मित्रोंआज की पोस्ट भी हम हदयरोग पर ही करेंगे हमारीकिसी विषय पर हमारी पिछली पोस्ट है आप पढ़ सकते हैं
आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019
हदयरोग ओर ज्योतिषीय उपचार-5 medical astrology
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रविवार, 6 अक्टूबर 2019
हदयरोग ओर ज्योतिषीय उपचार-4 medical astrology
लेकिन सामान्य माणिक इस शनि की युति को रोकने में असमर्थ मानी जाता है इसके लिये जातक को दोपहर के सूर्य का कारक स्टार या तुरका रूबी को ही पहिनना चाहिये,इस रूबी की खास पहिचान है कि किसी भी प्रकार की रोशनी में जाने पर इसमे से किरणे निकलती है जो प्रत्यक्ष रूप से साफ़ दिखाई देती है। अपने द्वारा किसी भी प्रकार की जानकारी के लिये फोन कर सकते है। अपनी संघ जन्म तारीख और समय के अनुसार अपनी बीमारी के लिये भी बेव-साइटwww.acharyarajesh.in से पता कर सकते है।
कर्क राशि का शनि होता है तो जातक के लिये दूसरों की भावना को समझना बहुत मुश्किल की बात होती है। अक्सर आपका वास्ता उन लोगों से भी पडा होगा जिन लोगों के मन में अपने ही दोस्तों अपने ही बडे भाई या बडी बहिनों अथवा काम करने के बाद दी जाने वाली कमाई के प्रति नुक्ताचीनी करने के बाद राजनीतिक बल से तुरत ही विभूषित कर दिया जाता है,वास्तव में यह कोई जातक की कमी से नही होता है,यह बात तभी मानी जाती है जब जातक का जन्म चौदह फ़रवरी से चौदह मार्च के बीच में हुआ होता है। उस समय जलवायु के अन्दर बसन्ती बयार का चलना माना जाता है और मौसम की जवानी जातक के लिये सहायक होती है। राजनीति का एक खेल और समझा जा सकता है कि राजनीति तभी होती है जब पेट भरा हो,जब तक जातक को भूख लगी है वह रूखा सूखा ठंडा गर्म सभी प्रकार का भोजन बडे आराम से कल लेगा,जैसे ही पेट भरा और कोई भोजन वाली वस्तु सामने आयी तो उसके अन्दर कई तरह की राजनीति सामने आने लगेगी जैसे नमक कम या अधिक है,मिर्च कम या अधिक है कम पकाया गया है या जला दिया गया है आदि। इसी प्रकार की राजनीति का प्रभाव जातक के इस समय में जन्म लेने के बाद पडता हुआ देखा जाता है,जितने भी छिद्रान्वेषी पैदा हुये है अगर इतिहास को उठाकर देखा जाये तो इसी काल में पैदा होने वाले व्यक्ति मिलेंगे। लेकिन इस समय में जो जातक किसी कारण से कर्क के शनि से आच्छादित युति में पैदा हुये है,मलिन या गन्दी बस्तियों मे पैदा हुये है,पानी को पाटकर बनाये हुये घरों में पैदा हुये है,अथवा खेती किसानी या जनता से जुडे समाज में पैदा हुये है उनके दोस्त तो राजनीति में विराजमान मिलेंगे और वे उनकी दोस्ती से अपने लिये कार्य भी जुटा लेंगे लेकिन उनके लिये ही काट करने से नही चूकेंगे। यह द्रश्य तो जातक के बाहरी जीवन के लिये देखा जा सकता है लेकिन उनके शरीर में जो प्रभाव यह ग्रह युति देती है वह जातक के कठोर स्वभाव से जातक की जडता वाली बुद्धि से शिक्षा को कम लेने के कारण या सीखने के लिये पढने के बजाय करने वाली बुद्धि का प्रयोग करने से माना जाना बेहतर समझने का कारण बनता है। शनि को कंट्रोल करने के लिये प्राय: दो ग्रहों का उपयोग अदिक किया जाता है एक सूर्य और दूसरा मंगल। जब शनि की अष्टम द्रिष्टि में सूर्य या मंगल आजाते है तो वे शनि पर अपना अधिकार नही रख पाते है,और शनि अपने द्वारा सूर्य और मंगल को प्रताणित करता रहता है। शनि से अष्टम में जाकर सूर्य बेबस हो जाता है,साथ ही मंगल को जो गर्म लोहे के पिंड की भांति है अगर शनि की ठंडी पर्त में दबा दिया जायेगा तो वह अपनी गर्मी को कैसे प्रदान कर सकता है,उसी प्रकार से जब सूर्य की रोशनी को शनि के अन्धेरे में दबा दिया जायेगा तो सूर्य भी बेवस हो जायेगा। इस बेबसता को ही जातक के लिये ह्रदय वाली बीमारी के रूप में भी जाना जा सकता है,सबसे अधिक प्रभाव जातक की आंखों की रोशनी पर पडता है उसके बाद जातक की पाचन क्रिया बेकार हो जाती है और गले में हमेशा कफ़ की खडखडाहट सुनने को मिलती रहती है। सूर्य शनि के लिये कुछ करने से इसलिये असमर्थ होता है कि वह जातक के ग्यारहवें भाव में है और उसे इसी शनि से अपने रोजाना के कामों के लिये काम चलाना है,यह भाव साधारण व्यक्ति के लिये माना जाता है लेकिन जो राजनीति में है उनके लिये माना जाता है कि उन्हे उसी जनता की बदौलत ही सीट मिलती है और उसी जनता के प्रति कोई गलत काम करते है या गर्मी दिखाते है तो वह जनता बिदक गयी तो अगले चुनाव में उसकी हार भी मानी जा सकती है। व्यापारी या सरकारी नौकरी में विराजमान लोग भी इसलिये असमर्थ है कि उन्ही कर्मचारियों से उन्हे काम भी लेना है और उन्ही की बदौलत वे अपने कार्यों में सफ़ल है तो वे किसलिये इस शनि से पंगा लेने चले। ह्रदय की बीमारी में राहु शनि और केतु अगर सूर्य चन्द्र पर अपनी अष्टम द्रिष्टि डालता है तो वह जातक के लिये ग्रहों की युति के अनुसार खतरनाक माना जाता है।इस युति से जातक को अगर ह्रदय वाली बीमारी से बचना है तो जातक को अपने रोजाना के कार्यों को खुद ही करना चाहिये। हर काम में काम करने वाले को अपने आसपास नही रखना चाहिये,अक्सर गर्मी के दिनो में लोग बर्फ़ का पानी पीते है और ठंड के दिनों में ठंडे पानी से नहाते है अपने हाथों को ठंडे पानी में रखते है या गले को कानो को खोल कर चलते है उनके लिये इस ग्रह युति का प्रभाव ह्रदय रोग को पैदा करने के लिये माना जाता है। इस युति में जातक को मूली छाछ और स्विन्ग पूल में नहाने का शौक होता है,यह तीनो ही एक समय में प्रयोग करने का मतलब है कि ह्रदय रोग को बुलावा देना। और सूर्य शनि की युति यानी सुबह शाम में अगर इन कारकों का प्रयोग किया जाता है तो भी जातक को ह्रदय रोग की बीमारी से बचाया नही जा सकता है। इस युति वाले जातकों को कभी ठंडे कमरे में और अन्धेरे में नही सोना चाहिये,सोने वाले पलंग पर हमेशा गुलाबी रंग की चद्दर और कमरे के पर्दे गुलाबी रंग के होने चाहिये,पूजा में दीपक का जलाना भी जरूरी है,राहु की चीजे जैसे अगरबत्ती चलाना धूल वाली जगह पर नही जाना सुबह के समय झाडू लगाते समय नाक को बन्द रखना इस रोग में सहायता देने के लिये माना जाता है,इस युति वाले जातक को सूर्य का रत्न माणिक को भी पहिनना जरूरी है लेकिन सामान्य माणिक इस शनि की युति को रोकने में असमर्थ मानी जाता है इसके लिये जातक को दोपहर के सूर्य का कारक स्टार या तुरका रूबी को ही पहिनना चाहिये,इस रूबी की खास पहिचान है कि किसी भी प्रकार की रोशनी में जाने पर इसमे से किरणे निकलती है जो प्रत्यक्ष रूप से साफ़ दिखाई देती है।
शनिवार, 5 अक्टूबर 2019
हदयरोग ओर ज्योतिषीय उपचार-3 medical astrology
मित्रों इससे पहले भी मैं तीन पोस्ट बीमारी पर कर चुका हूं उसको आप मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं ।और यह पोस्ट भी उसी पर आधारित है। अगर अच्छी लगे तो शेयर करें ,
,कारण सूर्य और शनि पिता पुत्र की तरह से है और जहां सूर्य की सीमा समाप्त होती है वही से शनि की सीमा शुरु हो जाती है,साथ ही बुध भी अपनी गति को सूर्य और शनि के साथ बराबरी की सीमा में बान्ध कर रखता है,इस प्रकार से कोई एक ग्रह का प्रभाव इन ग्रहो की युति में फ़र्क नही दे पाता है,नवग्रह का पेन्डल जब ह्रदय पर लटकता है तो जातक के अन्दर चलने वाले विचारों में स्थिरता आती है वह सोचता भी है और करता भी इस प्रकार से व्यक्ति की जीवन की अवधि बढ जाती है,जो व्यक्ति राजनीति में है या जो व्यक्ति जनता के साथ जुडकर जनता वाले कार्य कर रहे है अथवा जो लोग जनता के साथ मिलकर खरीद बेच का कार्य चांदी चावल तथा खेती से पैदा होने वाली जिन्स के प्रति अपने काम कर रहे है,अथवा जो लोग हाउसिंग सोसाइटी को बनाकर चला रहे है अथवा मकान को बनाकर बेचने का काम कर रहे है पानी वाले कार्यों को कर रहे है पानी वाले जहाज या नाव अथवा बोटिंग वाले काम कर रहे है उनके लिये यह स्वास्तिक बहुत फ़लदायी होता देखा गया है। मित्रों अगर आप भी अपनी कोई समस्या का उपाय चाहते हैं अपनी कुंडली दिखाना का बनवाना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट पर या हमारे नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं आचार्य राजेश कुमार
शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2019
हदय रोग ओर ज्योतिषीय उपचार-2 medical Astrology
ध्यान यह भी रखा जाता है कि इस स्थान पर चन्द्रमा का रूप या तो विधवा माता के रूप में हो जाता है अथवा माता का जन्म अपने भाई बहिनो में छोटे रूप मे होता है अथवा जातक के परिवार में ही ताई के रूप में माता का रूप होता है या ताई का जातक के साथ मानसिक रूप से अनबन का कारण भी बनता है,जातक का स्वभाव अपने ही भाई बहिनो के प्रति गलत बनता रहता है और जातक के अन्दर अपनी मानसिक द्वन्दता के कारण वह अपने ही लोगों के साथ तर्क करने के लिये अपने को हर समय तैयार रखता है जातक के अन्दर अपने ही भाई के साथ अपघात करने में कोई दिक्कत नही होती है वह किसी न किसी प्रकार से धन के रूप में समाज के रूप में परिवार के रूप में भाई के साथ घात करने के लिये अपनी मानसिकता को लगाये रखता हैजातक का मन रूपी चन्द्रमा जब शरीर से अधिक काम करने लगता है तो भी ह्रदय रोग के लक्षण मिलने लगते है,जैसे चन्द्रमा मिथुन राशि का होकर तीसरे भाव में आजाये,तो जातक अपने को भावुकता से काम करने वाला होता है वह अक्सर मन के अनुसार रोने लगता है मन के अनुसार हंसने लगता है मन के अनुसार रुष्ट हो जाता है मन के अनुसार गालिया देने लगता है और मन के अनुसार ही वह अपने को लेकर चलने वाला होता है अक्सर वे कलाकार जो नाटक आदि में काम करते है अपनी भावुकता से लोगों को हंसाने और रुलाने आदि का कार्य करते है उनके अन्दर इस प्रकार की बीमारी पायी जाती है,एक्टर अधिकतर इसी बीमारी का शिकार होते है,इसके साथ ही चन्द्रमा अगर कन्या राशि का होता तो जातक के अन्दर ह्र्दय की बीमारी का होना पाया जाता है,इसके लिये भी एक कारण बहुत ही चौंकाने वाला माना जाता है कि जातक अपनी छोटी उम्र में ही कामुकता की गिरफ़्त में आजाता है उसके द्वारा सोचे काम बन नही पाते है वह अपने किसी भी प्रयास में सफ़ल नही हो पाता है तो सीधा असर ह्रदय पर ही जाता है,वैसे भी छठा भाव चौथे का तीसरा है यानी अपने ह्रदय को लोगों के सामने प्रस्तुत करने का कारण बनना,अपने रोजाना के कामों के अन्दर इस राशि वाले चन्द्रमा के लिये माना जाता है कि वह पानी वाले काम अधिक करता है जैसे साफ़ सफ़ाई करना लोगों के लिये सेवा वाले काम करना लोगों के प्रति अपनी भावनात्मक प्रस्तुति को देना आदि इसके अलावा चन्द्रमा जब अष्टम यानी वृश्चिक राशि का होता है तो जातक के अन्दर तकनीकी कला का विकास होना भी माना जाता है वह अक्सर रूहानी कार्यों के लिये अपने को लेकर चलने लगता है किसी भी क्षेत्र के कामो के अन्दर वह अपनी अन्तर्द्र्ष्टि को अधिक प्रयोग में लेने लगता है इस प्रकार से दिमाग में अधिक वजन पडता है और सांसों के अन्दर बदलाव आने लगता है तो भी जातक के ह्रदय पर असर पडना शुरु हो जाता है।
ईस प्रकार के चन्द्रमा वाले जातको को काले रंग की लहसुनिया को पहिनना चाहिये लेकिन यह लहसुनिया तांबे में पहिना जाना उचित है। तांबा मंगल की धातु है और इस धातु में अगर केतु को धारण किया जायेगा तो मानसिक गति जो बिगडती है उसके अन्दर कोई न कोई सहायक कारण बनने लगेगा और जातक के ह्रदय पर पडने वाले बोझ में कमी आजायेगी,इसके अलावा भी जातक को स्वभाव में परिवर्तन लाना जरूरी है जैसे तीसरे चन्द्रमा के लिये छोटी बहिन पर बुरा प्रभाव होगा जरूर लेकिन उसके लिये अगर पहले से ही सोच कर कार्य किये जायेंगे तोवह परेशानियों से बची रहेगी और दिमागी रूप में जातक के लिये ठीक रहेगा,इसके अलावा जातक को अपने कार्यों के अन्दर वे कार्य जो अक्समात हंसी या गमी की सीमा में आते हो नही करना चाहिये,उस स्वभाव मे कमी लानी चाहिये जिनके अन्दर आंखों में अधिक आंसू आते हो,इस बात को भी जान लेना आवश्यक है कि जिनके जल्दी आंसू आते है उनके लिये लो-ब्लड प्रेसर की बीमारी को जाना जाता है और जिनके आंसू आते ही नही है वे हाई-ब्लड प्रेसर के मरीज होते है।
गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019
हदय रोग ओर ज्योतिषीय उपचार medical Astrology
मित्रों मेरी पिछली पोस्ट भी बीमारी और रोग पर मैंने लिखी थी आज भी हम एक बीमारी एक रोग की बात करेंगे जिसमें हम लेंगे दिल की बीमारी हदयरोग की हृदयरोग इन दिनों एक विकराल सेहत समस्या बनकर उभरा है। मित्रों हदय मानव शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है । ह्रदय की बनावट कार्य प्राणी या वाल्वों में रक्त संचार की रुकावट या शिराओं संचार व्यवस्था में गड़बड़ी होने से ह्रदय के कार्य करने में रुकावट पैदा होती है फलस्वरूप ह्रदय रोग उत्पन्न हो जाते हैं । शरीर की बीमारियों के मामले में अगर देखा जाये ग्रह अपनी सूचना को पहले से देते है अगर जातक सचेत होकर अपने ग्रहों को समझता रहे तो उन बीमारियों से बचा रहेगा। अक्सर ह्रदय रोग सबसे खतरनाक माना गया है इस रोग से पीड़ित मरीजों की कुंडलियों का विश्लेषण और उनसे बातचीत करने पर पाया कि यदि हार्ट अटैक का कांबीनेशन आपकी कुंडली में है तो आपको अच्छे से अच्छा सर्जन या हृदय रोग विशेषज्ञ भी इस रोग से नहीं बचा सकता। अस्पतालो में एक हार्ट स्पैशलिस्ट डाक्टर, एक किसान, एक फौजी, एक महिला, एक 12 साल का बच्चा जब बाईपास सर्जरी करवाते दिखे तो उन्होंने उन सभी तथ्यों की पुष्टि की जिनसे हार्ट प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए और फिर भी अच्छी सेहत, उचित रखरखाव और नियमित व्यायाम, योगासनों आदि के बावजूद हो गई।
वैसे तो इस पेंडेंट की कीमत बाजार में स्टोन को खरीदने फ़िर उसे बनवाने में हजारों रुपयें में मानी जाती है लेकिन इसे मेटल में बनवा कर और थोक की कीमत में ले् इसे लेने के लिये नीचे लिखें हमारे फोन नंबरों पर आप बात कर सकते हैं,इसे बनाने में माणिक लगभग सवा पांच रत्ती मूंगा पांच से छ: रत्ती और यंत्र का प्रयोग लाया जाता है।अपने बारे में शरीर के रोगों के बारे में भी आप मेरी बेव साइट से सम्पर्क कर सकते है।ह्रदय रोग के लिये बहुत से कारण और भी बनते है जिनके लिये अगर विस्तृत रूप में कुंडली का विवेचन किया जाये तो कारण मिलने लगते है। इस कुंडली में जो मेष लगन की है और शनि पानी वाले भाव कर्क राशि में विराजमान है,साथ ही राहु छठे भाव में जो बीमारी का भाव माना जाता है में विराजमान है,राहु अपनी उल्टी द्रिष्टि से पानी वाले भाव में बैठे शनि को देख रहा है,तथा शनि और राहु के बीच में चौथे भाव का मालिक चन्द्रमा है,शनि और राहु को पाप ग्रह की उपाधि दी गयी है,दो पाप ग्रह के बीच में बैठा चन्द्रमा ह्रदय रोग की बीमारी का संकेत दे रहा है। इस संकेत से जाना जा सकता है कि जातक का निवास ठंडे और गन्दे स्थान में है तथा वह जो रोजाना के कार्य करता है उसके अन्दर किसी न किसी प्रकार की गन्दगी वाली बात है जो रहने वाले स्थान में वायु को गन्दा कर रही है। छठे भाव को उत्तर पश्चिम दिशा का कारक कहा जाता है जो पश्चिमी दिशा से लगे कोने में रहने वाले स्थान के रूप में भी जाना जाता है राहु का दु:स्थान में जाने का मतलब है कि कोई गन्दा प्रभाव देने वाली वस्तु या कारक उस स्थान पर स्थापित है अधिकतर मामले में इस स्थान पर अगर घर का टायलेट है तो वह भी गन्दी श्रेणी में आयेगा अथवा उस स्थान पर कचडा आदि डालने की जगह अथवा रहने वाले मकान के इस दिशा में कोई गन्दा कारक स्थापित है,इन कारणों से ह्रदय रोग की सम्भावना बढ जाती है और चन्द्रमा बाधित हो जाता है।क्सर एक उपाय बहुत ही कारगर सिद्ध माना जाता है कि जब चन्द्रमा राहु से या शनि से पीडित हो तो केतु का उपाय फ़लदायी हो जाता है,इस उपाय के लिये केतु को सूर्य की या मंगल की धातु में स्थापित करने के बाद उस धातु में मंत्रों से पूरित ताबीजी रूप देकर लहसुनिया को स्थापित कर दिया जाता है इस ताबीजी रूप में बने लहसुनिया को गले में धारण करने से इस प्रकार के ग्रह योग से बने ह्रदय रोग में सहायता मिलती है। पंचम भाव का चन्द्रमा शिक्षा वाले कार्यों के लिये मनोरन्जन वाले कार्यों के लिये और जल्दी से धन कमाने वाले कार्यों के लिये जाना जाता है,शनि जो पानी वाले स्थान में बैठ कर अपना रूप कागज के रूप में भी लेता है और वाहन के रूप में भी जो पानी के अन्दर चलाये जाते है का रूप धारण कर लेता है,चान्दी चावल और उन ठोस कारकों का रूप लेता है जो पानी से अधिक पैदा होते है,अथवा जनता के बीच में रहकर अपने कार्यों को करना भी माना जाता है,साथ ही कार्य करने वाले स्थान के रूप में भी जाना जाता है,जैसे राहु के छठे भाव में होना यानी कार्य स्थान के पास में या तो सार्वजनिक टायलेट का होना या कार्यस्थान के पास में किसी प्रकार की अस्पताली गंदगी का इकट्ठा होना अथवा सफ़ाई कर्मचारियों के द्वारा कचडे को इकट्ठा करने वाला स्थान होना आदि भी माना जाता है इन स्थानों से भी बचने के उपाय करने चाहिये।
रविवार, 29 सितंबर 2019
Diseases ज्योतिष द्वारा रोग की पहिचान
ज्योतिष शास्त्र भविष्य दर्शन की आध्यात्मिक विद्या है। भारतवर्ष में चिकित्साशास्त्र (आयुर्वेद) का ज्योतिष से बहुत गहरा संबंध है। होमियोपैथ की उत्पत्ति भी ज्योतिष शास्त्र के आधार पर ही हुआ है I जन्मकुण्डली व्यक्ति के जन्म के समय ब्रह्माण्ड में स्थित ग्रह नक्षत्रों का मानचित्र होती है, जिसका अध्ययन कर जन्म के समय ही यह बताया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति को उसके जीवन में कौन-कौन से रोग होंगे। चिकित्सा शास्त्र व्यक्ति को रोग होने के पश्चात रोग के प्रकार का आभास देता है।चन्द्रमा के प्रकाश और वायु से धरती पर रोगो को पैदा करने वाले कारक और निवारण के कारक पैदा होते है। जब चन्द्रमा और वायु के कारक गुरु का किसी खराब ग्रह से योगात्मक प्रभाव मिलता है तो चराचर जगत के साथ साथ वनस्पतियों मे भी उनके खराब गुण ही विद्यमान हो जाते है। इसके लिये कहा भी गया है कि ऋतु के अनुसार भोजन लेने से और जो भोजन ऋतु के हिसाब से नही लिया जा सकता है के परित्याग से रोगो का पैदा होना नही मिलता है लेकिन जब जब राहु गुरु चन्द्रमा के साथ साथ अपना प्रभाव देगा वह भाव के अनुसार रोग को पैदा करने के लिये माना जायेगा। मन का कारक चन्द्रमा है और मन के रोगी होने पर शरीर रोगी हो जाता है और मन के प्रसन्न रहने पर शरीर रोग से दूर रहता है। उसी प्रकार से गुरु वायु का और प्राण वायु को संचालित करने का काम करता है जैसे ही गुरु का मिलना राहु या इसी प्रकार के ग्रह शनि केतु मंगल आदि ग्रहों के रोगी भाव के ग्रह के साथ युति लेने से रोग की शुरुआत हो जाती है। चन्द्रमा के लिये शीतकाल का समय बहुत ही अच्छा माना जाता है और इसी लिये देखा होगा कि शरद ऋतु की पूर्णिमा का चन्द्रमा रोगो से लडने की शक्ति को रखता है और लोग इस शरदीय पूर्णिमा को नदियों मे सरोवरो मे स्नान भी करते है और खीर आदि बनाकर रात को चन्द्रमा के सामने रखते है सुबह को उसका सेवन करते है जिससे चन्द्रमा के द्वारा दिये गये रोग निदान की शक्ति को ग्रहण किया जाता है। एक बात और भी देखी होगी कि पूर्णिमा के दिन मन भी बहुत प्रसन्न रहता है और अमावस्या के दिन मन की गति भी बहुत कमजोर मानी जाती है,जो काम अमावस्या को शुरु करने पर नही हो पाता है वह पूर्णिमा के दिन शुरु करने से पूरा हो जाता है। राजस्थान मे देखा भी गया है कि अमावस्या को मेहनत का काम करने वाले कारीगर इमारतो का काम करने वाले ठेकेदार काम को बन्द ही रखते है और काम को इसलिये नही करते है कि वे मानते है कि यह दिन उनके पूर्वजो का है और पूर्वजो के लिये वे काम नही करते है इसके पीछे जो वैज्ञानिक कारण सामने आता है वह केवल यही है कि मेहनत के काम को करने के बाद अगर अमावस्या को किया जाता है तो वह काम अगर खराब हो जाता है तो दुबारा से करना पडेगा और किये गये काम की मेहनत के साथ साथ उसका फ़ल भी खराब हो जायेगा। इसी प्रकार से समुद्र के अन्दर होने वाले बदलाव को भी इन्ही तिथियों मे देखा जा सकता है। रोगो की वृद्धि और कमी भी इन्ही तिथियों मे देखी जा सकती है। चन्द्रमा का रोगो से बहुत सम्बन्ध होता है इस बात को एक प्रकार से और भी देखा जा सकता है कि अगर रात को बच्चा जन्म लेता है तो बच्चे की आंखे नीली या कालिमा लिये होती है जबकि दिन को जन्म लेने वाले बच्चे की आंखो की पुतली का रंग बिलकुल सफ़ेद होता है यही बात अगर आप कर्क के चन्द्रमा और वृश्चिक के चन्द्रमा से देखेंगे तो कर्क के चन्द्रमा मे जन्म लेने वाले जातक की दांतो की पहिचान बहुत ही सुन्दर व चमकीली होती है जबकि चन्द्रमा के वृश्चिक राशि मे होने से दांतो की पहिचान गन्दी और पायरिया आदि से ग्रस्त तथा टेढी मेढी होती है,उसी प्रकार से मीन के चन्द्रमा मे जातक के दांत लम्बे होते है वृष के चन्द्रमा के दांत चौडे और सामने के चौकोर होते है।
शनिवार, 28 सितंबर 2019
संगत से गुण होत हैं , संगत से गुण जात
हम संगति के महत्व के बारे में हमेशा ही कुछ न कुछ पढ़ते आ रहें हैं। यहॉ तक कहा गया है -----` संगत से गुण होत हैं , संगत से गुण जात ´। मित्रों ज्योतिष भी संगति के महत्व को स्वीकार करता है। एक कमजोर ग्रह या कमजोर भाववाले व्यक्ति को मित्रता , संगति , व्यापार या विवाह वैसे लोगों से करनी चाहिए , जिनका वह ग्रह या वह भाव मजबूत हो। इस बात को एक उदाहरण की सहायता से अच्छी तरह समझाया जा सकता है। यदि एक बालक का जन्म अमावस्या के दिन हुआ हो , तो उन कमजोरियों के कारण , जिनका चंद्रमा स्वामी है ,बचपन में बालक का मनोवैज्ञानिक विकास सही ढंग से नहीं हो पाता है और बच्चे का स्वभाव कुछ दब्बू किस्म का हो जाता है , उसकी इस स्थिति को ठीक करने के लिए बालक की संगति पर ध्यान देना होगा। उसे उन बच्चों के साथ अधिकांश समय व्यतीत करना चाहिए , जिन बच्चों का जन्म पूर्णिमा के आसपास हुआ हो। उन बच्चों की उच्छृंखलता को देखकर उनके बाल मन का मनोवैज्ञानिक विकास भी कुछ अच्छा होजाएगा। इसके विपरीत यदि उन्हें अमावस्या के निकट जन्म लेनेवाले बच्चों के साथ ही रखा जाए तो बालक अधिक दब्बू किस्म का हो जाएगा। इसी प्रकार अधिक उच्छृंखल बच्चों को अष्टमी के आसपास जन्म लेनेवाले बच्चों के साथ रखकर उनके स्वभाव को संतुलित बनाया जा सकता है। इसी प्रकार व्यवसाय , विवाह या अन्य मामलों में अपने कमजोर ग्रहों के प्रभाव को कम करने या अपने कमजोर भावों की समस्याओं को कम करने के लिए सामने वाले के यानि मित्रों या जीवनसाथी की जन्मकुंडली में उन ग्रहों या मुद्दों का मजबूत रहना अच्छा होता है। इसके अलावे ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए हमारे धर्मशास्त्रों में हर तिथि पर्व पर स्नानादि के पश्चात् दान करने के बारे में बताया गया है।प्राचीनकाल से ही दान का अपना महत्व रहा है , परंतु दान किस प्रकार का किया जाना चाहिए , इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। दान के लिए शुद्ध द्रब्य का होना अनिवार्य है । दान के लिए सुपात्र वह व्यक्ति है , जो अनवरत किसी क्रियाकलाप में संलग्न होते हुए भी अभावग्रस्त है। दुष्कर्म या पापकर्म करनेवाले या आलसी व्यक्ति को दान देना बहुत बड़ा पाप होता है । यदि दान के नाम पर आप ठगे जाते हैं , तो इसका पुण्य आपको नहीं मिलेगा। इसलिए दान का उचित फल प्राप्त करने के लिए आप दान करते या देते समय ध्यान रखें कि दान उस सुपात्र तक पहुंच सके , जहॉ इसका उचित उपयोग हो सके।ऐसे में आपको सर्वाधिक फल की प्राप्ति होगी।साथ ही अपनी कुंडली के अनुसार ही उसमें जो ग्रह कमजोर हो , उसको मजबूत बनाने के लिए दान करना चाहिए। जातक का चंद्रमा कमजोर हो , तो अनाथाश्रम को दान करना चाहिए , खासकर 12 वर्ष से कम उम्र के अभावग्रस्त और जरुरतमंद बच्चों को दिए जानेवाले दान से उनका काफी भला होगा। जातक का बुध कमजोर हो तो उन्हें विद्यार्थियों को या किसी प्रकार के रिसर्च कार्य में लगे व्यक्ति को सहयोग देना चाहिए। जातक का मंगल कमजोर हो , तो उन्हें युवाओं की मदद और कल्याण के लिए कार्यक्रम बनाने चाहिए। जातक का शुक्र कमजोर हो तो उनके लिए कन्याओं के विवाह में सहयोग करना अच्छा रहेगा। सूर्य कमजोर हो तो प्राकृतिक आपदाओं में पड़नेवालों की मदद की जा सकती है। बृहस्पति कमजोर हो तो अपने माता पिता और गुरुजनों की सेवा से लाभ प्राप्त जोकिया जा सकता है। शनि कमजोर हो तो वृद्धाश्रम को दान करें या अपने आसपास के जरुरतमंद अतिवृद्ध की जरुरतों को पूरा करने की कोशिश करें। राहु के लिए कुष्ठ आश्रम में दान दे। केतु के लिए विकलांग अपाहिज, सफाईकर्मचारी जो जरुरतमंद हो
गुरुवार, 26 सितंबर 2019
ज्योतिष विद्या : विज्ञान या अंधविश्वास
ज्योतिष विज्ञान है या अंधश्वास , इस प्रश्न का उत्तर दे पाना समाज के किसी भी वर्ग के लिए आसान नहीं है। परंपरावादी और अंधविश्वासी विचारधारा के लोग ,जो कई स्थानों पर ज्योतिष पर विश्वास करने के कारण धोखा खा चुकें हैं ,भी इस शास्त्र पर संदेह नहीं करते। सारा दोषारोपण ज्योतिषी पर ही होता है। वैज्ञानिकता से संयुक्त विचारधारा से ओत-प्रोत व्यक्ति भी किसी मुसीबत में फंसते ही समाज से छुपकर ज्योतिषियों की शरण में जाते देखे जाते हैं। ज्योतिष की इस विवादास्पद स्थिति के लिए मै सरकार ,शैक्षणिक संस्थानों एवं पत्रकारिता विभाग को दोषी मानता हूं।
शनिवार, 21 सितंबर 2019
भारत की कुंडली
मित्रों मुझे बहुत दुख होता है जब मैं देखता हूं बड़े बड़े अच्छे नाम वाले ज्योतिषी सदियों से लोगों को गुमराह कर रहे हैं राशिफल के नाम पर और भी जाने क्या-क्या और अब मैं देख रहा हूं कि 15 अगस्त भारतदेश की कुंडली की बात हो रही है जो हर साल होती है तो उसको लेकर मेरे क्या विचार हैं आइए जानते हैंभारतवर्ष की कुंडली का विश्लेषण समय-समय पर ज्योतिषीगण करते ही रहते हैं। आज मैं इस मुद्दे पर अपना मत प्रकट कर रहा हूं- जड़ वस्तु का ज्योतिषीय विश्लेषण नहीं-
राहु की संगत बनाम शक्तीकीरंगत
कुंडली मे राहु जिस ग्रह के साथ गोचर करता है या जिस ग्रह के साथ जन्म समय से विराजमान होता है वही शक्ति जीवन के अन्दर काम करने के लिये मानी जाती है। घर की छत की शक्ति होती है कि वह हवा पानी धूप से रक्षा करती है,छतरी की शक्ति होती है कि वह पानी और धूप से शरीर को बचाती है,धूप की शक्ति होती है कि वह शरीर मे गर्मी पहुंचाती है,बरसात की शक्ति होती है कि वह शरीर को भीगने का सुख देती है,सर्दी की शक्ति होती है कि वह शरीर को ठंडा रखने का सुख देती है। यानी जहां जहां शक्ति है वहां वहां राहु की छाया है,घर की छत को भी राहु की उपाधि दी जाती है तो छतरी को भी राहु कहा जाता है,सूर्य की छाया यानी धूप भी राहु की श्रेणी मे आजाती है चन्द्रमा की शीतलता भी राहु की श्रेणी मे गिनी जाती है. इस प्रकार से जब ब्रह्माण्ड का कारक राहु ही है तो राहु से डरने का कारण क्या हो सकता है। जब राहु जिस ग्रह के साथ होता है तो उस ग्रह के बारे मे असीमित भावना को भर देता है,वह भावना अगर जन्म के राहु से टकरा रही है तो वह एक अमिट छाप यानी मोहर को लगा देती है।
शुक्रवार, 20 सितंबर 2019
गोचर मैं सिंह राशि में मंगल के प्रति फलादेश
वर्तमान मे मंगल का गोचर सूर्य की राशि मे चल रहा है,यह कारण सरकारी क्षेत्र मे और राजनीति में जिद्दी होने की बात को प्रकट करता है,सबसे पहले जिद्दी शब्द की व्याख्या करना जरूरी है। जब किसी कार्य मे परेशानी का कारण पैदा होने लगता है तो उस कार्य को जबरदस्ती करने की दिमाग मे आती है,बाकी के सभी कार्य छोड कर एक ही कार्य करने की जिद दिमाग मे पैदा हो जाती है। इससे व्यक्ति रूप मे भी दिमाग मे जिद्दीपन आजाता है,और व्यक्ति के आसपास के जो कार्य होते है उनके अन्दर परेशानी का कारण पैदा होना शुरु हो जाता है। काल पुरुष के अनुसार मंगल का स्थान संतान परिवार विद्या बुद्धि मनोरंजन जल्दी से धन कमाने के क्षेत्र खेलकूद के प्रति की जाने वाली भावना माता के परिवार माता के धन पिता के द्वारा रिस्क लेकर किये जाने वाले कार्य जीवन साथी के मित्र आदि के भाव मे इस मंगल का गोचर करना माना जाता है। इन सभी कारणो मे किसी न किसी प्रकार की उत्तेजना के कारण दिक्कत का होना माना जा सकता है। इन कारणो मे सरकार का परिवार का सन्तान का और इसी प्रकार के कारको का मानसिक तनाव भी माना जा सकता है। इन्ही क्षेत्रो मे कार्य करने वाले लोग किसी न किसी प्रकार से आहत भी होते है और चोट आदि के द्वारा दिक्कत भी उठाते है। मंगल खून की गर्मी का कारक है इस कारण से गुस्सा का बढना भी माना जाता है,जब कोई बढचढ कर बात करने के लिये अपनी मानसिकता को आगे रखता है या ताव खाता है तो अभिमान की मात्रा बढने से लडाई झगडे की नौबत भी आजाती है। अगर जातक की कुंडली में सूर्य भी इसी स्थान मे है तो जातक के पिता के प्रति यही धारणा मानी जा सकती है पुत्र के प्रति भी यही कारण माना जा सकता है इन दोनो को किसी प्रकार चोट आदि से पेट सम्बन्धी दिक्कत का होना भी माना जा सकता है.अगर इस भाव मे चन्द्रमा है तो जातक की माता को परेशानी का कारण पैदा होता है जनता के अन्दर किसी न किसी बात पर गुस्सा आता है और तोड फ़ोड जैसे कारण पैदा हो जाते है। शासन मे कोई स्त्री शासक यात्रा आदि मे अपने बिजी रखता है,परिवार मे भाई की यात्रा का कारण भी माना जा सकता है,इस युति से उतावलापन भी देखने को मिलता है। अगर इसी स्थान मे बुध है तो मानसिक अशान्ति और और दुश्मनी मे बढोत्तरी होने लगती है जो मित्र होते है वह भी अधिक अभिमान या अहम के कारण शत्रु बनने लगते है,पेट सम्बन्धी बीमारी का होना भी माना जा सकता है। अगर इस भाव मे गुरु के साथ मंगल का गोचर होता है तो जातक के अन्दर जितनी विद्या है उससे अधिक बात करने का कारण बनता है और कार्य के अन्दर जाकर वह झूठा अहम खत्म हो जाता है इसलिए अपमान भी होता है और अगर स्त्री की कुंडली मे यह युति बनती है तो उसके पति का यात्रा वाला या स्थान परिवर्तन का योग बनता है। वैसे उन्नति का समय भी माना जा सकता है। गोचर से जब मंगल इस भाव मे शुक्र पर आता है तो जान पहिचान मे बढोत्तरी होने की बात भी मिलती है सम्बन्धी घर आने लगते है,उत्सव आदि होने की बात भी होती है स्त्री जातक की कुंडली मे पति को लाभ होता है और भाई को किसी स्त्री से जान पहिचान का कारण भी माना जा सकता है। यही मंगल जब शनि पर गोचर करता है तो नौकरी आदि मे परेशानी देने का कारण बनता है किसी उच्च अधिकारी से मनमुटाव हो जाता है और धन की भी हानि होने का कारण बनता है यह बात अक्सर कार्य के अन्दर अधिक तकनीक लगाने और अपनी बात को उत्तेजना मे आगे रखने का कारण बनता है,यही पर राहु का असर होता है तो जातक के भाई पर परेशानी का कारण पैदा होता है जिद मे बढोत्तरी होती है पेट के अन्दर गैस का बनना और पाचन क्रिया का खराब होना भी माना जा सकता है,केतु के साथ मंगल का गोचर होने से भाई के अक्समात धार्मिक बनने की बात भी मानी जा सकती है या पति का किसी प्रकार से धर्म के प्रति लगाव शुरु हो जाता है आचार्य राजेश
मंगलवार, 17 सितंबर 2019
वक्रीशनि मार्गी शनि
शनि बुधवार, 18 सितंबर को ग्रहों का न्यायाधीश शनि अपनी चाल बदलेगा। ये ग्रह अभी धनु राशि में वक्री है। 18 तारीख के बाद मार्गी हो जाएगाजब शनि मार्गी हो जाएगा, तब सिर्फ राहु-केतु ही वक्री रहेंगे, क्योंकि ये दोनों ग्रह हमेशा वक्री ही रहते हैं।
काम करे ना करवावन देई,केवल आवन जावन लेई.
खुद के घर में वक्री रहता,देश से जाय विदेश में रहता,
जब कभी घर आवन होई,दस पांच साल में वापिस कोई"
शनि की आदतों से नही शनि की नजर से डरा जाता है,शनि की नजर जहाँ भी पड जाती है उसका कल्याण होना निश्चित है,मार्गी शनि पानी वाला सांप माना जाता है तो वक्री शनि जहरीला सांप और अस्त शनि को शेषनाग की उपाधि दी जाती है। कुंडली के त्रिक भाव में अगर शनि है तो बिना अपना असर दिये नही जाता है लेकिन शनि की आदत है कि वह अगर अपने इष्ट देव चाहे जो भी हों या अपने माता पिता की सेवा में रहता है,तो उसके ऊपर यह अपना असर कम ही करते हैं। जब शनि कुंडली में मार्गी होता है तो शरीर से मेहनत करवाता है और जो भी काम करवाता है उसके अन्दर पसीने को निकाले बिना भोजन भी नहीं देता है और जब किया सौ का जाय तो मिलता दस ही है,इसके साथ ही शरीर के जोड़ जोड़ को तोड़ने के लिए अपनी पूरी की पूरी कोशिश भी करता है,रहने के लिए अगर निवास का बंदोबस्त किया जाए तो मजदूरों से काम करवाने की बजाय खुद से भी मेहनत करवाता है तब जाकर कोई छोटा सा रहने वाला मकान बनवा पाता है,जब कोई कार्य करने के लिए अपने को साधनों की तरफ ले जाता है तो साधन या तो वक्त पर खराब हो जाते है या साधन मिल ही नहीं पाते है,मान लीजिये किसी को घर बनवाने के लिए सामान लाना है,सामान लाते हुए घर के पास ही या तो साधन खराब हो जाएगा जिससे आने वाले सामान को घर तक लाना भी है और साधन भी ख़राब है या रास्ता ही खराब है उस समय मजदूरी से अगर उस सामान को लाया जाता है तो वह मजदूरी इतनी देनी पड़ती है जिससे मकान को बनवाने के लिए जो बजट है वह फेल हो रहा है इस लोभ के कारण सामान को खुद ही घर बनाने के स्थान तक ढोने के लिए मजबूर होना पड़ता है,इसके बाद अगर किसी बुद्धि का प्रयोग भी किया जाए तो कोई न कोई रोड़ा आकर अपनी कलाकारी कर जाता है,जैसे कोई आकर कह जाता है कि अमुक समय पर उसका वह काम करवा देगा लेकिन खुद भी नहीं आता है और भरोसे में रखकर काम को करने भी नहीं देता है,यह मार्गी शनि का कार्य होता है,इसी प्रकार से मार्गी शनि एक विषहीन सांप की भांति भी काम करता है,विषहीन सांप से कोई डरता नहीं है उसे लकड़ी से उछल कर हाथ से पकड़ कर शरीर को तोड़ने का काम करता हैउसी जगह वक्री शनि बुद्धि से काम करने वाला होता है जैसे जातक को घर बनवाना है तो वह अपनी बुद्धि से साधनों का प्रयोग करेगा,पहले किसी व्यक्ति को नियुक्त कर देगा फिर उसे अपनी बुद्धि के अनुसार किये जाने वाले काम का मेहनताना देगा,जो मेहनताना दिया जा रहा है उसकी जगह पर वह दूसरा कोई काम बुद्धि से करेगा जिससे दिया जाने वाला मेहनताना आने भी लगेगा और दिया भी जाएगा जिससे खुद के लिए भी मेहनत नहीं करनी पडी और नियुक्त किये गए व्यक्ति के द्वारा काम भी हो गया,इस प्रकार से बुद्धि का प्रयोग करने के बाद जातक खुद मेहनत नहीं करता है दूसरो से बुद्धि से करवाकर धन को भी बचाता है,वक्री शनि का रूप जहरीले सांप की तरह से होता है वह पहले तो सामने आता ही नहीं है और अगर छेड़ दिया जाए तो वह अपने जहर का भी प्रयोग करता है और छेड़ने वाले व्यक्ति को हमेशा के लिए याद भी करता है,इस शनि के द्वारा मेहनत कास लोगों के लिए भी समय समय पर आराम करने और मेहनत करने के लिए अपने बल को देता है जैसे मार्गी शनि जब वक्री होता है तो मेहनत करने वाले लोग भी दिमागी काम को करने लगते है और जब वक्री शनि वाले जातको की कुंडली में वक्री होता है तो दिमागी काम की जगह पर मेहनत वाले काम करने की योजना को बनाकर परेशानी में डाल देता है.जब शनि अपने ही घर में वक्री होकर बैठा हो तो वह पैदा होने वाले स्थान से उम्र की दूसरे शनि वाले दौर में शनि का एक दौर पैंतीस साल का माना जाता है विदेश में फेंक देता है,जब कभी जातक को पैदा होने वाले स्थान में भेजता है और जल्दी ही वापस बुलाकर फिर से विदेश में अपनी जिन्दगी को जीने के लिए मजबूर कर देता है,इसके साथ ही शनि की आदत है कि वह कभी भी स्त्री जातक के साथ बुरा नहीं करता है वह हमेशा पुरुष जातक और अपने ऊपर धन बल शरीर बल बुद्धि बल रखने वाले लोगों पर बुरा असर उनके बल को घटाने और वक्त पर उनके बल को नीचा करने का काम भी करता है,घर में जितना असर पुत्र जातक को खराब देता है उतना ही अच्छा बल पुत्री जातक को देता है,लेकिन वक्री शनि से पुत्री जातक अपने देश काल और परिस्थिति से दूर रहकर विदेशी परिवेश को ही सम्मान और चलन में रखने के लिए भी माना जाता है.
🏡 **छत पर पानी की टंकी: क्या सिर्फ दक्षिण-पश्चिम (South-West) ही सही है? रटे-रटाए नियमों से बाहर निकलें और असली विज्ञान समझें!** 🏡
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लक्ष्मी योग शुभ ग्रह बुध और शुक्र की युति से बनने वाला योग है।बुध बुद्धि-विवेक, हास्य का कारक है तो शुक्र सौंदर्य, भोग विलास कारक है।अब ये द...
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दशम भाव ज्योतिष भाव कुडंली का सबसे सक्रिय भाव है| इसे कर्म भाव से जाना जाता है क्यूंकि ये भाव हमारे समस्त कर्मों का भाव है| जीवन में हम सब क...
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https://youtu.be/I6Yabw27fJ0 मंगल और राहूजब राहु और मंगल एक ही भाव में युति बनाते हैं, तो वह मंगल राहु अंगारक योग कहलाता है। मंगल ऊर्जा का स...
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मालव्य योग को यदि लक्ष्मी योगों का शिरोमणी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं। मालव्य योग की प्रशंसा सभी ज्योतिष ग्रन्थों में की गई है। यह योग शुक्...
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https://youtu.be/9VwaX00qRcw ये सच है कि हर रत्न इस धरती पर मौजूद हर व्यक्ति को शोभा नहीं देता है. इसे पहनने के लिए ज्योतिष की सलाह आवश्यक ह...
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आचार्य राजेश ईस बार मलमास 15 दिसंबर से आरंभ हो रहा है जो 14 जनवरी 2018तक रहेगा। मलमास के चलते दिसंबर के महीने में अब केवल 5 दिन और विवाह मुह...
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मित्रों आज वात करते हैं फिरोजा रतन की ग्रहों के प्रभाव को वल देने के लिए या फिर उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए ज्योतिष विज्ञान द्वारा विभि...
















