आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
शुक्रवार, 23 अगस्त 2019
गुरु शुक्र का परिवर्तन यानी परिवार से अदालत तक
शनिवार, 17 अगस्त 2019
अंत जो गति सो मति
सोमवार, 12 अगस्त 2019
अष्टम राहु यानी इन्फ़ेक्सन
संसार का विनाश हो जायेगा.उस वक्त मुझे विनाश मनुष्य का नही समझ में नहीं आया आज 2019 हैं और आज मनुष्यता का जरूर समझ मे आ रहा है.अगर देखा जाये तो
शनिवार, 10 अगस्त 2019
अपने अच्छे जीवन के लिए क्या करु
एक जातिका का प्रश्न है कि अपने अच्छे जीवन के लिये वह क्या कर सकती है,उसक साथ जो भी हो रहा है वह सही नही है. यह कुंडली वृश्चिक लग्न की है और लगनेश मंगल चौथे भाव मे है इस मंगल को शास्त्रीय रूप से नीच का माना जाता है साथ मे शुक्र भी है जो बारहवे और सातवे भाव मा मालिक भी है.बारहवा खर्च का मालिक है और सातवा जो भी जीवन मे जद्दोजहद करने का कारण बनाने के लिये अपने प्रभाव प्रस्तुत करता है वैसे तो सीधी भाषा में इस भाव को जीवन साथी का भाव भी कहा जाता है लेकिन जैसे ही जातक खुद के प्रयास से कुछ करने की अपनी मर्जी को जाहिर करने लगता है वही पर सातवे भाव का फ़ल मिलना शुरु हो जाता है। उदाहरण के लिये अगर सातवे भाव को जीवन साथी का भाव कहा जाता है तो सातवा भाव साझेदार का भी होता है और सातवा भाव ही कोर्ट कचहरी मे मुकद्दमा आदि लडने वाले प्रतिद्वंदी का भी होता है। कुंडली मे अगर सप्तमेश और लगनेश का साथ होता है तो दोनो भावो का फ़ल मिश्रित हो जाता है देखना यह पडता है कि दोनो मे प्रभाव किस प्रकार का है.लगनेश मंगल मे पहला प्रभाव चन्द्रमा का है क्योंकि वह चन्द्रमा की राशि कर्क यानी चौथे भाव मे है,दूसरा प्रभाव शनि का है क्योंकि वह शनि की राशि मे है तीसरा प्रभाव उसके अन्दर नक्षत्र का जो धनिष्ठा मे विराजमान है और चौथा प्रभाव उस नक्षत्र के पद का है जो बुध का है,पांचवा प्रभाव शुक्र के साथ होने से शुक्र का भी मिश्रित प्रभाव मिला हुआ है,छठा प्रभाव बारहवे चंद्रमा का भी जो नवम पंचम गति से मंगल को अपना असर दे रहा है,सातवा प्रभाव अष्टम गुरु का है जो अपनी नवी द्रिष्टि से अपना असर दे रहा है आठवा प्रभाव गुरु चन्द्र की मिश्रित प्रणाली से मिल रहा है नवां प्रभाव गुरु चन्द्र और शुक्र की मिश्रित प्रणाली से मिल रहा है,तथा दसवा प्रभाव मिथुन तुला राशियों का भी इस प्रकार से मंगल के बल को देखने के लिये इन दस कारणो को देखना जरूरी है,यह सभी कारक जब मिश्रित किये जायेंगे तभी जातिका के जीवन के प्रति कुछ सही फ़लादेश करना उचित रहेगा।जातिका की योग्यता आदि के लिये इन दशो प्रभावों को समझने के लिये इस प्रकार से समझा जायेगा:-
शुक्रवार, 2 अगस्त 2019
मेरी शादी कव होगी?
मनुष्य का जन्म हो जाता है शिक्षा होजाती धन कमाने के रास्ते मिल जाते है लेकिन विवाह के बारे मे जीवन अनिश्चितता की तरफ़ ही रहता है। अगर कहा जाये कि धनी बनकर शादी जल्दी हो जाती है या सम्बन्ध अच्छा मिल जाता है तो गलत ही माना जा सकता है,खूब पढ लिख कर अगर सम्बन्ध अच्छा बन जाये पत्नी मन या पति मनचाहा मिल जाये तो भी गलत बात ही मानी जाती है,शादी सम्बन्ध हमेशा संस्कारों से पूर्व के कृत पाप पुन्य से और समाज आदि के द्वारा समर्थन से ही सही मिलते है। प्रस्तुत कुंडली वृश्चिक लगन की है.मंगल इस कुण्डली मे लगनेश है और सप्तमेश शुक्र बुध के साथ तीसरे भाव मे विद्यमान है,शुक्र को कुंडली के अष्टम मे बैठा राहु मारक द्रिष्टि से देख रहा है। राहु ने चन्द्रमा को भी ग्रहण दिया हुया है और अपनी नवी द्रिष्टि से सूर्य को भी ग्रहण दिया है। सूर्य चन्द्र को ग्रहण देने के बाद राहु से वक्री गुरु का सम्बन्ध भी बन गया है। वक्री गुरु ने भी सूर्य को असर दिया है। गुरु मार्गी होना ही सम्बन्ध का उत्तम रूप से फ़लदायी माना जाता है,गुरु के मार्गी होते ही जातक के अन्दर स्वार्थी भावना आजाती है वह सम्बन्ध को नफ़ा नुकसान के रूप मे सोचने लगता है,कारण वक्री गुरु का प्रभाव जीवन मे नर संतान नही देने अथवा देने के बाद भी नर संतान का सुख नही देने के लिये माना जाता है। शनि और मंगल के बारे मे भी अगर देखा जाये तो शनि भी कन्या राशि का होकर वक्री है और मंगल भी कन्या राशि मे वक्री हो गया है मंगल पौरुष का कारक है और शनि मेहनत करने वाले कामो का कारक है जातक के अन्दर जब पौरुष ही नही होगा तो वह मेहनत वाले कामो को नही कर पायेगा। इस प्रकार से जातक के अन्दर मेहनत वाले कामो को नही करने से दिमागी बुद्धि का विकास अधिक हो जायेगा और वह अपने को हर सीमा मे बुद्धिमान समझने की कोशिश करेगा जिस समाज या परिवार से वह शादी विवाह की बात को चलाने की कोशिश करेगा उसी समाज या परिवार से अति आधुनिकता मे होने के कारण या विदेशी परिवेश मे रहने या नियमो को अपनानेके कारण भी समाज या परिवार शादी विवाह के लिये हिचकिचायेगा।शुक्र के बारे मे भी कहा जाता है कि जब यह बुध के साथ मकर राशि का तीसरे भाव मे होता है तो जातक के पास शादी विवाह के प्रपोजल खूब आते है लगता भी है कि शादी हो जायेगी लेकिन बात किसी न किसी बात से टूट जाती है अक्सर सोच यह भी होती है कि पत्नी काम करने वाली हो और वह घर संभालने के साथ साथ कमाई भी करे। केतु जिन साधनो से परिवार को आगे बढाने की कोशिश करता है राहु उन्ही साधनो की पूर्ति से परिवार को छोटा करता चला जाता है। जातक के रिस्ते की दो बाते चलेंगी लेकिन एक बात इस साल मे अगर बैठ भी जाती है तो वह किसी न किसी बात से टूट भी सकती है इस कारण को दूर करने के लिये अपने को अपनी मर्यादा समाज और परिवार के बारे मे खुल कर बात करनी चाहिये,विदेशी नीति रीति या अधिक आधुनिकता है तो उसे त्यागने मे ही भलाई है.राहु के द्वारा सूर्य और चन्द्र को ग्रहण देने की नीति से दूर रहने के लिये जातक को अपने पूर्वजो के प्रति श्रद्धा रखकर महिने या साल मे उनके नाम से किसी न किसी धर्म स्थान पर उनकी मान्यता का ध्यान भी रखकर अपने जीवन के क्षेत्र को आगे बढाने का प्रयास करते रहना चाहिये.मित्रो आप को भी कोई परेशानी है तो आप अपनी कुंडली दिखाकर उपाय चाहते हैं तो आप हम से संपर्क कर सकते हैं हमारी सेवा सशुल्क है 7597718725/941448132paytm no 7597718725
गुरुवार, 1 अगस्त 2019
देवी देवताओं के आसनों ओर वाहनों आ्का रहस्य और विज्ञान
दुर्गा की सवारी शेर को दिखा गया है,दुर्गा भक्ति के लिये अपनी प्रकृति को शेर की प्रकृति से जोड कर रखा जाता है। दुर्गा को शक्ति का स्वरुप माना जाता है। और मां की सवारी सिंह होता है, सिंह स्वयं शक्ति, बल, पराक्रम, और क्रोध का कारक होता है। शेर की यह सभी विशेषताएं मां दुर्गा के स्वभाव में मौजूद हैं। मां दुर्गा की हुंकार भी शेर की दहाड़ की ही तरह इतनी तेज है, जिसके आगे कोई भी आवाज सुनाई नहीं देती।दुर्गा की भक्ति को मन्दिर मे या घर के अन्दर नही किया जा सकता है उनकी भक्ति के लिये जंगल पहाड और निर्जन स्थान कन्दरा आदि को अपनाया जाता है।
भोलेनाथ बहुत शक्तिशाली होने के बावजूद बहुत शांत और संयमित रहते है। नंदी बैल भगवान शिव का वाहन है, उनके गणों में वह सर्वश्रेष्ठ माना गया है। बैल बहुत ताकतवर और शक्तिशाली होने के बावजूद शांत रहते हैं जो की भोलेनाथ के स्वभाव में दिखता है। इसके अलावा नंदी के चार पैर हिन्दू धर्म के चार स्तंभ, क्षमा, दया, दान और तप के प्रतीक हैं। नंदी सफेद रंग का बैल है जो स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। इसी प्रकार से जब शिव की भक्ति को करना होता है तो अपने को इस टप्रकार के स्थान पर ले जाना होता है जहां केवल सन्नाटा हो कोई वनस्पति और जीवित कारक आसपास नही हो साथ ही बाघम्बर बिछाने और भभूत लपेटने का अर्थ भी एक प्रकार से यही माना जाता है कि शिव की साधना के लिये शव यानी मृत मानना जरूरी हो जाता है बिना अपने को मृत माने शिव की साधना नही हो पाती है,निराकार मे साकार का प्रवेश होना उन्ही लोगो के लिये देखा जा सकता है जो अपने को कुछ नही मानते जो अपने को अहम के अन्दर ले कर चलते है वे शिव भक्ति कभी नही कर सकते है।
मूषक का अर्थ चूहा होता है, भगवान गणेश को बुद्धि के देवता माना जाता है। और उनकी सवारी चूहा है, दरअसल चूहा हर चीज को कुतर देता है, बह बिना सोचे समझे हर कीमती चीज़ या अनमोल चीज को कुतर देता है, वह उसे नष्ट कर देता है। इसी तरह बुद्धिहीन और कुतर्की व्यक्ति भी बिना सोचे-समझे, अच्छे-बुरे हर काम में बाधा उत्पन्न करते हैं। श्री गणेश ने मूषक पर सवारी कर कुतर्कों और अहित चाहने वाले लोगों को वश में किया है। गणेश भक्ति के लिये अपने को चूहा की प्रकृति मे ले जाना पडता है जैसे चूहा अपने को सुरक्षित रखते हुये सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नही करता है वह किसी भी बडे अबलम्ब के किनारे चलने और अपनी सुरक्षा को रखते हुये चलता है,तथा एकान्त और ऐसे स्थान पर अपने निवास को बनाता है जो किसी आम जीव की पहुंच से दूर हो एक प्रकार और भी देखा जाता है कि गणेश भक्ति मे अक्सर बाधा आती है उन बाधाओ से बचने के लिये चूहा अपने निवास के आसपास या माहौल मे अपने को एक से अधिक रास्ते जिस प्रकार से प्रयोग करने की युक्ति को बनाकर चलता है उसी प्रकार से गणेश भक्ति को करने वाले लोग अपने को एक ही सिद्धान्त पर लेकर नही चल पाते है उनके लिये कई प्रकार के रास्ते बनाने पडते है और एक रास्ता बन्द हो जाने पर दूसरा रास्ता उन्हे अपने आप चुनना पडता है।
विष्णु को गरुण की पीठ पर सवार होता हुआ दिखाया गया है,भगवत् गीता में इस बात का उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु के भीतर ही समस्त सृष्टि का निवास है, वे सबसे ताकतवर हैं। गरुड़ देव को भी अधिकार और दिव्य शक्तियों से लैस दर्शाया गया है इस वाहन से शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति अपने को दूर गामी और ऊंचाई पर लेजाकर नजर सभी कारको पर रखे और सयंत होकर अपने को आसपास के माहौल मे रखकर एकात्मक रूप से वायु प्रधान होकर यानी निराकार होकर साकार को दिष्टि मे रखकर चलता रहे। विष्णु को शेष शैया पर होना और शेषनाग का समुद्र मे होना भी एक प्रकार से शिक्षा देने वाला होता है कि गहरे पानी यानी मन के अन्दर गहरे विचार पैदा करने के बाद भी अपने आसपास के माहौल को मुलायम और जीविन्त रखकर उन विचारो का एक से अधिक कारण पैदा करने के बाद ही रहा जा सकता है।
उसी प्रकार से कार्तिकेय जी की मोर के ऊपर सवार होने का कारण भी बताया गया है । मोर चंचलता का प्रतीक है और उसे अपना वाहन बनाना इस बात को दर्शाता है कि कार्तिकेय ने अपने मोरे रूपी चंचल मन को अपने वश में कर लिया है।ओर मोर स्वयं द्रष्टा होता है वह अपने को सयंत रखकर भी जब मुदित होता है तो अपने पंखो को फ़ैला कर नाचना शुरु करता है और जगत कल्याण की भावना से यह समझा जाता है कि जीव की पूर्ति का साधन पानी बरसना तय होता है उसी प्रकार से जब किसी प्रकार की गलत शक्ति की आहट होती है तो मोर चिल्लाना शुरु कर देता है,इस कारण को सूक्ष्म रूप से समझे जाने पर पता चलता है कि सुन्दर और समृद्ध होने पर स्थिति को समझने की शक्ति भी होनी जरूरी होती है इसके साथ ही विष को भोजन करने के बाद भी मोर का कुछ नही बिगडता है कारण उसके अन्दर पराशक्तियों की इतनी गर्मी होती है कि वह मोर कंकडी जैसे पत्थर को खाकर भी अपने जीवन को चलाते रहने के लिये माना जाता है। सांकेतिक भाषा में हंस जिज्ञासा और पवित्रता का प्रतीक कहा जा सकता है।
ज्ञान की देवी सरस्वती को हंस से बेहतर और कोई वाहन मिल भी नहीं सकता था। मां सरस्वती का हंस पर विराजित होना इस बात को दर्शाता है कि ज्ञान के जरिए ही जिज्ञासा को शांत किया जा सकता है।इसी प्रकार से सरस्वती का वाहन हंस भी पानी का राजा कहा जाता है वह अपने ही माहौल मे रहना पसंद करता है तथा वह भूखा रह सकता है लेकिन भोजन मे मोती ही उसकी क्रियाशैली मे माने जाते है,अपने को स्माधिस्थ भी रखता है और अपने कार्य को भी करता रहता है।
लक्ष्मी का वाहन उल्लू बताया जाता हैउल्लू शुभता और संपत्ति का भी प्रतीक है। कहा जाता है कि अत्याधिक धन-संपदा को प्राप्त कर व्यक्ति उल्लू (बुद्धिहीन) हो जाता है। इसलिए देवी लक्ष्मी और उल्लू साथ-साथ चलते हैं। उल्लू दिन में नहीं देख पाता, वह रात का जीव है। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि लक्ष्मी जी की कृपा व्यक्ति को अंधकार से मुक्त कर सकती है।
इसी प्रकार से तकनीकी रूप बुद्धि को प्रदान करने वाले मंगल की सवारी मेढा को बताया गया है इस जीव की यह बात मानी जाती है कि तकनीकी रूप से बुद्धि को विकसित करने के लिये खोपडी मजबूत होनी चाहिये तथा दिमाग को सबल रखना चाहिये आदि बाते देवी देवताओं की सवारी से जोड कर देखी जा सकती है। आदि आचार्य राजेश
मंगलवार, 30 जुलाई 2019
मैं अपने जीवन में रिचहोना चाहता हूँ। और पूरी तरह से मेरे सभी उद्देश्य कव पुरे होंगे
कल सपने के बारे मे लिखा था,आज भी यही प्रश्न सामने है कि मै धनी बनना चाहता हूँ.सपना धन का,बहुत ही महत्वपूर्ण बात है,जिसे देखो इसी प्रकार का सपना लेकर चल रहा है.चौथा आठवा और बारहवा भाव इच्छाओं का कहलाता है लेकिन इच्छा पूर्ति के लिये इन तीनो भावो के ग्यारहवे भाव भी बली होने जरूरी है,इस जातक की कुंडली मे चौथे के ग्यारहवे यानी दूसरे भाव मे भी कोई ग्रह नही है,आठवे के ग्यारहवे में केवल सूर्य लगनेश और शुक्र जो तृतीयेश और कार्येश है विद्यमान है,बारहवे भाव के ग्यारहवे भाव मे भी कोई ग्रह नही है इस प्रकार से एक बात और भी जानी जा सकती है कि चौथा भाव खाली है,केवल आठवे भाव मे और बारहवे भाव मे ही मंगल और चन्द्रमा है। चन्द्रमा केवल सोच को देने वाला है और मंगल हिम्मत को देने वाला है.चौथा भाव पूर्वजो से प्राप्त सम्पत्ति की सोच से आगे बढने वाला होता है आठवा भाव खुद के द्वारा परिश्रम करने के बाद नौकरी या सेवा वाले काम करने के बाद प्राप्त करने वाले धन के प्रति सोच कर आगे बढने के लिये माना जाता है और दसवा भाव जो कार्य बडी विद्या को लेकर किये गये होते है के लिये माना जाता है। जातक की प्राथमिक विद्या में बुध वक्री होकर विराजमान है यानी प्राथमिक विद्या मे भी बदलाव हुया है ऊंची विद्या मे शनि विराजमान है जो केवल करके सीखने के लिये ही अपनी शक्ति को प्रदान करता है डिग्री लेने या अन्य प्रकार के कारण पैदा करने के बाद विशेषता हासिल करने के लिये नही माना जाता है,इसके बाद जो किसी विषय मे अलावा योग्यता के लिये देखा जाता है वह दूसरे भाव से देखना जरूरी है,लेकिन यह भाव भी खाली है.गुरु राहु की नवम पंचम युति को अक्सर फ़रेबी सम्बन्धो के लिये भी माना जा सकता है,जातक के दिमाग मे वही कारण पैदा होंगे जिससे वह फ़रेब से सम्बन्ध बनाकर धन कमाने के लिये अपनी इच्छाओं को पालेगा। धनु राशि का बुध अगर वक्री होता है तो वह उल्टे कानून बनाकर अपने कार्यों को लेकर चलने वाला होता है,केतु शनि और वक्री बुध की आपसी युति बन जाती है तो जातक कानून को अन्धेरे मे रखकर सत्ता या राजनीति का बल लेकर धन कमाने के लिये अपनी इच्छा को जाहिर करता है। लेकिन शनि जब भी किसी भी ग्रह को दसवी और चौथी नजर से देखता है तो वही ग्रह शनि की वक्र नजर से आहत हो जाते है। बारहवा चन्द्रमा नवी शनि से आहत है,छठे भाव के शुक्र और सूर्य दोनो ही इस शनि की दसवी नजर से आहत है। बारहवा भाव खर्च करने का मालिक भी है चन्द्रमा के बारहवे भाव मे होने से जातक मानसिक सोच को खर्च करने के लिये अपनी युति को देता है,इस चन्द्रमा की योग्यता से यह जिस भाव मे अपना गोचर करता है उसी को खर्च करने का मानस बना रहता है,जिस ग्रह के साथ रहता है उसी ग्रह की कारक वस्तुओ को खर्च करने के लिये माना जा सकता है। मंगल का प्रभाव भी इसी प्रकार से माना जाता है यह जिस भाव मे गोचर करता है उसी के प्रति अपनी मारक सोच रखता है,मीन राशि का मंगल होने के कारण अक्सर दिमागी झल्लाहट क भी प्रयोग करने के लिये माना जाता है,साथ ही यह मन्गल जन्म के जिस ग्रह के साथ अपना गोचर करेगा वह ग्रह भी मंगल की तपिस से नही बच पायेगा। राहु की सिफ़्त के अनुसार वह जिस भाव मे अपना गोचर करेगा उसी ग्रह या भाव से अपनी साझेदारी प्रकट करना शुरु कर देगा,वह साझेदारी किसी भी क्षेत्र से अच्छे या बुरे किसी भी कारण से हो सकती है केतु का स्वभाव अपनी उपस्थिति को देने है यह जिस भाव मे जिस ग्रह के साथ अपना गोचर करेगा वह अपनी उपस्थिति उसी भाव या राशि या ग्रह के अनुसार प्रदर्शित करना शुरु कर देगा। इस प्रकार से सूर्य और शुक्र के छठे भाव मे होने से साल के बारह महिनो मे जातक बारह प्रकार के कार्य सम्बन्धी बदलाओ को भी करेगा और जिस भी कार्य या स्थान मे हाथ डालने की कोशिश करेगा वह उसी से मानसिक और कार्य शत्रुता को अपने अन्दर बैठा लेगा.गुरु जो सम्बन्धो का कारक है जिस भाव राशि या ग्रह के साथ गोचर करेगा उसी भाव ग्रह के साथ व्यापारिक भाव पैदा कर लेगा,इस प्रकार से धन का कारक बुध जो वक्री है वह आयेगा तो लेकिन उल्टी गति से आकर वापस चला जायेगा। मित्रों आप भी अपनी कुंडली दिखाकर अपनी परेशानी का उपाय चाहते हैं तो आप हमारे नम्वरो पर सम्पर्क कर सकते हैं हमारी सेवा सशुल्क है आचार्य राजेश
रविवार, 28 जुलाई 2019
घनी(अमीर )बनने का स्वप्न
जीवन स्वप्न के रूप मे ही समझा बेहतर होता है लोग अपने अपने अनुसार स्वप्न बुना करते है और उन स्वप्नो को पूरा करने के लिये अपनी अपनी युक्तियां लगाया करते है उद्देश्य केवल चार ही होते है जो पुरुषार्थ के रूप मे माना जाता है,धर्म अर्थ काम और मोक्ष यही चार पुरुषार्थ है। धर्म की तरफ़ जाने से जातक अपने आप को आगे दुनिया मे दिखाना चाहता है,वह दिखावा भले ही शरीर की बनावट से हो या शरीर के द्वारा किये जाने वाले करतबो से हो वह चाहे शरीर की विशेष क्रिया के द्वारा भगवान के प्रति अपने को दिखाना चाहता हो या वह अपने को खुद ही ईश्वर बनाकर दिखाने की चेष्टा मे हो। अर्थ के मामले मे जातक अपने को अधिक से अधिक धनी बनाने के लिये युक्तियां बनाया करता हो या अपने को हर प्रकार का साधन धन से प्राप्त करने की योजना मे लगा रहता हो,चमक दमक से अपने जीवन को सभी के सामने प्रस्तुत करने के लिये भी आर्थिक रूप से बढावा देने के लिये माना जाता हो,इसी प्रकार से काम नाम के पुरुषार्थ की बढोत्तरी के लिये वह लोगो से अपने कार्यों को सिद्ध करने की कला को प्रस्तुत करना जानता हो अपने साथ समाज को भी साथ लेकर चलने के लिये अपनी योजनाओ को बनाया करता हो या अकेले मे अपने जीवन साथी और पुत्र पुत्री आदि सन्तान के रूप मे अपने आप को आगे बढाने के लिये प्रयास रत हो आदि बाते काम नामक पुरुषार्थ की श्रेणी मे आती है इसी प्रकार से जब व्यक्ति इन तीनो प्रकार के पुरुषार्थो को या तो प्राप्त कर चुका हो या उनके प्रति लगाव खत्म हो गया हो अथवा इतना भोग लिया हो कि वह बुरा लगने लगा हो या फ़िर अपने परिवार समाज या रीति रिवाज घर परिवार मे वह किसी बात से हमेशा ही तरसता रहा हो इसी के नाम को मोक्ष का प्रकार का कहा जाता है। मोक्ष का मतलब होता है सन्तुष्ट हो जाना,घनु लग्न की कुंडली हैं इस कुंडली में चौथा आठवा और बारहवा भाव जीवन की संतुष्टि के लिये की जाने वाली इच्छाओं के लिये माना गया है।धनु लगन है,लगनेश गुरु चौथे भाव मे है,गुरु का पंचम नवम योग राहु से अष्टम भाव मे है और जातक का बारहवा भाव खाली है। जातक का यह त्रिकोण पूरा नही है केवल चन्द्रमा से इस त्रिकोण को महिने मे सवा दो दिन के लिये पूरा किया जाता है,यह कारण जातक की इच्छा की तृप्ति के लिये अपनी कमी को बता रहा है।इच्छा की तृप्ति क्यों पैदा हो रही है इस बात को जानने के लिये जातक के दादा पिता माता नाना आदि की इच्छाओं की तृप्ति के लिये भी देखना जरूरी है जातक के किस सम्बन्धी की इच्छा की तृप्ति हो रही है,इस बात का विवेचन इसलिये जरूरी होता है क्योंकि जातक को इच्छाओं की तृप्ति के लिये सोच केवल अपने परिवार से ही प्राप्त हुयी होती है वह अलग से लेकर नही आता है। दादा के लिये जातक के राहु को देखेंगे,राहु के बारहवे भाव मे शुक्र है,राहु के चौथे भाव मे मंगल वक्री है,राहु का अष्टम भाव खाली है,इसका मतलब है कि दादा की उन्नति के कारण उनके पिता थे और शादी के बाद दादा के जीवन को उनकी पत्नी यानी दादी ने सम्भाल लिया था (बारहवा शुक्र).दादा की मानसिक इच्छा एक व्यवसायिक स्थान बनाने की थी लेकिन वह व्यवसायिक स्थान निर्माण मे अधूरा रह गया (वक्री मंगल तुला राशि का),जातक के दादा मे रिस्क लेने जोखिम लेने पूर्वजो के ऊपर ही अपने को निर्भर करने जितना कमाना और उतना ही खर्च लेना की आदत से उनकी इच्छायें पूरी नही हो पायीं (राहु से अष्टम भाव खाली कुम्भ राशि). पिता के लिये देखने के लिये सूर्य की स्थिति को देखते है,सूर्य से बारहवे भाव मे गुरु है सूर्य से चौथे भाव मे राहु है और सूर्य से अष्टम में कोई भी ग्रह नही है,इस प्रकार से जातक के पिताजी तीन भाई और तीन भाइयों मे जातक के पिता का स्थान बडप्पन के स्थान मे होने से तथा जातक के पिता के द्वारा अपने परिवार का पालन पोषण शिक्षा विवाह शादी आदि करने मे अपने धन को लगाया गया,चौथे भाव मे राहु के होने से जो भी कमाया गया वह किसी न किसी कारण से आक्समिक रूप से खर्च कर दिया गया और अपने नाम को कमाने के चक्कर मे या सामाजिक मर्यादा को दिखाने के चक्कर मे सयंत नही रखा गया,पिता का भी अष्टम खाली होने के कारण पिता मे भी जोखिम लेने की आदत नही थी जो भी हो रहा है सीधे से होने और सीधे से चलने मे ही विश्वास था। जातक की माता के लिये देखते है तो चन्द्रमा के चौथे भाव मे गुरु है,जातक की माता पूजा पाठ धर्म कर्म आदि से पूर्ण थी और अपने घर मे ही सामाजिक संगठन आदि के लिये अपने अनुसार कार्य करती थी उनका ध्यान धर्म संस्कृति और लोगो के साथ उच्चता मे जाने का था बडे समुदाय के रूप मे उन्होने भी अपने पति के परिवार के लिये कार्यों मे योगदान दिया,तीन लोगो की परवरिस और उन्हे आगे बढाने की योग्यता प्रदान की,माता के अष्टम मे राहु होने से जातक की माता को अक्समात रिस्क लेने की आदत थी वह किसी भी प्रकार से अपने को सोच विचार कर कार्य करने के लिये नही जाना जाता है,सभी कुछ सामने होने के बाद भी वह केवल आकस्मिक सोच के कारण नही प्राप्त कर पायीं। यही बात जातक के नाना के लिये देखने पर केतु से बारहवे भाव मे चन्द्रमा के होने से जातक के नाना का प्रभाव धर्म और पराशक्तियों की सहायता से अच्छा था वे बडे धार्मिक स्थानो और धार्मिक लोगो के लिये अपने विचार सही रखते थे लेकिन उनके चौथे भाव मे सूर्य बुध शनि के होने से जातक के नाना के पास घर मे वही काम थे जो सुबह शाम किये जाते है और अक्सर उनके पास केवल पिता के दिये गये कार्य और सरकार आदि से मिलने वाली मामूली सहायता को ही माना जा सकता है उन्होने भी अपनी तीन सन्तानो को आगे बढाने पढाने लिखाने मे खर्च किया,केतु से अष्टम भाव खाली होने से भी जातक के नाना को भी रिस्क लेने और जोखिम लेने की आदत नही थी इस कारण से वे भी अतृप्त रह गये।
गुरुवार, 25 जुलाई 2019
गगन लहरी योगगगन लहरी योग
जब कुंडली मे सभी ग्रह एक तीन नौ और दसवे भाव मे इकट्ठे हो जायें तो गगन लहरी योग का निर्माण हो जाता है। ऐसा जातक गेंद की तरह से सारी उम्र एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता रहता है और एक गेंद की भांति उसका आस्तित्व एक स्थान पर नही बन पाता है। प्रस्तुत कुंडली मे सूर्य बुध पहले भाव मे है बुध आदित्य योग का निर्माण तो हो रहा है लेकिन बुध के वक्री होने पर वह खुद के द्वारा आदेश से काम नही करवा कर दूसरे के आदेश से काम करने वाला होता है,वह खुद कानूनो का पालन नही करने के बाद दूसरो को कानून का पालन करने का आदेश देता है,वह दूसरो को केवल कुछ शब्दो में सुनता है और उसका जबाब विस्तृत रूप मे लोगो को देता है,अक्सर कन्या संतान या बहिन बुआ से बनती नही है या होती ही नही है। पिता का कानूनी मामले मे या समाज संगठन मे वर्चस्व रहा होता है,पिता के खुद के लोग ही जड काटने के लिये माने जाते है पिता का कानून से काम करवाना या कानून का पालन करवाना या धन आदि के मामले मे दूसरो की सहायता करना और एक समय मे उसी धन आदि के लिये दूसरो पर कानून का इस्तेमाल करना आदि भी पाया जाता है। इस प्रकार के जातक अक्सर बोलने के लिये कार्य करने के लिये स्थान स्थान पर यात्रा करते रहते है,अक्सर राहु जिस ग्रह के साथ या जिस भाव मे होता है जातक को उसी क्षेत्र मे अपने नाम और यश कमाने के लिये योग्यता का निर्माण करना पडता है,या तो जातक मानसिक रूप से अपने को आकासीय कारणो मे विचरण करने के लिये माना जाता है या किसी प्रकार मीडिया या सम्पादन मे छुपे भेद खोलने के लिये काम करना पडता है या फ़िर यात्रा आदि के कामो मे उसे लगातार लगा रहना होता है नवे भाव के ग्रहो के अनुसार उसे अपने जीवन को चलाना पडता है,अगर नवे भाव मे कानून या धर्म से सम्बन्धित ग्रह होते है तो कानून और धर्म आदि के बारे मे बाते करता है और उन्ही के द्वारा कन्ट्रोल होकर चलने के लिये मजबूर होता है,इस कुंडली मे गुरु के वक्री होने पर जातक को अपने देश या माहौल से दूर रहकर दूसरे देश या माहौल के लिये ही काम करना होगा,एक समस्या या एक कारण को कई रूप मे विवेचन करने के लिये उसे काम करना होगा,उसे काम करने का एक संयत क्षेत्र नही मानना होगा वह केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति तक ही काम करेगा,इसके अलावा वह राहु के मीन राशि मे और शनि तथा शुक्र के साथ होने से विश्व की तीन बडी कम्पनियों के सानिध्य मे उन्ही के आदेश से अपने जीवन को निकालने वाला होगा। उसके खरी बोलने की आदत को यही काम करने वाली कम्पनिया या विचार राहु शनि शुक्र के रूप मे मंगल और चन्द्रमा को कन्ट्रोल करेंगे जैसे इस जातक के दसवे भाव मे मंगल और चन्द्रमा है जो जातक के लिये बेलेन्स बनाकर तकनीकी काम करने के लिये अपनी युति को देते है लेकिन जातक राहु शनि और शुक्र की युति से अपने खरे बोलने के प्रभाव को खुद के लिये व्यापारिक नीति से काम करने के लिये अपनी युति को प्रदान करने के बाद कन्ट्रोल करने के लिये माना जायेगा। अगर जातक किसी प्रकार के छोटी यात्रा वाले काम करता है या किसी प्रकार से किसी ऐसे संस्थान के लिये काम करता है जो दूसरो को कुछ समय के लिये या हमेशा के लिये बन्धन वाले या कानूनी कारण पैदा करते है उनके ऊपर भी ऊपर का अंकुश उसे अपने मर्जी से काम नही करने देगा। जातक को पैदा होने से लेकर मृत्यु पर्यंत तक इधर से उधर ही रहना होगा या आना जाना पडेगा। किसी भी प्रकार से उसे विदेश आदि जाने मे दिक्कत नही होगी,जहां लोग विदेश आदि मे जाने के लिये तमाक कानूनी कार्यवाही मे उलझे रहेंगे जातक एक ही प्रयास मे विदेश आदि जाने के लिये अपनी शक्ति का प्रयोग करने के माना जायेगा। मित्रों अगर आप भी अपनी कुंडली दिखाना चाहते हैं तो आप हमारे नम्वरो पर सम्पर्क कर सकते हैं हमारी सेवा सशुल्क है
सोमवार, 15 जुलाई 2019
चंद्र ग्रहण
यह ग्रहण खण्डग्रास चंद्र ग्रहण होगा। इससे अलावा इस ग्रहण में ही सावन महीने की शुरुआत भी होगी। 16 जुलाई की रात 1.31 बजे ग्रहण का स्पर्श होगा, मध्य तीन बजे व मोक्ष रात 4.30 बजे होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में कुल मिलाकर 2 घंटे 59 मिनट होगा। चंद्र ग्रहण धनु राशि और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होगा।ज्योतिषीय दृष्टिकोण से लंबी अवधि तक दिखाई देने वाला यह चंद्रग्रहण भारत सहित पाकिस्तान, मध्य-एशिया और दक्षिण-अमेरिका के लिए विशेष रूप से अशुभ साबित हो सकता है। ग्रहण के समय चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होकर धनु और मकर दोनों राशियों को प्रभावित करेंगे। अग्नि तत्व की राशि धनु के अंतिम अंशों से शुरू होकर यह चंद्रग्रहण मकर राशि के शुरुआती अंशों को पीड़ित करता हुआ बेहद तीव्र रूप से फल देने वाला होगाइस क्रम में चंद्रग्रहण के नौ घंटे पूर्व 16 जुलाई को सूतक लगने के कारण शाम 4:30 से मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां ज्यादा हावी रहती हैं, हमारे ज्योतिष शास्त्रों ने चंद्रमा को चौथे घर का कारक माना है. यह कर्क राशी का स्वामी है. चन्द्र ग्रह से वाहन का सुख सम्पति का सुख विशेष रूप से माता और दादी का सुख और घर का रूपया पैसा और मकान आदि सुख देखा जाता है.
शुक्रवार, 28 जून 2019
कुछ करनी कुछ कर्म का फेर
मीन राशि की कुंडली है और गुरु वक्री होकर ग्यारहवे भाव मे मकर राशि का होकर बैठा है। मकर राशि के अन्दर अगर गुरु वक्री हो जाता है तो वह अपनी नीचता को दूर करने के बाद उच्चता मे आ जाता है। लेकिन जो अन्य ग्रह गुरु पर असर देने वाले होते है उनसे गुरु के स्वभाव मे परिवर्तन होना माना जाता है। चौथे भाव मे शनि विराजमान है और वह गुरु को अष्टम नजर से देख रहा है। माता के भाव से अष्टम मे गुरु होने से जातक को परदेशी या परदेश वास के लिये अपनी युति को देता है,साथ ही जातक के अन्दर अपने स्वभाव को वक्री करने के कारण जो भी कार्य समाज धर्म आदि होता है उससे अपने को केवल कर्म की मान्यता को मानने वाला भी होता है,चन्द्र लगनेश के द्वारा शनि केतु को छठे प्रभाव से देखने के कारण जातक की माता को अस्वस्थ माना जाता है। चौथा शनि अक्सर केतु के साथ होने से कंटक ढैया के नाम से भी जाना जाता है यह कंटक ढैया उन्ही कारको को प्रभावित करती है जो कारक ग्रह या भाव के रूप मे शनि की नजर में होते है। इस कुंडली मे शनि पहले तो अपने बैठने वाले स्थान को जडता दे रहा है,शनि एक पत्थर की भांति केतु की शक्ल मे लम्बा बनाकर शनि यानी ठंडी और निवास के स्थान मे केवल कमन्यूकेशन के कारणो से पूर्ण होने के बाद व्यक्ति को लम्बा लिटाने के लिये माना जाता है। शनि के साथ केतु होने से जिस कारक मे वह अपना असर देता है उसी कारक को नकारात्मक कर देता है,जैसे इस कुंडली मे शनि चौथे भाव मे है और वह चौथे भाव की कारक वस्तुओ जीवो को अपने अनुसार फ़्रीज कर रहा है,उन्हे सहारा देने के लिये शनि अपने पराक्रम को चौथे भाव से अपने तीसरे स्थान यानी छठे भाव को देख रहा है उस भाव मे शुक्र के स्थापित होने के कारण और शुक्र का राज्य की राशि मे स्थापित होने के कारण तथा सिंह राशि को सन्तान की कारक होने के कारण पुत्री सन्तान को या पुत्र की पत्नी को अपनी सेवा के लिये अपने को आगे पीछे खिसकाने को या अपने लिये कोई सहायता लेने के लिये जरूरत मे मानता है। यह स्थान शुक्र के छठे भाव मे होने के कारण नौकरानी के लिये भी माना जाता है,और जातक की माता के लिये नौकरानी की भी जरूरत पडती है इसके साथ ही यह स्थान बीमारी का होने के कारण और बीमारी के वक्त तीमारदारी करने के लिये भी अपनी गति को प्रदान करता के प्रति माना जाता है। शनि की निगाह छठे भाव के बाद अष्टम भाव मे भी है कारण एक पांच नौ किसी भी भाव के त्रिकोण की राशियों मे गिने जाते है और जो भी ग्रह इन भावो मे होते है सम्बन्धित भाव को उसी प्रकार से देखते है जैसे कि लगन पंचम और नवम को देखा जाता है। माता के भाव से पंचम में अष्टम भाव पंचम मे है जातक की माता को जीवन मे इस शनि और केतु के कारण अपमान जोखिम और परिवार को सम्भालने के काम तथा परिवार को किसी भी प्रकार की जोखिम से दूर रखने के कामो के लिये जाना जाता है,जातक के पिता की राशि मे राहु के होने से जातक के पिता के लिये केवल इतना ही माना जा सकता है कि वह या तो शिक्षा के क्षेत्र मे अपने को जोड कर रखता है या किसी प्रकार के मनोरंजन वाले क्षेत्र मे अपने को आगे बढाने और उसी के अन्दर अपने कार्यों को करने के लिये माना जाता है,अथवा वह सरकारी संस्थाओ मे अपने कार्यों को करना जानता है। इसके अलावा सूर्य के आगे शुक्र के होने से माता के अलावा भी किसी स्त्री जातक के साथ सम्बन्ध रहने और माता के प्रति बेरुखी अपनाने के लिये भी माना जाता है,माता के द्वारा किसी शिक्षा संस्थान मे कार्य करना भी माना जा सकता है।
गुरुवार, 30 मई 2019
वात करते हैं मोदी जी प्रधानमंत्री पद की शपथ के बारे में
30 मई को नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं, 30 मई को अपरा एकादशी भी है इसका अपना धार्मिक महत्व है. अखिर क्यों मोदी अपरा एकादशी के दिन शपथ ले रहे हैं? क्या ये एक संयोग है? एकदशी तिथि के दिन शपथ होना ही शुभ है। लेकिन इस समय रात 11 बजकर 3 मिनट तक रेवती नक्षत्र का होना आगामी समय में किसी बडे़ नेता को गंभीर बीमारी होने का संकेत दे रहा है।
मित्रों जैसा कि आप जानते हैं की हर ज्योतिषी जो टीवी पर आ रहा है या राजनेताओं के साथ जुड़े हुए हैं जरुरी नहीं है कि वह अच्छे बहुत बढ़िया हो जिसने भी य शाम 7:00 बजे का मुहूर्त निकाला है वह ज्यादा बढ़िया नहीं है मेरी नजर में क्योंकिउस समय 30 मई के दिन गुरुवार शाम 7 बजे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की शपथ लेने जा रहे है l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण के समय वृश्चिक लग्न का उदय हो रहा है जो की संयोग से उनका जन्म लग्न और जन्म राशि भी है
यह तो ठीक है वृश्चिक लग्न की कुंडली में गुरु पंचमेश है और उस पर सातवें भाव से दशमेश सूर्य और अष्टमेश बुध की दृष्टि से अच्छे फल मिलने की पूर्ण संभावना बनी हुई हैपर संप्तम का सुर्य के कारण अच्छे पलों में कमी आएगी आप देखें इस समय सातवें भाव का स्वामी शुक्र 6भाव में है यह भाव के वारे सभी ज्योतिष मित्र अच्छी तरह से जानते हैं 8वे भाव का ग्रह संप्तम में है यह भी ठीक नहीं ऐसा कौन सा समय है जिस पर मोदी जी प्रधानमंत्री की क्योंकि स्शपथ लेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा वह समय है
12:01 जो कि समय सिंह लग्न बन रहा है जो कि स्थिर लग्न भी है और सूर्य बुध दशम में है बृहस्पति सुखवा में है जोगी बहुत बढ़िया योग है और चंद्रमा से भी बृहस्पति नवम भाव में है 2 ग्रह को छोड़कर बाकी सारे ग्रह केंद्र से त्रिकोण से संवन्घ रख रहे है उस समय तो निर्धारित हो चुका है तो इस पर मोदी जी क्या उपाय कर सकते हैं मोदी जी को चाहिए कि वह अपने ईस्ट के सामने 12:01 से लेकर 12:15 तक मनसे शपथ ग्रहण करें तो उनके लिए बहुत अच्छा होगा
महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां
‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...
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https://youtu.be/hb9Ouf_rST4 मित्रों आज बात करेंगे बुध और शनि की युति जब एक ही भाव में एक साथ हो या किसी भी तरह की युति बन रही है, तो कल क्य...
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लक्ष्मी योग शुभ ग्रह बुध और शुक्र की युति से बनने वाला योग है।बुध बुद्धि-विवेक, हास्य का कारक है तो शुक्र सौंदर्य, भोग विलास कारक है।अब ये द...
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जब किसी के जीवन में अचानक परेशानियां आने लगे, कोई काम होते-होते रूक जाए। लगातार कोई न कोई संकट, बीमारी बनी रहे तो समझना चाहिए कि उसकी कुंडली...
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दशम भाव ज्योतिष भाव कुडंली का सबसे सक्रिय भाव है| इसे कर्म भाव से जाना जाता है क्यूंकि ये भाव हमारे समस्त कर्मों का भाव है| जीवन में हम सब क...
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https://youtu.be/I6Yabw27fJ0 मंगल और राहूजब राहु और मंगल एक ही भाव में युति बनाते हैं, तो वह मंगल राहु अंगारक योग कहलाता है। मंगल ऊर्जा का स...
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मालव्य योग को यदि लक्ष्मी योगों का शिरोमणी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं। मालव्य योग की प्रशंसा सभी ज्योतिष ग्रन्थों में की गई है। यह योग शुक्...
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https://youtu.be/9VwaX00qRcw ये सच है कि हर रत्न इस धरती पर मौजूद हर व्यक्ति को शोभा नहीं देता है. इसे पहनने के लिए ज्योतिष की सलाह आवश्यक ह...
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आचार्य राजेश ईस बार मलमास 15 दिसंबर से आरंभ हो रहा है जो 14 जनवरी 2018तक रहेगा। मलमास के चलते दिसंबर के महीने में अब केवल 5 दिन और विवाह मुह...
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मित्रों आज वात करते हैं फिरोजा रतन की ग्रहों के प्रभाव को वल देने के लिए या फिर उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए ज्योतिष विज्ञान द्वारा विभि...















