नवग्रह कहे जाने वाले 9 ग्रह वैदिक ज्योतिष में बड़ा महत्व रखते हैं | इसमें सूर्य, चन्द्रमा के अलावा मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और राहु-केतु शामिल हैं | इनमें से राहू-केतु को छाया ग्रह (Planets) माना जाता है | आपको बता दूं कि इन सभी ग्रहों की प्रकृति एक-दूसरे से भिन्न होती है। कुछ बहुत शुभ होते हैं, तो कुछ आपके काम में रूकावट डालने का प्रयास करते हैं। अतः आज हम उसी पर चर्चा करेंगेग्रहों का प्रतिनिधित्व हमारे जीवन के साथ-साथ हमारे शरीर के विभिन्न अंगों पर भी होता है। ऋषियों ने भी मस्तक के बीच भगवान सूर्य का स्थान माना है। ज्योतिष विद्या के अनुसार भी मस्तिष्क पर सूर्य देव का अधिकार होता है। चिंतन और मनन, इन सभी का आधार सूर्य ग्रह को माना गया है सूर्य ग्रह से एक अंगुली नीचे चंद्रमा का स्थान माना गया है। चंद्रमा का नाता भावुकता और चंचलता से है, साथ ही मनुष्य की कल्पना शक्ति भी चंद्रमा के द्वारा ही संचालित होती है। ज्योतिष भी कहता है कि चंद्रमा को अपनी रोशनी के लिए सूर्य पर ही निर्भर रहना पड़ता है, इसलिए चंद्रमा हमेशा सूर्य के साये में ही रहता है। जब सूर्य का तेज रोशनी बनकर चंद्रमा पर पड़ता है तभी व्यक्ति के विचार, उसकी कल्पना और चिंतन में सुधार आता है। गरुड़ पुराण के अनुसार नेत्रों में मंगल ग्रह का निवास माना गया है।
आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
शनिवार, 15 अगस्त 2020
लाल किताब अनुसार ग्रहों के रुप और उपाय
नवग्रह कहे जाने वाले 9 ग्रह वैदिक ज्योतिष में बड़ा महत्व रखते हैं | इसमें सूर्य, चन्द्रमा के अलावा मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और राहु-केतु शामिल हैं | इनमें से राहू-केतु को छाया ग्रह (Planets) माना जाता है | आपको बता दूं कि इन सभी ग्रहों की प्रकृति एक-दूसरे से भिन्न होती है। कुछ बहुत शुभ होते हैं, तो कुछ आपके काम में रूकावट डालने का प्रयास करते हैं। अतः आज हम उसी पर चर्चा करेंगेग्रहों का प्रतिनिधित्व हमारे जीवन के साथ-साथ हमारे शरीर के विभिन्न अंगों पर भी होता है। ऋषियों ने भी मस्तक के बीच भगवान सूर्य का स्थान माना है। ज्योतिष विद्या के अनुसार भी मस्तिष्क पर सूर्य देव का अधिकार होता है। चिंतन और मनन, इन सभी का आधार सूर्य ग्रह को माना गया है सूर्य ग्रह से एक अंगुली नीचे चंद्रमा का स्थान माना गया है। चंद्रमा का नाता भावुकता और चंचलता से है, साथ ही मनुष्य की कल्पना शक्ति भी चंद्रमा के द्वारा ही संचालित होती है। ज्योतिष भी कहता है कि चंद्रमा को अपनी रोशनी के लिए सूर्य पर ही निर्भर रहना पड़ता है, इसलिए चंद्रमा हमेशा सूर्य के साये में ही रहता है। जब सूर्य का तेज रोशनी बनकर चंद्रमा पर पड़ता है तभी व्यक्ति के विचार, उसकी कल्पना और चिंतन में सुधार आता है। गरुड़ पुराण के अनुसार नेत्रों में मंगल ग्रह का निवास माना गया है।
रक्की,उन्नति रोकी तो नहीं जा रही? कहीं आप बुरे प्रभाव में तो नहीं?
www.acharyarajesh.in कर पा रहे आप अच्छे पृष्ठभूमि से हैं। पर आप उसे भी बरकरार नहीं रख पा रहे जो बाप-दादाओं ने बनाया उसे भी नहीं संभल पा रहे ,जबकि आपमें सारी क्षमताएं और योग्यताएं हैं। आप अच्छी शिक्षा ,क्षमता ,योग्यता के बावजूद निम्न स्थिति में जीने को विवश हैं ,जबकि आपके आसपास अथवा परिवार में ही कोई अन्य लगातार उन्नति करता जा रहा ,हर तरफ विकास करता जा रहा अनावश्यक कभी रोग तो कभी हानि ,कभी कलह तो कभी लड़ाई झगड़े ,कभी कर्ज तो कभी दुर्घटनाएं ,कभी बच्चों की समस्याएं तो कभी माता -पिता की ,कभी नौकरी में समस्या तो कभी व्यवसाय में ,कभी पारिवारिक विवाद /मतभेद तो कभी मुकदमे लगातार कुछ न कुछ लगा ही रहता है ,जबकि आप यदि एकाग्र हो कर किसी भी क्षेत्र में जुट जाएँ तो आप सफल हो जायेंगे ,पर आप एकाग्र हो ही नहीं पा रहे ,पूरा समय लक्ष्य पर दे ही नहीं पा रहे इन सबके पीछे कुछ नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है। आप माने या न माने पर ऐसा होता है। विज्ञान भी नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा को स्वीकार करता है। यह नकारात्मक ऊर्जा ग्रह दोष के कारण हो सकती है। वास्तु दोष के कारण हो सकती है। स्थान अथवा भूमि दोष के कारण हो सकती है। आपके यहाँ पित्र दोष के कारण हो सकती है। आपके कुलदेवता /देवी की असंतुष्टि के कारण हो सकती है। कहीं से आये भूत -प्रेत -ब्रह्म -जिन्न के कारण हो सकती है। किसी के द्वारा भेजे गए भूत-प्रेत के कारण हो सकती है। किसी के द्वारा आपके विरुद्ध किसी तांत्रिक से अभिचार कराने के कारण हो सकती है। आपके किसी नजदीकी द्वारा समय समय पर आपके विरुद्ध टोटके किये जाने के कारण हो सकती है। आपके व्यावसायिक प्रतिद्वंदी अथवा दुश्मन या विरोधी द्वारा आपके विरुद्ध अभिचार कराने के कारण हो सकती है। नौकरी के किसी सहकर्मी अथवा किसी परिचित द्वारा आपकी उन्नति न देख पाने से कोई क्रिया कराने के कारण हो सकती है। इन नकारात्मक या दूषित प्रभावों के कारण ,आपकी उन्नति रुक जाती है ,आपका पतन होने लगता है। स्वभाव में खराबी आ जाती है। व्यवहार व् बर्ताब बिगड़ने लगता है। समय पर कार्य में बाधा आती है। आपके निर्णय गलत होने लगते हैं। आलस्य और प्रमाद घेरने लगता है। निराशा और डिप्रेसन होने लगता है। कभी स्वभाव में उग्रता आती है कभी हीन भावना ,क्षोभ और वितृष्णा रहती है। बुरे स्वप्न आ सकते हैं।अशुभ लक्षण दिख सकते हैं ।रात में निंद का ना आना या भय सा महसूस हो सकता है। कभी ऐसा लग सकता है। की कमरे में आपके अतिरिक्त भी कोई है। किन्तु आपको दीखता नहीं कभी सोते समय कोई आपके ऊपर आ सकता है। लग सकता है। की कोई आपको दबा रहा है। कभी कोई शक्ति अलग अलग चेहरे भी दिखा सकती है। या चेहराविहीन भी हो सकती है। बार बार घर परिवार अथवा खुद पर बीमारी आ सकती है।घर या कमरे से दुर्गन्ध महसूस हो सकती हैं।सीलन भरा वातावरण बन सकता है। बिना मतलब मुकदमे ,विवाद शुरू हो सकते है। पूरी म्र्हनत के बाद भी व्यवसाय दिन पर दिन कम हो सकता है।सारे प्रयास के बाद भी नौकरी नहीं लग रही या उपयुक्त नहीं मिल रही ।अगर ऐसा कुछ है तो आप नकारात्मक उर्जा से प्रभावि हैं।अगर आपके घर में जाते समय आपका सर भारी हो जाए अथवा आपके कार्य व्यवसाय की जगह पहुचते ही सर भारी हो जाए अथवा दोनों जगह सर भारी हो अनायास अशुभ लक्षण बार बार अथवा कभी लगे की दिमाग विचारशून्य हो गया है या सोचने समझने की क्षमता कम हो जाए कहीं ठीक से मन न लगे तनाव और मानसिक भारीपन महसूस हो |खुद पर से ही विश्वास कम हो जाए बेवजह कमजोरी महसूस हो कुछ करने का मन न करे आलस्य हो तो आप नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित हो सकते हैं। और इनके द्वारा आपकी उन्नति रोकी जा रही है।इस प्रकार की नकारात्मक उर्जाओं का प्रभाव टोटकों से नहीं समाप्त किया जा सकता इस तरह की समस्याओं को सोसल मीडिया और टोटकों /उपायों की किताबों से पढ़कर अथवा नीम हकीम ज्योतिषी -तांत्रिक से सुनकर करके नहीं हटाया जा सकता ,क्योकि इन्हें तो खुद इनकी तकनिकी ,समय ,मुहूर्त ,पूर्ण क्रिया ,इसके विज्ञानं ,उर्जाओं की समझ नहीं होती न जानकारी होती है। यह खुद यहाँ वहां लिखे अथवा पोस्ट किये हुए उपाय अथवा टोटके उठाकर बता देते हैं। कैसे ,कब ,कहाँ ,किस तरह और क्यों किये जा रहे उपाय अथवा टोटके जानकारी नहीं होती ,इनके पीछे क्या विज्ञान कार्य करता है ,कैसे ऊर्जा समीकरण बनते और बनाये जाते हैं। इन्हें खुद नहीं पता इसीलिए लाखों लोग ऐसे उपाय ,टोटके करके कोई लाभ नहीं पाते और इनका विश्वास ज्योतिष और तंत्र से उठ जाता है ,इन्हें लगता है। सब ठग हैं। और केवल यह सब ठग विद्या है। वास्तव में यहाँ बस वास्तविक पकड़ की बात होती है ।तलवार की जहाँ जरुरत है। वहां सुई चुभोने से काम नहीं होता अपितु नकारात्मक ऊर्जा और उग्र हो अधिक नुक्सान करती है।किसी को छेड़कर अथवा लाठी मार के छोड़ दीजिये तो वह और उग्र हो प्रतिक्रिया करता है ऐसा ही कुछ नकारात्मक उर्जा के साथ होता है |ज्योतिषीय उपाय भी अगर पूर्ण और प्रभावी नहीं किये जाएँ तो कोई प्रभाव नहीं दे पाते टोटके केवल सामान्य परिस्थिति में ही प्रभाव डालते हैं। नकारात्मक ऊर्जा अगर शक्तिशाली हुई तो टोटकों पर उलटी ही प्रतिक्रिया सामने आती है ।यही सब कारण है की यहाँ वहां से लोग उपाय जानकर करते रहते हैं। और परेशान के परेशान ही रहते हैं।इस तरह की नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाब कोकाटने के लिए किसी अच्छे जानकार से ही परामर्श करना चाहिए, और उसके बताये मार्गों का ही अनुसरण करना चाहिए यहाँ वहां से उपाय देखकर और सुनकर नहीं करना चाहिए ,क्योकि इनका अपना विज्ञानं होता है और हर वस्तु ऊर्जा स्वरुप है ,जिसका उपयोग उचित ढंग से न होने पर या तो लाभ होगा नहीं अथवा नुकसान भी संभव है |तांत्रिक उपायों में तो और भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए नकारात्मक ऊर्जा पर सात्विक और सौम्य शक्तियों का बहुत प्रभाव नहीं पड़ता हाँ यह घर और व्यक्ति पर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ा जरुर देती हैं जिससे नकारात्मकता की मात्रा का बैलेंस जरुर कम हो जाता है पर वह न समाप्त होती है न कम होती है जो अच्छे या शुभ परिणाम दीखते हैं वह सकारात्मकता बढने के कारण होते हैं।नकारात्मक ऊर्जा तो यथावत बनी ही रहती है और गाहे बगाहे अपना असर दिखाती ही रहती है। नकारात्मक उर्जाओं को हटाने के लिए उग्र शक्तियों का ही सहारा लेना पड़ता है। इसीलिए तांत्रिक और उग्र महाविद्याओं ,भैरवकाली, आदि के साधक इन कार्यों में अधिक सफल होते हैं। नकारात्मकता हटाने के लिए उग्र महाशक्तियों यथा काली ,बगलामुखी ,तारा ,काल भैरव ,नृसिंह ,दुर्गा ,आदि की साधना उपासना और हवन अधिक प्रभावी होते हैं इन नकारात्मक शक्तियों से किसी भी तरह प्रभावित व्यक्तयों को उपरोक्त उग्र शक्तियों के यन्त्र ,कवच में धारण करने चाहिए,स्पष्ट छाया या वायव्य बाधाओं से ग्रस्त व्यक्तियों को खुद कवच धारण करना चाहिए, और किसी अच्छे तांत्रिक या महाविद्या साधक से संपर्क करना चाहिए,नोट कुछ लोग दो कश्तियों पर सवार होकर समस्याओं का हल करना चाहते हैऐसे सज्जन कभी भी सफल नहीं हो पाते किसी जानकार योग्य से ही हल करवाएं एक पर भरोसा करके उसके कहे अनुसार ही उपाय करें जय माता दी
मंगलवार, 21 जुलाई 2020
मंत्र की शक्ति
रविवार, 21 जून 2020
क्या तीसरा विश्व युद्धहोगा। क्या भारत ओर चीन के मघ्य युद्ध होगा?(2)
मित्रों प्राचीन भारतीय ज्योतिषियों जैसे वाराह मिहिर तथा अंय संहिता ज्योतिषियों ने भारत की प्राचीन राशि मकर बताई थी 20 वीं सदी के महान ब्रिटिश पाॅमिस्ट काउंट लुई हेमन कीरो में भी 1925 मे प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘वल्र्ड प्रैडिक्शन’ मे भारत की राशि मकर बताई है लगभग हजार वर्ष पहले भारत विदेशी
मुस्लिम आक्रांताओं का गुलाम हो गया और 15 अगस्त 1947 को वृष लग्न मे भारत विदेशी गुलामी से मुक्त हुआ। भारतीय ज्योतिष मे किसी भी देश या व्यक्ति के पूर्वजंम का ज्ञान नवम भाव से और अगले जंन्म का ज्ञान पंचम भाव से होता है। वृष राशि मकर राशि से पंचम राशि है। भारतीय ज्योतिष मे बृहस्पति को धर्म और अध्यात्म का कारक ग्र्रह माना गया है तथा राहू को दैत्यों, राक्षसों, मुस्लिमों, मलेच्छों नास्तििििक धर्म विरोधी तथा दुर्भाग्य, नर संहार का कारक ग्रह माना गया है। भारत के इतिहास मे वृष मिथुन और धनु राशियो ंकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दुर्भाग्यवश भारत के जमांक मे धर्म गुरू की राशि धनु भारत की प्राचीन राशि मकर से धनु 12 भाव की राशि है। जो विनाश का भाव है मिथुन राशि भारत की राशि मकर से छठे भाव की राशि है। जो रोग व शत्रु का भाव है। भारत के इतिहास मे वृष मिथुन वृश्चिक और धनु राशियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राहू विनाश का कारक ग्रह है। केतु मोक्ष अलौकिकता तथा नई उत्पति का कारक ग्रह है। साथ ही केतु मे कई विनाशकारी शक्तियां भी है। भारत के लंबे इतिहास का ज्योतिषीय अध्ययन करने पर यह तथ्य प्रकृट हुआ है। जब-जब वृष वृश्चिक या मिथुन व धनु राशि मे राहू या केतु का गोचर हेाता है। तब तब भारत मे विनाशकारी घटनायें घटित होती है। राहू-केतु के विनाशकारी प्रभाव का भारत के इतिहास मे आश्चर्यजनक विनाशकारी घटनायें:-
क्या तीसरा विश्व युद्धहोगा। क्या भारत ओर चीन के मघ्य युद्ध होगा ?
मित्रों आपको पता ही है कि भारत और चीन में सीमा पर तनाव चल रहा है।इस वक्त देश और दुनिया में कई लोग भारत और चीन के बीच युद्ध की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। इसी आशंका के चलते कई ज्योतिष और भविष्यवक्ता अपने अपने यूट्यूब चैनल या सोशल मीडिया को चमकाने के लिए युद्ध की तरीख तक करने में लगे हैं। पिछले कुछ सालों से भारत और पाकिस्तान को लेकर हर साल युद्ध होने की भविष्यवाणी की जाती है लेकिन युद्ध तो होता हुआ नहीं दिखाई देता। हां, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे जरूर कुछ होता रहा है। आखिर इन भविष्यवाणियों का सच क्या है। भविष्य के गर्त में क्या छुपा है। आओ आज हम भी थोड़ा कुछ जान लेते हैं। भविष्यवाणियों के बारे में।
मंगलवार, 2 जून 2020
ग्रहण को लेकर मन में हैं शंकाएं, पढ़ें वैज्ञानिक एवं ज्योतिषीय विश्लेषण Surya Grahan 2020
मित्रों ग्रहण पर मैं पहले भी पोस्ट कर चुका हूं लेकिन एक astrologer होने के नाते मित्र दोस्त आस पड़ोस के लोग और रिश्तेदार यह सभी बार-बार सूर्यग्रहण को लेकर पूछ रहे हैं तो आज फिर से एक पोस्ट कर रहा हूं जिसमें सब कुछ बहुत ही डिटेल में बताया जाएगा। मित्रों इस साल का पहला सूर्यग्रहण 21 जून रविवार काे हाेगा।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 21 जून को सदी का सबसे बड़ा कंकणाकृति सूर्य ग्रहणओर सदी का सबसे बड़ा ग्रहण होने के कारण इस पर शोध भी होगा। जबकि इसके प्रभाव के चलते दिन में अंधेरा छा जाएगा। साथ ही दिन में तारे भी दिखाई देंगे।इसका असर बहुत अच्छा नहीं मिलने जा रहा है। पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था में और गिरावट आने के संकेत हैं। मृत्युदर और बढ़ोतरी हो सकती है। तूफान और भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं।
सोमवार, 1 जून 2020
Lunar And Solar Grahan/eclipse 2020: ग्रहण, जनिए सूतक काल का समय
Lunar And Solar Grahan/eclipse 2020: ग्रहण,
मित्रों 6 जून से 5 जुलाई के बीच दो चंद्र ग्रहणओर एक सुर्य ग्रहण लगेगा। 5 व 6 जून मांद्य चंद्र ग्रहण और 5 जुलाई को उप छाया ग्रहण लगेंगे। जो भारत ने दृश्यhttps://youtu.be/2A7UF80uvVs मान नहीं होने के कारण कम प्रभावशाली होगा। 21 जून को लग रहे सूर्य ग्रहण भारत में 99.4 % दृश्यमान परम ग्रास रहेगा। जिसमें चूड़ामणि सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा होगा।
पंचांगीय दशा से यह सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील और अशुभ स्थिति का निर्माण करने वाला होगा। जिसमें छह ग्रह एक साथ वक्री होकर संपूर्ण विश्व में बड़ी उथल-पुथल की स्थिति बनाएंगे। अभी एक पोस्ट लिख चुका हूं आप मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं महासागर में चीन की गतिविधियों से स्थिति तनावपूर्ण बनेगी। लगभग 5 घंटे 48 मिनट और 3 सेकंड के उक्त सूर्य ग्रहण के होने की बात बताई जा रही है।
जिसमें एक पॉजिटिव बात भी सामने आ रही है कि वर्तमान में कोरोनावायरस के संक्रमण व्याधि सूर्य ग्रहण से शुरू होकर इस सूर्य ग्रहण के गुजर जाने के बाद धीरे-धीरे कम होती जाएगी।58 वर्ष पूर्व वर्ष 1962 में ऐसी ही एक माह में तीन ग्रहणों की स्थिति बनी थी। जिसमें 17 जुलाई 1962 को मांद्य चंद्र ग्रहण, 31 जुलाई 1962 को सूर्य ग्रहण और 15 अगस्त 1962 को मांद्य चंद्रग्रहण हुआ था। मित्रोंपहला ग्रहण 5 जून को होगा। यह चंद्र ग्रहण रहेगा। इस वर्ष का यह दूसरा चंद्र ग्रहण है। इसके पहले 10 जनवरी को चंद्र ग्रहण लग चुका है। इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा जो कि कंकणाकृति का होगा। यह भारत में नजऱ नहीं आएगा। तीसरा ग्रहण भी चंद्र ग्रहण है जो 5 जुलाई को लगेगा। एक माह में तीन ग्रहण केवल एक ग्रहण भारत में दिखाई देगा। एक माह में तीन ग्रहण का होना देश के लिए हितकारी नहीं है। 5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच मे तीन ग्रहण हैं। चंद्रग्रहण - 5 जून , 2020
आरम्भ - रात्रि 11:15
अंत - रात्रि 2:34 ( 6 जून )
कुल अवधि - 3 घण्टे 19 मिनट
2. सूर्यग्रहण - 21 जून 2020
आरम्भ - सुबह 9:15
अंत - शाम 15:03
कुल अवधि - 5 घण्टा 48 मिनट
3. चंद्रग्रहण - 5 जुलाई 2020
आरम्भ - सुबह 8:37 मिनट
अंत - दिन 11:22 मिनट
कुल अवधि - 2 घण्टे 45 मिनट
( भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा, लेकिन साधना के लिए मान्य होगा )
तीन से ज्यादा ग्रहण आ जाएं तो एक चिंता का विषय बनता है
5 जून 2020 चंद्रग्रहण
प्रारंभ रात 11:15 मिनिट समाप्ति 6 जून सुबह 2:34 चंद्र ग्रहण जिसमे शुक्र वक्री और अस्त रहेगा गुरु शनि वक्री रहेंगे तो तीन ग्रह वक्री रहेंगे, जिसके कारण जिसके प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। शेयर बाजार से जुड़े हुए लोग सावधान रहें। यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर बुरा प्रभाव डालेगा। अगर कुंडली में भी अशुभ प्रभाव हो किसी भी तरह से
21 जून 2020 सूर्य ग्रहण
एक साथ 6 वक्री रहेंगे बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु यह छह ग्रह 21 जून 2020 को वक्री रहेंगे। इन छह ग्रह का वक्री होना यानी एक बहोत बड़ा तहलका मचाने वाला है।
5 जुलाई 2020 चंद्रग्रहण एक बहुत बड़ा परिवर्तन
मंगल का राशि परिवर्तन
सूर्य का राशि परिवर्तन
गुरु धन राशि मे वापस, लेकिन वक्री रहेंगे।
शुक्र मार्गी होगा24 जनवरी से शनि मकर राशि में गोचर है और मई से शनि की उल्टी चाल भी शुरू हो चुकी है. हालांकि सितंबर माह में केतु के राशि परिवर्तन और गुरु के साथ शनि के मार्गी हो जाने से इन हालातों में सुधार आने की भी संभावना है. सितंबर के आखिरी सप्ताह में देश में हालात पूरी तरह से अनुकूल हो सकते हैं और इस संक्रमण से मुक्ति मिलने के आसार हैं.
Lunar And Solar Grahan/eclipse 2020: ग्रहण, जनिए सूतक काल का समय
Lunar And Solar Grahan/eclipse 2020: ग्रहण,
मित्रों 6 जून से 5 जुलाई के बीच दो चंद्र ग्रहणओर एक सुर्य ग्रहण लगेगा। 5 व 6 जून मांद्य चंद्र ग्रहण और 5 जुलाई को उप छाया ग्रहण लगेंगे। जो भारत ने दृश्यhttps://youtu.be/2A7UF80uvVs मान नहीं होने के कारण कम प्रभावशाली होगा। 21 जून को लग रहे सूर्य ग्रहण भारत में 99.4 % दृश्यमान परम ग्रास रहेगा। जिसमें चूड़ामणि सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा होगा।
पंचांगीय दशा से यह सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील और अशुभ स्थिति का निर्माण करने वाला होगा। जिसमें छह ग्रह एक साथ वक्री होकर संपूर्ण विश्व में बड़ी उथल-पुथल की स्थिति बनाएंगे। अभी एक पोस्ट लिख चुका हूं आप मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं महासागर में चीन की गतिविधियों से स्थिति तनावपूर्ण बनेगी। लगभग 5 घंटे 48 मिनट और 3 सेकंड के उक्त सूर्य ग्रहण के होने की बात बताई जा रही है।
जिसमें एक पॉजिटिव बात भी सामने आ रही है कि वर्तमान में कोरोनावायरस के संक्रमण व्याधि सूर्य ग्रहण से शुरू होकर इस सूर्य ग्रहण के गुजर जाने के बाद धीरे-धीरे कम होती जाएगी।58 वर्ष पूर्व वर्ष 1962 में ऐसी ही एक माह में तीन ग्रहणों की स्थिति बनी थी। जिसमें 17 जुलाई 1962 को मांद्य चंद्र ग्रहण, 31 जुलाई 1962 को सूर्य ग्रहण और 15 अगस्त 1962 को मांद्य चंद्रग्रहण हुआ था। मित्रोंपहला ग्रहण 5 जून को होगा। यह चंद्र ग्रहण रहेगा। इस वर्ष का यह दूसरा चंद्र ग्रहण है। इसके पहले 10 जनवरी को चंद्र ग्रहण लग चुका है। इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा जो कि कंकणाकृति का होगा। यह भारत में नजऱ नहीं आएगा। तीसरा ग्रहण भी चंद्र ग्रहण है जो 5 जुलाई को लगेगा। एक माह में तीन ग्रहण केवल एक ग्रहण भारत में दिखाई देगा। एक माह में तीन ग्रहण का होना देश के लिए हितकारी नहीं है। 5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच मे तीन ग्रहण हैं। चंद्रग्रहण - 5 जून , 2020
आरम्भ - रात्रि 11:15
अंत - रात्रि 2:34 ( 6 जून )
कुल अवधि - 3 घण्टे 19 मिनट
2. सूर्यग्रहण - 21 जून 2020
आरम्भ - सुबह 9:15
अंत - शाम 15:03
कुल अवधि - 5 घण्टा 48 मिनट
3. चंद्रग्रहण - 5 जुलाई 2020
आरम्भ - सुबह 8:37 मिनट
अंत - दिन 11:22 मिनट
कुल अवधि - 2 घण्टे 45 मिनट
( भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा, लेकिन साधना के लिए मान्य होगा )
तीन से ज्यादा ग्रहण आ जाएं तो एक चिंता का विषय बनता है
5 जून 2020 चंद्रग्रहण
प्रारंभ रात 11:15 मिनिट समाप्ति 6 जून सुबह 2:34 चंद्र ग्रहण जिसमे शुक्र वक्री और अस्त रहेगा गुरु शनि वक्री रहेंगे तो तीन ग्रह वक्री रहेंगे, जिसके कारण जिसके प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। शेयर बाजार से जुड़े हुए लोग सावधान रहें। यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर बुरा प्रभाव डालेगा। अगर कुंडली में भी अशुभ प्रभाव हो किसी भी तरह से
21 जून 2020 सूर्य ग्रहण
एक साथ 6 वक्री रहेंगे बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु यह छह ग्रह 21 जून 2020 को वक्री रहेंगे। इन छह ग्रह का वक्री होना यानी एक बहोत बड़ा तहलका मचाने वाला है।
5 जुलाई 2020 चंद्रग्रहण एक बहुत बड़ा परिवर्तन
मंगल का राशि परिवर्तन
सूर्य का राशि परिवर्तन
गुरु धन राशि मे वापस, लेकिन वक्री रहेंगे।
शुक्र मार्गी होगा24 जनवरी से शनि मकर राशि में गोचर है और मई से शनि की उल्टी चाल भी शुरू हो चुकी है. हालांकि सितंबर माह में केतु के राशि परिवर्तन और गुरु के साथ शनि के मार्गी हो जाने से इन हालातों में सुधार आने की भी संभावना है. सितंबर के आखिरी सप्ताह में देश में हालात पूरी तरह से अनुकूल हो सकते हैं और इस संक्रमण से मुक्ति मिलने के आसार हैं.
रविवार, 10 मई 2020
समुंदर मंथन में छिपा गहरा राज रहस्य-2
मित्रों पहली पोस्ट में हमने कथा पर चर्चा की लेकिनइस पौराणिक कथा का आध्यात्मिक संबध भी है| यह कथा सभी के लिए मार्गदर्शक है| आध्यात्मिक रूप से देखा जाए तो समुद्र का अर्थ है शरीर और मंथन से अमृत और विष दोनों निकलते हैं|मित्रों
समुद्र कथा में छुपे गहरे रहस्य-1
समुद्र मंथन – हमारे धर्म की पौराणिक कथाओं में वैसे तो कई कथाएँ प्रचलित हैं…
शुक्रवार, 1 मई 2020
शनि केतु की युति
मित्रों आज हम चर्चा करेंगे शनि और केतु ग्रह की युति पर शनि ग्रह और केतु ग्रह की युति को समझने के लिए सर्वप्रथम हमें दोनों ग्रहों को समझना होगा। शनि ग्रह आयु, न्याय, नौकरी, सेवा, अपमान, और निष्ठा के कारक ग्रह है। ये कारावास के भी कारक ग्रह है। एवं केतु को रहस्यमयी विषयों का कारक ग्रह माना गया है। यह मोक्ष कारक ग्रह भी है्।
बुधवार, 29 अप्रैल 2020
#Planet#TransitIn #May&June2020
मित्रों मई माह में कई ग्रह अपनी चाल बदलेंगे। इन ग्रहों में सूर्य, मंगल, बुध शामिल हैं। इस महीने बुध दो बार अपनी राशि बदलेगा। इसके साथ ही गुरु, शुक्र और शनि ग्रह वक्री होंगे। इन सभी ग्रहों की चाल का प्रभाव आप सभी के ऊपर शुभाशुभ रूप में पड़ेगा।4 मईको मंगल ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि में यह 18 जून 2020 तक रहेगा। बुध ग्रह 9 मई को वृषभ राशि में प्रवेश करेगा।14 मई को सूर्य का मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश होगा। सूर्य इस राशि में 15 जून 2020 तक रहेगा।25 मई को बुध अपनी स्वराशि में प्रवेश करेगा।11 मई को शनि वक्री होंगे। उनकी यह वक्री चाल 142 दिन तक रहेगी। इसके बाद 29 सितंबर को फिर से मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिष में शनि का गोचर, वक्री और मार्गी होना बहुत ही महत्व होता है। इसका प्रभाव सभी पर पड़ता है 13 मई को शुक्र ग्रह वक्री होंगे। इसके बाद 25 जून 2020 को शुक्र मार्गी होगा। 14 तारीख को गुरु वक्री चाल चलेंगे और फिर 13 सितंबर 2020 को वह मार्गी होंगे। राहु केतु सदा ही बक्री चाल चलते हैंकुल 6ग्रह बक्री गति से होंगे प्लुटो सहित 7ग्रह होगेबक्री ग्रह अक्सर अप्रत्याशित रूप से अच्छे और बुरे दोनों परिणाम देते हैं। प्रतिगामी गति में ग्रह पृथ्वी के अधिक निकट होते हैं। इसलिए उनका प्रभाव अधिक महसूस होता है। प्रतिगामी गति में ग्रहों के कारक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में कुंडली के जिस घर में वक्री ग्रह होते हैं उनके परिणाम समुचित नहीं दे पाते हैं। इसलिए जब ग्रह वक्र हो तब किसी नई नीति या परियोजना को शुरू नहीं करना चाहिएसौर मंडल के सभी ग्रह पृथ्वी के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। लेकिन सांसारिक दृष्टिकोण से ऐसा लगता है जैसे पृथ्वी नहीं चल रही है, और सभी ग्रह केंद्र के रूप में पृथ्वी के साथ घूम रहे हैं। यह सिर्फ एक ऑप्टिकल भ्रम है। इसलिए ग्रह रुकते हुए प्रतीत होते हैं, पीछे की ओर जाते हैं, फिर से रुकते हैं और आगे जाते हैं जिसे डायरेक्ट मोशन कहते हैं। सूर्य और चंद्रमा हमेशा प्रत्यक्ष गति में होते हैं (अर्थात, वे कभी पीछे नहीं चलते हैं) जबकि राहु और केतु हमेशा प्रतिगामी यानी वक्री होते हैं (अर्थात, वे हमेशा पीछे की ओर बढ़ते हैं)। पांच ग्रह, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि दोनों प्रत्यक्ष और प्रतिगामी गति में चलते हैं। कुल 9 ग्रह हैं जिनका प्रभाव हमारे जीवन और समाज पर होता है। इस बीच काल सर्प योग भी प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की ऐसी स्थिति शुभ नहीं होती है। पूरी दुनिया इन दिनों एक गंभीर संकट का सामना कर रही है ऐसे में 6 ग्रहों का एक साथ उलटी चाल में चलना क्या गुल खिलाएंगा 18 जून को बुध उलटी चाल से चलने लगेंगे। गौरतलब है कि 18 जून से 25 जून के बीच ये चारों ग्रह एक ही समय पर प्रतिगामी यानी वक्र रहेंगे। ग्रहों की यह स्थिति 15 जुलाई तक कालपुरुष कुंडली में बने काल सर्प दोष के साथ परस्पर व्याप्त होती है जिसका परिणाम चिंताजनक हो सकता है।प्रतिगामी शनि उन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए शक्ति प्रदान करते है जिन्हें अतीत में अधूरा छोड़ दिया गया था। शनि 11 मई से 29 सितंबर तक मकर राशि में वक्री रहेंशनि का प्रतिगमन जिम्मेदारियों और काम के बोझ के साथ एक कठिन अवधि को दर्शाता है। लेकिन यह लोगों को अपने कौशल को अधिक निखारने और यथार्थवादी एवं व्यवहारिक बनने में भी मदद करेगा। कोरोनावायरस के कारण आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए नए कानून और नीतियां बनाई जा सकती हैं। न्यायिक सुधार और न्यायिक ढांचे का पुनर्गठन भी हो सकता है।शुक्र विलासिता, आराम, सौंदर्य और खुशी की भावना का ग्रह है। कालपुरुष की कुंडली में वह 2 और 7 भाव के स्वामी हैं। शुक्र 13 मई से 25 जून तक वृष राशि में वक्री रहेंगे जो इस अवधि के दौरान लोगों के सामान्य दृष्टिकोण में सुधार होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी। यात्रा और आतिथ्य उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए समर्थन और प्रोत्साहन मिल सकता है। साथ ही भारत के प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।बृहस्पति ज्ञान और बुद्धिमत्ता के ग्रह हैं। प्रतिगामी गति में उनके शुभ परिणाम देने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। बृहस्पति नवे और ग्यारहवें भाव के स्वामी है और 14 मई से 13 सितंबर तक मकर राशि में वक्री रहेंगे इस समय के दौरान देश में उन कार्यों और परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की क्षमता बढ़ेगी जिन्हें पहले अधूरा छोड़ दिया गया था। यह वह समय है जब बीमार कंपनियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है और सरकार द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज भी प्रदान किया जा सकता है। भारत के अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों को मजबूती मिल सकती है। इस समय जन आक्रोश और अशांति की आशंका रहेगी। मौजूदा कानूनों और नीतियों के खिलाफ धार्मिक समुदायों में भी असंतोष पैदा हो सकती है।बुध व्यापार, संचार व्यवस्था एवं नयी सोच का प्रतीक है। कालपुरुष कुंडली में, बुधक्षतीसरे ,छठे भाव के मालिक हैं। यह 18 जून से 12 जुलाई के बीच वृषभ राशि में वक्री रहेंगे, जो इस समय के दौरान कोरोनो वायरस के प्रभावों से निपटने के लिए नए विचार और समाधान सामने आ सकते हैं। पड़ोसियों देशों के साथ संवाद में व्यवधान आ सकता है। यह भी गौरतलब है कि 18 जून से 25 जून के बीच चार ग्रह – शनि, बृहस्पति, शुक्र और बुध – एक ही समय में प्रतिगामी गति में होंगे जो भ्रम और अराजकता पैदा कर सकते हैं।जून और जुलाई के महीने में करीब 30 दिन के अंदर तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं ऐसे में इसका क्या असर होगा जानिए
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