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देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-3 (2° से 3° तक का सूक्ष्म भविष्य)
हर हर महादेव!
मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), नाड़ी अंश शृंखला के तीसरे भाग में आपका स्वागत करता हूँ।
आज हम 2 डिग्री से 3 डिग्री के बीच के 5 अत्यंत रहस्यमयी अंशों का भेद खोलेंगे।
ये अंश आपके जीवन में सम्मोहन (Attraction), कला और गुप्त विद्याओं के द्वार खोलते हैं। अपनी कुंडली (D1) में देखें कि क्या आपका लग्न, सूर्य या चंद्रमा इन अंशों में बैठा है?
(स्मरण रहे: यह गणना केवल चर राशियों—मेष, कर्क, तुला, मकर—के लिए है)
11. मोहना (Mohana) अंश
(विस्तार: 02° 00' से 02° 12')
* अर्थ: मोहित करने वाला / सम्मोहन (Hypnotism)।
* सामान्य फल: जैसा नाम, वैसा काम। जातक के अंदर गजब की आकर्षण शक्ति होती है। लोग बरबस ही इसकी ओर खिंचे चले आते हैं।
* सटीक भेद (Precision):
* पूर्व भाग (02° 00' - 02° 06'): यहाँ 'शारीरिक आकर्षण' प्रबल होता है। जातक 'माया' में फंसा रहता है। प्रेम संबंधों में धोखा खाने या देने की संभावना रहती है।
* उत्तर भाग (02° 06' - 02° 12'): यह 'दिव्य आकर्षण' है। जातक की आँखों में एक तेज होता है। वह अपनी बातों से भीड़ को सम्मोहित कर लेता है (जैसे कोई बड़ा नेता या कथावाचक)।
12. मदिरा (Madira) अंश
(विस्तार: 02° 12' से 02° 24')
* अर्थ: मदिरा / नशा / आनंद।
* सामान्य फल: जातक जीवन का भरपूर आनंद लेने वाला होता है। लेकिन यह 'दुधारी तलवार' है—या तो महान आनंद या पतन।
* सटीक भेद (Precision):
* पूर्व भाग (02° 12' - 02° 18'): चेतावनी! जातक को नशे (Alcohol/Drugs) या बुरी लतों से बहुत सावधान रहना चाहिए। गलत संगति जीवन बर्बाद कर सकती है।
* उत्तर भाग (02° 18' - 02° 24'): यहाँ 'नशा' कामयाबी या सत्ता का होता है। जातक उच्च पद पर पहुँचकर गर्व (Pride) महसूस करता है। वह राजाओं जैसी ठाठ-बाट से जीता है।
13. मंजु (Manju) अंश
(विस्तार: 02° 24' से 02° 36')
* अर्थ: सुंदर / कोमल / ओस की बूंद।
* सामान्य फल: जातक का हृदय बहुत कोमल और पवित्र होता है। वह लड़ाई-झगड़ों से दूर रहने वाला शांतिप्रिय व्यक्ति होता है।
* सटीक भेद (Precision):
* पूर्व भाग (02° 24' - 02° 30'): जातक 'प्रकृति प्रेमी' होता है। उसे बागवानी, खेती या पहाड़ों पर रहना पसंद होता है। उसका मन बच्चे जैसा साफ होता है।
* उत्तर भाग (02° 30' - 02° 36'): जातक 'सजावट और डिजाइन' में निपुण होता है। वह अपने घर और ऑफिस को बहुत सुंदर तरीके से रखता है। इंटीरियर डेकोरेशन में सफलता मिलती है।
14. मंजुस्वना (Manjushvana) अंश
(विस्तार: 02° 36' से 02° 48')
* अर्थ: मीठी ध्वनि / मधुर स्वर।
* सामान्य फल: यह 'वाणी' (Speech) और 'संगीत' का विशेष अंश है। जातक की पहचान उसकी आवाज से होती है।
* सटीक भेद (Precision):
* पूर्व भाग (02° 36' - 02° 42'): जातक 'संगीतकार या गायक' बन सकता है। उसकी आवाज में जादू होता है जो लोगों का दिल छू ले।
* उत्तर भाग (02° 42' - 02° 48'): जातक 'विद्वान वक्ता' (Scholar/Speaker) होता है। वह शास्त्रों या कानून की बातें बहुत मीठे ढंग से समझाता है। शिक्षक या सलाहकार के लिए उत्तम।
15. माला (Mala) अंश
(विस्तार: 02° 48' से 03° 00')
* अर्थ: हार / माला / सर्प।
* सामान्य फल: जातक को गले में पहनने वाले आभूषण प्रिय होते हैं। जीवन में सम्मान (माला) मिलता है, लेकिन कभी-कभी बंधन भी महसूस होता है।
* सटीक भेद (Precision):
* पूर्व भाग (02° 48' - 02° 54'): जातक को 'यश और कीर्ति' की माला मिलती है। समाज में उसका बहुत नाम होता है। उसे पुरस्कार (Awards) मिलते हैं।
* उत्तर भाग (02° 54' - 03° 00'): यह 'जप-माला' (Rosary) का सूचक है। जातक जीवन के उत्तरार्ध में तंत्र-मंत्र या भक्ति मार्ग में गहरा उतर जाता है। वह सिद्ध हो सकता है।
निष्कर्ष:
मित्रों, हमने 3 डिग्री तक का सफर पूरा कर लिया है।
अगले लेख में हम 3 डिग्री से 4 डिग्री की ओर बढ़ेंगे, जहाँ 'जगती' (संसार) और 'कोला' (खजाना) जैसे शक्तिशाली अंश हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
जुड़े रहें और अपनी कुंडली में इन सूक्ष्म योगों को पहचानें।
शुभम भवतु!
— आचार्य राजेश कुमार
(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान
आचार्य जी, समीक्षा करें:
क्या 'मदिरा' और 'मोहना' अंश
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