बुधवार, 14 जनवरी 2026

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देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-11 (11° से 12° तक का सूक्ष्म भविष्य
हर हर महादेव!

मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), नाड़ी अंश शृंखला के ग्यारहवें भाग में आपका स्वागत करता हूँ।
आज हम 11 डिग्री से 12 डिग्री के बीच के 5 अत्यंत ऊर्जावान और धन दायक अंशों का विश्लेषण करेंगे।

यहाँ 'मारुत' (हवा) की गति और 'धनञ्जय' (अर्जुन/आग) का तेज है।
अपनी कुंडली (D1) के लग्नेश, सूर्य या चंद्रमा की डिग्री जांचें।

(स्मरण रहे: यह गणना केवल चर राशियों—मेष, कर्क, तुला, मकर—के लिए है)

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56. हरिणी (Harini) अंश
(विस्तार: 11° 00' से 11° 12')
* अर्थ: हिरणी / सुंदर आँखों वाली / विष्णु भक्त।

* सामान्य फल: जातक का स्वभाव हिरण जैसा चंचल और सुंदर होता है। आँखें बहुत आकर्षक होती हैं।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 00' - 11° 06'): जातक 'अस्थिर' (Restless) होता है। एक जगह टिक कर बैठना मुश्किल होता है। उसे घूमना-फिरना बहुत पसंद है।
    * उत्तर भाग (11° 06' - 11° 12'): जातक 'कला प्रेमी' होता है। संगीत, नृत्य या पेंटिंग में रुचि होती है। स्वभाव से डरपोक हो सकता है।

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57. हरिणा (Harina) अंश
(विस्तार: 11° 12' से 11° 24')
* अर्थ: हरिण / विष्णु / पीला रंग।

* सामान्य फल: यह भगवान विष्णु का अंश है। जातक सात्विक और धर्मपरायण होता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 12' - 11° 18'): जातक 'भक्त और सेवाभावी' होता है। उसे दूसरों की सेवा करने में आनंद आता है। धार्मिक संस्थाओं से जुड़ाव।
    * उत्तर भाग (11° 18' - 11° 24'): जातक को 'सरकारी लाभ' मिलता है। उच्च अधिकारियों से अच्छे संबंध रहते हैं। जीवन सुगम रहता है।

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58. मारुत (Marut) अंश
(विस्तार: 11° 24' से 11° 36')
* अर्थ: हवा / पवन देव / हनुमान जी।

* सामान्य फल: यह 'वायु तत्व' और 'गति' का अंश है। जातक एक जगह रुक नहीं सकता। उसमें अपार शक्ति होती है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 24' - 11° 30'): जातक 'प्राणवान' (Full of Life) होता है। वह योग, प्राणायाम या खेलकूद (Sports) में बहुत अच्छा करता है। शरीर लचीला होता है।
    * उत्तर भाग (11° 30' - 11° 36'): जातक 'संदेशवाहक' (Messenger) होता है। मीडिया, संचार या डाकिया जैसे कार्यों में सफलता। बातें हवा की तरह फैलाता है।

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59. धनञ्जय (Dhananjaya) अंश
(विस्तार: 11° 36' से 11° 48')
* अर्थ: अर्जुन / आग / धन जीतने वाला।

* सामान्य फल: यह 'विजय' और 'अग्नि' का अंश है। जातक अर्जुन की तरह लक्ष्य भेदने वाला (Focused) होता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 36' - 11° 42'): जातक 'महत्वाकांक्षी' (Ambitious) होता है। वह धन कमाने के लिए किसी भी हद तक मेहनत कर सकता है। उसे हारना पसंद नहीं।
    * उत्तर भाग (11° 42' - 11° 48'): जातक 'शत्रुहंता' होता है। उसके दुश्मन उसके सामने टिक नहीं पाते। कोर्ट-कचहरी या वाद-विवाद में हमेशा जीतता है।

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60. धनकरी (Dhanakari) अंश
(विस्तार: 11° 48' से 12° 00')
* अर्थ: धन देने वाली / समृद्धि।

* सामान्य फल: जैसा नाम, वैसा काम। यह पूर्ण रूप से 'आर्थिक सफलता' का अंश है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 48' - 11° 54'): जातक 'व्यापारी' (Businessman) होता है। उसे निवेश (Investment) की अच्छी समझ होती है। पैसा पैसे को खींचता है।
    * उत्तर भाग (11° 54' - 12° 00'): जातक 'परोपकारी धनी' होता है। वह धन कमाता है लेकिन उसे अच्छे कार्यों (धर्मशाला, अस्पताल) में लगाता है।

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निष्कर्ष:
मित्रों, हमने 12 डिग्री तक का सफर पूरा कर लिया है।
आज हमने 'मारुत' की शक्ति और 'धनञ्जय' की जीत को देखा।

अगले लेख में हम 12 डिग्री से 13 डिग्री की ओर बढ़ेंगे।
वहां 'धनदा' और 'कच्छपा' (कछुआ) जैसे स्थिर लक्ष्मी वाले अंश आएंगे।

शुभम भवतु!

— आचार्य राजेश कुमार
(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान

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