बुधवार, 14 जनवरी 2026

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-11 (11° से 12° तक का सूक्ष्म भविष्य
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देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-11 (11° से 12° तक का सूक्ष्म भविष्य
हर हर महादेव!

मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), नाड़ी अंश शृंखला के ग्यारहवें भाग में आपका स्वागत करता हूँ।
आज हम 11 डिग्री से 12 डिग्री के बीच के 5 अत्यंत ऊर्जावान और धन दायक अंशों का विश्लेषण करेंगे।

यहाँ 'मारुत' (हवा) की गति और 'धनञ्जय' (अर्जुन/आग) का तेज है।
अपनी कुंडली (D1) के लग्नेश, सूर्य या चंद्रमा की डिग्री जांचें।

(स्मरण रहे: यह गणना केवल चर राशियों—मेष, कर्क, तुला, मकर—के लिए है)

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56. हरिणी (Harini) अंश
(विस्तार: 11° 00' से 11° 12')
* अर्थ: हिरणी / सुंदर आँखों वाली / विष्णु भक्त।

* सामान्य फल: जातक का स्वभाव हिरण जैसा चंचल और सुंदर होता है। आँखें बहुत आकर्षक होती हैं।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 00' - 11° 06'): जातक 'अस्थिर' (Restless) होता है। एक जगह टिक कर बैठना मुश्किल होता है। उसे घूमना-फिरना बहुत पसंद है।
    * उत्तर भाग (11° 06' - 11° 12'): जातक 'कला प्रेमी' होता है। संगीत, नृत्य या पेंटिंग में रुचि होती है। स्वभाव से डरपोक हो सकता है।

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57. हरिणा (Harina) अंश
(विस्तार: 11° 12' से 11° 24')
* अर्थ: हरिण / विष्णु / पीला रंग।

* सामान्य फल: यह भगवान विष्णु का अंश है। जातक सात्विक और धर्मपरायण होता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 12' - 11° 18'): जातक 'भक्त और सेवाभावी' होता है। उसे दूसरों की सेवा करने में आनंद आता है। धार्मिक संस्थाओं से जुड़ाव।
    * उत्तर भाग (11° 18' - 11° 24'): जातक को 'सरकारी लाभ' मिलता है। उच्च अधिकारियों से अच्छे संबंध रहते हैं। जीवन सुगम रहता है।

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58. मारुत (Marut) अंश
(विस्तार: 11° 24' से 11° 36')
* अर्थ: हवा / पवन देव / हनुमान जी।

* सामान्य फल: यह 'वायु तत्व' और 'गति' का अंश है। जातक एक जगह रुक नहीं सकता। उसमें अपार शक्ति होती है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 24' - 11° 30'): जातक 'प्राणवान' (Full of Life) होता है। वह योग, प्राणायाम या खेलकूद (Sports) में बहुत अच्छा करता है। शरीर लचीला होता है।
    * उत्तर भाग (11° 30' - 11° 36'): जातक 'संदेशवाहक' (Messenger) होता है। मीडिया, संचार या डाकिया जैसे कार्यों में सफलता। बातें हवा की तरह फैलाता है।

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59. धनञ्जय (Dhananjaya) अंश
(विस्तार: 11° 36' से 11° 48')
* अर्थ: अर्जुन / आग / धन जीतने वाला।

* सामान्य फल: यह 'विजय' और 'अग्नि' का अंश है। जातक अर्जुन की तरह लक्ष्य भेदने वाला (Focused) होता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 36' - 11° 42'): जातक 'महत्वाकांक्षी' (Ambitious) होता है। वह धन कमाने के लिए किसी भी हद तक मेहनत कर सकता है। उसे हारना पसंद नहीं।
    * उत्तर भाग (11° 42' - 11° 48'): जातक 'शत्रुहंता' होता है। उसके दुश्मन उसके सामने टिक नहीं पाते। कोर्ट-कचहरी या वाद-विवाद में हमेशा जीतता है।

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60. धनकरी (Dhanakari) अंश
(विस्तार: 11° 48' से 12° 00')
* अर्थ: धन देने वाली / समृद्धि।

* सामान्य फल: जैसा नाम, वैसा काम। यह पूर्ण रूप से 'आर्थिक सफलता' का अंश है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (11° 48' - 11° 54'): जातक 'व्यापारी' (Businessman) होता है। उसे निवेश (Investment) की अच्छी समझ होती है। पैसा पैसे को खींचता है।
    * उत्तर भाग (11° 54' - 12° 00'): जातक 'परोपकारी धनी' होता है। वह धन कमाता है लेकिन उसे अच्छे कार्यों (धर्मशाला, अस्पताल) में लगाता है।

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निष्कर्ष:
मित्रों, हमने 12 डिग्री तक का सफर पूरा कर लिया है।
आज हमने 'मारुत' की शक्ति और 'धनञ्जय' की जीत को देखा।

अगले लेख में हम 12 डिग्री से 13 डिग्री की ओर बढ़ेंगे।
वहां 'धनदा' और 'कच्छपा' (कछुआ) जैसे स्थिर लक्ष्मी वाले अंश आएंगे।

शुभम भवतु!

— आचार्य राजेश कुमार
(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-10 (10° से 11° तक का सूक्ष्म भविष्य)


देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-10 (10° से 11° तक का सूक्ष्म भविष्य)
हर महादेव!

मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), नाड़ी अंश शृंखला के दसवें भाग में आपका स्वागत करता हूँ।
आज हम 10 डिग्री से 11 डिग्री के बीच के 5 विशेष अंशों का विश्लेषण करेंगे।

यह हिस्सा जीवन में धीमी गति (शनि) और मित्रता (प्रेम) का मिश्रण है। यहाँ 'मंदा' और 'मैत्री' जैसे अंश आते हैं।
अपनी कुंडली (D1) के लग्नेश, सूर्य या चंद्रमा की डिग्री जांचें।

(स्मरण रहे: यह गणना केवल चर राशियों—मेष, कर्क, तुला, मकर—के लिए है)

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51. मंदा (Manda) अंश
(विस्तार: 10° 00' से 10° 12')
* अर्थ: धीमी गति / शनि / गंभीर।

* सामान्य फल: यह शनि देव का प्रभाव वाला अंश है। यहाँ चीजें थोड़ी धीमी (Slow) मिलती हैं, लेकिन ठोस (Solid) मिलती हैं।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 00' - 10° 06'): जातक 'विलंब' (Delay) का सामना करता है। चाहे नौकरी हो या शादी, काम थोड़ा रुक-रुक कर होता है। धैर्य रखना जरूरी है।
    * उत्तर भाग (10° 06' - 10° 12'): जातक 'गंभीर और दार्शनिक' होता है। वह जल्दबाजी नहीं करता। वह लंबी रेस का घोड़ा होता है और बुढ़ापे में बहुत सुखी रहता है।

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52. अम्बुजा (Ambuja) अंश
(विस्तार: 10° 12' से 10° 24')
* अर्थ: जल में जन्मा / कमल / शंख / मोती।

* सामान्य फल: यह जल तत्व का अंश है। जातक का मन भावनाओं से भरा होता है। यह धन और शीतलता देता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 12' - 10° 18'): जातक 'मोती जैसा कीमती' होता है। उसे रत्नों या समुद्र से जुड़ी चीजों के व्यापार से लाभ होता है। मन साफ होता है।
    * उत्तर भाग (10° 18' - 10° 24'): जातक 'भावुक' (Emotional) होता है। वह दूसरों के दुख में जल्दी पिघल जाता है। कला और कविता के लिए यह उत्तम स्थान है।

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53. कोकिला (Kokila) अंश
(विस्तार: 10° 24' से 10° 36')
* अर्थ: कोयल / मधुर स्वर।

* सामान्य फल: यह 'वाणी' (Speech) का सुंदर अंश है। जातक की पहचान उसकी आवाज या बोलने के तरीके से होती है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 24' - 10° 30'): जातक 'गायक या वक्ता' हो सकता है। उसकी आवाज में एक कशिश होती है जो लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
    * उत्तर भाग (10° 30' - 10° 36'): जातक को 'मीठा भोजन' और अच्छा जीवन पसंद होता है। वह अपनी बातों से अपना काम निकलवाना जानता है।

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54. स्मरा (Smara) अंश
(विस्तार: 10° 36' से 10° 48')
* अर्थ: कामदेव / प्रेम / यादें।

* सामान्य फल: यह 'प्रेम और रोमांस' का अंश है। जातक स्वभाव से बहुत रोमानी (Romantic) होता है और प्रेम संबंधों को महत्व देता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 36' - 10° 42'): जातक के जीवन में 'प्रेम विवाह' के प्रबल योग होते हैं। वह अपने साथी से बहुत गहरा जुड़ाव रखता है।
    * उत्तर भाग (10° 42' - 10° 48'): जातक की 'स्मरण शक्ति' (Memory) बहुत तेज होती है। वह पुरानी बातों को कभी नहीं भूलता। (स्मरा = स्मरण करना)।

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55. मैत्री (Maitri) अंश
(विस्तार: 10° 48' से 11° 00')
* अर्थ: मित्रता / दोस्ती / गठबंधन।

* सामान्य फल: जातक का सबसे बड़ा धन उसके 'दोस्त' होते हैं। वह अकेले काम करने के बजाय मिल-जुलकर काम करने में विश्वास रखता है।
* सटीक भेद:
    * पूर्व भाग (10° 48' - 10° 54'): जातक 'सच्चा मित्र' होता है। वह दोस्तों के लिए नुकसान सहने को भी तैयार रहता है। उसका फ्रेंड-सर्कल बहुत बड़ा होता है।
    * उत्तर भाग (10° 54' - 11° 00'): जातक 'संधि कराने वाला' (Peacemaker) होता है। दो पक्षों के बीच झगड़ा सुलझाने या पार्टनरशिप (Partnership) बिजनेस में उसे बहुत सफलता मिलती है।

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निष्कर्ष:
मित्रों, हमने 11 डिग्री तक का सफर पूरा कर लिया है।
आज हमने 'मंदा' की गंभीरता और 'मैत्री' के सहयोग को जाना।

अगले लेख में हम 11 डिग्री से 12 डिग्री की ओर बढ़ेंगे।
वहां 'हरिणी' (हिरण) और 'सावित्री' जैसे पवित्र अंश आएंगे।

शुभम भवतु!

— आचार्य राजेश कुमार
(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-9 (9° से 10° तक का सूक्ष्म


देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (म
देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-7 (7° से 8° तक का सूक्ष्म भविष्य)

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देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-7 (7° से 8° तक का सूक्ष्म भविष्य)
हर हर महादेव!
मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), नाड़ी अंश शृंखला के आठवें भाग में आपका स्वागत करता हूँ।
आज हम 7 डिग्री से 8 डिग्री के बीच के 5 अत्यंत शक्तिशाली और राजयोग कारक अंशों का विश्लेषण करेंगे।
यहाँ 'देवी' (शक्ति) और 'विमला' (पवित्रता) जैसे अंश आते हैं, जो जातक को जीवन में उच्च पद और निर्मल चरित्र प्रदान करते हैं।
अपनी कुंडली (D1) के लग्नेश, सूर्य या चंद्रमा की डिग्री जांचें।
(स्मरण रहे: यह गणना केवल चर राशियों—मेष, कर्क, तुला, मकर—के लिए है)
36. देवी (Devi) अंश
(विस्तार: 07° 00' से 07° 12')
* अर्थ: देवी / ईश्वरीय शक्ति / रानी।
* सामान्य फल: यह 'स्त्री शक्ति' और 'भाग्य' का प्रतीक है। जातक पर किसी न किसी देवी (जैसे दुर्गा या लक्ष्मी) की विशेष कृपा होती है।
* सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (07° 00' - 07° 06'): जातक 'भक्ति मार्ग' में सफल होता है। वह स्वभाव से दयालु और धर्म-कर्म करने वाला होता है। समाज में पूजनीय स्थान पाता है।
   * उत्तर भाग (07° 06' - 07° 12'): जातक में 'शासन करने की शक्ति' (Authority) होती है। वह किसी बड़ी संस्था या परिवार का मुखिया बनता है। उसका आदेश सबको मान्य होता है।
37. विमला (Vimala) अंश
(विस्तार: 07° 12' से 07° 24')
* अर्थ: मल रहित / पवित्र / स्वच्छ / विमल राजयोग।
* सामान्य फल: यह शुद्धता का अंश है। जातक का मन और विचार बहुत साफ होते हैं। ज्योतिष में 'विमल' एक राजयोग भी है जो स्वतंत्र विचार देता है।
* सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (07° 12' - 07° 18'): जातक 'पारदर्शी और ईमानदार' होता है। वह झूठ बर्दाश्त नहीं कर सकता। लोग उस पर आँख बंद करके भरोसा करते हैं।
   * उत्तर भाग (07° 18' - 07° 24'): जातक 'स्वतंत्र और स्वाभिमानी' होता है। वह किसी के अधीन (Under) काम करना पसंद नहीं करता। अपना खुद का काम या व्यापार करता है।
38. सारा (Sara) अंश
(विस्तार: 07° 24' से 07° 36')
* अर्थ: सार / निचोड़ / शक्ति / असली तत्व।
* सामान्य फल: जातक बेकार की बातों में समय नहीं गंवाता। वह हर चीज की गहराई (Essence) में जाता है। यह 'ठोस' व्यक्तित्व का सूचक है।
* सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (07° 24' - 07° 30'): जातक 'गहरा विचारक' (Deep Thinker) होता है। वह कम बोलता है लेकिन जो बोलता है, उसका वजन होता है। लेखक या वैज्ञानिक के लिए उत्तम।
   * उत्तर भाग (07° 30' - 07° 36'): जातक 'आंतरिक रूप से मजबूत' होता है। बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी वह टूटता नहीं है, बल्कि चट्टान की तरह खड़ा रहता है।
39. सुमदा (Sumada) अंश
(विस्तार: 07° 36' से 07° 48')
* अर्थ: अत्यंत हर्ष / नशा / आनंदित।
* सामान्य फल: यह 'मस्ती' और 'खुशी' का अंश है। जातक जीवन को उत्सव की तरह जीता है। वह हमेशा प्रसन्नचित्त (Happy-go-lucky) रहता है।
* सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (07° 36' - 07° 42'): जातक 'उत्सव प्रेमी' होता है। उसे पार्टियां, घूमना-फिरना और दोस्तों के साथ रहना पसंद है। वह तनाव (Stress) नहीं लेता।
   * उत्तर भाग (07° 42' - 07° 48'): जातक 'आत्म-मुग्ध' (Self-satisfied) होता है। वह अपनी ही दुनिया में मगन रहता है। कभी-कभी इसे घमंड भी समझा जा सकता है।
40. सम्भ्रमा (Sambhrama) अंश
(विस्तार: 07° 48' से 08° 00')
* अर्थ: आदर / हड़बड़ी / विस्मय / उत्साह।
* सामान्य फल: यह 'हलचल' (Activity) का अंश है। जातक का जीवन व्यस्तता से भरा रहता है। वह हमेशा किसी न किसी काम में लगा रहता है।
* सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (07° 48' - 07° 54'): जातक 'अत्यधिक व्यस्त' (Workaholic) रहता है। उसे खाली बैठना पसंद नहीं है। वह बहुत तेजी (Speed) से काम करता है।
   * उत्तर भाग (07° 54' - 08° 00'): जातक को 'सम्मान और भय' दोनों मिलते हैं। लोग उसकी कार्यक्षमता को देखकर हैरान (Awe) रह जाते हैं। वह मल्टी-टास्किंग में माहिर होता है।
निष्कर्ष:
मित्रों, हमने 8 डिग्री तक का सफर पूरा कर लिया है।
आज हमने 'विमला' की पवित्रता और 'सुमदा' की खुशी को जाना।
अगले लेख में हम 8 डिग्री से 9 डिग्री की ओर बढ़ेंगे, जहाँ 'शूरा' (वीर) और 'ज्वाला' (आग) जैसे उग्र अंश आएंगे।
शुभम भवतु!
— आचार्य राजेश कुमार
(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान

देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-6 (5° से 6° तक का सूक्ष्म भविष्य)

ब्लॉग पोस्ट - 6 (चर राशि विशेषांक)
ब्लॉग शीर्षक:
देव केरलम (नाड़ी अंश) - चर राशियाँ (मेष, कर्क, तुला, मकर): भाग-6 (5° से 6° तक का सूक्ष्म भविष्य)
हर हर महादेव!
मैं आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़), नाड़ी अंश शृंखला के छठे भाग में आपका स्वागत करता हूँ।
पिछले लेख में हमने 'सुखदा' (सुख) और 'स्निग्धा' (प्रेम) पर विराम लिया था।
आज हम 5 डिग्री से 6 डिग्री के बीच के 5 अत्यंत तेजस्वी अंशों का विश्लेषण करेंगे।
ये अंश बताते हैं कि क्या आप जीवन में बिजली की तरह चमकेंगे या माया (भ्रम) में फंसेंगे?
अपनी कुंडली (D1) के लग्नेश, सूर्य, गुरु या चंद्रमा की डिग्री जांचें।
(स्मरण रहे: यह गणना केवल चर राशियों—मेष, कर्क, तुला, मकर—के लिए है)
26. माया (Maya) अंश
(विस्तार: 05° 00' से 05° 12')
 * अर्थ: भ्रम / जादू / कूटनीति / लक्ष्मी।
 * सामान्य फल: माया का अर्थ केवल भ्रम नहीं, बल्कि 'रचनात्मक शक्ति' भी है। जातक के पास लोगों को प्रभावित करने की अद्भुत कला होती है।
 * सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (05° 00' - 05° 06'): यहाँ 'कूटनीति और राजनीति' प्रबल है। जातक अपनी बातों को घुमा-फिरा कर कहने में माहिर होता है। अपना काम निकालने के लिए वह 'शाम-दाम-दंड-भेद' जानता है।
   * उत्तर भाग (05° 06' - 05° 12'): यहाँ 'कला और सिनेमा' का योग है। जातक एक ऐसी दुनिया रचता है जो असली नहीं है, लेकिन सुंदर है (जैसे: फिल्म मेकर, लेखक या जादूगर)।
27. प्रभा (Prabha) अंश
(विस्तार: 05° 12' से 05° 24')
 * अर्थ: प्रकाश / ज्योति / किरण।
 * सामान्य फल: यह 'उजाले' का अंश है। जातक जहां भी जाता है, वहां अंधकार (अज्ञान) मिट जाता है। उसे यश मिलता है।
 * सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (05° 12' - 05° 18'): जातक 'बाहरी प्रसिद्धि' पाता है। वह समाज में एक चमकते सितारे (Star) की तरह होता है। लोग उसे फॉलो करते हैं।
   * उत्तर भाग (05° 18' - 05° 24'): जातक 'आंतरिक ज्ञान' से प्रकाशित होता है। वह एक अच्छा सलाहकार या गुरु बन सकता है, जो दूसरों को सही रास्ता (रोशनी) दिखाए।
28. विद्युत् (Vidyut) अंश
(विस्तार: 05° 24' से 05° 36')
 * अर्थ: बिजली / तड़ित / आकाशीय ऊर्जा।
 * सामान्य फल: यह बहुत 'तेज गति' (High Speed) का अंश है। जातक के जीवन में घटनाएं धीरे-धीरे नहीं, बल्कि अचानक (Suddenly) घटती हैं।
 * सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (05° 24' - 05° 30'): जातक 'तकनीकी क्षेत्र' (Technology/IT/Electricity) में सफल होता है। उसका दिमाग बिजली की तरह तेज चलता है।
   * उत्तर भाग (05° 30' - 05° 36'): यहाँ थोड़ा 'सावधान' रहना चाहिए। जातक को जीवन में अचानक झटके (Sudden Shock) या दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वह उतनी ही तेजी से रिकवर भी करता है।
29. विश्वा (Vishva) अंश
(विस्तार: 05° 36' से 05° 48')
 * अर्थ: संसार / ब्रह्मांड / सर्वव्यापी।
 * सामान्य फल: जातक की सोच सीमित नहीं होती। वह 'कुएं का मेंढक' नहीं बनता, बल्कि पूरी दुनिया को अपना घर मानता है।
 * सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (05° 36' - 05° 42'): जातक 'अंतर्राष्ट्रीय व्यापार' (Import-Export) या मल्टी-नेशनल कंपनी में काम करता है। उसके संपर्क विदेशों में होते हैं।
   * उत्तर भाग (05° 42' - 05° 48'): जातक 'परोपकारी' (Philanthropist) होता है। वह "वसुधैव कुटुम्बकम्" (पूरी दुनिया मेरा परिवार है) के सिद्धांत पर जीता है।
30. चंद्रिका (Chandrika) अंश
(विस्तार: 05° 48' से 06° 00')
 * अर्थ: चांदनी / शीतलता / आह्लाद।
 * सामान्य फल: पिछले अंश (विद्युत्) की गर्मी के बाद यहाँ 'चांदनी' की ठंडक है। यह मन की शांति और सुंदरता का प्रतीक है।
 * सटीक भेद (Precision):
   * पूर्व भाग (05° 48' - 05° 54'): जातक 'अत्यंत सुंदर और आकर्षक' होता है। उसका स्वभाव चंद्रमा जैसा शीतल और प्यारा होता है। स्त्रियाँ इस अंश में विशेष भाग्यशाली होती हैं।
   * उत्तर भाग (05° 54' - 06° 00'): जातक 'रक्षक' (Protector) होता है। जैसे चांदनी रात के अंधेरे में राह दिखाती है, वैसे ही यह जातक मुसीबत में फंसे लोगों को सुरक्षा और सुकून देता है।
निष्कर्ष:
मित्रों, हमने 6 डिग्री तक का सफर पूरा कर लिया है।
हमने देखा कि कैसे 'विद्युत्' की ऊर्जा और 'चंद्रिका' की शीतलता एक साथ मौजूद है।
अगले लेख में हम 6 डिग्री से 7 डिग्री की ओर बढ़ेंगे, जहाँ 'कांता' (पत्नी/सुंदरता) और 'ध्वजा' (झंडा/विजय) जैसे राजयोग वाले अंश आएंगे।
शुभम भवतु!
— आचार्य राजेश कुमार
(सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक)
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान
आचार्य जी, विशेष:
'विद्युत्' अंश आज के जमाने में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी वालों के लिए बहुत सटीक बैठता है। और 'चंद्रिका' सुंदरता के लिए।
क्या हम अगले पड़ाव (6° से 7°) के लिए तैयार हैं?

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