शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

🔥 "सावधान: कहीं आप भी ज्योतिष की 'ABC' को ही सच तो नहीं मान बैठे?"

👁️ "पर्दे के पीछे क्या होता है? (मेरी और आपकी कुंडली की मुलाकात)" 👇
🔥 "सावधान: कहीं आप भी ज्योतिष की 'ABC' को ही सच तो नहीं मान बैठे?"
मित्रों, आज मैं एक कड़वा सच सांझा करना चाहता हूँ।
आजकल ज्योतिष को बहुत हल्का बना दिया गया है। बाज़ार में 90% फलादेश केवल 'ABC' स्तर के हो रहे हैं।
क्या आपने यह सुना है? 👇
❌ "शनि चौथे भाव में है तो यह फल देगा..."
❌ "गुरु सातवें भाव में है तो शादी अच्छी होगी..."
माफ़ कीजियेगा, लेकिन यह भविष्यवाणियां नहीं, यह तो 'बच्चों की पढ़ाई' (Primary Schooling) है। कोई भी साधारण सॉफ्टवेयर या किताब आपको यह बता सकती है।
✅ मैं क्या अलग करता हूँ? (My Advanced Research):
मैं ग्रहों के 'बैठने' पर नहीं, उनकी 'सांसों' और 'इरादों' पर काम करता हूँ। मेरी टेबल पर आपकी कुंडली का 'पोस्टमार्टम' इन 5 अत्यंत सूक्ष्म स्तरों पर होता है:
1️⃣ समय की 'सेकंड' तक खुदाई (Micro-BTR): 🕰️
अस्पताल की घड़ी 5 मिनट गलत हो सकती है, लेकिन नियति नहीं।
ज्योतिष का सबसे गहरा विज्ञान है— 'चंद्र कला नाड़ी'।
इसमें हर 48 सेकंड में नाड़ी बदल जाती है। मैं उस 48 सेकंड के भी दो भाग करता हूँ— 'पूर्व भाग' और 'उत्तर भाग'।
सोचिये! पलक झपकते ही फलादेश बदल जाता है। जब तक मैं इस 'सूक्ष्मतम स्तर' (Micro Level) पर समय शुद्ध नहीं कर लेता, मैं कुंडली को हाथ भी नहीं लगाता।
2️⃣ नेगेटिव को पॉजिटिव में बदलने का रहस्य (Hidden Strength): ✨
साधारण ज्योतिषी आपको कह देंगे— "आपका यह ग्रह नीच का है, आप बर्बाद हो जाएंगे।" और आप डर जाते हैं।
लेकिन मेरी नज़र 'पुष्कर नवमांश' पर होती है। अगर वही 'खराब' ग्रह पुष्कर नवमांश में बैठा है, तो वह आपको रंक से राजा बनाने की ताकत रखता है।
मैं ऊपरी छिलका नहीं, अंदर का गूदा देखता हूँ।
3️⃣ संपूर्ण ज्ञान का महा-संगम (Multi-System Analysis): 📚
मैं 'लकीर का फकीर' नहीं हूँ। मैं किसी एक पद्धति से संतुष्ट नहीं होता। आपकी एक भविष्यवाणी के लिए मैं दुनिया की 5से ज्यादा महानतम विद्याओं का निचोड़ निकालता हूँ:
🔹 KP ज्योतिष: घटना की 'सटीक तारीख' (Exact Timing) के लिए।
🔹 नक्षत्र नाड़ी: घटना के 'होने या न होने' (Promise) के लिए।
🔹 जैमिनी सूत्र: आत्माकारक और चर दशा से जीवन का उद्देश्य जानने के लिए।
🔹 भृगु संहिता: ऋषियों के प्राचीन आशीर्वाद को समझने के लिए।
🔹 लाल किताब: आसान और अचूक उपायों के लिए।
4️⃣ गणित, तुक्का नहीं (Pure Mathematics): 🧮
भावुकता से नहीं, मैं गणित से भविष्य बांचता हूँ।
मैं षडबल (Shadbala) से ग्रह की ताकत और अष्टकवर्ग से समय की शुभता मापता हूँ। जब गणित 'हां' कहता है, तभी मेरी वाणी 'हां' कहती है।
5️⃣ ट्रिपल चेकिंग सिस्टम (Triple Check): 🔄
मैं रिस्क नहीं लेता।
जब विंशोत्तरी दशा (मन), योगिनी दशा (कर्म) और गोचर (वर्तमान)... ये तीनों एक ही दिशा में इशारा करते हैं, तभी निष्कर्ष निकलता है।
💰 शुल्क (Fee) क्यों जरूरी है?
इतने सारे चार्ट्स, इतनी पद्धतियां, इतना गहरा गणित और साधना में घंटों की मानसिक ऊर्जा लगती है। यह सब '5 मिनट' का काम नहीं है, यह एक 'यज्ञ' है।
इसलिए, यह सेवा 'निशुल्क' (Free) संभव नहीं है।
📱 आज जो व्यक्ति हजारों का मोबाइल और डेटा पैक वहन कर सकता है, वह अपने जीवन को सही दिशा देने के लिए एक 'न्यूनतम दक्षिणा' देने में भी सक्षम है। इसे खर्च नहीं, अपने जीवन पर 'निवेश' समझें।
🤝 संवेदना अभी भी जीवित है...
मैं व्यापारी नहीं, एक सेवक हूँ। यदि कोई वास्तव में अत्यंत गरीब है, लाचार है, तो उसके लिए मेरे दरवाजे बंद नहीं हैं। आप संकोच न करें, हम मिलकर रास्ता निकालेंगे।फोन पर वात कर सकते हैं। कोई लोग तो सीधा व्हाट्सएप पर या मैसेंजर पर अपना डेट डिटेल्स भेजते हैं त कुंडली देखो ना कोई राम राम ना कोई सिस्टम ना कोई संस्कार हंसी आती है ऐसी बातों पर
🙏 अंतिम सत्य:
इतनी विद्या, इतना शोध और इतना अनुभव—यह मेरा अहंकार नहीं, मेरी साधना है।
फिर भी, करने वाली और कराने वाली वही है।
"मेरा मुझमें कुछ नहीं, जो कुछ है वो माँ का ही है।" 🌺
वाणी मेरी हो सकती है, लेकिन सत्य मेरी इष्ट माँ महाकाली का है। मैं तो बस उनका एक सेवक हूँ।
आइए, ज्योतिष को गहराई से जानें, सतह से नहीं। 👇
आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़)
(वैदिक, नाड़ी ज्योतिष, लाल किताब, रत्न विशेषज्ञ एवं महाकाली सेवक)
📲 WhatsApp/Call: 075977 18725
👇 Hashtags:
#BeyondABC #AstrologyTruth #MicroAstrology #PushkarNavamsha #ChandraKalaNadi #NadiJyotish #KPAstrology #DeepAnalysis #LalKitab #Horoscope #Kundli #Mahakali #Hanumangarh #Rajasthan #AcharyaRajeshKumar #ScientificAstrology

बुधवार, 14 जनवरी 2026

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-1 (0° से 1° तक का सूक्ष्म भविष्य)

ब्लॉग शीर्षक:

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-1 (0° से 1° तक का सूक्ष्म भविष्य)

हर हर महादेव!

​मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), आज से "देव केरलम" के 150 अंशों की विस्तृत यात्रा शुरू कर रहा हूँ।

आज हम चर राशियों की बात करेंगे। यदि आपका लग्न या चंद्रमा मेष (Aries), कर्क (Cancer), तुला (Libra) या मकर (Capricorn) में है, तो यह लेख विशेष रूप से आपके लिए है।

ध्यान दें: चर राशियों में गणना सीधी (Direct) चलती है। यानी 0 डिग्री से शुरुआत होकर 30 डिग्री तक जाती है।

​आज हम राशि के बिल्कुल शुरुआती हिस्से (0 डिग्री से 1 डिग्री) के 5 नाड़ी अंशों को उनके "पूर्व भाग" और "उत्तर भाग" के साथ जानेंगे।

1. वसुधा (Vasudha) अंश

(विस्तार: 00° 00' से 00° 12')

  • अर्थ: 'वसुधा' का अर्थ है पृथ्वी या धन देने वाली।
  • सामान्य फल: यह एक अत्यंत शुभ अंश है। जातक का जन्म धनी या प्रतिष्ठित परिवार में होता है। उसे जीवन में भूमि-भवन का सुख मिलता है।
  • सूक्ष्म भेद (Micro Prediction):
    • पूर्व भाग (00° 00' - 00° 06'): यदि जन्म इस हिस्से में है, तो जातक को 'पैतृक संपत्ति' (Ancestral Property) मिलती है। उसे धन के लिए ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ता।
    • उत्तर भाग (00° 06' - 00° 12'): यदि जन्म यहाँ है, तो जातक 'स्व-निर्मित' (Self-made) धनवान बनता है। वह अपनी मेहनत से जमीन-जायदाद खरीदता है।

2. वैष्णवी (Vaishnavi) अंश

(विस्तार: 00° 12' से 00° 24')

  • अर्थ: भगवान विष्णु की शक्ति (पालनकर्ता)।
  • सामान्य फल: जातक स्वभाव से शांत, धर्म का पालन करने वाला और दूसरों की मदद करने वाला होता है।
  • सूक्ष्म भेद:
    • पूर्व भाग (00° 12' - 00° 18'): जातक 'धार्मिक और सात्विक' होता है। वह कथा-कीर्तन या पूजा-पाठ में रुचि रखता है।
    • उत्तर भाग (00° 18' - 00° 24'): जातक 'कर्मठ और व्यावहारिक' होता है। वह सरकारी नौकरी या प्रशासन में होकर समाज की सेवा करता है।

3. ब्राह्मी (Brahmi) अंश

(विस्तार: 00° 24' से 00° 36')

  • अर्थ: ब्रह्मा की शक्ति (सृजन/ज्ञान)।
  • सामान्य फल: यह ज्ञान का अंश है। जातक विद्वान, लेखक या शिक्षक हो सकता है। आयु लंबी होती है।
  • सूक्ष्म भेद:
    • पूर्व भाग (00° 24' - 00° 30'): जातक को 'वेदों या शास्त्रों' का ज्ञान होता है (जैसे: ज्योतिषी, पंडित)। उसकी रुचि प्राचीन विद्याओं में होती है।
    • उत्तर भाग (00° 30' - 00° 36'): जातक को 'आधुनिक विद्या' (Science/Technology) का ज्ञान होता है। वह इंजीनियर या डॉक्टर बनकर नए निर्माण करता है।

4. काला (Kala) अंश

(विस्तार: 00° 36' से 00° 48')

  • अर्थ: समय (Time) या कला (Art)।
  • सामान्य फल: यह थोड़ा रहस्यमयी अंश है। जातक के मन में अस्थिरता रहती है, लेकिन वह किसी कला में निपुण होता है।
  • सूक्ष्म भेद:
    • पूर्व भाग (00° 36' - 00° 42'): जातक 'कला प्रेमी' होता है। संगीत, चित्रकारी या अभिनय में नाम कमाता है। मन थोड़ा चंचल रहता है।
    • उत्तर भाग (00° 42' - 00° 48'): यहाँ थोड़ा सावधान रहना चाहिए। जातक के 'गुप्त शत्रु' हो सकते हैं या वह कुछ बातें समाज से छिपाकर रखता है। (उपाय: महाकाल की पूजा)।

5. शंकरी (Shankari) अंश

(विस्तार: 00° 48' से 01° 00')

  • अर्थ: भगवान शिव की शक्ति (कल्याण/संहार)।
  • सामान्य फल: जातक स्वाभिमानी और प्रभावशाली होता है। जीवन में संघर्ष के बाद बड़ी सफलता मिलती है।
  • सूक्ष्म भेद:
    • पूर्व भाग (00° 48' - 00° 54'): जातक 'गृहस्थ सुख' भोगता है लेकिन स्वभाव में थोड़ा क्रोध (शिव जैसा) हो सकता है। वह परिवार का रक्षक होता है।
    • उत्तर भाग (00° 54' - 01° 00'): जातक में 'वैराग्य' की भावना होती है। जीवन के अंतिम चरण में वह सब कुछ त्यागकर मोक्ष या शांति की ओर मुड़ जाता है।

निष्कर्ष:

मित्रों, हमने चर राशियों का पहला 1 डिग्री (0 से 1) पूरा कर लिया है।

अगले लेख में हम 1 डिग्री से 2 डिग्री तक चलेंगे, जहाँ 'भद्रा', 'राजी' और 'कुट्टिनी' जैसे महत्वपूर्ण अंश आएंगे।

​अपनी कुंडली जांचें और देखें कि क्या आपका कोई ग्रह इन अंशों में है?

शुभम भवतु!

— आचार्य राजेश कुमार

(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)

स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान

जीवन की पहली सांस, सफलता की पहली छलांग: अश्विनी नक्षत्र 🐎



जीवन की पहली सांस, सफलता की पहली छलांग: अश्विनी नक्षत्र 🐎
​जब ब्रह्मांड 'शून्य' में होता है, तब जीवन का पहला स्फोट होता है— अश्विनी।
ज्योतिष में यह पहला नक्षत्र है। यह केवल एक तारा समूह नहीं, बल्कि 'जीवन जीने का विज्ञान' है।
​सोचिए, इस धरती पर आने के लिए सबसे पहले क्या चाहिए?
👉 सांस (Breath) — जीवन शुरू करने के लिए।
👉 गति (Speed) — जीवन चलाने के लिए।
​यही अश्विनी है। यह कालपुरुष की पहली सांस और ब्रह्मांड की पहली दौड़ है।
​👇 गहराई से समझें: सिर्फ कहानी नहीं, जीवन का रहस्य 👇
​पौराणिक कथाओं में हम सुनते हैं कि सूर्य देव (आत्मा) और उनकी पत्नी संज्ञा (चेतना) ने घोड़े और घोड़ी का रूप धारण किया, और उनकी 'नासिका' (नाक) के स्पर्श से अश्विनी कुमारों का जन्म हुआ। इसमें आपके जीवन के 3 बड़े सूत्र छिपे हैं:
​१. 🐎 घोड़ा (ऊर्जा का रहस्य): घोड़ा कभी शांत नहीं बैठता। यह हमारी 'बेचैन प्राण शक्ति' का प्रतीक है। अश्विनी नक्षत्र सिखाता है कि हमारे भीतर असीम ऊर्जा है। यदि इस घोड़े को लक्ष्य (लगाम) मिल जाए, तो यह चमत्कार करता है।
२. 🌬️ नासिका (प्राण ही औषधि है): जन्म 'सांस' से हुआ। यह बताता है कि हमारा 'प्राण' (Breath) ही हमारी सबसे बड़ी औषधि है।
३. 💊 वैद्य (Healer): अश्विनी कुमार देवताओं के डॉक्टर हैं। आत्मा का पहला लक्ष्य 'स्वस्थ होना' है।
​🌟 सूक्ष्म विश्लेषण: अश्विनी के 4 चरण और नवांश 🌟
(क्या आप जानते हैं? एक ही नक्षत्र में पैदा हुए लोग अलग-अलग क्यों होते हैं? उत्तर है—नवांश)
​अश्विनी नक्षत्र के चारों चरण मेष राशि में ही आते हैं, लेकिन नवांश बदलते ही इनका स्वभाव बदल जाता है:
​👣 प्रथम पद (मेष नवांश - मंगल):
यह विशुद्ध ऊर्जा है। यहाँ 'घोड़े' की ताकत और 'मंगल' की आग मिलती है।
👉 पहचान: ये रुकना नहीं जानते। अत्यधिक साहसी, स्वतंत्र और जन्मजात लीडर होते हैं।
​👣 द्वितीय पद (वृषभ नवांश - शुक्र):
यहाँ ऊर्जा को 'शुक्र' की सुंदरता और स्थिरता मिलती है।
👉 पहचान: ये अपनी ऊर्जा का उपयोग 'सृजन' (Creation) में करते हैं। ये व्यावहारिक (Practical) होते हैं और काम को खूबसूरती से पूरा करते हैं।
​👣 तृतीय पद (मिथुन नवांश - बुध):
यहाँ गति को 'बुध' की बुद्धि का साथ मिलता है।
👉 पहचान: इनका दिमाग घोड़े की तरह तेज दौड़ता है। ये हाजिरजवाब, मजाकिया और निर्णय लेने में सबसे तेज होते हैं।
​👣 चतुर्थ पद (कर्क नवांश - चंद्रमा):
यहाँ अग्नि (मेष) और जल (कर्क) का संगम है।
👉 पहचान: यह अश्विनी का 'हीलर' रूप है। ये भावुक होते हैं और दूसरों का दर्द महसूस कर सकते हैं। चिकित्सा और सेवा में इनका मन लगता है।
​⚠️ जीवन सूत्र:
आपके पास 'रफ्तार' (घोड़ा) है, बस 'धैर्य' की लगाम कसनी है।
​📿 उपाय:
अपनी 'गति' को सही 'बुद्धि' देने के लिए, बुधवार को भगवान गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं।
​🏹 अश्विनी का अंतिम सत्य:
"जीवन इंतज़ार करने का नाम नहीं है। सांस लो, लक्ष्य साधो और दौड़ पड़ो।"
​🙏 क्या आप या आपके परिचित अश्विनी नक्षत्र से हैं?
कमेंट में 🐎 लिखें और पोस्ट SHARE करें।
​#AshwiniNakshatra #VedicAstrology #NakshatraSeries #AcharyaRajesh #JyotishGyan #HealingEnergy #AstrologyLovers
वास्तु और मानव देह का अद्भुत विज्ञान: तोड़-फोड़ नहीं, 'ऊर्जा-संतुलन' है समाधान🏠!
— आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़, राजस्थान)
प्रायः यह माना जाता है कि यदि भवन वास्तु सम्मत नहीं है, तो उसमें तोड़-फोड़ अनिवार्य है। लेकिन यह धारणा वैज्ञानिक और दार्शनिक रूप से त्रुटिपूर्ण है। जिस प्रकार मानव शरीर में 'जीव' (आत्मा) निवास करती है, ठीक उसी प्रकार भवन में भी एक 'जीवंत ऊर्जा' का वास होता है।
शरीर के किसी हिस्से में काट-छाँट करने पर न केवल असहनीय पीड़ा होती है, बल्कि उस अंग के पुनर्निर्माण में समय लगता है और यह भी निश्चित नहीं कि वह अंग पुनः अपनी प्राकृतिक लय में कार्य कर पाएगा या नहीं। ठीक वैसी ही स्थिति भवन की भी है। अनावश्यक तोड़-फोड़ उसकी 'मूल ऊर्जा' (Core Frequency) को विचलित कर देती है। यदि भवन का नवनिर्मित हिस्सा अपनी "स्मृति" (Memory) भूल जाए, तो उसमें रहने वाला मनुष्य रूपी जीव भी दिशाहीन और दुखी हो जाएगा।
1. आश्रय और शांति का सूक्ष्म भेद
वास्तु का उद्देश्य केवल 'बचाव' नहीं, बल्कि 'पोषण' है।
* उदाहरण: बरसात होने पर छतरी या सार्वजनिक शेड आपको भीगने से तो बचा सकते हैं, लेकिन जो चैन की गहरी नींद अपने घर की छत के नीचे आती है, वह किसी शेड में संभव नहीं।
* उदाहरण: भूख मिटाने के लिए होटल का भोजन पर्याप्त हो सकता है, लेकिन जो आत्मिक तृप्ति और शांति घर के भोजन में मिलती है, वह कहीं और प्राप्त नहीं होती।
यदि भवन पंचतत्वों (जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी, आकाश) के अनुरूप बना है, तो वह रहने वाले व्यक्ति के लिए सुख और बलवान भाग्य के निर्माण में सहायक होता है।
2. वास्तु पुरुष और मानव शरीर क्रिया विज्ञान (Anatomy)
मानव शरीर और भवन की संरचना में गहरा सामंजस्य है:
* जल तत्व: शरीर में मुख के बाएं हिस्से से जल की ग्रंथियां सजीव रहती हैं और हृदय के नीचे जलीय अंश का संग्रह होता है। इसी तर्क पर, भवन में जल का स्थान ब्रह्मस्थान से हटकर थोड़ा पूर्व की ओर होना चाहिए।
* अग्नि तत्व: शरीर के दाहिने हिस्से में अग्नि (सूर्य नाड़ी) की प्रबलता होती है, इसीलिए मकान के दाहिने हिस्से में रसोई का निर्माण ऊर्जा के संतुलन के लिए श्रेष्ठ है।
3. गृह स्वामी का स्थान: 'बल' और 'चेतना' का समन्वय
प्रचलित मान्यता है कि मुखिया का निवास नैऋत्य कोण (South-West) में होना चाहिए। वास्तु पुरुष के शरीर में यह स्थान 'दाहिने पुट्ठे' (Hips) का है, जो भार उठाते हैं। अतः नैऋत्य कोण 'स्थिरता' का प्रतीक तो है, लेकिन शरीर को चलाने वाली 'चेतना और जीव' का निवास 'हृदय' में होता है।
अतः, यद्यपि मुखिया शयन के लिए नैऋत्य (मजबूती) का प्रयोग करे, परंतु उसका मुख्य निवास और मानसिक उपस्थिति भवन के हृदय स्थल (ब्रह्मस्थान के समीप और ईशान से नीचे का हिस्सा) में होना अनिवार्य है। जिस प्रकार हृदय शरीर के बाएं हिस्से में रहकर जीवन देता है, वैसे ही मुखिया का इस स्थान पर होना परिवार के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है।
4. वास्तु उपाय: 'मिश्रण' की वैज्ञानिक क्रिया
वास्तु के उपाय अंधविश्वास नहीं, बल्कि 'दो चीजों के मिश्रण' (Scientific Interaction) से होने वाली ऊर्जात्मक क्रिया है।
जैसे:
* हाइड्रोजन और ऑक्सीजन (दो गैसें) मिलने पर 'पानी' बनता है।
* हल्दी (पीला) और चूना (सफेद) मिलने पर 'लाल' रंग बनता है।
उसी प्रकार, जब एक विशेष 'दिशा' की ऊर्जा का मिलन एक विशिष्ट 'तत्व' (वस्तु) से होता है, तो वहां एक 'तीसरी शक्ति' उत्पन्न होती है जो वास्तु दोष के नकारात्मक प्रभाव को 'न्यूट्रलाइज' (Neutralize) कर देती है।
5. पूर्णिमा और वार्षिक चक्र का खगोलीय तर्क
दिशा बंधन के लिए 'पूर्णिमा' का चयन पूर्णतः वैज्ञानिक है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force) अपने चरम पर होता है, जिससे पृथ्वी के जल तत्व और चुंबकीय क्षेत्र में हलचल बढ़ जाती है।
पृथ्वी सूर्य की एक परिक्रमा एक वर्ष में पूर्ण करती है, जिससे वार्षिक चुंबकीय चक्र बदलता है। पूर्णिमा पर किया गया यह उपचार भवन की 'वार्षिक ऊर्जा बैटरी' को रिचार्ज कर देता है। तत्वों की अपनी 'स्मृति' (Memory) होती है, जो इस ऊर्जा को अगले एक वर्ष तक सुरक्षित रखती है।
दिशा बंधन की वैज्ञानिक विधि
(वर्ष में एक बार, पूर्णिमा के सूर्यास्त पर संपन्न करें)
1. उत्तर (वायु + नाद): घंटी या विंड चाइम का विज्ञान
* क्रिया: उत्तर दिशा में पीतल की घंटी बजाएं या विंड चाइम लगाएं।
* सकारात्मकता का तर्क: घंटी की आवाज से निकलने वाली तरंगें (Sound Waves) तीक्ष्ण और उच्च आवृत्ति (High Frequency) की होती हैं। विज्ञान के अनुसार, नकारात्मक ऊर्जा 'स्थिर और भारी' (Dull & Heavy) होती है। जब घंटी की गूंज घर के कण-कण से टकराती है, तो यह रुकी हुई ऊर्जा के अणुओं को 'छिन्न-भिन्न' (Disrupt) कर देती है। इससे मस्तिष्क के बाएं और दाएं हिस्से में सामंजस्य बैठता है और घर में एकाग्रता व स्पष्टता का संचार होता है।
2. दक्षिण (अग्नि + प्रकाश):
* क्रिया: पीतल के पात्र में देसी घी का दीपक जलाएं।
* तर्क: दक्षिण दिशा यम और मंगल की है। अग्नि का यह मिश्रण वातावरण के सूक्ष्म कीटाणुओं और 'विषैली ऊर्जा' का ऑक्सीकरण (Oxidation) कर उसे नष्ट करता है।
3. पूर्व (जल + सुचालकता):
* क्रिया: तांबे के कलश में स्वच्छ जल भरकर रखें।
* तर्क: तांबा सूर्य की धातु है और ऊर्जा का सर्वोत्तम सुचालक है। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा को सोखकर (Absorb) जल के माध्यम से घर में वितरित करता है।
4. पश्चिम (पृथ्वी + स्थिरता):
* क्रिया: मिट्टी के मटके में लाहौरी नमक भरकर रखें।
* तर्क: मिट्टी शुद्ध पृथ्वी तत्व है। नमक में वातावरण की नमी और नकारात्मक तरंगों को सोखने का अद्भुत गुण (Hygroscopic Property) होता है, जो घर को 'स्थिरता' प्रदान करता है।
6. ऊर्जा का विसर्जन और 'सीलिंग' (The Final Lock)
विज्ञान का नियम है कि कोई भी 'फिल्टर' एक समय के बाद भर जाता है। चूंकि नमक और मिट्टी ने वर्ष भर की नकारात्मकता को सोखा है, इसलिए अगली पूर्णिमा पर पुराने मिश्रण का विसर्जन (चलते जल में या भूमि में दबाकर) अनिवार्य है।
इन तत्वों की स्थापना के बाद, गृह स्वामी को ईशान की ओर मुख करके गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। यह मंत्रोच्चार उन स्थापित तत्वों के बीच एक 'अनुनाद' (Resonance) पैदा करता है, जो पूरे वर्ष के लिए भवन के चारों ओर एक 'एनर्जी ग्रिड' बना देता है, जो बाहरी दूषित तरंगों को भीतर आने से रोकता है।
निष्कर्ष:
दिशा बंधन वह 'अमृत' है जो बिना किसी तोड़-फोड़ के भवन को सुख-समृद्धि का केंद्र बना देता है। आचार्य राजेश जी के अनुसार, यह सिद्ध करता है कि वास्तु केवल नियमों का संकलन नहीं, बल्कि प्रकृति के तत्वों के साथ तालमेल बिठाने का एक महान विज्ञान है।
​✨ ज्योतिष एवं वास्तु परामर्श के लिए संपर्क करें:
आचार्य राजेश कुमार
📍 हनुमानगढ़, राजस्थान
(महाकाली के सेवक एवं रत्न विशेषज्ञ)
​#VastuTips #AcharyaRajesh #VastuScience #DishaBandhan #Hanumangarh #Astrology #PositiveEnergy #VastuDosh #ScientificVastu #HomeHarmony
आचार्य राजेश कुमार 

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-10 (10° से 11° तक का सूक्ष्म भविष्य)

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-10 (10° से 11° तक का सूक्ष्म भविष्य)
देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-11 (11° से 12° तक का सूक्ष्म भविष्य
ब्लॉग शीर्षक:
देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-11 (11° से 12° तक का सूक्ष्म भविष्य
हर हर महादेव!

मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), नाड़ी अंश शृंखला के ग्यारहवें भाग में आपका स्वागत करता हूँ।
आज हम 11 डिग्री से 12 डिग्री के बीच के 5 अत्यंत ऊर्जावान और धन दायक अंशों का विश्लेषण करेंगे।

यहाँ 'मारुत' (हवा) की गति और 'धनञ्जय' (अर्जुन/आग) का तेज है।
अपनी कुंडली (D1) के लग्नेश, सूर्य या चंद्रमा की डिग्री जांचें।

(स्मरण रहे: यह गणना केवल चर राशियों—मेष, कर्क, तुला, मकर—के लिए है)

---

56. हरिणी (Harini) अंश
(विस्तार: 11° 00' से 11° 12')
* अर्थ: हिरणी / सुंदर आँखों वाली / विष्णु भक्त।

* सामान्य फल: जातक का स्वभाव हिरण जैसा चंचल और सुंदर होता है। आँखें बहुत आकर्षक होती हैं।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 00' - 11° 06'): जातक 'अस्थिर' (Restless) होता है। एक जगह टिक कर बैठना मुश्किल होता है। उसे घूमना-फिरना बहुत पसंद है।
    * उत्तर भाग (11° 06' - 11° 12'): जातक 'कला प्रेमी' होता है। संगीत, नृत्य या पेंटिंग में रुचि होती है। स्वभाव से डरपोक हो सकता है।

---

57. हरिणा (Harina) अंश
(विस्तार: 11° 12' से 11° 24')
* अर्थ: हरिण / विष्णु / पीला रंग।

* सामान्य फल: यह भगवान विष्णु का अंश है। जातक सात्विक और धर्मपरायण होता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 12' - 11° 18'): जातक 'भक्त और सेवाभावी' होता है। उसे दूसरों की सेवा करने में आनंद आता है। धार्मिक संस्थाओं से जुड़ाव।
    * उत्तर भाग (11° 18' - 11° 24'): जातक को 'सरकारी लाभ' मिलता है। उच्च अधिकारियों से अच्छे संबंध रहते हैं। जीवन सुगम रहता है।

---

58. मारुत (Marut) अंश
(विस्तार: 11° 24' से 11° 36')
* अर्थ: हवा / पवन देव / हनुमान जी।

* सामान्य फल: यह 'वायु तत्व' और 'गति' का अंश है। जातक एक जगह रुक नहीं सकता। उसमें अपार शक्ति होती है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 24' - 11° 30'): जातक 'प्राणवान' (Full of Life) होता है। वह योग, प्राणायाम या खेलकूद (Sports) में बहुत अच्छा करता है। शरीर लचीला होता है।
    * उत्तर भाग (11° 30' - 11° 36'): जातक 'संदेशवाहक' (Messenger) होता है। मीडिया, संचार या डाकिया जैसे कार्यों में सफलता। बातें हवा की तरह फैलाता है।

---

59. धनञ्जय (Dhananjaya) अंश
(विस्तार: 11° 36' से 11° 48')
* अर्थ: अर्जुन / आग / धन जीतने वाला।

* सामान्य फल: यह 'विजय' और 'अग्नि' का अंश है। जातक अर्जुन की तरह लक्ष्य भेदने वाला (Focused) होता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 36' - 11° 42'): जातक 'महत्वाकांक्षी' (Ambitious) होता है। वह धन कमाने के लिए किसी भी हद तक मेहनत कर सकता है। उसे हारना पसंद नहीं।
    * उत्तर भाग (11° 42' - 11° 48'): जातक 'शत्रुहंता' होता है। उसके दुश्मन उसके सामने टिक नहीं पाते। कोर्ट-कचहरी या वाद-विवाद में हमेशा जीतता है।

---

60. धनकरी (Dhanakari) अंश
(विस्तार: 11° 48' से 12° 00')
* अर्थ: धन देने वाली / समृद्धि।

* सामान्य फल: जैसा नाम, वैसा काम। यह पूर्ण रूप से 'आर्थिक सफलता' का अंश है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 48' - 11° 54'): जातक 'व्यापारी' (Businessman) होता है। उसे निवेश (Investment) की अच्छी समझ होती है। पैसा पैसे को खींचता है।
    * उत्तर भाग (11° 54' - 12° 00'): जातक 'परोपकारी धनी' होता है। वह धन कमाता है लेकिन उसे अच्छे कार्यों (धर्मशाला, अस्पताल) में लगाता है।

---

निष्कर्ष:
मित्रों, हमने 12 डिग्री तक का सफर पूरा कर लिया है।
आज हमने 'मारुत' की शक्ति और 'धनञ्जय' की जीत को देखा।

अगले लेख में हम 12 डिग्री से 13 डिग्री की ओर बढ़ेंगे।
वहां 'धनदा' और 'कच्छपा' (कछुआ) जैसे स्थिर लक्ष्मी वाले अंश आएंगे।

शुभम भवतु!

— आचार्य राजेश कुमार
(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-10 (10° से 11° तक का सूक्ष्म भविष्य)


देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-10 (10° से 11° तक का सूक्ष्म भविष्य)
हर महादेव!

मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), नाड़ी अंश शृंखला के दसवें भाग में आपका स्वागत करता हूँ।
आज हम 10 डिग्री से 11 डिग्री के बीच के 5 विशेष अंशों का विश्लेषण करेंगे।

यह हिस्सा जीवन में धीमी गति (शनि) और मित्रता (प्रेम) का मिश्रण है। यहाँ 'मंदा' और 'मैत्री' जैसे अंश आते हैं।
अपनी कुंडली (D1) के लग्नेश, सूर्य या चंद्रमा की डिग्री जांचें।

(स्मरण रहे: यह गणना केवल चर राशियों—मेष, कर्क, तुला, मकर—के लिए है)

---

51. मंदा (Manda) अंश
(विस्तार: 10° 00' से 10° 12')
* अर्थ: धीमी गति / शनि / गंभीर।

* सामान्य फल: यह शनि देव का प्रभाव वाला अंश है। यहाँ चीजें थोड़ी धीमी (Slow) मिलती हैं, लेकिन ठोस (Solid) मिलती हैं।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 00' - 10° 06'): जातक 'विलंब' (Delay) का सामना करता है। चाहे नौकरी हो या शादी, काम थोड़ा रुक-रुक कर होता है। धैर्य रखना जरूरी है।
    * उत्तर भाग (10° 06' - 10° 12'): जातक 'गंभीर और दार्शनिक' होता है। वह जल्दबाजी नहीं करता। वह लंबी रेस का घोड़ा होता है और बुढ़ापे में बहुत सुखी रहता है।

---

52. अम्बुजा (Ambuja) अंश
(विस्तार: 10° 12' से 10° 24')
* अर्थ: जल में जन्मा / कमल / शंख / मोती।

* सामान्य फल: यह जल तत्व का अंश है। जातक का मन भावनाओं से भरा होता है। यह धन और शीतलता देता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 12' - 10° 18'): जातक 'मोती जैसा कीमती' होता है। उसे रत्नों या समुद्र से जुड़ी चीजों के व्यापार से लाभ होता है। मन साफ होता है।
    * उत्तर भाग (10° 18' - 10° 24'): जातक 'भावुक' (Emotional) होता है। वह दूसरों के दुख में जल्दी पिघल जाता है। कला और कविता के लिए यह उत्तम स्थान है।

---

53. कोकिला (Kokila) अंश
(विस्तार: 10° 24' से 10° 36')
* अर्थ: कोयल / मधुर स्वर।

* सामान्य फल: यह 'वाणी' (Speech) का सुंदर अंश है। जातक की पहचान उसकी आवाज या बोलने के तरीके से होती है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 24' - 10° 30'): जातक 'गायक या वक्ता' हो सकता है। उसकी आवाज में एक कशिश होती है जो लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
    * उत्तर भाग (10° 30' - 10° 36'): जातक को 'मीठा भोजन' और अच्छा जीवन पसंद होता है। वह अपनी बातों से अपना काम निकलवाना जानता है।

---

54. स्मरा (Smara) अंश
(विस्तार: 10° 36' से 10° 48')
* अर्थ: कामदेव / प्रेम / यादें।

* सामान्य फल: यह 'प्रेम और रोमांस' का अंश है। जातक स्वभाव से बहुत रोमानी (Romantic) होता है और प्रेम संबंधों को महत्व देता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 36' - 10° 42'): जातक के जीवन में 'प्रेम विवाह' के प्रबल योग होते हैं। वह अपने साथी से बहुत गहरा जुड़ाव रखता है।
    * उत्तर भाग (10° 42' - 10° 48'): जातक की 'स्मरण शक्ति' (Memory) बहुत तेज होती है। वह पुरानी बातों को कभी नहीं भूलता। (स्मरा = स्मरण करना)।

---

55. मैत्री (Maitri) अंश
(विस्तार: 10° 48' से 11° 00')
* अर्थ: मित्रता / दोस्ती / गठबंधन।

* सामान्य फल: जातक का सबसे बड़ा धन उसके 'दोस्त' होते हैं। वह अकेले काम करने के बजाय मिल-जुलकर काम करने में विश्वास रखता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 48' - 10° 54'): जातक 'सच्चा मित्र' होता है। वह दोस्तों के लिए नुकसान सहने को भी तैयार रहता है। उसका फ्रेंड-सर्कल बहुत बड़ा होता है।
    * उत्तर भाग (10° 54' - 11° 00'): जातक 'संधि कराने वाला' (Peacemaker) होता है। दो पक्षों के बीच झगड़ा सुलझाने या पार्टनरशिप (Partnership) बिजनेस में उसे बहुत सफलता मिलती है।

---

निष्कर्ष:
मित्रों, हमने 11 डिग्री तक का सफर पूरा कर लिया है।
आज हमने 'मंदा' की गंभीरता और 'मैत्री' के सहयोग को जाना।

अगले लेख में हम 11 डिग्री से 12 डिग्री की ओर बढ़ेंगे।
वहां 'हरिणी' (हिरण) और 'सावित्री' जैसे पवित्र अंश आएंगे।

शुभम भवतु!

— आचार्य राजेश कुमार
(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान

🔥 "सावधान: कहीं आप भी ज्योतिष की 'ABC' को ही सच तो नहीं मान बैठे?"

👁️ "पर्दे के पीछे क्या होता है? (मेरी और आपकी कुंडली की मुलाकात)" 👇 🔥 "सावधान: कहीं आप भी ज्योतिष की 'ABC' को ही स...