मित्रों हर चीज हमारे नियंत्रण में नही है। हम मेहनत तो बहुत करते है परन्तु सबको एक जैसा फल नहीं मिलता, कोई बीमार है, कोई आर्थिक तंगी का शिकार है, किसी की शादी नही हो रही और किसी को नौकरी नही मिल रही तो कोई व्यापार में घाटा उठा रहा है, कोई पाप करता है और फिर भी मजे से जिन्दगी काटता है और कोई बहुत शुभ कर्म करता है तब भी कष्ट उठा रहा है, वैसे तो आजकल भाग्य और ज्योतिष को निरर्थक और अनपढ़ लोगो की विद्या समझ कर नकार दिया जाता है लेकिन जब हम अभी कही गयी बातों का लगातार शिकार होते है, तब हमे लगता है कि इस संसार में भाग्य नाम की एक चीज भी है। जन्म कुंडली में बारह खाने बने होते हैं जिन्हें भाव कहा जाता है। शास्त्रों में 12 भावों के स्वरूप हैं और भावों के नाम के अनुसार ही इनका काम होता है। पहला भाव तन, दूसरा धन, तीसरा सहोदर, चतुर्थ मातृ, पंचम पुत्र, छठा अरि, सप्तम जाया, आठवाँ आयु, नवम धर्म, दशम कर्म, एकादश आय और द्वादश व्यय भाव कहलाता है़।कुंडली मे जीवन की यात्रा पहले भाव से शुरु होती है,चौथे भाव तक शरीर का पालन पोषण किया जाता है और पहली यात्रा शुरु हो जाती है सप्तम भाव तक पहली यात्रा चलती है,सप्तम के बाद जीवन की दूसरी यात्रा शुरु होती है जो दसवे भाव तक चलती है,दसवे से तीसरी और अन्तिम यात्रा शुरु हो जाती है जो दुबारा से जीवन को देने के लिये पहले तक अपनी यात्रा को जारी रखने के लिये माना जाता है.इस प्रकार से जीवन की यात्रायें क्रम से चलती रहती है,शरीर बदल जाते है योनि बदल जाती है कर्मो के अनुसार जीवन का क्षेत्र बदल जाता है। अच्छे काम जीवन की यात्रा मे किये जाते है तो अच्छी योनि की प्राप्ति हो जाती है बुरे काम किये जाते है तो बुरी योनि की प्राप्ति हो जाती है। अच्छे और बुरे दोनो प्रकार के कार्य किये जाते है तो अच्छे और बुरे दोनो प्रकार के सम्मिलित परिणाम मिलते रहते है। शरीर परिवार जीवन साथी और दुनियादारी यह चार रास्ते हर जीव के प्रति अपने विचार चार रास्तों की तरह से होते है और इन चारो के मिलने के स्थान को चौराहे से जोड कर देखा जा सकता है। जो व्यक्ति जिस रास्ते पर जा रहा होता है वह अपने रास्ते को अगर लगातार दाहिनी तरफ़ लेकर चला जाता है तो वह पहले परिवार मे चलेगा फ़िर जीवन साथी के साथ चलेगा और बाद मे जगत व्यवहार को लेकर चलने के बाद वापस फ़िर से जीवन के प्रति आकर नया जीवन शुरु कर देगा,यह मान्यता जगत मे मान्य है और वैदिक तथा शास्त्रीय रीति से इसे उत्तम रास्ता कहा जाता है। इसके विपरीत दूसरा व्यक्ति अपने लगातार बायीं तरफ़ लेकर चलेगा तो वह पहले जगत व्यवहार को देखना शुरु कर देगा और फ़िर जीवन साथी और बाद मे परिवार की तरफ़ देखकर दुबारा से शरीर के प्रति आकर नया जन्म लेगा और दुबारा से अपनी सृष्टि क्रम का साझेदार बन जायेगा। इस प्रकार से दो प्रकार के भाव जीवन मे माने जाते है।सुबह जागने के बाद व्यक्ति के अन्दर कई प्रकार के भाव पैदा होते है जो उसे पूरे दिन के लिये अपनी चेतन और अचेतन मन के द्वारा प्रकट किये जाते है। वह किस क्षेत्र मे अपने को ले जायेगा वह विचार उसे या तो अपने दिमाग से लेकर चलना पडता है अथवा दूसरे लोग उसके मन को अधिग्रहण करने के बाद चलाने के लिये माने जाते है। जो लोग अपने मन से चलते है वे अक्सर बायीं ओर चलने वाले माने जाते है और जो दूसरों के प्रति दूसरों की धारणा से चलते है वे दाहिनी तरफ़ चलने वाले लोगों के जैसे माने जाते है। जब उन्नति और अवनति क कारण देखा जाता है तो दाहिनी तरफ़ वाले व्यक्ति तो जगत के व्यवहार को पहले नही देखते है वे परिवार की सहायता से फ़िर जीवन साथी की सहायता से जगत व्यवहार को समझने की चेष्टा करते है और उन्हे भावी कष्ट ही मिलते है लेकिन जो दाहिनी तरफ़ चलने वाले लोग होते है वे सीधे से जगत व्यवहार से जुडते है और उन्हे स्वार्थी जगत की श्रेणी मे पहले से ही निपटना होता तो वे अपने जगत व्यवहार से अपने जीवन साथी को भी केवल आदेश से ही लेकर चलते है और अपने परिवार को भी आदेश से लेकर चलने के लिये माने जाते है इस प्रकार से वे जगत व्यवहार के आगे अपने वास्तविक मूल्य को भूल कर केवल जगत व्यवहार के लिये ही होकर रह जाते है,उन्हे अपने जीवन का वास्तविक रास्ता नही मिलता है जो मिलता है वह स्वार्थ की रीति से ही मिलता है। जैसे जगत व्यवहार का रास्ता खत्म हो जाता है तो जीवन साथी भी अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिये साथ चलता है और जैसे ही जीवन साथी का स्वार्थ पूरा हो जाता है व्यक्ति अपने परिवार के ऊपर निर्भर होकर रह जाता है एक समय ऐसा भी आता है जब व्यक्ति निराट अकेला रहकर अपने द्वारा लोगों की छल वाली नीतियों के प्रति सोचता हुआ अन्तगति को प्राप्त करता है और दूसरे जीवन मे अपनी उसी नीति को धारणा मे लेकर चलता है,उस धारणा के अन्दर जो पहले जीवन की अनुभूति होती है वह दूसरे जीवन मे बदली हुयी होती है पहले जैसे उसे ठगा गया था वह दूसरों को ठगना शुरु कर देता है और जब जीवन साथी का क्षेत्र आता है तो वह जीवन साथी के स्वार्थ को भी अपनी चाहत से ठगने की बात सोचता है और स्वार्थी भावना के रहते उसे केवल अपनी स्वार्थो की पूर्ति के लिये ही प्रयोग मे लाता है अन्त मे अपने परिवार को भी ठग कर दूसरी दुनिया मे अपने को लेजकर किसी ऐसे क्षेत्र को पकडता है जहां उसके जान पहिचान या कोई सगा सम्बन्धी नही होता है वह अपने को अकेला रखकर अन्तगति को प्राप्त करता है।इस यात्रा क्रम को कई लोग बीच मे बदल लेते है और वे जो दाहिने चलने वाले होते है वे अपने को बायें चलाने लगते है और बायें चलने वाले दाहिने चलने के लिये भी माने जाते है कई लोग ऐसे भी होते है जो अपने को बीच मे ही रोकर एक जगह पर स्थापित कर लेते है फ़िर उनका जीवन के रहते हुये कोई मकसद नही होता है। या तो वे नितान्त अकेले रहकर जीवन को निकालते है या अपने को दूसरो के भरोसे छोड कर पडे रहते है। जो लोग अकेले पडे रहते है उनके अन्दर या तो खुद का अहम भरा हुआ होता है या वे किसी के अहम के शिकार हो गये होते है। जो अहम के शिकार हुये होते है वे हर बात से अपने अन्दर शक्तिहीन मानने लगते है और जो अपने अहम से अकेले पडे रहते है वे दूसरो को शक्तिहीन समझने लगते है। लेकिन दोनो ही बातो में दम नही होता है कारण जीव अपनी शक्ति को लेकर पैदा होता है और अपनी शक्ति का प्रयोग करने के बाद ही अपनी गति को समेट लेता है। अगर उसके अन्दर अहम की भावना आजाती है तो वह अपने चलते हुये जीवन क्रम को बिगाडने का क्रम ही पैदा करता है उसे अपनी शक्ति के आगे दूसरे की शक्ति की आभास नही हो पाता है। यही बात उन लोगो के लिये भी पैदा होती है जो अपने को दूसरो का अहम का शिकार बनाकर पडे रहते है उन्हे अपनी शक्ति का आभास नही हो पाता है।
आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
मंगलवार, 14 जनवरी 2020
जीवन यात्रा: Life Through the Lens of Jyotish
मित्रों हर चीज हमारे नियंत्रण में नही है। हम मेहनत तो बहुत करते है परन्तु सबको एक जैसा फल नहीं मिलता, कोई बीमार है, कोई आर्थिक तंगी का शिकार है, किसी की शादी नही हो रही और किसी को नौकरी नही मिल रही तो कोई व्यापार में घाटा उठा रहा है, कोई पाप करता है और फिर भी मजे से जिन्दगी काटता है और कोई बहुत शुभ कर्म करता है तब भी कष्ट उठा रहा है, वैसे तो आजकल भाग्य और ज्योतिष को निरर्थक और अनपढ़ लोगो की विद्या समझ कर नकार दिया जाता है लेकिन जब हम अभी कही गयी बातों का लगातार शिकार होते है, तब हमे लगता है कि इस संसार में भाग्य नाम की एक चीज भी है। जन्म कुंडली में बारह खाने बने होते हैं जिन्हें भाव कहा जाता है। शास्त्रों में 12 भावों के स्वरूप हैं और भावों के नाम के अनुसार ही इनका काम होता है। पहला भाव तन, दूसरा धन, तीसरा सहोदर, चतुर्थ मातृ, पंचम पुत्र, छठा अरि, सप्तम जाया, आठवाँ आयु, नवम धर्म, दशम कर्म, एकादश आय और द्वादश व्यय भाव कहलाता है़।कुंडली मे जीवन की यात्रा पहले भाव से शुरु होती है,चौथे भाव तक शरीर का पालन पोषण किया जाता है और पहली यात्रा शुरु हो जाती है सप्तम भाव तक पहली यात्रा चलती है,सप्तम के बाद जीवन की दूसरी यात्रा शुरु होती है जो दसवे भाव तक चलती है,दसवे से तीसरी और अन्तिम यात्रा शुरु हो जाती है जो दुबारा से जीवन को देने के लिये पहले तक अपनी यात्रा को जारी रखने के लिये माना जाता है.इस प्रकार से जीवन की यात्रायें क्रम से चलती रहती है,शरीर बदल जाते है योनि बदल जाती है कर्मो के अनुसार जीवन का क्षेत्र बदल जाता है। अच्छे काम जीवन की यात्रा मे किये जाते है तो अच्छी योनि की प्राप्ति हो जाती है बुरे काम किये जाते है तो बुरी योनि की प्राप्ति हो जाती है। अच्छे और बुरे दोनो प्रकार के कार्य किये जाते है तो अच्छे और बुरे दोनो प्रकार के सम्मिलित परिणाम मिलते रहते है। शरीर परिवार जीवन साथी और दुनियादारी यह चार रास्ते हर जीव के प्रति अपने विचार चार रास्तों की तरह से होते है और इन चारो के मिलने के स्थान को चौराहे से जोड कर देखा जा सकता है। जो व्यक्ति जिस रास्ते पर जा रहा होता है वह अपने रास्ते को अगर लगातार दाहिनी तरफ़ लेकर चला जाता है तो वह पहले परिवार मे चलेगा फ़िर जीवन साथी के साथ चलेगा और बाद मे जगत व्यवहार को लेकर चलने के बाद वापस फ़िर से जीवन के प्रति आकर नया जीवन शुरु कर देगा,यह मान्यता जगत मे मान्य है और वैदिक तथा शास्त्रीय रीति से इसे उत्तम रास्ता कहा जाता है। इसके विपरीत दूसरा व्यक्ति अपने लगातार बायीं तरफ़ लेकर चलेगा तो वह पहले जगत व्यवहार को देखना शुरु कर देगा और फ़िर जीवन साथी और बाद मे परिवार की तरफ़ देखकर दुबारा से शरीर के प्रति आकर नया जन्म लेगा और दुबारा से अपनी सृष्टि क्रम का साझेदार बन जायेगा। इस प्रकार से दो प्रकार के भाव जीवन मे माने जाते है।सुबह जागने के बाद व्यक्ति के अन्दर कई प्रकार के भाव पैदा होते है जो उसे पूरे दिन के लिये अपनी चेतन और अचेतन मन के द्वारा प्रकट किये जाते है। वह किस क्षेत्र मे अपने को ले जायेगा वह विचार उसे या तो अपने दिमाग से लेकर चलना पडता है अथवा दूसरे लोग उसके मन को अधिग्रहण करने के बाद चलाने के लिये माने जाते है। जो लोग अपने मन से चलते है वे अक्सर बायीं ओर चलने वाले माने जाते है और जो दूसरों के प्रति दूसरों की धारणा से चलते है वे दाहिनी तरफ़ चलने वाले लोगों के जैसे माने जाते है। जब उन्नति और अवनति क कारण देखा जाता है तो दाहिनी तरफ़ वाले व्यक्ति तो जगत के व्यवहार को पहले नही देखते है वे परिवार की सहायता से फ़िर जीवन साथी की सहायता से जगत व्यवहार को समझने की चेष्टा करते है और उन्हे भावी कष्ट ही मिलते है लेकिन जो दाहिनी तरफ़ चलने वाले लोग होते है वे सीधे से जगत व्यवहार से जुडते है और उन्हे स्वार्थी जगत की श्रेणी मे पहले से ही निपटना होता तो वे अपने जगत व्यवहार से अपने जीवन साथी को भी केवल आदेश से ही लेकर चलते है और अपने परिवार को भी आदेश से लेकर चलने के लिये माने जाते है इस प्रकार से वे जगत व्यवहार के आगे अपने वास्तविक मूल्य को भूल कर केवल जगत व्यवहार के लिये ही होकर रह जाते है,उन्हे अपने जीवन का वास्तविक रास्ता नही मिलता है जो मिलता है वह स्वार्थ की रीति से ही मिलता है। जैसे जगत व्यवहार का रास्ता खत्म हो जाता है तो जीवन साथी भी अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिये साथ चलता है और जैसे ही जीवन साथी का स्वार्थ पूरा हो जाता है व्यक्ति अपने परिवार के ऊपर निर्भर होकर रह जाता है एक समय ऐसा भी आता है जब व्यक्ति निराट अकेला रहकर अपने द्वारा लोगों की छल वाली नीतियों के प्रति सोचता हुआ अन्तगति को प्राप्त करता है और दूसरे जीवन मे अपनी उसी नीति को धारणा मे लेकर चलता है,उस धारणा के अन्दर जो पहले जीवन की अनुभूति होती है वह दूसरे जीवन मे बदली हुयी होती है पहले जैसे उसे ठगा गया था वह दूसरों को ठगना शुरु कर देता है और जब जीवन साथी का क्षेत्र आता है तो वह जीवन साथी के स्वार्थ को भी अपनी चाहत से ठगने की बात सोचता है और स्वार्थी भावना के रहते उसे केवल अपनी स्वार्थो की पूर्ति के लिये ही प्रयोग मे लाता है अन्त मे अपने परिवार को भी ठग कर दूसरी दुनिया मे अपने को लेजकर किसी ऐसे क्षेत्र को पकडता है जहां उसके जान पहिचान या कोई सगा सम्बन्धी नही होता है वह अपने को अकेला रखकर अन्तगति को प्राप्त करता है।इस यात्रा क्रम को कई लोग बीच मे बदल लेते है और वे जो दाहिने चलने वाले होते है वे अपने को बायें चलाने लगते है और बायें चलने वाले दाहिने चलने के लिये भी माने जाते है कई लोग ऐसे भी होते है जो अपने को बीच मे ही रोकर एक जगह पर स्थापित कर लेते है फ़िर उनका जीवन के रहते हुये कोई मकसद नही होता है। या तो वे नितान्त अकेले रहकर जीवन को निकालते है या अपने को दूसरो के भरोसे छोड कर पडे रहते है। जो लोग अकेले पडे रहते है उनके अन्दर या तो खुद का अहम भरा हुआ होता है या वे किसी के अहम के शिकार हो गये होते है। जो अहम के शिकार हुये होते है वे हर बात से अपने अन्दर शक्तिहीन मानने लगते है और जो अपने अहम से अकेले पडे रहते है वे दूसरो को शक्तिहीन समझने लगते है। लेकिन दोनो ही बातो में दम नही होता है कारण जीव अपनी शक्ति को लेकर पैदा होता है और अपनी शक्ति का प्रयोग करने के बाद ही अपनी गति को समेट लेता है। अगर उसके अन्दर अहम की भावना आजाती है तो वह अपने चलते हुये जीवन क्रम को बिगाडने का क्रम ही पैदा करता है उसे अपनी शक्ति के आगे दूसरे की शक्ति की आभास नही हो पाता है। यही बात उन लोगो के लिये भी पैदा होती है जो अपने को दूसरो का अहम का शिकार बनाकर पडे रहते है उन्हे अपनी शक्ति का आभास नही हो पाता है।
शनिवार, 11 जनवरी 2020
#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 2
मित्रों अपनी पिछली पोस्ट में मैंने जनवरी से लेकर अगस्त तक के मंदा तेजी बाजार के बारे में ग्रह गोचर को देखकर लिखा है उसको भी आप पढ़ सकते हैं इस पोस्ट में सितंबर से लेकर दिसंबर 2020 तक की मंदा -तेजी की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं September 2020#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 2
गुरुवार, 9 जनवरी 2020
#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 1
, शनि 11 तारीख से वक्री गति में चलेगा। इसी दिन कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करेगा। यह इस्पात (जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील), ऑटोमोबाइल्स (टीवीएस मोटर्स, मारुति), ऑटो सहायक (मदरसन), तेल, गैस और पेट्रोलिय (एचपीसीएल, बीपीसीएल, एमजीएल, आईजीएल) सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में मांग पैदा करेगा।13 तारीख को बुध रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र की कंपनियों को 13 तारीख को शुक्र के वृष राशि में वक्री गति करने के चलते मांग में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। फैशन, प्रसाधन सामग्री (कॉस्मेटिक्स) और तेजी से बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) के शेयरों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। 16 तारीख को पश्चिम में बुध का उदय होगा। इससे बाजार में तेजी आएगी। राहु और बुध 20 तारीख को मृगशिरा नक्षत्र में शुक्र ग्रह के साथ युति बनाएंगे। शेयर बाजार में 28 तारीख तक अस्थिरता की स्थित होने की संभावना है। मुनाफे की चाह में लंबे समय तक बाजार में पैसा लगाने वाले व्यापारियों (Long side traders) को हर बढ़त पर मुनाफा कमाने की कोशिश करनी चाहिये। 29 तारीख को, शुक्र के वक्री होने और सूर्य और शुक्र पर उग्र ग्रह मंगल की दृष्टि होने के कारण स्पॉट एंड इक्विटी मार्केट का ग्राफ ऊपर की ओर जाएगा।शेयर बाज़ार में तेजी आने की संभावना है। स्टील, तेल, फार्मा, उर्वरक, चाय, कॉफी, भारी इंजीनियरिंग, सार्वजनिक क्षेत्र, पेट्रोलियम, रसायन, विद्युत समूह, तंबाकू, वाहन उद्योग, रिलायंस आदि से जुड़े क्षेत्र में उछाल आएगा। स्टॉक मार्केट इंडेक्स सभी रिकॉर्डों को पार करेगा और सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। मंदड़ियों को किसी भी प्रकार के निवेश या खरीदारी से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 3, 4, 5, 6, 8, 12, 17, 18, 19, 20, 23, 24, 25, 26 और 31 मई 2020
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August
August2020के अगस्त महीने की शुरुआत में ग्रहों की कई दिलचस्प घटनाएं होंगी।हालांकि, ग्रहों की स्थिति और चाल आपको मिलेजुले परिणाम दिलवा सकती है। ग्रहों की स्थिति के बारे में बात करें तो कुंडली का विश्लेषण करने के बाद देखा जा सकता है कि महीने की शुरुआत में सूर्य और बुध ग्रह कर्क राशि में रहेंगे, मंगल ग्रह मीन राशि में, बृहस्पति और प्लूटो ग्रह धनु राशि में, शुक्र और राहु ग्रह मिथुन राशि में, यूरेनस ग्रह मेष राशि में और नेपच्यून ग्रह कुंभ राशि में रहेगा । 17 तारीख को सूर्य और मंगल क्रमशः सिंह और मेष राशि में गोचर कर रहे हैं, जबकि 18 तारीख को बुध सिंह राशि में प्रवेश करेगा। शुक्र मिथुन राशि में राहु के साथ प्रवेश करेगा और केतु और बृहस्पति की युति पर इसकी विपरीत दृष्टि होगी। और ग्रह मंगल शुक्र और राहु की युति पर दृष्टि डालेगा। बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। समझदार व्यापारी हर बढ़त पर लाभ उठाएंगे। 4 तारीख को पुष्य नक्षत्र में बुध के आने से रजत-स्वर्ण में गिरावट देखने को मिलेगी। वाणिज्य और व्यापार का मुख्य ग्रह, बुध सूर्य के साथ अश्लेषा नक्षत्र में युति बनाएगा। गैस, खान (कोल इंडिया, वेदांता), किफायती आवास (आशियाना, एल्डेको) और सीमेंट (अल्ट्राटेक) सेक्टर के शेयरों में उछाल आएगा। हालांकि बाजार में तेजी की स्थिति की अचानक दिशा बदलने की संभावना है, क्योंकि मंगल मेष राशि में प्रवेश करके बुध पर दृष्टि डालकर बुध की स्थिति को कमजोर करेगा।14 तारीख से बैंकिंग और फाइनेंस, हिंदुस्तान लीवर, वनस्पती, और तंबाकू से संबंधित कंपनियों के स्टॉक की कीमतों में गिरावट आ सकती है, हालांकि जिन-जिन क्षेत्रों के शेयर मंगल, राहु और शनि द्वारा शासित होते है, उनके ग्राफ में निरंतर वृद्धि देखी जाएगी।कुल मिलाकर, 21 तारीख तक बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। 22 तारीख से, ग्रहों की स्थिति में परिवर्तन बाजार में मंदी की स्थिति को प्रभावित करेगा। खुदरा बाजार में 29 तारीख तक अपस्फीति का अनुभव होगा। महीने के अंतिम दिन शुक्र ग्रह का प्रवेश जल तत्व की राशि कर्क में होपर मंगल की दृष्टि होगी। यह संयोग तेजड़ियों के चहरों पर मुस्कानगा। यहां शुक्र लाएगा।
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 4, 6, 8, 12, 17, 19, 24 और 31 अगस्त 2020मंदी की अपेक्षित तिथि: 1, 2, 5, 10, 12, 15, 18, 22, 23, 27 और 29 अगस्त 2020
बुधवार, 8 जनवरी 2020
शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट 2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण
Acharya Rajesh: 7597718725/9414481324
जनवरी
ग्रह गोचर के अनुसारजनवरी महीने की शुरुआत में, सूर्य ग्रह, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु के साथ धनु राशि में स्थित रहेगा। वहीं मंगल ग्रह वृश्चिक राशि में रहेगा, राहु मिथुन राशि में रहेगा, शुक्र मकर राशि में रहेगा और चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और यूरेनस मेष राशि में रहेगा।
साल के पहले दिन धनु राशि में पांच ग्रहों (सूर्य, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु) का मिलन होगा। यह ग्रहों की यह युति तेजड़ियों के लिए अच्छी लग रही है। बुध साल 2020 के दूसरे दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा और सूर्य के साथ इसी नक्षत्र में बुध की युति होगी। शुरू में मामूली गिरावट के बाद कमोडिटीज और स्वर्ण-रजत मार्केट में तेजी देखने को मिलेगी। अष्टम घर में कुंभ राशि में शुक्र के आगमन के साथ, कपड़ा (रेमंड), एफएमसीजी (एचयूएल, आईटीसी) और चीनी (ईआईडी) के शेयरों में उछाल देखने को मिल सकता है, जबकि कपास, चीनी और घी से संबंधित स्टॉक में भी तेजी देखने को मिलेगी। 13 वें दिन बुध के मकर राशि में प्रवेश करते ही स्वर्ण और रजत सट्टेबाजों के प्रिय बन जाएंगे।पौष पूर्णिमा का महीना शुभ रह सकता है, जबकि माघ अमांत के दौरान मकर संक्रांति का समय अशुभ परिणाम दे सकता है। इसलिए, शेयर बाज़ार 2020 की भविष्यवाणियों के अनुसार इस महीने के अंत में बाज़ार में तेजी देखी जा सकती है। 18 जनवरी तक इस ग्राफ में उतार-चढ़ाव होगा, लेकिन बैंकिंग, वित्त, तंबाकू, चाय-कॉफी और औद्योगिक क्षेत्रों में शेयर बाज़ार में एकतरफा तेज़ी देखी जाएगी। साथ ही, 16 जनवरी से पब्लिक सेक्टर के शेयरों में वृद्धि होगी, और रबर उद्योग, कोयला, औद्योगिक, ऑटो, लोहा, तेल और मोबाइल कंपनियों के शेयर बाज़ार में वृद्धि होगी।
15 तारीख को मकर राशि में बुध के साथ सूर्य की युति बनेगी, यह स्थिति आग में घी डालने का काम करेगी। गेहूं, गुड़, चीनी, कपास, कपड़ा और स्वर्ण-रजत की मांग में और वृद्धि होगी। पूंजीगत माल (क्रॉम्पटन ग्रीव्स) के स्टॉक डिमांड में रहेंगे। शनि 24 तारीख को मकर राशि में प्रवेश करेगा और बुध और सूर्य के साथ युति बनाएगा। इससे बाजार के माहौल में अस्थिरता पैदा होगी। व्यापारियों और सट्टेबाजों को प्रत्येक वृद्धि पर मुनाफे की उम्मीद करनी चाहिये। 31 तारीख को कुंभ राशि में शुक्र के साथ बुध की युति बनेगी और इन दोनों ग्रहों पर मंगल की दृष्टि होगी। ग्रहों की इस स्थिति से तेजड़ियों की अस्थिरता में वृद्धि होगी।रिलायंस इंडस्ट्री, कैपिटल, सेल, टिस्को, एसटीआई आदि में निरंतर वृद्धि देखी जाएगी। हालांकि, इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री, एल्युमीनियम, टी, कॉफी, इंडस्ट्रियल, हैवी इंजीनियरिंग, केमिकल्स, खाद आदि में मंदी का रुख रहेगा।
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 1, 4, 6, 7, 11, 13, 14, 18, 19, 21 और 26 जनवरी 2020मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 5, 12, 20, 27 और 29 जनवरी 2020
[08/01, 19:13]
फरवरी
फरवरी महीने की शुरुआत में शनि ग्रह की सूर्य के साथ मकर राशि में युति बनेगी। बुध, शुक्र और नेपच्यून कुंभ राशि में रहेंगे। चंद्रमा मेष राशि में यूरेनस के साथ संयोग करेगा, जबकि बृहस्पति, केतु और प्लूटो धनु राशि में रहेंगे।मंगल वृश्चिक राशि में गोचर करेगा जबकि राहु मिथुन राशि में भ्रमण करता रहेगा।
शुक्र 2 तारीख को मीन राशि में प्रवेश करेगा और इस पर शनि की दृष्टि होगी, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में अस्थायी गिरावट आ सकती है। लेकिन धीरे-धीरे, घरेलू सामान (सिम्फनी, ब्लू स्टार) के शेयरों में एक मुद्रास्फीति देखी जाएगी और आईटी और सॉफ्टवेयर (टीसीएस, इन्फोसिस) कंपनियों पर गौर किया जाएगा। कच्चे तेल की कीमतों और दरों में वृद्धि देखी जाएगी। व्यापारियों को किसी भी तरह के झांसे में नहीं आना चाहिये, क्योंकि मांग बढ़ने की संभावना रहेगी। वैश्विक बाजार की स्थिति 12 फरवरी तक व्यापारियों और सटोरियों को बेचैन बनाए रखेगी।
17 तारीख को बुध ग्रह वक्री गति करेगा। मंदी का माहौल सूचकांक को गिरा देगा। हालांकि, 22 तारीख को बाजार और सूचकांक में तेजी देखी जाएगी। फार्मा (सन, फाइजर, डॉ. रेड्डीज), मीडिया और कैपिटल गुड्स (हैवेल्स) स्टॉक मार्केट 2020 गोचर के अनुसार मांग में रहेंगे। शुक्र मेष राशि में प्रवेश करेगा जहां बृहस्पति की दृष्टि भी उसपर होगी। एफएमसीजी, गेहूं, एडिबल्स, तेल, सरसोंं, ऊन और गुड़ के स्टॉक गिरने की संभावना है, जबकि सूचकांकों में तेजी का रुख रहेगा। क्यों किइस महीने में बृहस्पति, शनि और राहु की शुभ दृष्टि सिंह राशि पर पड़ेगी, जिस वजह से बाजार में तेजी का दौर आएगा। आयरन, स्टील, टी, कॉफी, बैंकिंग, हिंदुस्तान लीवर, ज्वैलरी, फर्टिलाइजर्स, हैवी इंजीनियरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, कॉस्मेटिक्स, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी आदि के शेयरों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 1, 3, 4, 8, 10, 11, 15, 17, 18, 22, 23, 24, 25, 27 और 28 फरवरी 2020
मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 5 और 6 फरवरी 2020
मार्च
ग्रहों की स्थिति के अनुसार मार्च में शेयर बाज़ार में मिले- जुले परिणाम मिलने के आसार हैं। मार्च 2020 की शुरुआत में, सूर्य और नेपच्यून ग्रह कुंभ राशि में, प्लूटो और शनि ग्रह मकर राशि में, धनु राशि में बृहस्पति और मंगल ग्रह, कुंभ राशि में बुध ग्रह, मिथुन राशि में राहु ग्रह, मकर राशि में केतु ग्रह और मेष राशि में शुक्र और हर्षल ग्रह को देखा जाएगा। हिंदू कैलेंडर या पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमांत शेयर बाज़ार के लिए अनुकूल लगता है, जबकि चैत्र अमांत और मीन संक्रांति (मीन राशि में सूर्य का गोचर) प्रतिकूल परिणाम दे सकते हैं।
पिछले महीने की तरह इस महीने की शुरुआत में भी बाज़ार में तेजी देखी जा सकती है। 6 तारीख तक सभी क्षेत्रों में एकतरफा बढ़ोतरी रहेगी।10 तारीख को कुंभ राशि में स्थित बुध मार्गी गति प्रारंभ करेगा। यह बैंकिंग (एचडीएफसी), बीमा, कागज (वेस्ट कोस्ट, तमिल न्यूजप्रिंट, ट्राइडेंट), लॉजिस्टिक्स (ब्लू डार्ट) और टायर सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में सकारात्मकता लाएगा।
निवेशक घरेलू सामान की कंपनियों (ब्लू स्टार, एम्बर, व्हर्लपूल) के शेयरों को प्राप्त करने में रुचि लेंगे। पावर, इलेक्ट्रिकल और गैस (IGL) क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में 13 तारीख से वृद्धि होगी। यह 12 मार्च के बाद, रिलायंस समूह, सौंदर्य प्रसाधन, वाहन, औद्योगिक, मनोरंजन, टीवी चैनल आदि में मिश्रित परिणाम देखने को मिलेंगे। रिलायंस, समाचार पत्र और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी के शेयरों में गिरावट आ सकती है। दूरसंचार और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भी मंदी का भाव देखा जा सकता है।18 से 20 के बीच फायदा होने की संभावना (प्रॉफिट बुकिंग) देखी जाएगी। मंगल 22 तारीख को अपनी उच्च राशि मकर में प्रवेश करेगा और यहां शनि से इसकी युति होगी। यह ग्रहीय संयोग वैश्विक स्तर पर एक असहज परिदृश्य पैदा करेगा। तेल, गेहूं, चावल और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थों की मांग में वृद्धि और आपूर्ति की कमी के कारण तेजी देखने को मिल सकती है। 25 से 27 के बीच इंडिसेस में गिरावट देखी जा सकती है। निवेशकों का सोना खरीदने की ओर झुकाव रहेगा। 27 तारीख के बाद शेयर बाजार में सुधार की संभावना है।
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 3, 7, 8, 15, 16, 22, 24, 28, 29, और 30 मार्च 2020
मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 4, 5, 6, 11, 14, 18, 24 और 31 मार्च 2020
अप्रैल
अप्रैल 2020 का महीना निवेशकों के लिए आकर्षक रहेगा। महीने की शुरुआत में, विभिन्न ग्रहों की स्थिति शेयर बाज़ार को प्रभावित करती दिखेगी।अप्रैल के महीने में, ग्रहों की स्थिति इस तरह होगी - सूर्य मीन राशि में, मंगल, बृहस्पति, शनि और प्लूटो मकर राशि में। बुध और नेपच्यून कुंभ राशि में गोचर करेंगे। राहु और चंद्रमा संयुक्त रूप से मिथुन राशि में भ्रमण करेंगे जबकि शुक्र, वृषभ राशि में स्थित होगा।
महीने के मध्य में 13 तारीख को, सूर्य अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि में प्रवेश करेगा। मंगल की मेष राशि में सूर्य पर चतुर्थ दृष्टि होगी जोकि पहले से ही मकर राशि में बृहस्पति और शनि के साथ युतु बना रहा है। कपास, नारियल, सरसों और बुलियन सकारात्मक खरीद के रुझान से गुजरेंगे। आईटी (टीसीएस) और एफएमसीजी (एचयूएल, नेस्ले और ब्रिटानिया) के शेयर हरे रंग के रहेंगे। 17 तारीख को, बुध रेवती नक्षत्र में आगे बढ़ेगा और इसपर शनि की दृष्टि होगी। ब्लू चिप निवेशकों की मांग में बढ़ोतरी होगी। स्मार्ट और विवेकपूर्ण निवेशक आईटी, सॉफ्टवेयर (इन्फोसिस, विप्रो), भारी उद्योगों (रिलायंस), बैंकों (एचडीएफसी) और रासायनिक क्षेत्रों के शेयरों को कम दरों पर खरीदने के लिए प्रेरित रहेंगे।
बुध 24 तारीख को मेष राशि में सूर्य से युति करेगा। इस संयोग पर उग्र ग्रह मंगल की दृष्टि भी होगी, जिसकी वजह से मुद्रास्फीति बढ़ेगी। इस समय सूचकांकों के ग्राफ में तेजी देखने को मिलेगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस महीने बाजार में तेजी रहेगी।महीने के अन्त में बुध के उदय के कारण, तेल, पेट्रोलियम, चमड़ा, बड़े मशीनों, लोहा, इस्पात, सीमेंट, ऊनी कपड़े, कोयला, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, खनन, वनस्पती उद्योग, तंबाकू, परिवहन कंपनियां और इनसे संबंधित क्षेत्रों में तेजी देखी जाएंगी।
इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के भी शेयरों में गिरावट देखी जा सकती है। फार्मा सेक्टर में कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी और 23 अप्रैल से शेयर बाज़ार में भी एकतरफा बढ़त देखने को मिलेगी। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि निवेशकों और खरीदारों को शानदार परिणाम देगा, और इस तरह से कार्य करने पर उन्हें लंबे समय लिए लाभ कमाने में मदद मिल सकती है
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 8, 13, 14, 15, 20, 21, 22, 25, 26 और 28 अप्रैल 2020
मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 6, 7, 11, 21 और 27 अप्रैल 2020
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सूचनारविवार, 5 जनवरी 2020
2020 ग्रह गोचर का प्रभाव ज्योतिषीय विश्लेषण
296 साल बाद 2020 में बनी है ग्रहों की ऐसी स्थिति, साल के प्रारंभ में धनु राशि में सूर्य, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु भी हैं। ग्रहों की ऐसी स्थिति 296 साल पहले 1 जनवरी 1723 को बनी थी।अब अगले 500 सालों तक ग्रहों की ऐसी स्थिति नहीं बनेगी। सितारों की ये स्थिति देश में बड़े बदलाव होने का संकेत दे रही है।
गुरुवार, 2 जनवरी 2020
चंद्र ग्रहण 10/1/2020
https://youtu.be/bV7kSwr8i3wमित्रों दिसंबर में सूर्य ग्रहण के बाद साल 2020 यानी नए साल का पहला ग्रहण 10 जनवरी को होगा। यह चंद्र ग्रहण होगा और यह 10 जनवरी की रात में 10 बजकर 37 मिनट से शुरू होगा और 11 जनवरी को 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 06 मिनट है। चंद्रग्रहण भारत, यूरोप, अफ्रीक, एशिया और आस्ट्रेलिया में देखा जाएगा।https://youtu.be/bV7kSwr8i3w
शनिवार, 28 दिसंबर 2019
कुंडली मिलान कंप्यूटर बाबा से
जन्म, विवाह एवं मृ्त्यु ये तीनों ही जीवन के अति महत्वपूर्ण पडाव या कहें कि अंग माने गये हैं। बेशक जन्म और मृ्त्यु पर तो किसी का भी वश नहीं,किन्तु विवाह एक ऎसा माँगलिक कार्य है जिसके प्रति पुरातन एवं आधुनिक परिस्थितियों को ध्यान में रख कर यदि थोडी सी समझदारी दिखाई जाए तो जीवन को सुखपूर्वक व्यतीत किया जा सकता है। विवाह जिसका मर्म दो आत्माओं का स्वरैक्य है,जीवन में प्रेम, सहानुभूति,कोमलता,पवित्रता तथा भावनाओं का विकास है।आजकल समयाभाव के कारण विवाह की अत्यन्त जटिल विधि को भी बहुत थोडे समय में तुरत फुरत निपटाने की एक परम्परा ही चल पडी है। लेकिन इन सब में भी एक बात जो सबसे अधिक महत्व रखती है,वो है विवाह पूर्व लडका-लडकी की जन्म पत्रिका का मिलान किया जाना। इससे परिणय सूत्र में बँधने वाले वर-वधू के जन्मकालीन ग्रहों तथा नक्षत्रों में परस्पर साम्यता, मित्रता तथा संबंध पर विचार किया जाता है। शास्त्रों में मेलापक के दो भेद बताए गए हैं। एक ग्रह मेलापक तथा दूसरा नक्षत्र मेलापक। इन दोनों के आधार पर वर-वधू की शिक्षा, चरित्र,भाग्य,आयु तथा प्रजनन क्षमता का आकलन किया जाता है। नक्षत्रों के "अष्टकूट"(वर्ण,वश्य,तारा,योनि,ग्रह मैत्री,गण,भकुट,नाडी) तथा नौ ग्रह इत्यादि इस रहस्य को व्यक्त करते हैं।वैसे तो अक्सर ये भी देखने सुनने में आ जाता है कि कुण्डली मिलान के पश्चात भी पति-पत्नि में आपसी तनाव,गृ्हस्थ सुख में न्यूनता,सम्बन्ध विच्छेद रुपी दुष्परिणाम भोगने पड जाते हैं। आखिर ऎसा क्यूं होता है। इसका सबसे बडा कारण तो वो आधे अधूरे ज्योतिषी हैं, जो अपना अधकचरा ज्ञान लेकर सिर्फ गुण मिलान की संख्या को ही मेलापक की इतिश्री समझ लेते हैं। इन लोगों की नजर में यदि गुण संख्या 18 से कम हुई तो मिलान ठीक नहीं है ओर यदि संख्या 18 से अधिक हुई तो समझिये मिलान अच्छा है। गुण संख्या के अतिरिक्त मेलापक में ग्रह मिलान एवं अन्य बहुत सी बातें देखी जाती हैं,जिसका कि एक ज्योतिषी को पूर्णत: ज्ञान होना अति आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति सिर्फ गुणों के आधार पर मेलापक निष्कर्ष निकालता है तो समझिए वो ज्योतिषी नहीं बल्कि कोई घसियारा है,जिसने जीवन में ज्योतिष के नाम पर सिर्फ घास ही खोदी है एक ओर कारण जो कि इस विषय में उतरदायी है--वो है तकनीक पर अति निर्भरता।आजकल एक बात बहुत प्रचलन में आ गयी है कि शादी विवाह के मामले में कम्पयूटर से फ़टाफ़ट गुण मिलाकर शादी करने या नही कर देने के कारण कितने ही रिस्ते या तो शादी के बाद बिगड जाते है या जो रिस्ते कम्पयूटर से नही बनते है वे अपनी अपनी औकात को लेकर सभी प्रकार की शिक्षा को बेकार समझ कर एक तरफ़ कर दिये जाते है। हमेशा जरूरी नही है कि कम्पयूटर अपनी समझ को सही रूप में प्रकट करेगा।भई विज्ञान अभी इतना सूझवान नहीं हो पाया है कि कम्पयूटर जैसी मशीन के जरिये इन्सानी बुद्धि का काम ले सके। इसके जरिये सिर्फ कुंडली में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति व गुण दोष ही स्पष्ट हो पाते हैं। विवाह के लिये जरूरी जन्मपत्री का वास्तविक मिलान नहीं हो पाता। कम्पयूटर के जरिये आप सिर्फ गुण मिलान की संख्या के बारे में जान सकते हैं,जीवन पर कुंडली का क्या प्रभाव रहेगा, यह बताने में अभी कंप्यूटर बाबा जी समर्थ नहीं हो पाये हैं। दरअसल यह तो एक ज्योतिष विद्वान के अनुभव आधारित ज्ञान में ही छिपा रहता है,जिसका स्थान कम्पयूटर कदापि नहीं ले सकता।
शुक्रवार, 27 दिसंबर 2019
सप्ताह के सात दिनों का क्याहै रहस्य ?
इतना तो सबको मालूम है कि सप्ताह के दिनों के नाम ग्रहों की संज्ञाओं के आधार पर रखे गए हैं अर्थात जो नाम ग्रहों के हैं, वही नाम इन दिनों के भी हैं. जैसे सूर्य के दिन का नाम रविवार, आदित्यवार, अर्कवार, भानुवार इत्यादि. शनिश्चर के दिन का नाम शनिवार, सौरिवार आदि. चाहे आप संस्कृ्त मे य़ा अन्य किसी भी भाषा में देख लें, साप्ताहिक दिनों के नाम सात ग्रहों के नाम पर भी आपको रखे मिलेंगें. संस्कृ्त में ग्रह के नाम के आगे वार या वासर या कोई ओर प्रयायवाची शब्द रख दिया जाता है. इससे यह सूचित होता है कि अमुक दिन का अमुक ग्रह है.पश्चिमी भाषाओं में भी, इसी प्रकार ग्रहों के नामों के साथ दिन का वाचक शब्द लगा दिया जाता है. जैसे कि लेटिन में सोमवार को Lunae, मंगलवार को Martis, बुधवार के लिए Mercurii इत्यादि.अब प्रश्न यह उत्पन होता है कि यह क्रम कैसे चला और अमुक दिन अमुक ग्रह का है—-इसका अभिप्राय क्या है?. ज्योतिष के ग्रन्थों के अनुसार प्राचीन समय में ग्रहों का क्रम इस प्रकार माना जाता था—शनि, बृ्हस्पति, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध और चन्द्रमा. अर्थात पृ्थ्वी की अपेक्षा शनि सबसे ऊपर या दूर माना जाता था और चन्द्रमा सबसे नीचे अर्थात नजदीक. इन ग्रहों को, जैसा कि सूर्य सिद्धान्त आदि ग्रन्थों से सिद्ध है, ज्योतिषियों नें दिनों का स्वामी माना है.
शनिवार, 21 दिसंबर 2019
#सुर्य ग्रहण(Surya Grahan)Solar Eclipse
मित्रों साल का आखिरी ग्रहण लगने में अब कुछ ही दिन शेष रह गये हैं। ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। 26 दिसंबर को लगने जा रहे ग्रहण में सूर्य के बीच के भाग को चंद्रमा पूरी तरह से ढक देगा। जिस कारण सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह दिखाई देगा। भारत में वलयाकार सूर्य ग्रहण दक्षिण भाग कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के हिस्सों में दिखाई देगा जबकि देश के बाकी हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा दिखा जा सकेगा।
मंगलवार, 17 दिसंबर 2019
जीवन में भटकाव के कारतत्व
मित्रों ऊपर दी गई कुंडली मीन लगन की है और लगनेश गुर पंचम भाव मे केतु के साथ है,लगनेश का केतु के साथ होने का अर्थ जीवन मे भटकाव के अलावा और कुछ भी प्राप्त नही होता है जिस भाव का केतु होता है उसी भाव के फ़लो मे जातक को भटकाने का काम करता है वह चाहे अच्छे रूप मे हो या खराब रूप में। गुरु का स्थान पंचम मे होने से विद्या और बुद्धि के क्षेत्र मे है,जल्दी से धन कमाने के क्षेत्र मे है खेलकूद और रोजाना की जिन्दगी मे असीमित लालसाओं तथा प्राप्तियों के प्रति चिन्ता करने के क्षेत्र मे है। ग्यारहवे भाव में स्थित राहु भी गुरु को अपनी युति प्रदान कर रहा है। केतु का भटकाव नौकरी के लिये जल्दी से जल्दी धन कमाकर अपने को समाज मे प्रदर्शित करने के लिये शादी और कार्य करने वाली पत्नी की प्राप्ति के लिये गुरु केतु की तीसरी द्रिष्टि सप्तम मे होने से है,और सप्तम मे स्थापित शुक्र जो हिम्मत देने का भी मालिक है और अपमान करने के साथ साथ रोजाना की जिन्दगी मे जोखिम भी लेने के लिये माना जा सकता है। गुरु केतु की पंचम द्रिष्टि नवे भाव पर है और नवे मे होने से जातक का जो भी ऊंचे शिक्षा का क्षेत्र है वह भी बाधित हो गया है और धन आदि कमाने के चक्कर मे तथा शिक्षा के क्षेत्र मे जाने से अपनी वास्तविक कार्यप्रणाली को बदलने के भी उत्तरदायी है। गुरु कर्क राशि का उच्च का है इसलिये जीवन मे उन्नति साधारण मार्ग से अपने को इज्जत और मान मर्यादा मे रखकर चलने से भी मानी जायेगी केतु के साथ होने से और गुरु केतु के द्वारा अष्टम स्थान पर चन्द्र सूर्य बुध को व्यापारिक बल देने के कारण जातक को धन सम्बन्धी काम जैसे व्यापारिक धन को जोखिम से बचाना सरकारी कारणो से धन की बरबादी को बचाना व्यापारिक कानूनो के प्रयोग से जनता को धन सम्बन्धी बचाव का रास्ता देना आदि कारण जातक के लिये वास्तविक उद्देश्य का रास्ता बताते है लेकिन राहु पिछले चौवन महिने से जातक के दुसरे भाव तीसरे भाव और अब चोथे भाव मे गोचर करने से जातक के अन्दर एक प्रकार का जल्दी से कमाने और धन की जरूरत को पूरा करने के लिये तथा छोटी सी उमर मे ही लोगो के लिये आदर्श बनने का भूत सवार कर रहा है। इस राहु के कारण जातक अपनी वास्तविक मर्यादा को भूल गया है वह अपने को कभी तो इतना व्यस्त कर लेता है कि खाने पीने सोने और मौज मस्ती से दूर चला जाता है,घर मे एक प्रकार का सन्नाटा प्रदान करने के लिये पिता के लिये माता के लिये सेहत सम्बन्धी कष्ट प्रदान करने का कारण चिन्ता से देने के लिये और जो भी कारण शिक्षा सम्बन्धित है वह केवल कनफ़्यूजन मे लेकर उन्हे समय से नही पूरा करने की बात से भी माने जाते है। जातक केवल घर की प्राथमिक अवस्थाओ को पूरा करने के बाद चाहता तो वह अपने वास्तविक उद्देश्य जो ऊपर धन सम्बन्धी कारणो की शिक्षा के लिये बताई गयी है एक चार्टेड एकाउन्टेन्ट की हैसियत से जीवन को निकालने के लिये प्रकृति ने जो साधन बुद्धि और ज्ञान दिया था वह प्रयोग नही करके केवल धन के प्रति सोचने और अपने को बेकार के कनफ़्यूजन मे ले जाकर समय और सेहत के साथ मूल्यवान समय को बरबाद करने का कारण ही तो जातक को मिल रहा है दोस्ती के भाव मे राहु के होने से जो भी जातक के दोस्त है वह जातक को कभी तो राजकीय सेवा मे जाने के लिये कभी स्कूली काम करवाकर बिना किसी लाभ के भटकाने के लिये कभी कुछ और कभी कुछ करने का भूत सवार करने के बाद जातक के टारगेट से दूर जाने का उपक्रम करने के लिये अपनी शक्ति को प्रदान कर रहा है।गुरु से शनि की स्थिति छठे भाव मे होने से जातक के लिये कहा जा सकता है कि जातक का जीवन कठिन से कठिन मेहनत करने के बाद जो भी प्राप्त करेगा वह धन ग्यारहवे मंगल के प्रभाव के कारण जिस पर मित्र भाव के राहु का असर है अचानक खर्च करने के कारको मे अपना सब कुछ खर्च कर देगा और फ़िर वृष राशिका मंगल अपने कारको से परिवार की जिम्मेदारी के प्रभाव को साथ मे लाकर जातक को कर्जा दुश्मनी बीमारी से ग्रस्त करने के कारको को पैदा करेगा।
महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां
‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...
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लक्ष्मी योग शुभ ग्रह बुध और शुक्र की युति से बनने वाला योग है।बुध बुद्धि-विवेक, हास्य का कारक है तो शुक्र सौंदर्य, भोग विलास कारक है।अब ये द...
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जब किसी के जीवन में अचानक परेशानियां आने लगे, कोई काम होते-होते रूक जाए। लगातार कोई न कोई संकट, बीमारी बनी रहे तो समझना चाहिए कि उसकी कुंडली...
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दशम भाव ज्योतिष भाव कुडंली का सबसे सक्रिय भाव है| इसे कर्म भाव से जाना जाता है क्यूंकि ये भाव हमारे समस्त कर्मों का भाव है| जीवन में हम सब क...
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मालव्य योग को यदि लक्ष्मी योगों का शिरोमणी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं। मालव्य योग की प्रशंसा सभी ज्योतिष ग्रन्थों में की गई है। यह योग शुक्...
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आचार्य राजेश ईस बार मलमास 15 दिसंबर से आरंभ हो रहा है जो 14 जनवरी 2018तक रहेगा। मलमास के चलते दिसंबर के महीने में अब केवल 5 दिन और विवाह मुह...
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मित्रों आज वात करते हैं फिरोजा रतन की ग्रहों के प्रभाव को वल देने के लिए या फिर उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए ज्योतिष विज्ञान द्वारा विभि...









