रविवार, 15 जनवरी 2017

सोमवार, 9 जनवरी 2017

सरस्वती योग यह योग आपकी कुंडली में तभी बनता है जब शुक्र, बृहस्पति और बुध ग्रह एक-दूसरे के साथ हों अथवा केंद्र में बैठकर एक-दूसरे से संबंध बना रहे हों। युति अथवा दृष्टि किसी प्रकार से संबंध बनने पर यह योग बनता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली में बनता है उस पर विद्या की देवी मां सरस्वती की कृपा खूब बरसती है। सरस्वती योग वाले व्यक्ति कला, संगीत, लेखन एवं विद्या से संबंधित किसी भी क्षेत्र में काफी नाम और धन कमाते हैं। नृप योग अपने नाम के अनुरूप ही अज्ञात होता है। यह योग जिस भी व्यक्ति की कुंडली में बनता है वह राजा के समान जीवन जीता है। इस योग का निर्माण तब होता है जब व्यक्ति की जन्म कुंडली में तीन या उससे अधिक ग्रह उच्च स्थिति में रहते हैं। अमला योग भी शुभ और महान योगों में माना जाता है। यह योग तब बनता है जब जन्म पत्रिका में चंद्रमा से दशम स्थान पर कोई शुभ ग्रह स्थित होता है। इस योग वाला व्यक्ति अपने धन, यश और र्कीत हासिल करता है।

स्थान परिवर्तन योग स्थान परिवर्तन योग से जीवन सुखमय बन जाता है! आप यह जान लें कि उच्चाधिकारी, मन्त्री, मुख्यमन्त्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल बनने के लिए अल्पतम एक स्थान परिवर्तन योग आवश्यक है। अधिकतम तीन स्थान परिवर्तन योग एक जातक की कुण्डली में हो सकते हैं। यदि ये हों तो जातक उच्चाधिकारी, मन्त्री या प्रधानमन्त्री बनता है। इन्दिरा गांधी की कुण्डली में लग्नेश-सप्तमेश, षष्ठेश-लाभेश, धनेश-पंचमेश स्थान परिवर्तन योग थे। यहां स्थान परिवर्तन के तीस योग दे रहे हैं। इनमें से यदि दूसरे, चौथे, पांचवें, सप्तम, नौवें, दसवें योग बनें तो अधिक शुभता रहती है। जातक धनी, उच्चाधिकारी, मन्त्री, प्रधानमन्त्री एवं राजा सदृश जीवन जीता है। यहां तीस स्थान परिवर्तन योग की चर्चा कर रहे हैं जोकि इस प्रकार है- 1. भाग्येश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 2. लाभेश एवं धनेश का स्थान परिवर्तन योग 3. भाग्येश एवं दशमेश का स्थान परिवर्तन योग 4. चतुर्थेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 5. भाग्येश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 6. लग्नेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 7. पंचमेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 8. भाग्येश एवं पंचमेश का स्थान परिवर्तन योग 9. भाग्येश एवं लग्नेश का स्थान परिवर्तन योग 10. लग्नेश एवं धनेश का स्थान परिवर्तन योग 11. भाग्येश एवं धनेश का स्थान परिवर्तन योग 12. लग्नेश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 13. दशमेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 14. धनेश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 15. धनेश एवं पंचमेश का स्थान परिवर्तन योग 16. चतुर्थेश एवं पेचमेश का स्थान परिवर्तन योग 17. दशमेश एवं द्वितीयेश का स्थान परिवर्तन योग 18. दशमेश एवं पंचमेश का स्थान परिवर्तन योग 19. दशमेश एवं लग्नेश का स्थान परिवर्तन योग 20. दशमेश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 21. लग्नेश एवं पंचमेश का स्थान परिवर्तन योग 22. पंचमेश एवं सप्तमेश का स्थान परिवर्तन योग 23. सप्तमेश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 24. सप्तमेश एवं दशमेश का स्थान परिवर्तन योग 25. सप्तमेश एवं नवमेश का स्थान परिवर्तन योग 26. तृतीयेश एवं लग्नेश का स्थान परिवर्तन योग 27. पराक्रमेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 28. पराक्रमेश एवं षष्ठेश का स्थान परिवर्तन योग 29. षष्ठेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 30. द्वादशेश एवं अष्टमेश का स्थान परिवर्तन योग उक्त योगों को आप अपनी कुण्डली में ढूंढिए और देखिए कि कितने स्थान परिवर्तन योग आपकी कुण्डली में विद्यमान हैं। एक से अधिक हैं तो समझ लीजिए इन योगों के कारक ग्रहों की दशान्तर्दशा में आप उच्चाधिकारी बन सकते हैं। यदि इनके अतिरिक्त अन्य राजयोग भी विद्यमान हैं तो सोने में सुहागे वाली बात है। आप अवश्य उच्चाधिकारी, मन्त्री बनकर राजा सदृश जीवनयापन कर सकते हैं। ये योग अधिकारियों की कुण्डली में अवश्य होता है। योग बनाने वाले ग्रह योगकारक होते हैं, इनकी दशा आने पर ही इनका फल मिलता है। श्रीमती इन्दिरा गांधी जी की कुण्डली में तीन स्थान परिवर्तन योग थे।

महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां

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