Planet Transit In May &June 2020: लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Planet Transit In May &June 2020: लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 29 अप्रैल 2020

#Planet#TransitIn #May&June2020

https://youtu.be/2A7UF80uvVsAstro Guru आचार्य राजेश कुमार
Planet Transit In May &June 2020:
By acharyaRajeshkumar
Planet Transit in May 2020:
 
मित्रों मई माह में कई ग्रह अपनी चाल बदलेंगे। इन ग्रहों में सूर्य, मंगल, बुध शामिल हैं। इस महीने बुध दो बार अपनी राशि बदलेगा। इसके साथ ही गुरु, शुक्र और शनि ग्रह वक्री होंगे। इन सभी ग्रहों की चाल का प्रभाव आप सभी के ऊपर शुभाशुभ रूप में पड़ेगा।4 मईको मंगल ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि में यह 18 जून 2020 तक रहेगा। बुध ग्रह 9 मई को वृषभ राशि में प्रवेश करेगा।14 मई को सूर्य का मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश होगा। सूर्य इस राशि में 15 जून 2020 तक रहेगा।25 मई को बुध अपनी स्वराशि में प्रवेश करेगा।11 मई को शनि वक्री होंगे। उनकी यह वक्री चाल 142 दिन तक रहेगी। इसके बाद 29 सितंबर को फिर से मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिष में शनि का गोचर, वक्री और मार्गी होना बहुत ही महत्व होता है। इसका प्रभाव सभी पर पड़ता है 13 मई को शुक्र ग्रह वक्री होंगे। इसके बाद 25 जून 2020 को शुक्र मार्गी होगा। 14 तारीख को गुरु वक्री चाल चलेंगे और फिर 13 सितंबर 2020 को वह मार्गी होंगे। राहु केतु सदा ही बक्री चाल चलते हैंकुल 6ग्रह बक्री गति से होंगे प्लुटो सहित 7ग्रह होगेबक्री ग्रह अक्सर अप्रत्याशित रूप से अच्छे और बुरे दोनों परिणाम देते हैं। प्रतिगामी गति में ग्रह पृथ्वी के अधिक निकट होते हैं। इसलिए उनका प्रभाव अधिक महसूस होता है। प्रतिगामी गति में ग्रहों के कारक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में कुंडली के जिस घर में वक्री ग्रह होते हैं उनके परिणाम समुचित नहीं दे पाते हैं। इसलिए जब ग्रह वक्र हो तब किसी नई नीति या परियोजना को शुरू नहीं करना चाहिएसौर मंडल के सभी ग्रह पृथ्वी के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। लेकिन सांसारिक दृष्टिकोण से ऐसा लगता है जैसे पृथ्वी नहीं चल रही है, और सभी ग्रह केंद्र के रूप में पृथ्वी के साथ घूम रहे हैं। यह सिर्फ एक ऑप्टिकल भ्रम है। इसलिए ग्रह रुकते हुए प्रतीत होते हैं, पीछे की ओर जाते हैं, फिर से रुकते हैं और आगे जाते हैं जिसे डायरेक्ट मोशन कहते हैं। सूर्य और चंद्रमा हमेशा प्रत्यक्ष गति में होते हैं (अर्थात, वे कभी पीछे नहीं चलते हैं) जबकि राहु और केतु हमेशा प्रतिगामी यानी वक्री होते हैं (अर्थात, वे हमेशा पीछे की ओर बढ़ते हैं)। पांच ग्रह, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि दोनों प्रत्यक्ष और प्रतिगामी गति में चलते हैं। कुल 9 ग्रह हैं जिनका प्रभाव हमारे जीवन और समाज पर होता है। इस बीच काल सर्प योग भी प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की ऐसी स्थिति शुभ नहीं होती है। पूरी दुनिया इन दिनों एक गंभीर संकट का सामना कर रही है ऐसे में 6 ग्रहों का एक साथ उलटी चाल में चलना क्या गुल खिलाएंगा 18 जून को बुध उलटी चाल से चलने लगेंगे। गौरतलब है कि 18 जून से 25 जून के बीच ये चारों ग्रह एक ही समय पर प्रतिगामी यानी वक्र रहेंगे। ग्रहों की यह स्थिति 15 जुलाई तक कालपुरुष कुंडली में बने काल सर्प दोष के साथ परस्पर व्याप्त होती है जिसका परिणाम चिंताजनक हो सकता है।प्रतिगामी शनि उन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए शक्ति प्रदान करते है जिन्हें अतीत में अधूरा छोड़ दिया गया था। शनि 11 मई से 29 सितंबर तक मकर राशि में वक्री रहेंशनि का प्रतिगमन जिम्मेदारियों और काम के बोझ के साथ एक कठिन अवधि को दर्शाता है। लेकिन यह लोगों को अपने कौशल को अधिक निखारने और यथार्थवादी एवं व्यवहारिक बनने में भी मदद करेगा। कोरोनावायरस के कारण आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए नए कानून और नीतियां बनाई जा सकती हैं। न्यायिक सुधार और न्यायिक ढांचे का पुनर्गठन भी हो सकता है।शुक्र विलासिता, आराम, सौंदर्य और खुशी की भावना का ग्रह है। कालपुरुष की कुंडली में वह 2 और 7 भाव के स्वामी हैं। शुक्र 13 मई से 25 जून तक वृष राशि में वक्री रहेंगे जो इस अवधि के दौरान लोगों के सामान्य दृष्टिकोण में सुधार होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी। यात्रा और आतिथ्य उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए समर्थन और प्रोत्साहन मिल सकता है। साथ ही भारत के प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।बृहस्पति ज्ञान और बुद्धिमत्ता के ग्रह हैं। प्रतिगामी गति में उनके शुभ परिणाम देने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। बृहस्पति नवे और ग्यारहवें भाव के स्वामी है और 14 मई से 13 सितंबर तक मकर राशि में वक्री रहेंगे इस समय के दौरान देश में उन कार्यों और परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की क्षमता बढ़ेगी जिन्हें पहले अधूरा छोड़ दिया गया था। यह वह समय है जब बीमार कंपनियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है और सरकार द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज भी प्रदान किया जा सकता है। भारत के अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों को मजबूती मिल सकती है। इस समय जन आक्रोश और अशांति की आशंका रहेगी। मौजूदा कानूनों और नीतियों के खिलाफ धार्मिक समुदायों में भी असंतोष पैदा हो सकती है।बुध व्यापार, संचार व्यवस्था एवं नयी सोच का प्रतीक है। कालपुरुष कुंडली में, बुधक्षतीसरे ,छठे भाव के मालिक हैं। यह 18 जून से 12 जुलाई के बीच वृषभ राशि में वक्री रहेंगे, जो इस समय के दौरान कोरोनो वायरस के प्रभावों से निपटने के लिए नए विचार और समाधान सामने आ सकते हैं। पड़ोसियों देशों के साथ संवाद में व्यवधान आ सकता है। यह भी गौरतलब है कि 18 जून से 25 जून के बीच चार ग्रह – शनि, बृहस्पति, शुक्र और बुध – एक ही समय में प्रतिगामी गति में होंगे जो भ्रम और अराजकता पैदा कर सकते हैं।जून और जुलाई के महीने में करीब 30 दिन के अंदर तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं ऐसे में इसका क्या असर होगा जानिए
जब भी किसी एक महीने में दो से अधिक ग्रहण पड़े और पाप ग्रहों का भी उस पर प्रभाव रहे तो वह समय जनता के लिए कष्टकारी होगा।
मित्रों6 जून से 5 जुलाई के बीच तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं। इनमें से दो ग्रहण भारत में दृश्य होंगे। 5/6 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण यूरोप, भारत सहित एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा। 21 जून को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण भारत सहित एशिया के कई दूसरे राज्यों, यूरोप और अफ्रीका में भी दिखेगा।
इसके बाद 4/5 जुलाई को लगने जा रहा चंद्र ग्रहण अफ्रीका और अमेरिका में नजर आएगा। इन तीनों ग्रहणों में से पहले दो ग्रहण, जो कि आषाढ़ कृष्ण पक्ष में पड़ेंगे, वह भारत में दृश्य होंगे। अंतिम ग्रहण जो कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष में है वह भारत में दिखाई नहीं देगा। इन ग्रहणों का मिथुन और धनु राशि के अक्ष को पीड़ित करना अमेरिका और पश्चिम के देशों के लिए विशेष रूप से अशुभ होगा।
भारत और विश्व के लिए 21 जून का सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील है। मिथुन राशि में होने जा रहे इस ग्रहण के समय मंगल जलीय राशि मीन में स्थित होकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु को देखेंगे जिससे अशुभ स्थिति का निर्माण होगा। इसके अलावा ग्रहण के समय 6 ग्रह शनि, गुरु, शुक्र और बुध वक्र होंगे। राहु केतु हमेश वक्र चलते हैं इसलिए इनको मिलकर कुब 6 ग्रह वक्री रहेंगे, जो शुभ फलदायी नहीं है। इस स्थिति में संपूर्ण विश्व में बड़ी उथल-पुथल मचेगी।
ग्रहण के समय इन बड़े ग्रहों का वक्री होना प्राकृतिक आपदाओं जैसे अत्यधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, महामारी आदि से जन-धन की हानि कर सकता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में भयंकर वर्षा एवं बाढ़ से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में महामारी और भोजन का संकट इन देशों में कई स्थानों पर हो सकता है। मंगल जल तत्व की राशि मीन में पांच माह तक रहेंगे ऐसे में वर्षा काल में आसामान्य रूप से अत्यधिक वर्षा और महामारी का भय रहेगा। ग्रहण के समय शनि और गुरु का मकर राशि में वक्री होना इस बात की आशंका को जन्म दे रहा है कि चीन के साथ पश्चिमी देशों के संबंध बेहद खराब हो सकते है
भारत के पश्चिमी हिस्सों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान में राजनीतिक उठा-पटक चिंता का कारण बनेगी तथा हिंद महासागर में चीन की गतिविधयों से तनाव बढ़ेगा। शनि, मंगल और गुरु इन तीनों ग्रहों के प्रभाव से विश्व में आर्थिक मंदी का असर एक वर्ष तक बना रहेगा।

महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां

‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...