शनिवार, 3 दिसंबर 2016

सच्चा गुरु कौनृ[03/12 11:27 am] Acharya rajesh: ज्ञान से त्याग उत्पन्न होता है लेकिन किस चीज़ का और कितना त्याग ? हरेक गुरू ने अलग अलग चीज़ों का त्याग करना बताया और उनका स्तर भी अलग अलग ही बताया। इनमें से किसने ठीक बताया है ?, यह भी एक प्रश्न है। जितने लोगों को आज गुरू माना जाता है। वे ख़ुद जीवन भर दुखी रहे और जिसने भी उनके रास्ते पर चलने की कोशिश की उस पर भी दुख का पहाड़ टूट पड़ा। बुरे लोगों ने गुरू और उनके शिष्यों को ख़ूब सताया। बुरे लोगों ने गुरूओं और उनके शिष्यों के प्राण तक लिए हैं। अच्छे लोगों ने संसार का त्याग किया तो बुरे लोगों ने संसार पर राज्य किया। इस तरह संसार का त्याग करने वाले बुरे लोगों के रास्ते से ख़ुद ही हट गए और बुरे लोगों ने समाज का डटकर शोषण किया। संसार का त्याग करने से न तो अपना दुख नष्ट हुआ और न ही समाज का। यह और बात है कि किसी ने अपने अहसास को ही ख़त्म कर लिया हो। उसकी बेटी विधवा हुई हो तो वह रोया न हो। उसने अपनी बेटी के दुख को अपने अंदर महसूस ही न किया हो कि उसकी बेटी पर क्या दुख गुज़रा है ? उसके घर में कोई जन्मा हो तो वह ख़ुश न हुआ हो। उसके घर में कोई मर भी जाए तो वह दुखी न होगा। उसका मन संवेदना जो खो चुका है। वह अपने मन में ख़ुशी और दुख के हरेक अहसास को महसूस करना बंद कर चुका है। उसमें और एक पत्थर में कोई फ़र्क़ नहीं बचा है। अब वह एक चलते फिरते पत्थर में बदल चुका है। ऐसे लोग परिवार छोड़ कर चले जाते हैं या परिवार में रहते भी हैं तो उनकी मनोदशा असामान्य बनी रहती है। जब तक हमारी खाल तंदरूस्त है, वह ठंडक और गर्मी को महसूस करती है। उसके ऐसा करने से हमें दुख अनुभव होता है। वह ऐसा करना बंद कर दे। हममें से यह कोई भी न चाहेगा क्योंकि इसका मतलब है रोगी हो जाना लेकिन दिल को सुख दुख का अहसास बंद हो जाए, इसके लिए लोगों ने ज़बर्दस्त साधनाएं कीं। जो विफल रहे वे तो नाकाम ही रहे और जिनकी साधना सफल हुई, वे उनसे भी ज़्यादा नाकाम रहे। उनके दिल से सुख दुख का अहसास जाता रहा।सुख दुख का अहसास है तो आप चंगे हैं। दुख मिटाने की कोशिश में आपका दिल संवेदना खो देगा। तब आप न ख़ुशी में ख़ुश होंगे और न दुख में दुखी होंगे। आप समझेंगे कि मुझे ‘सम‘ अवस्था प्राप्त हो गई है लेकिन हक़ीक़त में मानवीय संवेदना की स्थिति जो आपको प्राप्त थी, आपने उसे खो दिया है इच्छा, कामना, तृष्णा और संबंध दुख देते हैं तो दें इन्हें छोड़कर दुख से मुक्ति मिलती है तो उस मुक्ति का अचार डालना है क्या हम किसी के उपयोग के न बचें, जगत की किसी वस्तु का हम उपयोग न करें और अगर करें तो उसमें लिप्त न हों इस सबका लाभ क्या है ? दुख से मुक्ति वह संभव नहीं है कोई बुरा आदमी हमें न भी सताए, तब भी औरत बच्चे को जन्म देगी तो उसे दुख अवश्य होगा दुख हमेशा हमारे कर्म में लिप्त होने से ही उत्पन्न नहीं होता दुख हमारे जीवन का अंग है। परमेश्वर ने हमारे जीवन को ऐसा ही डिज़ायन किया है परमेश्वर ने हमारे जीवन को ऐसा क्यों बनाया है परमेश्वर हमें न बताए तो हम इस सत्य को जान नहीं सकते। जीवन के सत्य को जानने के लिए हमें परमेश्वर की ज़रूरत है क्योंकि सत्य का ज्ञान केवल उसी सर्वज्ञ को है। मनुष्य का गुरू वास्तव में सदा से वही है सच्चा गुरू वह है जो जीने की राह दिखाता है सच्चा गुरू आपको इसी समाज में जीन सिखाएगा। वह आपको पत्नी और परिवार के प्रति संबंधों का निर्वाह सिखाएगा परिवार को छोड़कर भागना वह न सिखाएगा सन्यास को वह वर्जित बताएगा। वह आपको जज़्बात में जीना सिखाएगा। वह आपके दिल की सेहत को और बढ़ाएगा। वह सुख और दुख को महसूस करना और उस पर सही प्रतिक्रिया देना सिखाएगा वह आपको काम, क्रोध, लोभ, मोह को छोड़ने के लिए नहीं कहेगा। वह इनका सकारात्मक उपयोग सिखाएगा। ज़हर का इस्तेमाल दवा के रूप में भी होता है। वह हमें अपने दुखों की चिंता छोड़कर दूसरों के दुख में काम आना सिखाएगा वह अपनी वाणी में यह सब विस्तार से बताएगा। अपनी वाणी के साथ वह उसके अनुसार व्यवहार करने वाले एक मनुष्य को भी लोगों का आदर्श बनाएगा ताकि लोग जान लें कि क्या करना है और कैसे करना है ? परमेश्वर अपने ज्ञान के कारण स्वयं गुरू है और आदर्श मनुष्य उसके ज्ञान के कारण और उसके द्वारा चुने जाने के कारण गुरू है। लोग ईश्वर की वाणी को भी परख सकते हैं और उसके द्वारा घोषित आदर्श व्यक्ति को भी। परमेश्वर के कर्म भी हमारे सामने हैं और आदर्श मनष्य के कर्म भी। प्रकृति ओर इतिहास दोनों हमारे सामने हैं। सच्चे गुरू को पाना बहुत आसान है लेकिन उसके लिए पक्षपात और पूर्वाग्रह छोड़ना पड़ेगा दुनिया में जितने लोगों ने मनुष्य को जीवन का मक़सद और उसे पाने का तरीक़ा बताया है। आप उन सबके कामों पर नज़र डालिए और देखिए कि वे ख़ुद समाज के कमज़ोर और दुखी लोगों के दुख में काम कैसे आए और कितना आए . और उन्होंने एक इंसान को दूसरे इंसान के काम आने के लिए क्या सिखाया और उन्होंने अपने बीवी-बच्चों की देखभाल का हक़ कैसे अदा किया [03/12 11:39 am] Acharya rajesh: उनमें से जिसने यह काम सबसे बेहतर तरीक़े से किया होगा, उसने अपने अनुयायियों का साथ एक दोस्त की तरह ही दिया होगा और उनके भीतर छिपी समझ को भी उन्होंने जगाया होगा और तब उनके दिल की गहराईयों में जो घटित हुआ होगा, उसे बेशक आत्मबोध कहा जा सकता है। आत्मबोध से आपको अपने कर्तव्यों का बोध होगा और उन्हें करने की भरपूर ऊर्जा मिलेगी। उन कर्तव्यों के पूरा होने से आपके परिवार और समाज का भला होगा। किसी के कर्म देखकर ही उसके मन की गहराईयों के विचारों को जाना जा सकता है कि उसके मन में सचमुच ही ‘आत्मबोध‘ घट चुका है। इसी के बाद आदमी को ज्ञान होता है कि किस चीज़ को कितना और कैसे त्यागना है और क्यों त्यागना है ? और किस चीज़ को कितना और कैसे भोगना है और क्यों भोगना है ? जगत का उपभोग यही कर पाते हैं और यह जगत बना भी इसीलिए है दुनियावी जीवन को सार्थक करने वाले यही लोग हैं यही लोग सीधे रास्ते पर हैं और यही लोग सफलता पाने वाले हैं

आने वाले 2017नूतन वर्ष के इस सुप्रभातकारी आगमन की सुमधुर वेला में 'स्वास्थ्य-सुख' परिवार की ओर से अपने सभी पाठकों, समर्थकों, व मित्रो सहित सभी परिचित-अपरिचित साथियों को इस नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.... परम-पिता परमेश्वर से कामना है कि आप सहित आपके परिजनों व मित्रों के जीवन में नई उमंगें, व खुशियों के आगमन सहित उनकी सभी कामनाएँ आगामी 365 दिनों के इस कालखंड में सम्पूर्णता को प्राप्त हों. नववर्ष मुबारक

सोमवार, 28 नवंबर 2016

सच्चा सुलेमिनी पत्थर भी नजर पुराने जमाने मे राजा महाराजा अपने अपने अनुसार सुलेमान की चीजो का प्रयोग करना जानते थे,सुलेमान के पत्थर सुलेमान की खासियत है,कारण सुलेमान की जमीन ही पुराने जमाने के पीर फ़कीरो की साधना जमीन रही है,बडे बडे जिन्नात वाले साधन सुलेमान से ही प्राप्त होते है। सुलेमानी तलवार के बारे मे खूब किस्से कहानी मिलते है,वह तलवार किसी भी शैतानी ताकत को काटने की हिम्मत रखती थी। खैर अब तीर तलवार का जमाना चला गया है लेकिन सुलेमान का तरासा हुआ पत्थर जो खास किस्म का होता है,आज भी नजर दोष पति पत्नी की अनबन दुकान घर मे लगी नजर आदि के काम आता है। जो लोग शमशानी स्थानो के आसपास रहते है या जो महिलाये अधिकतर पर्दे मे रहती है,या जो लोग किसी न किसी कारण से मशहूर हो गये होते है,उन लोगो के लिये शैतानी आंख अनदेखे हथियार की तरह से मारने के काम आती है,महिलाओ मे सिरदर्द की बीमारी हो जाना,उल्टी आदि होने लगना,अनाप सनाप बकने लगना,किसी को कुछ भी कहने लग जाना,अगर बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाये है तो उनके दूध का अचानक सूखने लग जाना,भूख नही लगना,हमेशा बुरे बुरे ख्याल आते रहना,कामुकता का अधिक पैदा हो जाना,जननांग को खुजलाने की आदत लग जाना,योनि का हमेशा गीला रहना,बाथरूम मे अधिक समय का लगना,बाल खुल्ले रखने की आदत बन जाना,किसी न किसी अंग का लगातार फ़डकते रहना,अचानक रोने का मन करना,कभी अचानक बिना बात के ही हंसी आजाना,किसी के गिरने पडने पर मजा आना,ऊंचे स्थान पर जाने के बाद नीचे कूद जाने का मन करना,खतरे से खेलने के लिये मन मे उतावलापन होना,अपने ही रखवालो को अपने से दूर करने के लिये कठोर बात करने लग जाना,लडने झगडने की आदत बन जाना,भोजन मे अधिक खटाई का प्रयोग करने लग जाना,छाछ आदि की पीने की इच्छा रखना,घर की महिलाओ से अकारण ही बैर भाव पाल लेना,अपनी सन्तान का ख्याल नही रखना,दूसरो की बातो मे समय को निकालना,नाखून चबाते रहना आदि बाते देखने को मिलती है। इसी प्रकार से दुकानदारी के चलते चलते अचानक बन्द हो जाना,ग्राहक का आना लेकिन कुछ समय बाद उसका मन बदल जाना और बिना कुछ खरीदे वापस चले जाना,खुद की दुकान से सस्ता सामान नही खरीदना अगल बगल वाली दुकान से महंगा सामान खरीद कर ले जाना,दुकान के सामने किसी न किसी प्रकार से गंदगी का होना,कुत्तो का अधिक आना जाना लग जाना,दुकान या व्यवसाय स्थान के गेट पर कुत्तो का पेशाब करने लग जाना,वाहन पर कुत्तों का पेशाब करने लग जाना,घर के अन्दर काली बिल्ली का रात को आना,छत पर बिल्लिया आपस में लडने लग जाना,अचानक बुखार का आना और अचानक ही उतर भी जाना,किसी अच्छे काम को शुरु करते ही किसी न किसी प्रकार की बाधा का आजाना कुछ नही तो टेलीफ़ोन का ही बजने लग जाना और जब तक उसे उठाओ बन्द हो जाना,गलत नम्बर का बार बार आना,किसी महत्वपूर्ण बात को करने के समय किसी बेकार के व्यक्ति का आजाना और बात का पूरा नही हो पाना,किसी बडे सौदे के समय मे या तो अधिकारी का नही आना या खुद के परिवार की कोई दिक्कत का पैदा हो जाना,सोने वाले बिस्तर पर लाल या काली चींटियों का घूमने लग जाना,ओढने बिछाने वाले कपडो मे अजीब सी बदबू का आना शुरु हो जाना,त्वचा मे बिना किसी कारण के खुजलाहट होने लगना आदि बाते देखने को मिलती है तो सुलेमानी पत्थर को पहिनने से इनमे आराम मिलने लगता है। अक्सर यह भी देखा जाता है कि इस पत्थर को पहिन कर अगर कोई शमशान कब्रिस्तान या मौत वाले स्थान पर जाता है तो यह पत्थर अपनी शक्तियों से विहीन हो जाता है और बेकार हो जाता है,कारण ऐसे स्थानो पर शैतानी आत्मायें अधिक होती है और इस पत्थर मे उतनी ही ताकत होती है जितनी व्यक्ति के द्वारा इसे शक्तिवान किया जाता है। इस पत्थर के पहिनने से रात को खराब स्वप्न भी नही आते है आराम की नींद आती है भूख भी लगने लगती है। इसे काले रंग के धागे मे पहिना जाता है और बहुत ही संभाल कर रखा जाता है,कारण जब बुरी आत्माओं को परेशान करना होता है तो वे इस पत्थर को दूर करने के लिये दिमाग पैदा करने लगती है.

रविवार, 27 नवंबर 2016

क्या नजर दोष होता है अगर है तो क्या है उपाय शैतान की आंख का प्रयोग अक्सर एक ऐसी बीमारी के लिये किया जाता है जिसके अन्दर किसी भी दवा उपाय डाक्टर समझदार व्यक्ति समझने मे असमर्थ हो जाते है इस के लिये जो दुर्भावना रखता है,जलन रखता है और किसी प्रकार से आगे नही बढने देता है,आदि कारणों से युक्त व्यक्ति से नजर लगना कहा जाता है,इसे नजर-दोष भी कहा जाता है,हर्ब्यू के शब्दों में ’अयन हारा’ जिसके अन्दर यद्धिश लोग अयन-होरो,अयन होरा या अयन हारा भी कहते है,इटली मे इसे ’मालओसियो’ और स्पेन मे ’माल ओजो’ या ’एल ओजो’ के नाम से जाना जाता है,सिसली लोग ’जैट्टोर जिसका शाब्दिक अर्थ आंख के द्वारा प्रोजेक्सन करना,माना जाता है,फ़ारसी लोग ’ब्लाबन्द’यानी शैतान की आंख कहते है। शैतान की आंख उस व्यक्ति के लिये भी मानी जाती है जो किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचाने वाला या किसी भी प्रकार से जलन या दुर्भावना नही रखता है उसके पास भी हो सकती है,और उसके द्वारा भी आपके बच्चे को,आपको,आपके पास रखे किसी वस्तु विशेष के भन्डार को,आपके पास रखे फ़लों को,आपके फ़लवाले वृक्षों को आपके दूध देने वाले पशुओं को,आपकी सुन्दरता को आपके व्यवसाय को,आपके प्राप्त होने वाले धन के स्तोत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। और यह सब केवल उस व्यक्ति के द्वारा देखने और उसके द्वारा किसी भी प्रकार के लालच करने से हो सकता है। अक्सर इस प्रकार का असर उन लोगों के द्वारा भी होता है जो ओवर-लुकिन्ग की मान्यता को रखते हैं उनके द्वारा उनकी आंखों से अधिकतम अनुमान लगाने किसी वस्तु,मकान,इन्सान आदि को आंखों से ही नापने और उसकी क्षमता का अनुमान लगाने से भी प्रभाव पडता है इस बीमारी को देने वाले व्यक्ति अगर किसी प्रकार से खाना खाते वक्त पास में हों,तो उनके देखते ही हाथ का ग्रास नीचे गिर जाता है किसी मकान की सुन्दरता को वे अपनी नजर से परख लें तो मकान मे दरार आना,या मकान का गिर जाना भी सम्भव होता है,अधिकतर असर छोटे बच्चों पर अधिक होता है नजर या शैतान की आंख को खराब ही माना जाता है और यह जलन रखने वाले और सही किसी भी प्रकार के व्यक्ति के पास हो सकती है इसका कारण एक और माना जाता है कि जो बच्चे किसी प्रकार से बचपन में अपना ही मल खा जाते है उनकी आंख भी शैतान की आंख का काम करती हैआगे जारी

क्या नजर दोष होता है अगर है तो क्या है उपाय शैतान की आंख का प्रयोग अक्सर एक ऐसी बीमारी के लिये किया जाता है जिसके अन्दर किसी भी दवा उपाय डाक्टर समझदार व्यक्ति समझने मे असमर्थ हो जाते है इस के लिये जो दुर्भावना रखता है,जलन रखता है और किसी प्रकार से आगे नही बढने देता है,आदि कारणों से युक्त व्यक्ति से नजर लगना कहा जाता है,इसे नजर-दोष भी कहा जाता है,हर्ब्यू के शब्दों में ’अयन हारा’ जिसके अन्दर यद्धिश लोग अयन-होरो,अयन होरा या अयन हारा भी कहते है,इटली मे इसे ’मालओसियो’ और स्पेन मे ’माल ओजो’ या ’एल ओजो’ के नाम से जाना जाता है,सिसली लोग ’जैट्टोर जिसका शाब्दिक अर्थ आंख के द्वारा प्रोजेक्सन करना,माना जाता है,फ़ारसी लोग ’ब्लाबन्द’यानी शैतान की आंख कहते है। शैतान की आंख उस व्यक्ति के लिये भी मानी जाती है जो किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचाने वाला या किसी भी प्रकार से जलन या दुर्भावना नही रखता है उसके पास भी हो सकती है,और उसके द्वारा भी आपके बच्चे को,आपको,आपके पास रखे किसी वस्तु विशेष के भन्डार को,आपके पास रखे फ़लों को,आपके फ़लवाले वृक्षों को आपके दूध देने वाले पशुओं को,आपकी सुन्दरता को आपके व्यवसाय को,आपके प्राप्त होने वाले धन के स्तोत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। और यह सब केवल उस व्यक्ति के द्वारा देखने और उसके द्वारा किसी भी प्रकार के लालच करने से हो सकता है। अक्सर इस प्रकार का असर उन लोगों के द्वारा भी होता है जो ओवर-लुकिन्ग की मान्यता को रखते हैं उनके द्वारा उनकी आंखों से अधिकतम अनुमान लगाने किसी वस्तु,मकान,इन्सान आदि को आंखों से ही नापने और उसकी क्षमता का अनुमान लगाने से भी प्रभाव पडता है इस बीमारी को देने वाले व्यक्ति अगर किसी प्रकार से खाना खाते वक्त पास में हों,तो उनके देखते ही हाथ का ग्रास नीचे गिर जाता है किसी मकान की सुन्दरता को वे अपनी नजर से परख लें तो मकान मे दरार आना,या मकान का गिर जाना भी सम्भव होता है,अधिकतर असर छोटे बच्चों पर अधिक होता है नजर या शैतान की आंख को खराब ही माना जाता है और यह जलन रखने वाले और सही किसी भी प्रकार के व्यक्ति के पास हो सकती है इसका कारण एक और माना जाता है कि जो बच्चे किसी प्रकार से बचपन में अपना ही मल खा जाते है उनकी आंख भी शैतान की आंख का काम करती हैआगे जारी

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

नाडी ज्योतिष में दशायें नाडी ज्योतिष के अनुसार जो दशायें सामने आती है वे इस प्रकार से मानी जाती हैं:- पहली दशा जन्म दशा कहलाती है. दूसरी दशा सम्पत्ति की दशा कहलाती है. तीसरी दशा विपत्ति की दशा होते है. चौथी दशा कुशल क्षेम की दशा होती है. पांचवी दशा शरीर या परिवार से पृथक होने की दशा होती है. छठी दशा शरीर या मन को साधने की दशा कही जाती है. सातवीं दशा में मृत्यु योग को अन्य के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है. आठवीं दशा में जो कारक मृत्यु योग प्रस्तुत करना चाहते वे मित्रता करते हैं. नौवीं दशा परममित्र की दशा होती है,जिसके अन्दर मनसा वाचा कर्मणा सभी मित्र होते है.

संसार में प्रथम तो वैराग्य होना कठिन है। यदि वैराग्य हो भी गया तो कर्मकाण्ड का छूटना कठिन है। यदि कर्मकाण्ड से छुटकारा मिल गया तो काम क्रोधादि से छूटकर दैवी सम्पत्ति प्राप्त करना कठिन है। यदि दैवी संपत्ति भी आ गई तो भी सदगुरु मिलना कठिन है। यदि सदगुरु भी मिल जाय तो भी उनके वाक्य में श्रद्धा होकर ज्ञान होना कठिन है। और यदि ज्ञान भी हो जाय तो भी चित्त- वृत्ति का स्थिर रहना कठिन है। यह स्थिति तो केवल भगवत्कृपा से ही होती है, इसका कोई अन्य साधन नही है

अकेला ऐक गृह कुछ नही कर सकता हा दशा अन्तरदशा गृहवल नछत्तर दृष्टि चन्द्र लगन ओर वाकी chart ओर वहुँत से विन्दु है जिससे सटीक फलकथन किया जाना चाहिऐ आजकल ज्योतिष का वेङा गर्क हो गया है जेसे फला गृह लग्न मे तो याह फल दुसरे भाव मे तो ह यह फल अगर तुला लगन वाले ऐसे होते है मेष वाले ऐसे होते है या आज कन्या राशीवाले यह करे घनु राशी का यह फल क्या यह ज्योतिष है सव को पता है की यह गलत है फिर भी सवी चुप है

सोमवार, 21 नवंबर 2016

मित्रो वक्री ग्रह हो को लेकर पहले भी काफी पोस्ट fb पर post कर चुका हु वक्री ग्रह सदा हानी या वुरा नहीं करते वह कभी-कभी बहुत शुभ फल भी जातक को देते है खास स्थान में वक्री ग्रह जातक को उच्च शिखर पर पहुंचाने में अत्यंत सहायक होते हैं ऐसी स्थिति में जातक को धन, यश व अच्छी सेहत की प्राप्ति होती है किसी के जन्म में यदि कोई ग्रह वक्री होता है और जीवन में वह वक्री ग्रह जब गोचर में आता है, तो बहुत शुभ फल देता है। खास बात यह है कि सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते मंगल : यह ग्रह यदि वक्री है तो व्यक्ति शीघ्र क्रोधी तथा उत्तेजित होने वाला हो सकता है जब मंगल का वक्रत्व समाप्त होता है, तभी उसके सभी कार्य पूर्ण होना माना जा सकता है वक्री मंगल वाले व्यक्ति प्राय: डॉक्टर, वैज्ञानिक या रहस्यमयी विधाओं के ज्ञाता देखे गऐ है वाकी योग भी कुंङली मे हो तो वैसे वक्री मंगल वाले मजदूर कार्यस्थल पर काम के बजाय हड़ताल पर रहना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे जातक अधिकतर कामचोर होते हैंपुरा फल कथन पुरी कुंङली पर ही देखा जाता है यह सिर्फ जनरल जानकारी है हर ग्रह के लिऐ ऐसा ही माने क्योकि कोई भी ऐक ऐकल ग्रह से फल संभव नही बुध : जिनकी जन्मकुंडली में बुध वक्री होता है, वह कमजोर स्वाभाव वाले अथवा मुसीबत में घबरा जाने वाले व्यक्ति होते हैं। जब गोचर में बुध वक्री हो जाता है तो व्यक्ति तीक्ष्ण बुद्धि वाले होते हैं। समाज की विभिन्न समस्याओं को आश्चर्यजनक ढंग से सुलझाने में वे सक्षम होते हैं वुघ जव भी गोचर मे वक्री हो तव वो अपना लेपटोप या कम्प्यूटर मे ङाटा को संभाल कर रखे या backup वना कर रखे बृहस्पति : वक्री बृहस्पति भी शुभ फल देता है। इसके जातकों के पास अद्भुत क्षमता होती है और वे विलक्षण कार्यशैली वाले होते हैं। भले ही उनका कोई काम अधूरा रह जाए, पर आखिरकार वह अपने अधूरे कार्यों को पूरा जरूर करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि भवन निर्माण का कार्य रुका हुआ हो अथवा फैक्टरी बंद पड़ी हो, तो दोबारा गोचर में वक्री आने पर रुका हुआ काम पुन: शुरू हो जाता है और पूरा भी होता है शुक्र : जन्म के समय शुक्र के वक्री होने पर जातक धार्मिक स्वभाव का होता है। धर्म पर विश्वास रखने के कारण ऐसे जातकों को लोकप्रियता मिलती है। गोचर में शुक्र जब वक्री होता है, तो उस दौरान वह व्यक्ति सत्यवादी, पर क्रूर हो जाता है। यदि वक्री शुक्र वाले जातक को प्यार, स्नेह या सम्मान नहीं मिलता, तो वह विद्रोही हो जाता है। वक्री शुक्र वाले जातक यदि कलाकार, संगीतज्ञ, कवि या ज्योतिषी हैं, तो उनकी शक्ति बढ़ जाती है और अपने व्यवसायों में वे शिखर पर पहुंच जाते हैं। साथ ही वे काफी नाम भी कमाते हैं। शनि : जन्म में शनि जब वक्री होता है और युवा होने पर जब वह वक्री गोचर में आता है, तो व्यक्ति शक्की स्वभाव का हो जाता है और साथ ही स्वार्थी भी हो जाता है। ऐसे व्यक्ति दिखते कुछ और हैं, पर वास्तव में कुछ और होते हैं। ऐसे व्यक्ति ऊपर से साहसी, कठोर, सिद्धांतवादी और अनुशासनप्रिय होने का ढोंग करते हैं। हकीकत यह होती है कि वे अंदर से डरपोक, खोखले और लचीले स्वभाव के होते हैं। वैसे तो वक्री ग्रहों को अच्छा नहीं माना जाता, पर कुछ खास परिस्थितियों में इनका प्रभाव जातकों के लिए शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्र में वक्री ग्रहों को भी शुभ की संज्ञा दी गई है, जिनसे जातकों का जीवन सुखमय हो सकता है।मै फिर यही कहुगा कोई फल पुरी कुंङली देख कर ही संभव हो सकता है वक्री ग्रह अगर कुंङली मे शुभ है या अशुभ है तो उसके फलो मे अघिकता होगी आचार्य राजेश

रविवार, 20 नवंबर 2016

वहुँत सी मेरी माताऐ मुझ से वच्चो को लेकर सवाल करती है की हमारे वच्चे पङते नही ना ही कहना मानते है सारा दिन फोन पर या Tv पर लगे रहते है मै मानता हु आज का वातावरण ऐसा हो रहा है उसका प्रभाव वच्चो पर आना माना जा सकता है जिस मां के मन में अध्यात्मिक भाव हो वही अपने बच्चे के लिये भी यही चाहती है कि उसमें अच्छे संस्कार आयें और इसके लिये बकायदा प्रयत्नशील रहती है। यहां यह भी याद रखें कि मां अगर ऐसे प्रयास करे तो वह सफल रहती है। अब यहां कुछ लोग सवाल उठा सकते हैं कि अध्यात्मिक भाव रखने से क्या होता है? श्रीमद्भागवत गीता कहती है कि इंद्रियां ही इंद्रियों में और गुण ही गुणों में बरत रहे हैं। साथ ही यह भी कि हर मनुष्य इस त्रिगुणमयी माया में बंधकर अपने कर्म के लिये बाध्य होता है। इस त्रिगुणमयी माया का मतलब यह है कि सात्विक, राजस तथा तामस प्रवृत्तियों मनुष्य में होती है और वह जो भी कर्म करता है उनसे प्रेरित होकर करता है। जब बच्चा छोटा होता है तो माता पिता का यह दायित्व होता है कि वह देखे कि उसका बच्चे में कौनसी प्रवृत्ति डालनी चाहिए। हर बच्चा अपने माता पिता के लिये गीली मिट्टी की तरह होता है-यह भी याद रखें कि यह केवल मनुष्य जीव के साथ ही है कि उसके बच्चे दस बारह साल तक तो पूर्ण रूप से परिपक्व नहीं हो पाते और उन्हें दैहिक, बौद्धिक, तथा मानसिक रूप से कर्म करने के लिये दूसरे पर निर्भर रहना ही होता है। इसके विपरीत पशु, पक्षियों तथा अन्य जीवों में बच्चे कहीं ज्यादा जल्दी आत्मनिर्भर हो जाते हैं। यह तो प्रकृति की महिमा है कि उसने मनुष्य को यह सुविधा दी है कि वह न केवल अपने बल्कि बच्चों के जीवन को भी स्वयं संवार सके। ऐसे में माता पिता अगर लापरवाही बरतते हैं तो बच्चों में तामस प्रवृत्ति आ ही जाती है। मनुष्य का यह स्वभाव है कि वह व्यसन, दुराचरण तथा अभद्र भाषा की तरफ स्वाभाविक रूप ये आकर्षित होता है। अगर उसे विपरीत दिशा में जाना है तो अपनी बुद्धि को सक्रिय रखना आवश्यक है। उसी तरह बच्चों के लालन पालन में भी यह बात लागू होती है। जो माता पिता यह सोचकर बच्चों से बेपरवाह हो जाते हैं कि बड़ा होगा तो ठीक हो जायेगा। ऐसे लोग बाद में अपनी संतान के दृष्कृत्यों पर पछताते हुए अपनी किस्मत और समाज को दोष देते हैं। यह इसलिये होता है क्योंकि जब बच्चों में सात्विक या राजस पृवत्ति स्थापित करने का प्रयास नहीं होता तामस प्रवृत्तियां उसमें आ जाती हैं। बाहरी रूप से हम किसी बुरे काम के लिये इंसान को दोष देते हैं पर उसके अंदर पनपी तामसी प्रवृत्ति पर नज़र नहीं डालते। अध्यात्मिक ज्ञान में रुचि रखने वालों में स्वाभाविक रूप से सात्विकता का गुण रहते हैं और उनका तेज चेहरे और व्यवहार में दिखाई देता है

गुरुवार, 17 नवंबर 2016

अक्षरो की यात्रा मित्रो जिसका क्षरण नही हो सकता है अक्षर कहलाता है किसी भी भाषा का बना हो,किसी भी देश में लिखा या बोला जाता हो अक्षर ही अपनी योग्यता को शब्द बनाकर दिखलाने का काम करता है। मान लीजिये गाली एक शब्द है और गाली में ग आ ल और ई अक्षरों का प्रयोग किया गया है,अब ग का उच्चारण किया तो गले से ही निकलेगा आ का उच्चारण किया तो मुंह पूरा खोलना ही पडेगा,ल का उच्चारण किया तो लपलपी जीभ को प्रयोग में लाना ही पडेगा और ई का प्रयोग करने पर सभी मुंह के अंगो के साथ शरीर की भी गति को संभाल कर बोलना पडेगा,तभी केवल गाली शब्द को बोलना पडेगा। अब खतरनाक गाली है तो गले की नौबत है,थोडी कम खतरनाक है तो मुंह को बाजा की तरह बजाने का कारण बन सकता है,अन्यथा बदले में ली तो जायेगी ही चाहे वह इज्जत के रूप में हो या औकात के रूप में इसलिये गाली शब्द को बडी गम्भीरता से बनाया गया होगा,लेकिन अक्षर का चुनाव करने के समय कितना दिमाग पूर्वजों ने लगाया होगा इसका भी अनुमान लगाना बडा कठिन काम है। बावन अक्षर वेदों मे नियत किये गये है,अन्ग्रेजी में तो केवल चौबीस अक्षर ही प्रयोग में लाये गये है,अक्षरों को मिला मिलाकर कितने करोड शब्द बन गये कि उनकी गणना करने में कितना समय लगेगा। म अक्षर के शुरु में लगने से किसी प्रकार की ममता का भान तो होना ही है,जैसे महान म हान में नही होता तो वह बेकार ही था,म के लगते ही हान महान हो गया। कर में म के लगते ही मकर हो गया,यानी म नही लगती तो केवल कर यानी कर्म रह जाता या कर यानी हाथ का ही रूप होता। इसी प्रकार से मचल को ही देख लीजिये म नही होता तो चला चली का ही खेला था,क्या फ़ायदा था जो मचलना भी नही हो पाता। ध्वनि का कारण अक्षर से ही सम्भव है। जो ध्वनि हमारे शरीर से पैदा की जाती है उस ध्वनि को निकालना और सुनना बहुत ही महत्व की बात है। गला जीभ तालू होंठ दांत सभी अक्षर पर ही निर्भर है। ग से गला ज से जीभ त से तालू द से दांत और बिना किसी इन अंगो के प्रयोग के ह तो बोला ही जा सकता है। इसी लिये कहा जाता है कि हंसने के लिये किसी भी अंग को श्रम नही करना पडता है वह हंसा सिर्फ़ ह्रदय से ही जा सकता है लेकिन रोने के लिये जीभ को थर्राना जरूरी है और नाक मुंह तालू सभी को काम करना पडता है,अब बताइये अक्षर हंसने में अच्छे लगते है या रोने में। जो लोग हमेशा रोते ही रहते है वे सही है या जो लोग हमेशा हंसते रहते है वे ही अच्छे है,हंसने वाले ह्रदय से काम लेते है और रोने वाले अपने शरीर को काम मे लेते है शरीर से काम लेने वाले तो गलत काम भी कर सकते है लेकिन ह्रदय से काम लेने वाले कभी गलत काम भी नही कर सकते है। क्ष अक्षर की विशेषता को समझने के लिये किसी को तो बरबाद करना ही पडेगा,जैसे अच्छी भली लार मुंह में आ रही थी,क्ष को कहते ही तालू को सुखाना जरूरी हो गया,उसी तरह से अ को कहने से ही किसी न किसी को तो आना ही पडेगा चाहे वह भावना का आना हो या इन्सान का अथवा जानवर को पुकारने के समय अ अक्षर अपना काम तो करता ही है। आप भी सोच कर देखिये,इसमें कोई पाप नही नही है

सोमवार, 14 नवंबर 2016

धन का शास्त्र ****************************** धन का शास्त्र समझना चाहिए। धन जितना चले उतना बढ़ता है। चलन से बढ़ता है। समझो कि यहां हम सब लोग हैं, सबके पास सौ—सौ रुपए हैं। सब अपने सौ—सौ रुपए रखकर बैठे रहें! तो बस प्रत्येक के पास सौ—सौ रुपए रहे। लेकिन सब चलाएं। चीजें खरीदें, बेचें। रुपए चलते रहें। तो कभी तुम्हारे पास हजार होंगे, कभी दस हजार होंगे। कभी दूसरे के पास दस हजार होंगे, कभी तीसरे के पास दस हजार होंगे। रुपए चलते रहें, रुकें न कहीं। रुके रहते, तो सबके पास सौ—सौ होते। चलते रहें, तो अगर यहां सौ आदमी हैं तो सौ गुने रुपए हो जाएंगे। इसलिए अंग्रेजी में रुपए के लिए जो शब्द है वह करेंसी है। करेंसी का अर्थ होता है: जो चलती रहे, बहती रहे। धन बहे तो बढ़ता है। अमरीका अगर धनी है, तो उसका कुल कारण इतना है कि अमरीका अकेला मुल्क है जो धन के बहाव में भरोसा करता है। कोई रुपए को रोकता नहीं। तुम चकित होओगे जानकर यह बात कि उस रुपए को तो लोग रोकते ही नहीं जो उनके पास है, उस रुपए को भी नहीं रोकते जो कल उनके पास होगा, परसों उनके पास होगा! उसको भी, इंस्टालमेंट पर चीजें खरीद लेते हैं। है ही नहीं रुपए, उससे भी खरीद लेते हैं। इसका तुम अर्थ समझो। एक आदमी ने कार खरीद ली। पैसा उसके पास है ही नहीं। उसने लाख रुपए की कार खरीद ली। यह लाख रुपया वह चुकाएगा आने वाले दस सालों में। जो रुपया नहीं है वह रुपया भी उसने चलायमान कर दिया। वह भी उसने गतिमान कर दिया। लाख रुपए चल पड़े। ये लाख रुपए अभी हैं नहीं, लेकिन चल पड़े। इसने कार खरीद ली लाख की। इसने इंस्टालमेंट पर रुपए चुकाने का वायदा कर दिया। जिसने कार बेची है, उसने लाख रुपए बैंक से उठा लिए। कागजात रखकर। लाख रुपए चल पड़े। लाख रुपयों ने यात्रा शुरू कर दी! अमरीका अगर धनी है, तो करेंसी का ठीक—ठीक अर्थ समझने के कारण धनी है। भारत अगर गरीब है, तो धन का ठीक अर्थ न समझने के कारण गरीब है। धन का यहां अर्थ है बचाओ! धन का अर्थ होता है चलाओ। जितना चलता रहे उतना धन स्वच्छ रहता है। और बहुत लोगों के पास पहुंचता है। इसलिए जो है, उसका उपयोग करो। खुद के उपयोग करो, दूसरों के भी उपयोग आएगा। लेकिन यहां लोग हैं, न खुद उपयोग करते हैं, न दूसरों के उपयोग में आने देते हैं! और धीरे—धीरे हमने इस बात को बड़ा मूल्य दे दिया। हम इसको सादगी कहते हैं। यह सादगी बड़ी मूढ़तापूर्ण है। यह सादगी नहीं है। यह सादगी दरिद्रता है। यह दरिद्रता का मूल आधार है। चलाओ! कुछ उपयोग करो। बांट सको बांटो। खरीद सको खरीदो। धन को बैठे मत रहो दबाकर! यह तो तुम्हें करना है तो मरने के बाद, जब सांप हो जाओ, तब बैठ जाना गड़ेरी मारकर अपने धन के ऊपर! अभी तो आदमी हो, अभी आदमी जैसा व्यवहार करो

महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां

‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...