रविवार, 22 जनवरी 2017

मित्रो मेरा विचार यह है कि ज्योतिष एक ऐसा ज्ञान है जो बहुत उपयोगी है जिसे सिर्फ वह मनुष्य जानता है जो श्रेष्ठ आचरण और धर्म का पालन करते हुये इसकि बारीकियों को सिखे और फिर अपने उस ज्ञान की सिद्धी से वह कई उन बातों को जान लेता है जो साधारण मनुष्य के लिये उपयोगी हो सकता है . जैसे अगर कोई वृक्ष पर कोई फल लगा है जो कच्चा है अगर उसे बच्चा तोडना चाहे तो मां बाप कहते है अभी रुको एक सप्ताह बाद यह पक जायेगा तब तोडना, ये ज्ञान भी ज्योतिष ही तो है. इसलिये ज्योतिष ज्ञान को आजकल के साइंस से तुलना करके नकार नही सकते. रही बात आजकल के ज्योतिषियों की तो उन लोगों ने अधकचरे ज्ञान से अपने बोलने की कला का प्रयोग करके लोगों को उल्लू बना के अपना काम चला रहे है और सही ज्योतिष का ज्ञान रखने वाले भी उनके चक्कर मे वदनाम होते है साधु का चोला बहुत ही पवित्र माना जाता है वो अपने अंदर समस्त कोटी अपराधों को हर लेता है. रावण भी इसी भेष मे आया था और आजकल समाज में कुटील, कामी, लोलूप लोग भी इसी चोले को अपना कर उसकी आढ में गलत काम करते है परंतु साधु का वो चोला फिर भी श्रेश्ठ माना जाता है क्युंकि वो उस खोटे ब्यक्ति की बुराई को ढक लेता है और फिर वो गलत आदमी उस चोले की आढ में लोगों से दुराचार भी करता है. परंतु उसकी महीमा को तो मानना ही पढेगा. उसी तरह हो सकता है अनपढ भविष्य वेत्ता आते हों किसी ब्राहम्ण के भेष में या ज्योतिषि के वेश मे परन्तु इसका मतलब यह नही का ज्योतिष का ज्ञान ही गलत है. मेरा विचार यह है कि ज्योतिष एक ऐसा ज्ञान है जो बहुत उपयोगी है जिसे सिर्फ वह मनुष्य जानता है जो श्रेष्ठ आचरण और धर्म का पालन करते हुये इसकि बारीकियों को सेखे और फिर अपने उस ज्ञान की सिद्धी से वह कई उन बातों को जान लेता है जो साधारण मनुष्य के लिये उपयोगी हो सकता है . जैसे अगर कोई वृक्ष पर कोई फल लगा है जो कच्चा है अगर उसे बच्चा तोडना चाहे तो मां बाप कहते है अभी रुको एक सप्ताह बाद यह पक जायेगा तब तोडना, ये ज्ञान भी ज्योतिष ही तो है. इसलिये ज्योतिष ज्ञान को आजकल के साइंस से तुलना करके नकार नही सकते. रही बात आजकल के ज्योतिषियों की तो उन लोगों ने अधकचरे ज्ञान से अपने बोलने की कला का प्रयोग करके लोगों को उल्लू बना के अपना काम चला रहे है साधु का चोला बहुत ही पवित्र माना जाता है वो अपने अंदर समस्त कोटी अपराधों को हर लेता है. रावण भी इसी भेष मे आया था और आजकल समाज में कुटील, कामी, लोलूप लोग भी इसी चोले को अपना कर उसकी आढ में गलत काम करते है परंतु साधु का वो चोला फिर भी श्रेश्ठ माना जाता है क्युंकि वो उस खोटे ब्यक्ति की बुराई को ढक लेता है और फिर वो गलत आदमी उस चोले की आढ में लोगों से दुराचार भी करता है. परंतु उसकी महीमा को तो मानना ही पढेगा. उसी तरह हो सकता है अनपढ भविष्य वेत्ता आते हों किसी ब्राहम्ण के भेष में या ज्योतिषि के वेश मे पर्न्तु इसका मतलब यह नही कि ज्योतिष का ज्ञान ही गलत है.क्युंकि ज्योतिषी का मतलब सबसे अधिक पढा लिखा और विद्वान होता है. मै आपसे अनुरोध करुंगा आप भी ज्योतिष कि बुराई के बजायउनकी वुराई करे जो वेसिर पैर की वाते ज्योतिष के नाम पर कर रहे है जैसहैसियत राशीफल फला राशी वाले आज यह करे फलां राशी वाले आज काले कपङे पहने या 2 अंक वाले आज चावल ना खाऐ 4 वाले आज मत नहाऐ नही तो नजले की शकायत हो सकती है कन्या लग्न वाले हरे रंग के रुमाल जेव मे रखे या मेष लग्न वाले किसी के आगे झुकते नही आप मित्रो यह ज्योतिष नही है ना ही ऐसा करने वाले ज्योतिषी आप खुल कर ईसका विरोघ करे ओर हमारे समाज मे ईस वुराई को खत्म करे ताकि आने वाली पीडीया हमे दोषी ना ठहराऐ

मित्रो एक सच यह भी हैं… (ज्योतिष अपने आप में एक सम्पूर्ण विज्ञानं हैं…ज्योतिषी गलत हो सकता हैं,ज्योतिष नहीं मित्रों जहाँ सभी विज्ञानं का ज्ञान समाप्त हो जाता हैं वह से ज्योतिष विज्ञानं आरम्भ होती हैं यह काफी पुरानी घटना हैं,मै ट्रेन मे रिजर्वेशन की तलाश मे भटक रहा था। ट्रेन मे तिल रखने तक की जगह नही थीमेरा मित्र मेरे साथ था जगह ना मिलने के कारन हम टायलेट के पास बैठे अपने ही जैसे यात्रियो के साथ बैठ गये एक सहयात्री समय काटने के लिये लोगो का हाथ देख रहा था और विस्तार से सब कुछ बता रहा था। पास बैठे पिता-पुत्र की बारी आयी। पुत्र का हाथ देखते ही उसके माथे पर चिंता की लकीर उभर आयी। वह कुछ नही बोला। पिता को आशंका हुयी। वह पुत्र के बारे मे जानने व्यग्र हो उठा। एक कोने मे ले जाकर उस सहयात्री ने धीरे से बताया कि आपके पुत्र के हाथ को देखकर लगता है कि इसका कुछ समय पहले किसी से झग़डा हुआ है और ऐसा भी लगता है कि यह मर्डर करके भागा है। मै ने सोचा अब तो उस ज्योतिषी की खैर नही। ऐसा पिटेगा कि दम निकल जायेगा। पर हुआ उल्टा। पिता उनके पैरो मे गिर गया और बताया कि चम्वा मे दोस्तो के साथ किसी झग़डे मे इन सब से किसी की हत्या हो गयी। कैसे भी मैने अपने बेटे को निकाला है। अब इसे मुम्बई ले जा रहा हूँ ताकि कुछ काम सीखने के बाद वाहर के देशो मे नौकरी मिल सके। मेरे आश्चर्य का ठिकाना नही रहा। मैने बहुत बार भविष्य़वाणियो के बारे मे सुना और पढा था पर उन्हे सच होते इतने करीब से नही देखा था। उस ज्योतिषी के दिव्य ज्ञान ने मुझे प्रेरित किया कि मै इस प्राचीन विज्ञान का विस्तार से अध्ययन करुँ। मैने ढेरो पुस्तके खरीदी पर बिना गुरु केसही ज्ञानृ नही मिलता फिर पत्राचार से भी पङाई की तव भी वात नही वनी प्यास ज्यो की त्यो वनी रही जब भी हमे अखबारो मे किसी ज्योतिषी का विज्ञापन दिखता हम उसके ठिकने पर पहुँच जातेओर उनसे सीखने को कहते ओर कईयो से सीखा भी पर सव अघकचरे ज्ञानी थे कुछ समय तक यह सिलसिला चला यह तक कि इसी तरह जो शहर के ज्योतिषी थे या आस पास के उनके पास भी जा जा कर सीखा धीरे-धीरे समझ विकसित हुयी और जब एक ज्योतिष सम्मेलन मे दुनिया भर से आये विद्वानो से मिलवाने मेरे ऐक मित्र मुझे जबरदस्ती ले गये तो मेरी आँखे खुली। मैने ज्योतिष को एक समृद्ध पारम्परिक ज्ञान की तरह पाया। उन्ही विद्वानो से पता चला कि कैसे भारतीय ज्योतिष के आगे सारी दुनिया नतमस्तक है। उसके बाद से मैने शहर के ज्योतिषी ङेरे नाथ संत महात्मा किसी को नही छोङा सभी के पास ज्ञान के लिऐ भटकता रहा !खैर मेरी अघ्यातम यात्रा के किस्से काफी लम्वे हे फिर कभी आप को वताउगा कुछ वर्षो पहले एक ऐसे हस्तरेखा विशेषज्ञ से मिलने का अबसर मिला जो लोगो को टीवी पर या मंच से सुनकर उनकी हू-बहू हस्तरेखाए बना देता है। हस्तरेखा से लोगो के बारे मे बताना तो ठीक है पर लोगो को सुनकर भला कैसे कोई हस्तरेखा बना सकता है? यह विशेषज्ञ अपनी मर्जी से ही व्यक्ति का चुनाव करता है और इस ज्ञान से अर्थ लाभ नही करता है। वह इसके प्रदर्शन के भी खिलाफ है। मुझे पता है कि यदि वह इस ज्ञान के साथ बाजार मे आये तो उसे लोगो के सिर आँखो मे बैठने मे जरा भी देर नही लगेगी। डिस्कवरी चैनल मे एक बार एक फिल्म आ रही थी जिसमे बताया गया था कि शीत युद्ध के दिनो मे अमेरीकी सेना ने एक ऐसे लोगो की टोली बनायी थी जो कल्पना के सहारे एक बन्द कमरे मे बैठकर दुश्मनो के बारे मे विशिष्ट जानकारी देते थे। आज ऐसी कोई बात भारत मे करे तो हमारा आधुनिक समाज इसे अन्ध-विश्वास घोषित करने मे जरा भी देर नही करेगा। इसी तरह की सोच ने आज भारतीय पारम्परिक ज्ञान को उसके अपने घर मे बेसहारा कर दिया है। मै ज्योतिष को विज्ञान मानता हूँ। आम तौर पर ज्योतिषीयो द्वारा की जाने वाली भविष्यवाणियो पर तरह-तरह के सवाल किये जाते है। ये भविष्य़वाणियाँ व्यवसायिक ज्योतिष से जुडे लोग अर्थार्जन के लिये करते है। इसी आधार पर ज्योतिष के विज्ञान होने पर सन्देह किया जाता है। लोगो के इस तर्क को सुनकर मुझे बरबस ही एक और विज्ञान की याद आ जाती है। वह है हम सब का प्यारा मौसम विज्ञान जिसकी भविष्य़वाणियाँ शायद की कभी सही होती है। शहर से लेकर गाँवो तक सब जानते है इस विज्ञान को और इसकी उल्टी भविष्य़वाणियो को। पर फिर भी कोई इसे ज्योतिष की तरह कटघरे मे खडा नही करता। देश मे इस विज्ञान के विकास के लिये अरबो खर्च किये जा रहे है। इसका एक प्रतिशत भी भारतीय ज्योतिष के उत्थान मे खर्च किया जाता तो इसे नया जीवन मिल जाता। कुछ वर्षो पहले एक किसान की हवाले से यह जानकारी स्थानीय अखबार मे छपी कि इस बार मछरिया नामक खरपतवार की संख्या को देखकर लगता है कि बारिश कम होगी। जैसी कि उम्मीद थी दूसरे ही दिन इसे अन्ध-विश्वास बताते हुये एक समाचार छप गया। किसान ने ठान लिया कि चुप रहने मे ही भलाई है। उस साल सचमुच बारिश कम हुयी। ऐसे ही वनस्पतियो और पशुओ के व्यवहार से मौसम की परम्परागत भविष्य़वाणी का विज्ञान अपने देश मे समृद्ध है। मौसम विज्ञानी इसे महत्व नही देते है पर जानकारी मिलने पर इस पर शोध-पत्र तैयार कर विदेशो मे प्रस्तुत करने का अवसर भी नही छोडते है। किसानो के पारम्परिक ज्ञान पर वाह-वाही लूटकर अवार्ड भी पा जाते है कौआ-कैनी नामक खरपतवार जो कि बरसात मे खेतो मे उगता है, के फूलो को बन्द होता देखकर किसान यह पूर्वानुमान लगा लेते है कि मौसम बिगडने वाला है। इसी तरह सर्दियो मे उगने वाले कृष्णनील नामक खरपतवारो के फूलो से भी ऐसी ही जानकारी एकत्र की जाती है।अब भी यह सागर मे एक बूँद के समान है। कभी-कभी लगता है कि पारम्परिक भारतीय ज्ञान की रक्षा के लिये और परम्पराओ और संस्कारो को नयी पीढी तक पहुँचाने के लिये लोगो को जोडकर एक ऐसा संगठन बनाऊँ जो इस विषय मे उपलब्ध तमाम जानकारियो को आम लोग तक तो पहुँचाये ही साथ ही इन्हे अन्ध-विश्वास बताकर अपनी दुकान चलाने वाले तथाकथित समाजसेवियो के खिलाफ भी आवाज उठाये। आखिर भारत मे रहकर उसकी परम्पराओ और संस्कारो को गलत ठहराना किसी अपराध से कम नही है।मित्रो आज जो भी मांकाली की कृप्पा से ही हु मुझ मे मेरा कुछ भी नही है आचार्य राजेश

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

मैने पहले राशी फल पर आपको जागरुक करने की कोशिश की पता नही फिर भी लोग राशी फल की मांग करते है तब से अब तक परिस्थितियां बदल चुकी हैं. हमारी पूर्णतया वैज्ञानिक यह कला, कम्प्यूटर का सहारा लेकर और भी निखर गई है. पहले की भी बहुत-सी भविष्यवाणियां सत्यापित हुई हैं और अब भी हो रही हैं, लेकिन कुछ लोग ज्योतिष व भविष्यवाणी में पूर्ण आस्था रखते हैं और कुछ लोग किसी राशिफल, अंक-ज्योतिष, बोलें सितारे, टैरो कॉर्ड, आर्थिक भविष्यफल,अंग फड़कने आदि में ही अटके है मेरा अपना विचार है, कि जन्मपत्री में एक पल की भी हेरफेर होने से भविष्यवाणी में भी हेरफेर हो सकता है. एक ही राशि के करोड़ों लोगों के लिए एक ही भविष्यवाणी कैसे सत्य हो सकती है? आजकल हर कला का व्यावसायीकरण हो गया है, ऐसे मे ज्योतिषी लोगो को कोवोगस राशी फल पङना छोङना होगा वहुँत से मित्रो को मेरी वात समझ मे आ रही है ओर वो खुलेआम ईसका विरोध भी कर रहे है आपका क्याविचार है कृप्पा जरुर वताऐ कही मै गलत तो नही आचार्य राजेश

बुधवार, 18 जनवरी 2017

मनुष्य के आचरण पर उसके विचारों का सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए मनुष्य को लगातार अपने विचारों का विश्लेषण करते रहना चाहिए कि उसके मन में किस तरह के विचार मौजूद हैं ? मन में ज़्यादा समय से जमे हुए विचार गहरी जड़े जमा लेते हैं, उनसे मुक्ति पाना आसान नहीं होता। ईश्वर और महापुरूषों के बारे में हमारे जो विचार होते हैं, वे भी हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। किसी बात को ईश्वर का आदेश या किसी बात को महापुरूष का कर्म मानते हुए यह ज़रूर चेक कर लें कि कहीं वह ‘पवित्रता‘ के विपरीत तो नहीं है ईश्वर पवित्र है और महापुरूषों का आचरण भी पवित्र होता है। जो बात पवित्रता के विरूद्ध होगी, वह ईश्वर के स्वरूप और महापुरूष के आचरण विपरीत भी होगी, यह स्वाभाविक है। इस बात को जानना निहायत ज़रूरी है। ऐसा करने के बाद चोरी, जारी और अन्याय की वे सभी बातें ग़लत सिद्ध हो जाती हैं, जिन्हें अपने स्वार्थ पूरा करने के लिए ग़लत तत्वों ने धर्मग्रन्थों में लिख दिया है। जो ग़लत काम महापुरूषों ने कभी किए ही नहीं हैं, उन्हें उनके लिए दोष देना ठीक नहीं है। उन कामों का अनुसरण करना भी ठीक नहीं है। सही बात को सही कहना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है ग़लत बात को ग़लत कहना। ऐसा करने के बाद ही हम ग़लत बात के प्रभाव से बच सकते हैं। हम ईश्वर और महापुरूषों के बारे में पवित्र विचार रखेंगे तो हमारा आचरण भी पवित्र हो जाएगा। यदि हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में चोरी, झूठ, अन्याय और भ्रष्टाचार मौजूद है तो हम सब को अपने अपने विचारों पर नज़र डाल कर देखनी चाहिए कि ईश्वर और महापुरूषों के बारे में हमारी मान्यताएं क्या हैं ? यह जीवन तो फिर भी किसी न किसी तरह कट जाएगा लेकिन अगर इसी अपवित्रता की दशा में हमारी मौत हो जाती है तो हम पवित्र लोक के दिव्य जीवन में प्रवेश न कर सकेंगे, जिसके बारे में हरेक महापुरूष ने बताया है और जिसे पाना इस जीवन के कर्म का मूल उददेश्य है।

सोमवार, 16 जनवरी 2017

कुछ मित्रो ने नीलम के वारे मे पुछा नीलम नीलम शनि ग्रह का रत्न है। नीलम का अंग्रेज़ी नाम 'सैफायर' है। नीलम रत्न गहरे नीले और हल्के नीले रंग का होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है; मसलन- मोर की गर्दन जैसा, हल्का नीला, पीला आदि। मोर की गर्दन जैसे रंग वाला नीलम उत्तम श्रेणी का माना जाता है। नीलम पारदर्शी, चमकदार और लोचदार रत्न है। नवरत्न में नीलम भी होता है। शनि का रत्न नीलम एल्यूमीनियम और ऑक्सिजन के मेल से बनता है।ईसके कारन ही ईसका रंग वनता है इसे कुरुंदम समूह का रत्न माना जाता हैयह जम्मू कश्मीरी जो आज कल नीही के वरावर मीलते है श्रींलका के शहर सलोन मे ऐक जगह है रतनपुरा आस्ट्रेलिया वर्मा थाईलैंड स्विट्जरलैंड वर्जील ओ जावा कावूल अमेरिका भी वहुत से देशो मे पाया जाता हैमाणिक्‍य और नीलम की वैज्ञानिक संरचना बिल्‍कुल एक जैसी है। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो माणिक्‍य की तरह ही नीलम भी एक एल्‍युमीनियम ऑक्‍साइड है। एल्‍युमीनियम ऑक्‍साइड में आइरन, टाइटेनियम, क्रोमियम, कॉपर और मैग्‍नीशियम की शुद्धियां मिली होती हैं जि‍ससे इनमें नीला,पीला, बैंगनी, नारंगी और हरा रंग आता है। इन्‍हें ही नीलम कहा जाता है। इसमें ही अगर क्रोमियम हो तो यह क्रिस्‍टल को लाल रंग देता है जिसे रूबी या माणिक्‍य कहते हैं।समूह में लाल रत्‍न को माणिक तथा दूसरे सभी को नीलम कहते हैं। इसलिए नीलम हरे, बैंगनी, नीले आदि रंगों में प्राप्‍त होता है। सबसे अच्‍छा नीलम नीले रंग का होता है जैसे आसमानी, गहरा नीला, चमकीला नीला आदि कोलंबो। श्रीलंका की एक खान में 1404.49 कैरेट का नीलम रत्न मिला है। दुनिया के इस सबसे बड़े रत्न का मूल्य 10 करोड़ डालर है। श्रीलंका के रत्न विशेषज्ञों का कहना है कि देश के दक्षिणी भाग में रत्नपुर में यह रत्न प्राप्त किया गया। रत्नपुर को ‘सिटी आफ जेम्स’ के नाम से जाना जाता है। दुनिया के इस सबसे बड़े रत्न का मूल्य 10 करोड़ डालर (6 अरब 66 करोड़) आंका गया है। नीलामी में इसके 17.5 करोड़ डालर में बिकने की संभावना है। नीलम के मालिक ने कहा कि जिस वक्त मैंने इसे देखा, उसी वक्त इसे खरीदने का फैसला किया। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर उसने कहा कि रत्न को जब मेरे पास लाया गया, तभी मुझे लगा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा नीलम रत्न हो सकता है। इसीलिए मैंने जोखिम लिया और इसे खरीद लिया। रिपोर्ट के अनुसार नीलम के मामले में मौजूदा रिकार्ड 1,395 कैरेट का है।

रविवार, 15 जनवरी 2017

Acharya rajesh: वैसे तो भारत में ज्योतिष शास्त्र पर विश्वास करने वाले लोगो की कमी नहीं है. हिंदू धर्म में शादी का मुहुर्त निकालना हो, या शादी के लिए लड़के और लड़की की कुड़ंली का मिलान करवाना हो या फिर नामकरण जैसे रिवाज, इनमें ज्योतिष शास्त्र की मदद ली जाती हैं. ज्योतिष के जादू से ना सिर्फ आम जनता बल्की बॉलीवुड स्टार्स भी अछुते नहीं है. कई बॉलीवुड स्टार्स ने अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए रत्नों की मदद ली हैं. आईए बात करते है बॉलीवुड सेलीब्रिटीज और उनके रत्न प्रेम की– ऐश्वर्या रॉय – ऐश्वर्या ने अपनी खूबसूरती के दम पर विश्वसुदंरी की खिताब अपने नाम पर किया. जब उन्होंने बॉलीवुड में अपने करियर का आगाज किया तो उन्हें कोई खास सक्सेस नहीं मिली लेकिन ताल और हम दिल दे चुके सनम जैसी फ़िल्मों ने उन्हें सक्सेस का स्वाद चखा ही दिया लेकिन उन्होंने अपने करियर में कई चढ़ाव के साथ उतार भी देखे. ऐसे में उन्हे जरुरत महसूस हुई ऐसे जेमस्टोन्स की जो उन्हे एक शक्ति महसूस कराए. वो अपनी उंगली में एक नीलम रिंग पहनती है. इसके अलावा वो हीरा भी पहन चुकी है. कहा जाता है कि हीरा शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है जो ग्लैमर की दुनिया में सक्सेस दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इमरान हाशमी– लाल मूंगा, माणिक, पुखराज और ओपल जैसे रत्नों को धारण कर चुके है इमरान हाशमी. माना जाता है कि इन्हे मर्डर-2 और जन्नत टू जैसी फ़िल्मों में सक्सेस इन्हीं को पहनने की वजह से मिली है. ऐसे नहीं है कि इनकी फ़िल्में फ्लॉप नहीं हुई है अगर रत्नों का साथ हो तो नुकसान थोड़ा कम होता है प्रियंका चोपड़ा- प्रियंका चोपड़ा भी रत्नों में विश्वास रखती है. वो अपने हाथों की उंगलियों को कई रत्नों से सजा चुकी है. हालांकी वो कई कारणों से रत्नों को बदलती भी रही है अमिताभ बच्चन– सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने अपने करियर में सबसे बेहतरीन और सबसे खराब दौर भी देखा है. अपने कठिनाइओं से भरी जिंदगी में उनका झुकान रत्न-विज्ञान की तरफ हुआ. माना जाता है कि जब से उन्होंने नीलम रत्न पहना है उनके स्वास्थ और करियर में भी सुधार आया हैं.हालांकि नीलम पहनने के दो साल वाद उसका असर दिखना शुरु हुआ ऐसा उन्होने Stardast नामक फिल्मी मैग्जीन के ऐक intervew मे कहा: सलमान खान– सलमान ख़ान की तो जैसे पहचान ही बन चुका है उनका फिरोजा ब्रेसलेट ये गिफ्ट के तौर पर उनके पिता ने उन्हें दिया था ये ब्रेसलेट उनके लिए काफी लकी भी रहा है सुनीलगवास्कर प्रकाश सिहवादल सुखवीर वादल नीता अंम्वानी मुलायम सिह यादव नवजोतसिह सिद्दूतो देखा आपने की कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ रत्नो की शक्ति को किसी चमत्कार से कम नहीं मानते है. तो कुछ बॉलीवुड सेलिब्रिटीज इसमें बिल्कुल विश्वास नहीं रखते है.यह पोस्ट मेरे अजीज दिल्ली से रोहीत जी की हो उन्होनो फोटो के साथ यह मुझे भेजी ऐसा नहीं है कि सिर्फ रत्न धारण करने से ही सक्सेस मिलती है लेकिन ऐसा माना जाता है कि कठिन दौर में भी ये रत्न एक सहारे की तरह काम करते है, ये ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद करते है और अच्छे प्रभाव को बढ़ाने में मदद करते हैं.

महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां

‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...