सोमवार, 9 जनवरी 2017

सरस्वती योग यह योग आपकी कुंडली में तभी बनता है जब शुक्र, बृहस्पति और बुध ग्रह एक-दूसरे के साथ हों अथवा केंद्र में बैठकर एक-दूसरे से संबंध बना रहे हों। युति अथवा दृष्टि किसी प्रकार से संबंध बनने पर यह योग बनता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली में बनता है उस पर विद्या की देवी मां सरस्वती की कृपा खूब बरसती है। सरस्वती योग वाले व्यक्ति कला, संगीत, लेखन एवं विद्या से संबंधित किसी भी क्षेत्र में काफी नाम और धन कमाते हैं। नृप योग अपने नाम के अनुरूप ही अज्ञात होता है। यह योग जिस भी व्यक्ति की कुंडली में बनता है वह राजा के समान जीवन जीता है। इस योग का निर्माण तब होता है जब व्यक्ति की जन्म कुंडली में तीन या उससे अधिक ग्रह उच्च स्थिति में रहते हैं। अमला योग भी शुभ और महान योगों में माना जाता है। यह योग तब बनता है जब जन्म पत्रिका में चंद्रमा से दशम स्थान पर कोई शुभ ग्रह स्थित होता है। इस योग वाला व्यक्ति अपने धन, यश और र्कीत हासिल करता है।

स्थान परिवर्तन योग स्थान परिवर्तन योग से जीवन सुखमय बन जाता है! आप यह जान लें कि उच्चाधिकारी, मन्त्री, मुख्यमन्त्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल बनने के लिए अल्पतम एक स्थान परिवर्तन योग आवश्यक है। अधिकतम तीन स्थान परिवर्तन योग एक जातक की कुण्डली में हो सकते हैं। यदि ये हों तो जातक उच्चाधिकारी, मन्त्री या प्रधानमन्त्री बनता है। इन्दिरा गांधी की कुण्डली में लग्नेश-सप्तमेश, षष्ठेश-लाभेश, धनेश-पंचमेश स्थान परिवर्तन योग थे। यहां स्थान परिवर्तन के तीस योग दे रहे हैं। इनमें से यदि दूसरे, चौथे, पांचवें, सप्तम, नौवें, दसवें योग बनें तो अधिक शुभता रहती है। जातक धनी, उच्चाधिकारी, मन्त्री, प्रधानमन्त्री एवं राजा सदृश जीवन जीता है। यहां तीस स्थान परिवर्तन योग की चर्चा कर रहे हैं जोकि इस प्रकार है- 1. भाग्येश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 2. लाभेश एवं धनेश का स्थान परिवर्तन योग 3. भाग्येश एवं दशमेश का स्थान परिवर्तन योग 4. चतुर्थेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 5. भाग्येश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 6. लग्नेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 7. पंचमेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 8. भाग्येश एवं पंचमेश का स्थान परिवर्तन योग 9. भाग्येश एवं लग्नेश का स्थान परिवर्तन योग 10. लग्नेश एवं धनेश का स्थान परिवर्तन योग 11. भाग्येश एवं धनेश का स्थान परिवर्तन योग 12. लग्नेश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 13. दशमेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 14. धनेश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 15. धनेश एवं पंचमेश का स्थान परिवर्तन योग 16. चतुर्थेश एवं पेचमेश का स्थान परिवर्तन योग 17. दशमेश एवं द्वितीयेश का स्थान परिवर्तन योग 18. दशमेश एवं पंचमेश का स्थान परिवर्तन योग 19. दशमेश एवं लग्नेश का स्थान परिवर्तन योग 20. दशमेश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 21. लग्नेश एवं पंचमेश का स्थान परिवर्तन योग 22. पंचमेश एवं सप्तमेश का स्थान परिवर्तन योग 23. सप्तमेश एवं चतुर्थेश का स्थान परिवर्तन योग 24. सप्तमेश एवं दशमेश का स्थान परिवर्तन योग 25. सप्तमेश एवं नवमेश का स्थान परिवर्तन योग 26. तृतीयेश एवं लग्नेश का स्थान परिवर्तन योग 27. पराक्रमेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 28. पराक्रमेश एवं षष्ठेश का स्थान परिवर्तन योग 29. षष्ठेश एवं लाभेश का स्थान परिवर्तन योग 30. द्वादशेश एवं अष्टमेश का स्थान परिवर्तन योग उक्त योगों को आप अपनी कुण्डली में ढूंढिए और देखिए कि कितने स्थान परिवर्तन योग आपकी कुण्डली में विद्यमान हैं। एक से अधिक हैं तो समझ लीजिए इन योगों के कारक ग्रहों की दशान्तर्दशा में आप उच्चाधिकारी बन सकते हैं। यदि इनके अतिरिक्त अन्य राजयोग भी विद्यमान हैं तो सोने में सुहागे वाली बात है। आप अवश्य उच्चाधिकारी, मन्त्री बनकर राजा सदृश जीवनयापन कर सकते हैं। ये योग अधिकारियों की कुण्डली में अवश्य होता है। योग बनाने वाले ग्रह योगकारक होते हैं, इनकी दशा आने पर ही इनका फल मिलता है। श्रीमती इन्दिरा गांधी जी की कुण्डली में तीन स्थान परिवर्तन योग थे।

रविवार, 8 जनवरी 2017

मित्रो ज्‍योतिष सिर्फ नक्षत्रों का शीयो का अध्‍ययन नहीं हे। वह तो है ही वह तो हम बात करेंगे साथ ही ज्‍योतिष और अलग अलग आयामों से मनुष्‍य के भविष्‍य को टटोलने की चेष्‍टा है कि वह भविष्‍य कैसे पकड़ा जा सके। उसे पकड़ने के लिए अतीत को पकड़ना जरूरी है। उसे पकड़ने के लिए अतीत के जो चिन्‍ह है, आपके शरीर पर और आपके मन पर भी छुट गये है। उन्‍हें पहचानना जरूरी हे। और जब से ज्‍योतिषी शरीर के चिन्‍हों पर बहुत अटक गए है तब से ज्‍योतिष की गिराई खो गई है, क्‍योंकि शरीर के चिन्‍ह बहुत उपरी है आपके हाथ की रेखा तो आपके मन के बदलने से इसी वक्‍त भी बदल सकती हे। आपके आयु की जो रेखा है, अगर आपको भरोसा दिलवा दिया जाए हिप्रोटाइज करके की आप पन्‍द्रह दिन बाद मर जाएंगे और आपको रोज बेहोश करके पन्‍द्रह दिन तक यह भरोसा पक्‍का बिठा दिया जाए की आप पन्‍द्रह दिन बाद मर जाओगे, आप चाहे मरो या न मरो,आपके उम्र की रेखा पन्‍द्रह दिन के समय पहुंचकर टूट जाएगी। आपकी अम्र की रेखा में गैप आ जाएगा। शरीर स्‍वीकार कर लेता है कि ठीक है, मौत आती है शरीर पा जो रेखाएं है वह तो बहुत ऊपरी घटनाएं है। भीतर गहरे में मन है और जिस मन को आप जानते है वही गहरे में नहीं है। वह तो बहुत ऊपर है बहुत गहरे तो वह मन है जिसका आपको पता नहीं है। इस शरीर में भी गहरे में जो चक्र है,जिनको योग चक्र कहते है, वह चक्र आपकी जन्‍मों-जन्‍मों की संपदा की संग्रहीत रूप है। आपके चक्र पर हाथ रखकर जो जानता है वह जान सकता है कि कितनी गति है उस चक्र की। आपके सातों चक्रों को छूकर जाना जा सकता है कि आपने कुछ अनुभव किए है कभी या नहीं। ज्‍योतिष मूलत: चूंकि भविष्‍य की तलाश है। और विज्ञान चूंकि मूलत: अतीत की तलाश है—विज्ञान इसी बात की खोज है कि काज क्‍या है, कारण क्‍या है ज्‍योतिष इसी बात की खोज है कि एफेक्ट क्‍या होगा। परिणाम क्‍या होगा? इन दोनों के बीच बड़ा भेद है। इन दोनों के बीच बड़ा भेद है। लेकिन फिर भी विज्ञान को रोज-रोज अनुभव होता है। कुछ बातें जो अनहोनी लगती थी, लगती थीं—कभी सही नहीं हो सकतीं, वह सही होती हुई मालूम पड़ती है। जैसा मैंने पीछे आपको कहा, अब वैज्ञानिक इसको स्‍वीकार कर लिए है कि प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अपने जन्‍म के साथ बिल्‍ट-इन अपना व्‍यक्‍तित्‍व लेकर पैदा होता है। इसको पहले वह मानने को राज़ी नहीं थे। ज्‍योतिष इसे सदा से कहता रहा है। जैसे समझो, एक बीज है—आम का बीज, आम के बीज के भीतर किसी न किसी रूप में जब हम आम के बीज को वो देंगे तो जो वृक्ष पैदा होता है उसकी बिल्‍ट-इन प्रोग्राम होना चाहिए। उसका ब्ल्यू प्रिंट होना चाहिऐ नहीं, तो यह आम का बीज बेचारान कोई विशेषज्ञों की सलाह लेता हे, न किसी यूनिवर्सिटी में शिक्षा पाता है यह आम के वृक्ष को कैसे पैदा कर लेता है। फिर इसमें वैसे ही पत्‍ते जाते है, फिर इसमें वैसे ही आम लग जाते है। इस बीज, गुठली के भीतर छिपा हुआ कोई पूरा का पूरा प्रोग्राम चाहिए,नहीं तो बिना प्रोग्राम के यह बीज क्‍या कर पायेगा। इसके भीतर सब मौजूद चाहिए । जो भी वृक्ष में होगा वह कहीं न कहीं छिपा ही होना चाहिए। हमें दिखाई नहीं पड़ता काट पीट कर हम देख लेते है। कहीं दिखाई नहीं पड़ता। लेकिन होना तो चाहिए। अन्‍यथा आम के बीज से फिर नीम निकल सकती है। भूल-चूक हो सकती है। लेकिन कभी भूल-चूक होती दिखाई नहीं पड़ती। आम ही निकल आता है सब रिपिट हो जाता है फिर वही पुनरुक्त रह जाता है। इस छोटे से बीज में अगर सारी की सारी सूचनाएं छिपी हुई नहीं है कि इस बीज को क्‍या करना है , कैसे अंकुरित होना है, कैसे पत्‍ते, कैसे शाखाएं, कितना बड़ा वृक्ष, कितनी उम्र का वृक्ष, कितना ऊँचा उठना है। यह सब इस में छिपा होना चाहिए। कितने फल लगेंगे, कितने मीठे होंगे पकें गे कि नहीं पकें गे, यह सब इसके भीतर छिपा होना चाहिए। अगर आम के बीज के भीतर यह सब छिपा है तो आप जब मां के पेट में आते है तो आपके बीज में सब छिपा नहीं होगा अब वैज्ञानिक स्‍वीकार करते है कि आँख का रंग छिपा होगा,बाल का रंग छिपा होगा। शरीर की ऊँचाई छिपी होगी। स्‍वास्‍थ्‍य-अस्‍वास्‍थ्‍य की सम्‍भावनाएं छिपी होगी। बुद्धि का अंक छिपा होगा, क्‍योंकि इसके सिवाय कोई उपाय नहीं है कि आप विकसित कैसे होंगे। आपके पास अग्रिम प्रोग्राम चाहिए—कोई हड्डी कैसे हाथ बन जाएगी, कोई हड्डी कैसे पैर बन जाएगी। चमड़ी का एक हिस्‍सा आँख बन जाएगा, एक हिस्‍सा कैसे कान बन जायेगा। एक हड्डी सुनने लगेगी,एक हड्डी देखने लगेगी। ये सब कैसे होगा वैज्ञानिक पहले कहते थे, सब संयोग है, लेकिन संयोग शब्‍द बहुत अवैज्ञानिक मालूम पड़ता हे। संयोग का मतलब है चांस, तो फिर कभी पैर देखने लगे और कभी हाथ सुनने लगे। और इतना संयोग नहीं मालूम पड़ता। इतना व्‍यवस्‍थित मालूम पड़ता है...ज्‍योतिष ज्‍यादा वैज्ञानिक बात कहता है। ज्‍योतिष कहता है। सब बीज को उपलब्‍ध है। हम अगर बीज को पढ़ पाये,अगर हम डी-कोड कर पाएँ, अगर हम बीज से पूछ सकें कि तेरे इरादे क्‍या हे—तो हम आदमी के बाबत भी पूर्व घोषणाएँ कर सकते है वृक्ष के बाबत तो वैज्ञानिक घोषणाएँ करने लगें है। बीस साल में आदमी के बाबत बहुत सी घोषणाएँ वे करने लगेंगे। और अब तक हम सब समझते रहे कि सूपरस्‍टीटस है ज्‍योतिष, एक विश्‍वास मात्र हे। लेकिन यदि घोषणाएँ विज्ञान करेगा तो वह ज्‍योतिष भी हो जाएगा। और विज्ञान घोषणा करने लगेगा। बहुत पुराने ज्‍योतिषी, ज्‍योतिष का पुराने से पुराना इजिप्‍शियन एक ग्रंथ है जिसको पाइथागोरस ने पढ़कर और यूनान में ज्‍योतिष को पहुंचाया यह ग्रंथ कहता है—काश हम सब जान सकें, तो भविष्‍य बिलकुल नहीं है। चूंकि हम सब नहीं जानते कुछ ही जानते है—इसलिए जो हम नहीं जानते,वह भविष्‍य बन जाता है। हमें कहना पड़ता है, शायद ऐसा हो, क्‍योंकि बहुत कुछ है जो अनजाने है। अगर सब जाना हुआ हो तो हम कह सकते है कि ऐसा ही होगा। फिर इस में रति भर फर्क नहीं होगा। आदमी के बीज में भी अगर सब छिपा है जन्‍म कुंडली या होरोस्‍कोप उसका ही टटोलना है। हजारों वर्ष से हमारी कोशिश यही है कि जो बच्‍चा पैदा हो रहा है वह क्‍या हो सकता हे। या क्‍या हो सकेगा? हमें कुछ तो अन्‍दाज मिल जाए तो हम उसे शायद हम उसे सुविधा दे पाएँ। शायद हम उससे आशाएं बाँध पाएँ ज्‍योतिष बहुत बातों की खोज थी। उसमें जो अनिवार्य है, उसके साथ सहयोग—वह जो होने ही वाला है, उसके साथ व्‍यर्थ का संघर्ष नहीं, जो नहीं होने वाला है उसकी व्‍यर्थ की मांग नहीं, उसकी आकांशा नहीं, ज्‍योतिष मनुष्‍य को धार्मिक बनाने के लिए, तथाता में ले जाने के लिए, परम स्‍वीकार में ले जाने के लिए उपाय था। उसके बहु आयाम हैजैसे कि चाँद-तारों से हम प्रभावित होते है। ज्‍योतिष का और दूसरा ख्‍याल है कि चाँद-तारे भी हमारे प्रभावित होत है, क्‍योंकि प्रभाव कभी भी एक तरफा नहीं होता। जब कभी बुद्ध जैसा आदमी जमीन पर पैदा होता है तो चाँद यह न सोचे कि चाँद पर उनकी वजह से कोई तूफान नहीं उठते। बुद्ध की वजह से कोई तूफान चाँद पर शांत नहीं होते अगर सूरज पर धब्‍बे आते है और तूफान उठते है। तो जमीन पर बीमारियां फैल जाती हैतो जमीन पर जब बुद्ध जैसे व्यक्ति पैदा होते है। और शांति की धारा बहती है। और ध्‍यान का गहन रूप पृथ्‍वी पर पैदा होता है। तो सूरज पर भी तूफान फैलने में कठिनाई होती हैसब संयुक्‍त है एक छोटा सा घास का तिनका भी सूरज को प्रभावित करता हैऔर सूरज भी घास के तिनके को प्रभावित करता हे। न तो घास का तिनका इतना छोटा है कि सूरज कहे कि जा हम तेरी फ्रिक नहीं करते। और न सूरज इतना बड़ा है कि यह कह सके कि घास का तिनका मेरे लिए क्‍या कर सकता हे। जीवन संयुक्‍त है यहां छोटा-बड़ा कोई भी नहीं है। एक आर्गैनिक यूनिटी है—इस एकात्‍म का बोध अगर ख्‍याल में आए तो ही ज्‍योतिष समझ में आ सकता है। अन्‍यथा ज्‍योतिष समझ में नहीं आ सकता हे माँ काली ज्योतिष hanumangarh आचार्य राजेश

शनिवार, 7 जनवरी 2017

मित्रों जहाँ विज्ञानं का क्षेत्र समापत होता है वहां से ज्योतिष विज्ञान की शुरुआत होती है हम रोज अख़बारों में पढ़ते है की आज किसी बेटे ने पिता को मार डाला अथवा माता को मार डाला ! और कभी यह भी की पिता ने बेटे को मार डाला ! कितना भयानक होता होगा यह मंज़र उफ़ वो पिता जो कभी बेटे की एक किलकारी सुनते ही ख़ुशी से मदहोश हो जाता हो और वह बेटा जो पिता के आने की एक आहट से ही झूम उठता हो फिर क्यों हो जाते हैं मजबूर इस भयानक मंज़र को अंजाम देने के लिए !जिस माँ की छवि जीवन भर जिस बेटे ने मन में बसा रखी हो वह फिर ऐसा कर दे कितना भयानक सा लगता है ! कुछ लोग कहते हैं खून तो पानी होता जा रहा है आज ! और कुछ कहते हैं की खून तो आज सफ़ेद होता जा रहा है ! इस भयानक अंजाम के तात्कालिक कारण कुछ भी हों पर कहीं न कहीं इस सब की जिम्मेवार तो है मनो दशा जब मानव के जीवन में राहु जैसे ग्रहों का भूचाल आता है तो मनो दशा तो बिगड़ ही जाती है मानव की फिर वह चाहे रावण जैसा ज्ञानी ही क्यों न हो ! ग्रहों के इस असर पर ओशो ने तो यह कहा है की मानव का जब जनम होता है तो ग्रहों की जिस धुन को वह जनम लेते ही सुनता है वही धुन जीवन भर उस पर अपना प्रभाव रखती है ! ज्यों ही इस में विपरीत धुन शामिल होती है तो शुरू होता है जीवन में भयानक बदलाव ! और ज्यों ही पक्ष में यह धुन पैदा होती है तो मूर्खों को भी ज्ञानी होते देखा गयाहो है जब इस संगीत में बदलाव आता है तो इस का सब से अधिक असर इंसान के दिमाग पर होता है पागलख़ानो की वहां सबसे ज्यादा उत्पात पागल तब मचाते हैं जब आकाश में पूर्ण चाँद होता है ! फिर यदि चाँद से मानव दिमाग पर इतना प्रभाव हो सकता है तो बाकी ग्रहों का तो कहना ही क्या ! वह तो चाँद से हज़ारों गुना बड़े हैं !तो इस का कोई हल है भी या नहीं ? मेरे ख्याल से इस का जवाब ज्योतिष में है ! एक बचे को सभी डाक्टरों ने जवाब दे दिया की इस का बचना मुश्किल है ! पर वह बचा बच गया ! आज भी वह तंदरुस्त है.! आप यकीन माने या न माने पर यह सत्य है ! जहाँ विज्ञानं का क्षेत्र समापत होता है वहां से ज्योतिष की शुरुआत होती है ! उस बचे को एक ज्योतिषी ने एक छोटे से उपाए से बचा लिआ ! पर हाँ न तो हर बार डाक्टर ही सफल होने की गरंटी दे सकता है और न ही कोई ज्योतिषीयह तो बस प्रभु का रचा हुआ खेल है जय माता दी माँ काली ज्योतिष आचार्य राजेश

गुरुवार, 5 जनवरी 2017

माँ काली ज्योतिष की आज की पोस्ट , मित्रो दुनियां अगर सराय है तो आदमी क्या है मुसाफिर या दम है तो जीवन है जीवन से हम है यानी जब जनता की शिकायत अधिकारी के पास पहुंचने लगती है तो पहले तो वह शिकायत को नजरंदाज करता रहता है कि हो सकता है किसी ने कोई भूल से काम किया हो और वह उस भूल को सुधार ले लेकिन जब शिकायते अधिक आने लगती है तो अधिकारी जांच के लिये निकल देता है,वह सभी प्रकार के अपने जांच के कारको को प्रयोग मे लाता है और जब देखता है कि गल्ती अधिक हो रही है तो गल्ती करने वाले को दंड देने और जिनके साथ गल्ती हुयी है उन्हे सहायता देने का काम करता है। कभी कभी ऐसा भी होता है कि शिकायत करने के लिये भीड तो जाती है लेकिन अधिकारी या तो नियुक्त नही हुआ होता है और जब तक नियुक्त होता है तब तक जनता चली जाती है,उस बीच मे उस अधिकारी से भी बडे अधिकारी को शिकायते दूसरे मार्ग से मिलती है वह अपनी योग्यता से अपने कार्यों को पूरा करने के लिये अन्य साधनो का प्रयोग करता है। इसी प्रकार से परम पिता परमात्मा इस धरती पर आत्माओं को भेज कर जांच करवाता है कि धरती पर कितना अधर्म हो रहा है कितना धर्म हो रहा है कितना जीव को सताया जा रहा है और कितना जीव के साथ प्रकृति इंसाफ़ कर रही है कि नही कर रही है जीव का उद्देश्य परहित मे है कि नही आदि की जानकारी लेने के लिये वह मानवीय रूप मे आत्मा को धरती पर भेज कर उसके जाने के बाद उसके सुकर्मो और दुष्कर्मो की मीमांशा करता है भेजी जाने वाली आत्मा को तो सुकर्मो और दुष्कर्मो की सजा मिलती ही है लेकिन उसके कर्मो और के प्रति भी परमात्मा को पता चल जाता है कि धरती पर किस प्रकार से पाप और पुण्य घट बढ रहे है। यह कुंडली एक जातिका की है,पंचम भाव मे गुरु और नवम भाव मे सूर्य का होना जीवात्मा योग होने की बात को प्रकट करता है,यह जीवात्मा योग ईश्वर अंश से जन्म लेने की क्रिया जाहिर करने लगता है। सूर्य के धर्म के भाव मे रहने से जातिका का अहम केवल धर्म और मर्यादा के प्रति माना जाता है साथ ही सूर्य पर गुरु की नजर होने से जातिका अपने परिवेश और परिवार मे भी धर्म और संस्कृति के प्रति अटल विश्वास रखने वाली होती है वह किसी भी सम्बन्ध को केवल धर्म और पारिवारिक सम्बन्ध की द्रिष्टि से देखती है उसे अपने परिवेश का पूरा ग्यान है कि वह कहां से आयी है उसे क्या करना है उसकी धारणा क्या है उसे जीवन मे किस प्रकार के कार्य करने है और वह किस प्रकार से दूसरो से किस प्रकार के कार्य करवाने की क्षमता को रखती है। अक्सर देखा जाता है कि बहुत कम लोग ही इस बात से सम्बन्ध रखते है कि गुरु और नेपच्यून जब एक राशि मे हो और उस राशि का सम्बन्ध अगर धर्म संस्कृति और जीवन के साथ साथ न्याय दर्शन महापुरुषो के विचार उन विचारो के द्वारा समाज और धर्म के प्रति चलने वाले विश्वास आदि भी नेपच्यून और गुरु की संगति से जातिका के पास मिलते है। एक संत की आत्मा का प्रादुर्भाव भी इसी गुरु और नेपच्यून की संगति पर जाना मिलता है और इस प्रकार की युति यही वर्णन करती है कि जातिका रूप भले ही संसार मे साधारण मनुष्य के रूप मे है लेकिन वह आत्मा से एक संत की आत्मा को लेकर ही इस धरती पर आयी है। इसी बात से एक प्रश्न और बनता है कि आखिर आत्मा का इस धरती पर आने का कारण क्या है ? इस बात को देखने के लिये :- गुरु ने बल दिया सूर्य और वक्री बुध को तथा सूर्य और वक्री बुध ने अपने बल को वक्री शनि और प्लूटो को दे दिया,वक्री शनि ने अपने बल को प्लूटो की सहायता से वापस गुरु को अपना बल दे दिया। वक्री शनि और प्लूटो ने अपना बल गुरु नेपच्यून को दिया गुरु ने उस बल को सूर्य और बुध पर दे दिया और सूर्य बुध (व) ने अपना बल वापस शनि प्लूटो को दे दिया। सूर्य और वक्री बुध ने अपना बल शनिवक्री और प्लूटो को दिया शनि वक्री और प्लूटो ने अपना बल गुरु और नेपच्यून को दे दिया,गुरु वह बल वापस सूर्य बुध वक्री को दे दिया. यह तीनो मीमांशा केवल शरीर और पहिचान (लगनेश से) शिक्षा संतान बुद्धि जीवन की सोच (पंचमेश से) जीवन साथी जीवन मे आने का उद्देश्य और जीवन के कार्य लोगों को दी जाने वाली सलाह (सप्तमेश से) मिलती है,साथ मे जिन और शक्तियों ने बल दिया है उनके अन्दर भौतिक धन कुटुम्ब पहिचान तथा अपने से बडे मित्र भाई बहिन आदि के मालिक बुध (व) ही बाकी का किसी का कोई लेना देना नही है यह भी है कि जो भी बुध वक्री ने दिया है वह जातिका वापस भी कर देगी किसी का कोई अहसान भी अपने पर नही रख सकती है। कहा जाता है और जो कारण इस जन्म के लिये माने जाते है वह गुरु का शिक्षा के भाव मे और सूर्य का धर्म के भाव मे होना भी यह प्रकट करता है कि जातिका का उद्देश्य शिक्षा से धर्म और मीमांशा के प्रति लोगों को बताना तथा उस सूर्य रूपी आत्मा को जो अपने नि:स्वार्थ भाव से धर्म के प्रति समर्पित है का गुणगान करना भी है। बुध वक्री है और मार्गी बुध तो दूसरो से कहने सुनने और अपने प्रभाव को प्रसारित करने के लिये माना जाता है जब कि वक्री बुध केवल दूसरो के भावो को सुनने के बाद उसका प्रभाव धार्मिक रूप से विवेचन मे लाकर प्रयोग करने के लिये माना जाता है। वैसे तो कहा जाता है कि बुध वक्री उल्टी बात करता है लेकिन उल्टी बात का मतलब यह नही होता है कि वह गाली देता है बल्कि बुध वक्री का मतलब परमात्मा भी अपनी कला को किस प्रकार से बदल कर प्रस्तुत करता है उसकी मिशाल नही मानी जाती है,पुरुष राशि मे पुरुष ग्रह के साथ अगर बुध मार्गी होता तो वह पुरुष रूप मे इस जगत मे प्रकट होता,लेकिन बुध के वक्री होने के कारण वह स्त्री रूप मे प्रकट हो गया। यही बात जीवन साथी के लिये भी मानी जा सकती है कि स्त्री राशि मे सप्तमेश शनि स्त्री रूप मे प्रकट होने थे लेकिन वक्री होने के कारण पुरुष रूप मे प्रकट हो गये। इस प्रकार की युति एक पूर्व जन्म के द्वन्द के रूप मे माना जा सकता है कि दोनो आत्माओ के अन्दर यह भाव रहा कि अगर वह स्त्री होती तो वह कुछ कार्य जो पुरुष रूप मे नही कर पाये वह कर सकती थी,तथा यही पति के लिये भी माना जा सकता है कि वह जो कार्य स्त्री रूप मे नही कर पाया वह कार्य वह पुरुष रूप मे कर सकता था और प्रकृति ने जन्म विपरीत लिंगी बनाकर दे दिया। यह भाव प्रकृति के द्वारा दिये गये नामो से भी प्रकट हो जाता है जैसे स्त्री नाम को पुरुष के साथ और पुरुष नाम को स्त्री के साथ,विनय विजय विनीत विह्वल आदि पुरुष वाचक नाम है और किरण किमी आदि स्त्री नाम है। सूर्य बुध वक्री ने कालेज शिक्षा दी और राहु ने शिक्षा के क्षेत्र मे जाने की अलावा डिग्री दी यह साधारण आदमी के लिये सोचा जा सकता है। जब इसे कालपुरुष की कुंडली के अनुसार देखा जायेगा तो गुरु कालेज शिक्षा मे चला जाता है और राहु धन भाव मे आकर शिक्षा देने वाले अलावा कारको के लिये अपना बल देने लगता है। राहु और चन्द्र मिलकर चिन्ता मे लीन व्यक्तियों को धर्म और न्याय तथा कानून के अलावा ज्योतिष कर्मकाण्ड आदि की शिक्षा दे सकता है,यही राहु कभी तो बहुत से कार्य दे दे और कभी बिलकुल ही नही दे,जो कह दिया जाये वह सत्य हो जाये और लोग सत्य के रूप मे स्वीकार करने लग जायें,तथा यही राहु कार्य के रूप मे चिन्ता का विषय हमेशा प्रस्तुत करना शुरु कर दे। जो सूर्य अपने प्रभाव को सरकारी रूप से या राजनीति के रूप मे प्रस्तुत करना चाहे वह चन्द्रमा की चिन्ता के कारण कुछ कर भी नही पाये और संसार हित के लिये अपने को प्रस्तुत करना शुरु कर दे। जीवन की जद्दोजहद मे शामिल होने के लिये भी परमात्मा कारणो को पहले ही बनाकर भेज देता है,पति के लिये कार्य भाव खाली और पत्नी के लिये रोजाना के कार्यों और सेवा वाला भाव खाली,इन्ही दोनो भावो के लिये पति पत्नी अगर अपनी जीवन की जद्दोजहद को करते रहते है तो उनके लिये जीवन का सार्थक करने का प्रभाव पूरा नही हो पाता है अगर वह अपने अनुसार इन्ही कारणो को जो सामने है उन्हे पूरा करने की कोशिश करते रहे तो वह अपने अनुसार अपने जन्म को सार्थक भी कर सकते है और दुनिया मे नाम तथा लोक हित के लिये मशहूर भी हो सकते है। चन्द्रमा को गुरु बारहवा दे दिया है और सूर्य के लिये गुरु नवा दे दिया है,लोक हित मे गुरु सन्तुष्ट रहने का काम कर रहा है और स्वहित के लिये गुरु भाग्य का काम कर रहा है,जातिका जनता के लिये आश्रय का स्थान देने का काम करती है तो वह प्रसिद्धि की तरफ़ बढ जाती है और वह अगर राज्य या राजनीति से जुड जाती है तो वह एक सम्माननीय व्यक्ति के रूप मे प्रसिद्धि प्राप्त करती है। है कि वह प्रश्न करने वाला होता है और उत्तर देने के लिये वह जिस भाव पर अपनी नजर रखता है वही भाव अपनी योग्यता के अनुसार बुध को जबाब देते है,लेकिन बुध वही प्रश्न करता है जिस ग्रह के साथ होता है तथा जिस ग्रह का असर द्रिष्टि से बुध को मिलता है इसके साथ ही उसके प्रश्न अमिट रूप से वही रहते है जो जन्म के समय मे बुध के प्रति अपनी धारणा को प्रकट करते थे,इसके अलावा भी सांसारिक गतिविधि का रूप भी तब और समझ मे आता है जब बुध गोचर से विभिन्न भावो मे गोचर करता है और जो भी उस भाव का सामयिक कारण और रूप होता है उसके बारे मे भी अपनी धारणा को जन्म के बुध की प्रकृति को साथ रखने से और केवल प्रश्न करने की क्रिया को ही प्रस्तुत करने की मान्यता से समझा जा सकता है। इस बुध से यही माना जाता है कि जातिका को प्रश्न करने की आदत है वह किसी भी बात को उल्टा इसलिये कहती है कि सामने वाला जबाब दे सके लेकिन सामने वाला जबाब तभी दे पायेगा जब वह दिमागी रूप से बुद्धिमान है और उसे बजाय करके दिखाने के समझाने की पूरी जानकारी है। करके दिखाने के लिये तो वही लोग सामने आते है जिनके पास शरीर का बल होता है लेकिन समझाकर दिखाने का कार्य वही करते है जिनके पास दिमागी बल होता है और वह अपने समझाने के तरीको को विभिन्न रूप मे सामने लाकर प्रस्तुत कर सकते है। कभी कभी यह भी देखा जाता है कि जो व्यक्ति कहना चाहता है वह सामने वाला समझ रहा है कि नही अगर कहने वाला उल्टा बोलता है और सामने वाला भी उल्टे को उल्टे रूप मे ही प्रस्तुत रखने की कला को जानता है तो दोनो अपनी अपनी बात को एक दूसरे को समझा कर सन्तुष्ट होजायेंगे और सामने वाला उल्टी बात का जबाब जब समझाने की बजाय ताकत से देना शुरु कर देता है तो उल्टा बोलने वाला या तो कभी उल्टी बात को करता ही नही है या वह हमेशा के लिये शांत हो जाता है।उल्टी बात करने का भी एक असर होता है कभी कभी कोई बात उल्टी की जाये और वह शास्त्र सम्मत हो तो उस उल्टी बात का भी आदर किया जायेगा और जब कोई उल्टी बात की जाये लेकिन वह गाली जैसी लगे तो जो सुनेगा वह बजाय उत्तर देने के या तो अपनी दिमागी शक्ति से कोई कानूनी काम करने के लिये राजी हो जायेगा या फ़िर अपने देह बल को प्रयोग करने के बाद दांत तोड देगा। इस कुंडली से भी यही समझ मे आता है कि बुध के वक्री होने का असर तो है लेकिन बुध पर गुरु के प्रभाव के कारण जो भी बात बुध करना चाहता है वह धर्म से सम्बन्धित है शिक्षा से सम्बन्धित है जीवन साथी से सम्बन्धित है बुध के राजकीय ग्रह के साथ होने से तथा राज्य के ग्रह सूर्य पर अपना असर देने के कारण सरकारी कानून से सम्बन्धित है के कारण जो भी बात बुध के द्वारा उल्टे रूप मे की जायेगी वह सुनी भी जायेगी और उसका उत्तर भी बजाय शरीर की शक्ति का प्रयोग करके दिमागी शक्ति को प्रयोग करने के बाद ही दिया जायेगा। इस बात को समझने के लिये जातिका के तीसरे भाव मे विराजमान वक्री शनि से देखा जा सकता है। मार्गी शनि शरीर की शक्ति से काम लेने वाला होता है लेकिन वक्री शनि दिमागी शक्ति से काम लेने वाला होता है जब मशीनी ग्रह और तकनीक का मालिक प्लूटो भी साथ हो जाता है तो वह शानि मशीनी रूप से दिमागी उत्तर प्रस्तुत करने के लिये अपनी योग्यता को जाहिर करने लगता है। मित्रो अगर आप भी मुझ से अपनी समस्या का उपायचाहते नम्वरो पर सम्पर्क करे 07597718725 09414481324 आचार्य राजेश माँ काली ज्योतिष या कुन्ङली दिखाना चाहते है हमारी paid service है

शनिवार, 31 दिसंबर 2016

*बुद्ध आदित्य योग पहले तो आप योग का नाम ही पढिये। बुद्ध आदित्य योग याने बुद्ध पहले और बादमे आदित्य याने सूर्य याने कुंडली में बुध पहले तो सूर्य से डिग्रीकली(12")अंस जेसा आगे हो ।ये एक नियम है। दूसरा नियम बुद्ध आदित्य योग फक्त बुद्ध ,सूर्य और सूर्य की उच्च की राशि में ही ये योग बनता है।याने 3-मिथुन,6-कन्या,5-सिंह और 1-मेष.ये राशि में हो तोहि ये योग बनता है।

काली मंत्र काली मां दुर्गा का ही एक स्वरुप है। मां दुर्गा के इस महाकाली स्वरुप को देवी के सभी रुपों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। दसमहाविद्याओं में काली का पहला स्थान माना जाता है। दुष्ट, अभिमानी राक्षसों के संहार के लिए मां काली को जाना जाता है। अक्सर काली की साधना सन्यासी या तांत्रिक करते ही करते हैं लेकिन मां काली के कुछ मंत्र ऐसे भी हैं जिनका जाप कर कोई भी साधक अपने जीवन के संकटों को दूर कर सकता है। 22 अक्षरी श्री दक्षिण काली मंत्र ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥ इस मंत्र के जरिये दक्षिण काली का आह्वान किया जाता है। शत्रुओं के विनाश के लिए साधक इस मंत्र के जरिये मां काली की साधना करते हैं व सिद्धि प्राप्त करते हैं। तंत्र विद्या में मां काली की साधना के लिए यह मंत्र काफी लोकप्रिय है। इस मंत्र का तात्पर्य है अर्थ है कि परमेश्वरी स्वरुप जगत जननी महाकाली महामाया मां मेरे दुखों को दूर करें। शत्रुओं का नाश कर मां अज्ञानता का अंधकार मिटाकर ज्ञान का प्रकाश हो। वैसे भी मां काली ज्ञान, मोक्ष तथा शत्रु नाश करने की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी कृपा से समस्त दुर्भाग्य दूर हो जाते हैं एकाक्षरी काली मंत्र ॐ क्रीं यह मां काली का एकाक्षरी मंत्र है। इसका जप मां के सभी रूपों की आराधना, उपासना और साधना में किया जा सकता है। मां काली के इस एकाक्षरी मंत्र को मां चिंतामणि काली का विशेष मंत्र भी कहा जाता है। तीन अक्षरी काली मंत्र ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं॥ मां काली की साधना व उनके प्रचंड रुपों की आराधना के लिए यह तीन अक्षरी मंत्र एक विशिष्ट मंत्र है। एकाक्षरी व त्रयाक्षरी मंत्रों को तांत्रिक साधना के मंत्र के पहले और बाद में संपुट की तरह भी लगाया जा सकता है। पांच अक्षरी काली मंत्र ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं हूँ फट्॥ माना जाता है कि इस पंचाक्षरी मंत्र का जाप प्रतिदिन प्रात:काल में 108 बार किया जाये तो मां काली साधक के सभी दुखों का निवारण करके उसके यहां धन-धान्य की वृद्धि करती हैं। पारिवारिक शांति के लिए भी इस मंत्र का जप किया जाता है। षडाक्षरी काली मंत्र ॐ क्रीं कालिके स्वाहा॥ इस षडाक्षरी मंत्र का जप सम्मोहन आदि तांत्रिक सिद्धियों के लिए किया जाता है। यह मंत्र तीनों लोकों को मोहित करने वाला है। सप्ताक्षरी काली मंत्र ॐ हूँ ह्रीं हूँ फट् स्वाहा॥ यह मंत्र भी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह मंत्र कारगर माना जाता है। श्री दक्षिणकाली मंत्र ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं॥ तांत्रिक इस मंत्र के जरिये दक्षिण काली की साधना कर सिद्धि प्राप्ति की कामना करते हैं। यदि आपको शत्रुओं का भय सता रहा है तो आप भी अपने गुरु के मार्गदर्शन में इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। श्री दक्षिणकाली मंत्र क्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणेकालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा॥ यह भी दक्षिण काली का एक प्रचलित मंत्र है। रोग दोष आदि को दूर करने के लिए इस मंत्र से साधना करें। मां काली शीघ्र कृपा करती हैं। श्री दक्षिणकाली मंत्र ॐ ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥ इस मंत्र में भी विभिन्न बीज मंत्रों को सम्मिलित किया गया है जिससे मंत्र और अधिक शक्तिशाली हो जाता है। मां काली को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए तांत्रिक या सन्यासी इस मंत्र के द्वारा मां काली की साधना करते हैं। श्री दक्षिणकाली मंत्र ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके स्वाहा॥ यह काली माता का एक विशिष्ट मंत्र है इसका प्रयोग भी तांत्रिक साधना में किया जाता है। भद्रकाली मंत्र ॐ ह्रौं काली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा॥ मां भद्रकाली के इस मंत्र का प्रयोग शत्रुओं को वश में करने के लिये किया जाता है। शत्रुओं के तीव्र विनाश के लिये मां भद्रकाली की साधना की जाती है। मां भद्रकाली को धर्म, कर्म और अर्थ की सिद्धी देने वाली माना जाता है। साधक जिस भी कामना से भद्रकाली की साधना करता है, उनकी उपासना करता है, वह पूर्ण होती है। श्री शमशान काली मंत्र ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिके क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं॥ यह माना जाता है कि शमशान काली शमशान में वास करती हैं व शव की सवारी करती हैं। तंत्र विद्या के अनुसार शमशान काली की साधना शवारुढ़ यानि शव पर बैठकर की जाती है। इसलिए यह बहुत ही जटिल एवं अमानवीय साधना भी मानी जाती है जो कि सामाजिक व कानूनी रुप से लगभग प्रतिबंधित है। फिर भी लकड़ी आदि के टुकड़ों में प्राण प्रतिष्ठा कर उसे शव का रुप देकर भी तांत्रिक शमशान काली की साधना करते हैं। भूत-प्रेत, पिशाचादि को वश में करने के लिए शमशान काली की साधना की जाती है। नोट: यह बात विशेष रुप से ध्यान दें कि कोई भी साधना गुरु के मार्ग दर्शन में ही करें। विशेषकर मां काली की साधना कठिन होने के कारण तांत्रिकों अथवा योगियों द्वारा ही की जाती है।

महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां

‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...