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गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

पुखराज रतन Yellow Sapphire

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अखिल ब्राह्मण मे विचरण कर रहे ग्रहो का रत्नों (रंगीन मूल्यवान पत्थरों ) से निकटता का संबंध होता है
 मनुष्य के जीवन पर आकाशीय ग्रहों व उनकी बदलती चालों का प्रभाव अवश्य पड़ता है, ऐसे मे यदि कोई मनुष्य अपनी जन्म-कुंडली मे स्थित

 पाप ग्रहों की मुक्ति अथवा अपने जीवन से संबन्धित किसी अल्पसामर्थ्यवान ग्रह की शक्ति मे वृद्धि हेतु उस ग्रह का प्रतिनिधि रत्न
 धारण करता है तो उस मनुष्य के जीवन तथा भाग्य मे परिवर्तन अवश्यभावी हो जाता है बशर्ते की उसने वह रत्न असली ओर दोष रहित होने के साथ-साथ पूर्ण विधि-विधान से धारण किया हो पुखराज की गुणवत्ता 
आकार, रंग तथा शुद्धता के आधार पर तय की जाती है। जातकों को अपनी कुंडली के अनुसार पुखराज को धारण करना चाहिए जितना यह मूल्यवान है उतनी ही इस रत्न के लाभ हैं। इस रत्न को धारण करने से आर्थिक 
पाप ग्रहों की मुक्ति अथवा अपने जीवन से संबन्धित किसी अल्पसामर्थ्यवान ग्रह की शक्ति मे वृद्धि हेतु उस ग्रह का प्रतिनिधि रत्न
 धारण करता है तो उस मनुष्य के जीवन तथा भाग्य मे परिवर्तन अवश्यभावी हो जाता है बशर्ते की उसने वह रत्न असली ओर दोष रहित होने के साथ-साथ पूर्ण विधि-विधान से धारण किया हो पुखराज की गुणवत्ता 
आकार, रंग तथा शुद्धता के आधार पर तय की जाती है। जातकों को अपनी कुंडली के अनुसार पुखराज को धारण करना चाहिए जितना यह मूल्यवान है उतनी ही इस रत्न के लाभ हैं। इस रत्न को धारण करने से 


 जातक की कुंडली का अध्ययन करने से पूर्व उस कुंडली मे वृहस्पति की स्थिति ओर बलाबल पर सर्वप्रथम ध्यान देता है ।
नवग्रहों धरती के नवरत्नों मे से वृहस्पति का रत्न ‘पुखराज’ होता है । इसे ‘गुरु रत्न’ भी कहा जाता है धरती पर जितने भी रंगों के फूल पाए जाते हैं पुखराज उतने ही रंगों में पाया जाता है आमतौर पर यहसफ़ेद, पीला, गुलाबी, आसमानी, हरा लाल संदुरी तथा नीले रंगों मे पाया जाता है । किन्तु वृहस्पति ग्रह के प्रतिनिधि रंग ‘पीला’ होने के कारण ‘पीला पुखराज’ ही इस ग्र्ह के लिए उपयुक्त और अनुकूल रत्न माना गया है प्रायः पुखराज विश्व के अधिकांश देशों मे न्यूनाधिक्य पाया जाता है , परंतु सामान्यतः ब्राज़ील तथा श्रीलंका का पुखराज क्वालिटी मे सर्वोत्तम माना जाता है । वैसे भारत मे भी उत्तम किस्म का पुखराज पाया गया है पुखराज हड्डी का दर्द, काली खांसी , पीलिया , तिल्ली, एकांतरा ज्वर मे धारण करना लाभप्रद है इसे कुष्ठ रोग व चर्म रोग नाशक माना गया है इसके अलावा इस रत्न को सुख व संतोष प्रदाता, बल-वीर्य वनेत्रज्योतिवर्धक माना गया हैआयुर्वेद मे इसको जठराग्नि बढ़ाने वाला , विष का प्रभाव नष्ट करने वाला, वीर्य पैदा करने वाला, बवासीर नाशक , बुद्धिवर्धक , वातरोग नाशक, और चेहरे की चमक मे वृद्धि करने वाला लिखा गया है ।  जवान तथा सुंदर युवतियाँ अपने सतीत्व को बचाने के लिए प्राचीन काल मे इसे अपने पास रखती थी क्योंकि इसे पवित्रता का प्रतीक माना जाता है । पेट मे वायु गोला की शिकायत अथवा पांडुरोग मे भी पुखराज धारण करना लाभकारी रहता है  मित्रों कोई भी रतन राशि या अंक ज्योतिष के हिसाब से मत पहले यह अपनी जन्मकुंडली या हस्तरेखा के हिसाब से ही पहने क्योंकि आजकल TV परओर समाचार पत्रों में बड़ी-बड़ी ऐड आती रहती है  कि फला राशि वाले पुखराज पहने तुला राशि वाले हीरा ओर कुंभ वाले नीलम पहनने ऐसा मत करें दोस्तों  रतन अगर फायदा कर सकते हैं तो नुकसान भी बहुत करते हैं इसलिए किसी अच्छे ज्योतिषी को जो रतन एक्सपर्ट हो उसको अपनी कुडली दिखाकर ही रत्न धारण  करे।अंगूठी अथवा लॉकेट मे जड़वाने के दिन से लेकर चार वर्ष तीन महीने और अट्ठारह दिनों तक पुखराज एक व्यक्ति के पास प्रभावशाली  रहता है 
नोट। ध्‍यान रहे इस रत्‍न धारण करने से पूर्व किसी अनुभवी ज्‍योतिषी से कुंडली का अध्‍ययन जरूर करवा ले।
बिना ज्‍योतिषी सलाह के पुखराज रत्‍न धारण करने से आपको फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए ध्‍यान रखें। आचार्य राजेश

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

Red Coral मुगा रत्न

मित्रों आज बात करते हैं मूंगा रत्न की जिसे अंग्रेजी में कोरल कहा जाता है। यह समुद्र की गहराई मेवनस्पति के रूप में पाया जाता है। समुद्र में मूंगा का निर्माण j एक विशेष प्रकार के जन्तुओं द्वारा किया जाता है।
  इन वनस्पति को समुद्र से निकालने और तराशने के बाद कोरल यानि मूंगा रत्न का निर्माण किया जाता है।मूंगा मुख्यतः लाल रंग का होता है। इसके अतिरिक्त मूंगा सिंदूरी, गेरुआ, सफेद तथा काले रंग का भी होता है। मूंगा 
एक जैविक रत्न होता है।मूंगा समुद्र के गर्भ में लगभग छः-सात सौ फीट नीचे गहरी चट्टानों पर विशेष प्रकार के कीड़े, जिन्हें आईसिस नोबाइल्स कहा जाता है, इनके द्वारा स्वयं के लिए बनाया गया घर होता है। उनके इन्हीं 
घरों को मूंगे की बेल अथवा मूंगे का पौधा भी कहा जाता है। बिना पत्तों का केवल शाखाओं से युक्त यह पौधा लगभग एक या दो फुट ऊंचा और एक इंच मोटाई का होता है। कभी-कभी इसकी ऊंचाई इससे अधिक भी हो जाती है। परिपक्व हो जाने पर इसे समुद्र से निकालकर मशीनों से इसकी कटिंग आदि करके मनचाहे आकारों का बनाया जाता है। मूंगे के विषय में कुछ लोगों की धारणा कि मूंगे का पेड़ होता है किंतु वास्तविकता यह है कि मूंगे का पेड़ नहीं होता और न ही यह वनस्पति है। बल्कि इसकी आकृति पौधे जैसी होने के कारण ही इसे पौधा कहा जाता है। वास्तव में यह जैविक रत्न होता है। मूंगा समुद्र में जितनी गहराई पर प्राप्त होता है, इसका रंग उतना ही हल्का होता है। इसकी अपेक्षा कम गहराई पर प्राप्त मूंगे का रंग गहरा होता है। अपनी रासायनिक संरचना के रूप में मूंगा कैल्शियम कार्बोनेट का रूप होता है। मूंगा भूमध्य सागर के तटवर्ती देश अल्जीरिया, सिगली के कोरल सागर, ईरान की खाड़ी, हिंद महासागर, इटली तथा जापान में प्राप्त होता है। इटली से प्राप्त मूंगे को इटैलियन मूंगा मूंगा को मंगल ग्रह का रत्न कहा जाता है। मूंगा दूसरे रत्‍नों की तरह रसायनिक पदार्थों से मिलकर नहीं बना है बल्कि यह एक वनस्‍पति है इसलिए इसका अध्‍ययन वनस्‍पति विज्ञान में किया जाता है। यह पानी से बाहर आने के बाद हवा के संपर्क में आने से कठोर हो जाता है।  ये कहा जाता है की मूंगा धारण करने से बुरी नजर, बुरी आत्मा और शैतानी ताकतें धारक को स्पर्श  नहीं कर सकती|इसीलिए प्रायः छोटे बच्चों के गले में मूंगे के दाने डाले जाते हैं।जन्म कुंडली में मंगल अच्छे प्रभाव दे रहा हो तो मूंगा अवश्य धारण करना चाहिए। कुंडली में मंगल कमजोर होने पर मूंगा धारण करने से उसे बल दिया जा सकता है। यह पराक्रम बढ़ाता है और आलस्य में कमी लाता है। स्त्रियों में रक्त की कमी और मासिक धर्म, और रक्तचाप जैसी परेशानियो को नियंत्रित करने में भी मूंगा लाभकारी होता है। जिन बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और दब्बूपन हो, उन्हें मूंगा जरूर धारण करना चाहिए दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदला जा सकता है। प्रतिकूल ग्रह-गोचरों को अनुकूल बनाया जा सकता है। अर्थात सभी प्रकार की उन्‍नति के लिए रत्‍न धारण करना अत्‍यंत श्रेयस्‍कर माना जाता है। रत्‍न हमें शुभ-अशुभ कार्य होने का पूर्वानुमान भी कराते हैं। ये रत्‍न जाति, धर्म, संप्रदाय से हटकर सभी मानव को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं।नौ रत्‍नों में मूंगे का स्‍थान अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है। कहा जाता है कि मूंगा धारण करने के बाद शुभ-अशुभ घटनाओं का पूर्वाभास हो जाता है, भयानक व डरावने स्‍वप्‍न नहीं आते, अनिष्‍ट से बचाता है। करंट लगने पर भी मानसिक भय नहीं रहता।
इसके अलावा आंधी झंझावात एवं प्राकृतिक बिजली के झटके भी मूंगा धारण करने वाले को स्पर्श नहीं कर सकते|मूंगा रत्न ऊर्जा प्रदान करने और कार्यों को पूर्ण करने के लिए जाना जाता है। मूंगा धारण करने से कई फायदे होते हैं, कुछ लाभ इस प्रकार हैं: नहीं
मूंगा रत्न खून, अस्थि मज्जा और सिर से संबंधित बीमारियों से रक्षा करता है। कुछ रोग जैसे- पाइल्स, अल्सर यानि फोड़े आदि होने पर मूंगा रत्न पहना जा सकता है।
यह रत्न शारीरिक शक्ति बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत बनाने में भी सक्षम होता है।
मूंगा सांप और बिच्छू के विष के प्रभाव को कम करता है या सर्पदंश और बिच्छू के डंक से रक्षा करता है।
वे लोग जो जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। मूंगा के प्रभाव से उन्हें धैर्य और साहस मिलता है।
लाल मूंगा धारण करने से जीवन में आने वाले मुश्किल हालात का आत्म सम्मान और दृंढ इच्छाशक्ति के साथ सामना करने का बल प्राप्त होता है।
ऐसा माना जाता है कि यदि गर्भवती महिला मूंगा रत्न पहनती हैं तो गर्भावस्था के शुरुआती 3 महीनों में गर्भपात की संभावना कम हो जाती है।
वे बच्चे जो कुपोषण से पीड़ित हैं उनके लिए लाल मूंगा रत्न पहनना लाभकारी होता है।
मूंगा आपके अंदर नेतृत्व क्षमता का विकास करता है और आप जीवन की चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनते हैं।ज्योतिष विद्या के अनुसार हर ग्रह को एक विशेष रत्न प्रदर्शित करता है। अपनी कुंडली के अनुसार पहनने से कुंडली में मंगल को वल  देने ओर मंगल की उर्जा वडाने के लिए चारण करें यदि मंगल कारक ओर शुभ है   इसी तरह हर ग्रह के अनुसार रत्न धारण किया जाता है। यदि किसी पर मंगल का क्रूर प्रभाव है तो उस जातक को अपनी कुंडली के अनुसार मूंगा धारण करना चाहिए ना की राशी या अंक ज्योतिष के अनुसार। मूंगा पहनने से व्यक्ति को अपार ऊर्जा मिलती है। इसको धारण करने से दुर्घटनाओं से, अपयश से, जेल यात्रा आदि से छुटकारा मिल जाता है  अर्थात सभी प्रकार की उन्‍नति के लिए रत्‍न धारण करना अत्‍यंत श्रेयस्‍कर माना जाता है। रत्‍न हमें शुभ-अशुभ कार्य होने का पूर्वानुमान भी कराते हैं। ये रत्‍न जाति, धर्म, संप्रदाय से हटकर सभी मानव को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं ज्योतिष को परोपकार से ज्यादा व्यवसाय मानकर अपना लिया गया है, इसलिए बाजार में असली के साथ-साथ नकली रत्न भी उपलब्ध है। नकली मूंगा भी बहुत कुछ असल से मिलता है। इसीलिए आम मनुष्य क्या कई बार तो ज्योतिषशास्त्री भी इसे देखकर धोखा खा जाते हैं।और अगर इसके उलट किसी ने इस रत्न को बिना सलाह के जबरदस्ती पहन लिया और उसका मंगल नकारात्मक है तो क्रोध एकदम बढ़ जाता है , उच्च - रक्तचाप कि समस्या हो जायेगी , आपकी संपत्ति सम्बन्धी विवाद बढ़ जायेंगे और ख़तम होने का नाम नहीं लेंगे , बहन - बुआ के साथ विशेष रूप से झगड़ा करवा देगा , कर्कश भाषा हो जायेगी आपकी , हड्डियाँ कि कमजोरी और पेट में बढ़ा देगा ।* अगर कुंडली में आपका मंगल खराब है , आपको आमतौर पर गुस्सा रहता है , और गुस्सा नाक पर बैठा रहता है , धुल , धुप और धुए से परेशानी होती है , अगर आप ज्यादा दवाई लेते है तो मूंगा नहीं पहनना चहिये ।नोट :


( कृपया किसी भी रत्न करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष से सलाह जरुर ले ले और सिर्फ यहाँ पोस्ट पढ़ने मात्र से कृपया रत्न को धारण करने का मन न बनाये क्यूंकि सभी भी कुंडली अलग होती है आचार्य राजेश 07597718725-09414481324

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

Ruby Gemstone Manik Ratan Jyotish

मित्रों माणिक सब रत्नों का राजा माना गया है। इसके बारे में एक धारणा यह है कि माणिक की दलाली में हीरे मिलते हैं। कहने का मतलब यह रत्न अनमोल है। यह रत्न सूर्य ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और इसे सूर्य के कमजोर व पत्रिकानुसार स्थिति जानकर धारण करने का विधान है। 
कीमत में इसका कोई मोल नहीं है, इसकी क्वॉलिटी पारदर्शिता व कलर पर निर्भर करता है इसका मूल्य। सबसे उत्तम बर्मा का माणिक माना गया है। यह अनार के दाने-सा दिखने वाला गुलाबी आभा वाला रत्न बहुमूल्य है। इसकी कीमत वजन के हिसाब से होती है। यह बैंकॉक का भी मिलता है; लेकि
न कीमत सिर्प बर्मा की ही अधिक होती है। बाकी 100 रु. से 500 रु. कैरेट तक में मिल जाता है, लेकिन बर्मा माणिक की कीमत 1000 रु. कैरेट से आगे होती है। एक कैरेट 200 मिली का होता है व पक्की रत्ती 180 मिली की होती है।माणिक को मोती के साथ पहन सकते हैं और पुखराज के साथ
 भी पहन सकते हैं। मोती के साथ पहनने से पूर्णिमा नाम का योग बनता है। जबकि माणिक व पुखराज प्रशासनिक क्षेत्र में उत्तम सफलता का कारक होता है। माणिक व मूंगा भी पहन सकते हैं, ऐसा जातक प्रभावशाली व कोई प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता पाता है। इसे पुखराज, मूंगा के साथ भी पहना जा सकता है। पन्ना व माणिक भी पहन सकते है, इसके पहनने से बुधादित्य योग बनता है। जो पहनने वाले को दिमागी कार्यों में सफल बनाता है।मनुष्य की सहज प्रकृति है कि वह हमेशा सुख में जीना चाहता है परंतु विधि के विधान के अनुसार धरती पर ईश्वर भी जन्म लेकर आता है तो ग्रहों की चाल के अनुसार उसे भी सुख-दुःख सहना पड़ता है। हम अपने जीवन में आने वाले दुःखों को कम करने अथवा उनसे बचने हेतु उपाय चाहते हैं। उपाय के तौर पर अपनी कुण्डली की जांच करवाते हैं और ज्योतिषशास्त्राr की सलाह से पूजा करवाते हैं, ग्रह शांति करवाते हैं अथवा रत्न धारण करते हैं। रत्न पहनने के बाद कई बार परेशानियां भी आती हैं अथवा कोई लाभ नहीं मिल पाता है। इस स्थिति में ज्योतिषशास्त्राr के ऊपर विश्वास डोलने लगता है। जबकि हो सकता है कि । माणिक यहां से आपने खरीदा वहां से आपको नकली या घटीया रतन दिया हो या फिर कुंडली के हिसाब से आपको माफिक ना करता हो आपका रत्न सही नहीं हो। वास्तव में रत्न खरीदते समय काफी समझदारी से काम लेना चाहिए क्योंकि असली और नकली रत्नों में काफी समानता रहती है जिससे गोरखधंधा के आप शिकार हो सकते हैं। रत्न अपरिचित स्थान से नहीं खरीदना चाहिए। रत्न खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति विश्वसनीय एवं रत्नों का जानकार हो। रत्न खरीदने से पहले बाजार भाव का पता कर लेना इससे रत्न की सत्यता और मूल्य का वास्तविक अनुमान भी मिल जाता है। रत्न अगर टूटा हुआ हो  तो कभी नहीं खरीदना चाहिए। इन रत्नों का प्रभाव कम होता है और कुछ स्थितियों में प्रतिकूल परिणाम भी देता  होता है।  इसीलिए जब भी रत्न पहनना हो तो किसी अच्छे रतन विशेषज्ञ को कुंडली दिखाकर ही पहनेसूर्य का प्रत्येक कुंडली में विशेष महत्व है तथा किसी कुंडली में सूर्य का बल, स्वभाव और स्थिति कुंडली से मिलने वाले शुभ या अशुभ परिणामों पर बहुत प्रभाव डाल सकती है। सूर्य के बल के बारे में चर्चा करें तो विभिन्न कुंडली में सूर्य का बल भिन्न भिन्न होता है जैसे किसी कुंडली में सूर्य बलवान होते हैं तो किसी में निर्बल जबकि किसी अन्य कुंडली में सूर्य का बल सामान्य हो सकता है। किसी कुंडली में सूर्य के बल को निर्धारित करने के लिय बहुत से तथ्यों का पूर्ण निरीक्षण आवश्यक है हालांकि कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में सूर्य की किसी राशि विशेष में स्थिति ही सूर्य के कुंडली में बल को निर्धारित करती है जबकि वास्तविकता में किसी भी ग्रह का किसी कुंडली में बल निर्धारित करने के लिए अनेक प्रकार के तथ्यों का अध्ययन करना आवश्यक है। विभिन्न कारणों के चलते यदि सूर्य किसी कुंडली में निर्बल रह जाते हैं तो ऐसी स्थिति में सूर्य उस कुंडली तथा जातक के लिए अपनी सामान्य और विशिष्ट विशेषताओं के साथ जुड़े फल देने में पूर्णतया सक्षम नहीं रह पाते जिसके कारण जातक को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कुंडली में निर्बल सूर्य को ज्योतिष के कुछ उपायों के माध्यम से अतिरिक्त उर्जा प्रदान की जाती है जिससे सूर्य कुंडली में बलवान हो जायें तथा जातक को लाभ प्राप्त हो सकें। सूर्य को किसी कुंडली में अतिरिक्त उर्जा प्रदान करने के उपायों में से उत्तम उपाय है सूर्य का रत्न माणिक्य धारण करना जिसे धारण करने के पश्चात धारक को सूर्य के बलवान होने के कारण लाभ प्राप्त होने आरंभ हो जाते हैं।माणिक्य रत्न सूर्य की उर्जा तरंगों को अपनी उपरी सतह से आकर्षित करके अपनी निचली सतह से धारक के शरीर में स्थानांतरित कर देता है जिसके चलते जातक के आभामंडल में सूर्य का प्रभाव पहले की तुलना में बलवान हो जाता है तथा इस प्रकार सूर्य अपना कार्य अधिक बलवान रूप से करना आरंभ कर देते हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि सूर्य का रत्न माणिक्य किसी कुंडली में सूर्य को केवल अतिरिक्त बल प्रदान कर सकता है तथा माणिक्य किसी कुंडली में सूर्य के शुभ या अशुभ स्वभाव पर कोई प्रभाव नहीं डालता। इस प्रकार यदि किसी कुंडली में सूर्य शुभ हैं तो माणिक्य धारण करने से ऐसे शुभ सूर्य को अतिरिक्त बल प्राप्त हो जायेगा जिसके कारण जातक को सूर्य से प्राप्त होने वाले लाभ अधिक हो जायेंगें जबकि यही सूर्य यदि किसी जातक की कुंडली में अशुभ है तो सूर्य का रत्न धारण करने से ऐसे अशुभ सूर्य को और अधिक बल प्राप्त हो जायेगा जिसके चलते ऐसा अशुभ सूर्य जातक को और भी अधिक हानि पहुंचा सकता है। इस लिए सूर्य का रत्न माणिक्य केवल उन जातकों को पहनना चाहिये जिनकी कुंडली में सूर्य शुभ रूप से कारक  र्हैं तथा ऐसे जातकों को सूर्य का रत्न कदापि नहीं धारण करना चाहिये जिनकी कुंडली में सूर्य अशुभ रूप से कार्य कर रहें जिस तरह सेटेलाईट से बदलते मौसम कीजानकारी मौसम वैज्ञानिकों को समय से पहले मिल जाती है ठीक उसी तरह सूर्य के रत्न माणिक्य में यह खूबी है कि यह आने वाली संकट की सूचना पहले दे देता है।मानक्य के विषय में मान्यता है कि जो व्यक्ति इसे धारण करता है वह अगर गंभीर रूप बीमार होने वाला होता है तो इसका रंग फीका हो जाता है। अगर व्यक्ति की मृत्यु होने वाली होती है तो करीब तीन महीने पहले से माणिक्य का रंग सफेद या फीका  होने लग जाता है।माणिक्य में रक्त संबंधी रोगों को दूर करने की क्षमता है। तपेदिक से पीड़ित व्यक्ति अगर इसे धारण करे तो चिकित्सा का लाभ तेजी से प्राप्त होता है।अगर किसी व्यक्ति को ब्लड प्रेशर या मधुमेह की समस्या है तो ऐसे हालातों में यह रत्न फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा पीठ दर्द, कान से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी इस रत्न को धारण कर किया जा सकता है।,इस रत्न का हमारी आखों, हड्डियों और यश पर सीधा असर होता हैब्रह्मांड की आत्मा कहे जाने वाले सूर्य की खूबियों से लैस माणिक रत्न सिलेब्रिटीज को आप अक्सर पहने देखेंगे। कुछ लोग इसे धार्मिक मान्यताओं के चलते पहनते हैं तो कुछ इसको जिंदगी में सफलता पाने के मकसद सेमाणिक रत्न पहने हुए व्यक्ति को उनके जीवन में नाम, प्रसिद्धि, लोकप्रियता प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। माणिक रत्न निजी जीवन में रचनात्मकता और आत्मविश्वास उत्पन्न करता है।इस पत्थर के बारे में कहा जाता है कि यह पत्थर पहनने से सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है, जो संबंधों में खुशी, प्रेम और सद्भाव को बढ़ाता है।जो व्यक्ति व्यवसायिक समस्याओं का सामना कर रहे है, उन्हें इस पत्थर को पहनना चाहिए क्योंकि यह इस पत्थर के बारे में कहा जाता है कि इस रत्न को पहनने से जीवन में भाग्य और धन आमंत्रित होता है।यह कम रक्तचाप, अनियमित दिल की धड़कन या ध्रुमपान, पक्षाघात और सामान्य दुर्बलता का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है।यह रत्न राजनीति और जो उच्च कार्यालय या उच्च पदों में सफलता प्राप्त करने के लिए यहां फिर से वता दूं माणिक्य रत्न का इस्तेमाल कुंडली दिखाने के बाद करें.यहां पर इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि विभिन्न जातकों के लिए माणिक्य के भिन्न भिन्न रंग उपयुक्त हो सकते हैं जैसे किसी को हल्के गुलाबी रंग का माणिक्य अच्छे फल देता है जबकि किसी अन्य को गहरे लाल रंग का माणिक्य अच्छे फल देता हैइसलिए माणिक्य के रंग का चुनाव केवल अपने ज्योतिषी के परामर्श अनुसार ही करना चाहिए तथा अपनी इच्छा से ही किसी भी रंग का माणिक्य धारण नहीं कर लेना चाहिये क्योंकि ऐसा करने से ऐसा माणिक्य लाभ की अपेक्षा हानि भी दे क्या है 
अपने ज्योतिषी द्वारा सुझाये गये माणिक्य के भार पर भी विशेष ध्यान दें तथा इस रत्न का उतना ही भार धारण करें जितना आपके ज्योतिषी के द्वारा बताया गया हो क्योंकि अपनी इच्छा से माणिक्य का भार बदलने से कई बार यह रत्न आपको उचित लाभ नहीं दे पाता जबकि कई बार ऐसी स्थिति में आपका माणिक्य आपको हानि भी पहुंचा सकता है।
शुक्लपक्ष के प्रथम रविवार के दिन सूर्य उदय के पश्चात् अपने दाये हाथ की अनामिका में धारण करे!माणिक्य को धारण करने के पश्चात सामान्यतया 3 से 6 मास की अवधि में एक बार अच्छी प्रकार से साफ कर लेना चाहिए क्योंकि ऐसा न करने पर आपके रत्न पर जमी धूल इसे सूर्य की उर्जा तरंगों को आपके शरीर में स्थानांतरित करने में बाधा उपस्थित कर सकती है जिससे आपका रत्न पूर्ण रूप से आपको लाभ प्रदान नहीं कर पाता।यदि आप जानना चाहते है की आपकी कुंडली के अनुसार आपको माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए या नहीं तो आप अपनी जन्म तारिक, जन्म समय और जन्म स्थान मुझे  फोन करे या आप रतन मंगवान चाहते हैं तो भी हमसे असली ओर लैव टैस्ट मंगवा सकते हैं 07597718725-09414481324क

महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां

‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...