आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
गुरुवार, 11 मई 2017
ज्योतिष से वैदिक काल से ज्योतिष का प्रचलन रहा है समय की पहिचान बिना ज्योतिष के ज्ञान के नही हो सकती है।आज का विज्ञान प्राचीन ज्योतिष का लघु शिष्य है और आयुर्वेद ज्योतिष का चचेरा भाई। ज्योतिष एक रितंभरा प्रज्ञा है। ज्योतिष का इतिहास मानव सभ्यता का इतिहास है जिसका आधार पूर्णतः गणितीय एवं वैज्ञानिक है। हमारे मनिषियों ने इस “पराविज्ञान” के प्रत्येक पक्ष का गहनतम अध्ययन किया है। ज्योतिष शास्त्र एक गुढ़ वैज्ञानिक चिंतन है। यह ग्रह-नक्षत्रों का चिंतन मात्र नहीं, बल्कि भविष्य को टटोलकर अपने अनुकूल बनाने की चेस्टा है। वस्तुतः ज्योतिष भविष्य की तलाश है।इसी प्रकार से आसमानी गह भी ज्योतिष से ही कालान्तर के लगातार ज्ञान को प्राप्त करने के कारण ही पहिचाने जाते है। जब तक ज्योतिष का ज्ञान नही था तब तक पृथ्वी स्थिर थी और सूर्य चन्द्रमा और तारे चला करते थे। जैसे ही ज्योतिष का ज्ञान होने लगा तो पता लगा कि सूर्य तो अपनी ही कक्षा मे स्थापित है बाकी के ग्रह चल रहे है। लेकिन ऋषियों और मनीषियों को बहुत पहले से ज्योतिष का ज्ञान था उन्हे प्रत्येक ग्रह के बारे मे जानकारी थी,यहां तक कि मंगल ग्रह के बारे मे भी उनका ज्ञान प्रचुर मात्रा मे था और उन्होने मंगल ग्रह की पूरी गाथा पहले ही लिख दी थी। पुराने जमाने से सुनता आया हूँ- "लाल देह लाली लसे और धरि लाल लंगूर,बज्र देह दानव दलन जय जय कपि शूर",इस दोहे को लिखा तो तुलसीदास जी है लेकिन उन्हे इस बारे मे कैसे पता लगा कि मंगल का रंग लाल है और जब मंगल को खुली आंख से देखा जाये तो लाल रंग का ही दिखाई देता है सूखा ग्रह है इसलिये बज्र की तरह से कठोर है,साथ ही ध्वजा पर लाल रंग का होना मंगल का उपस्थिति का कारण भी बनाता है,मंगल के देवता हनुमान जी के विषय मे उन्होने लिखा था। इस बात का सटीक पता तब और चला जब अमेरिका के नासा स्पेस से वाइकिंग नामका उपग्रह यान मंगल पर भेजा गया और उसने जब सन दो हजार में मंगल के ऊपर की कुछ तस्वीरे भेजी तो उसके अन्दर एक फ़ेस आफ़ मार्स के नाम से भी तस्वीर आयी। यह तस्वीर बिलकुल हनुमान जी की तस्वीर की तरह थी,इस तस्वीर को उन्होने सन दो हजार दो तक नही प्रसारित की,इसका भी कारण था,वे अपने को बहुत ही उन्नत और वैज्ञानिक भाषा मे दक्ष मानते थे और जब भी उनका कोई टूरिस्ट भारत आता था और भारत मे जब हनुमानजी के मंदिर को देखता तो वह मजाक करता था और "मंकी टेम्पिल" कह के चला जाता था। इस फ़ेस आफ़ मार्स ने अमेरिका के वैज्ञानिक धारणा को चौपट कर दिया और उन्हे यह पता लग गया कि भारत मे तो आदि काल से ही मंगल को हनुमान जी के रूप मे माना जा रहा है। विज्ञान जहाँ समाप्त हो जाता है वहाँ से ज्योतिष विज्ञान शुरु होता है ! जिस प्रकार से विज्ञान के अन्दर जो भी धारणा पैदा की जाती है उसके अनुसार रसायन शास्त्र भौतिक शास्त्र चिकित्सा शास्त्र आदि बनाये गये है। लेकिन जितनेी तत्व विज्ञान की कसौटी पर खरे उतरते है उनके अन्दर केवल चार तत्व की मीमांसा ही की जा सकती है। बाकी का एक तत्व जो गुरु के रूप मे है वह विज्ञान न तो कभी प्रकट कर पाया है और न ही कभी अपनी धारणा से प्रकट कर सकता है। शरीर विज्ञान को ही ले लीजिये,सिर से लेकर पैर तक सभी अंगो का विश्लेषण कर सकता है,हड्डी से लेकर मांस मज्जा खून वसा धडकन की नाप आदि सभी को प्रकट कर सकता है कृत्रिम अंग बनाकर एक बार शरीर के अंग को संचालित कर सकता है। फ़ाइवर ब्लड को बनाकर कुछ समय के लिये खून की मात्रा को बढा सकता है लेकिन जो सबसे मुख्य बात है वह है प्राण वायु यानी गुरु की वह पैदा नही कर सकता है जब प्राण वायु को शरीर से जाना होता है तो वह चली जाती है और शरीर मृत होकर पडा रह जाता है उसके बाद शरीर वैज्ञानिक केवल पोस्ट्मार्टम रिपोर्ट को ही पेश कर सकता है कि ह्रदय रुक गया मस्तिष्क ने काम करना बन्द कर दिया अमुक चीज की कमी रह गयी और अमुक कारण नही बन पाया। नही समझ पाये आज तक कि गुरु क्या है लेकिन ज्योतिष शास्त्र मे सर्वप्रथम गुरु का विवेचन समझना पडता है गुरु जिस स्थान से शुरु होता है अपने अन्तिम समय तक केवल काल की अवधि तक ही सीमित रहता है उसे कोई पकड नही पाया अपने अनुसार पैदा नही कर पाया और न ही विज्ञान के अन्दर इतनी दम है कि वह भौतिक रूप से गुरु को प्रदर्शित कर सके। जिस दिन यह गुरु भौतिकता मे समझ मे आने लगेगा उस दिन विज्ञान की परिभाषा पराविज्ञान के रूप मे जानी जायेगी।
सोमवार, 8 मई 2017
किसी भी काम में सफलता पाने के लिए सही ज्ञान होना आवश्यक है। अज्ञान या अधूरा ज्ञान हमेशा परेशानियों का कारण बनता है। अत: व्यक्ति को सदैव ज्ञान अर्जित करने के प्रयास करते रहना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा जानकारी होगी तो हमारा दिमाग अच्छे-बुरे समय में सही निर्णय ले सकेगा। सही और गलत में से सही को चुनना तो सरल है, लेकिन दो सही बातों में से ज्यादा सही कौन सी बात है, ये जानने के लिए ज्ञान होना बहुत जरूरी है।
शुक्रवार, 5 मई 2017
मां काली ज्योतिष की आज की पोस्ट ज्योतिष तो अपने आप में पूर्णतः सही गणना है, परन्तु भविष्य वक्ता की गणना सही है या गलत यह इस बात पर निर्भर करता है कि जो व्यक्ति गणना कर रहा है, उसके पास ज्योतिष का कितना ज्ञान है, जिस प्रकार एक प्रशिक्षित डॉक्टर या वैद्य किसी बीमारी को डाइग्नोस करने में पहले उसके लक्षण व स्वभाव को समझता है फिर उसका इलाज करता है । हालांकि यह और बात है कि आज के मशीनी युग में हम मशीनी परीक्षण पर निर्भर हैं, लेकिन दोनों ही स्थितियों में डॉक्टर व वैद्य का ज्ञान और परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही मरीज़ को सही इलाज मिलना सम्भव है । थोड़ी सी लापरवाही या अल्पज्ञान मरीज़ के लिये घातक सिद्ध हो सकता है ठीक उसी प्रकार ज्योतिष में ग्रहों के स्वभाव, भाव और राशि तथा आपसी ग्रहों के संबंधों के आधार पर भविष्य कथन होता है जो पूर्णतः सही होता है । परन्तु यदि ज्योतिष शास्त्री अगर ग्रहों की स्थिति व भावगत स्वभाव को समझने में थोड़ी सी भी भूल कर देते हैं तो उनका कथन गलत हो जाता है । ज्योतिष शास्त्र जीवन का आईना दिखाने के साथ - साथ जीवन का मार्गदर्शन भी करता है । व्यक्ति का जीवन किस दिशा में निर्धारित है और उसे को किस दिशा में प्रयास करना चाहिए । जैसे कि ज्योतिष में पहले से निर्धारित है कि अमुक समस्या का समय अमुक तारीख से अमुक तारीख तक रहेगा, उसके लिए व्यक्ति मानसिक तौर पर तैयार हो जाता है और उस समय धैर्य नहीं खोता है । अगर समस्या का समय पता न हो तो व्यक्ति धैर्य खो देता है । अतः समस्या का कारण पता होने से सकारात्मक दिशा में सुधार हेतु प्रयास भी काफी हद तक व्यक्ति को समस्याओं से निजात दिलाने में सार्थक होते हैं । जहाँ तक नौकरी की बात है तो बच्चे के जन्म के समय से ही पता लग जाता है कि वह नौकरी करेगा या व्यवसाय तो उस दिशा में उसके स्वभाव के अनुरूप दिशा देना उसके कैरियर में काफी महत्वपूर्ण साबित होता है । ठीक उसी प्रकार से बीमारी की जहां तक बात है तो ज्योतिष द्वारा यह आंकलन होता है कि कौन सी बीमारी कब और शरीर के किस हिस्से में होगी उसके अनुरूप ज्योतिष द्वारा कौन से उपाय करने चाहिए यह तय करना आसान हो जाता है । जैसे की अगर किसी को पाचन की समस्या हो रही है तो कुण्डली में यह पता चल जाता है कि उसे यह समस्या मंदाग्नि या जठराग्नि के कारण है । मंदाग्नि, जठराग्नि पित्तज प्रवृति के ग्रहों की प्रबलता या निर्बलता पर निर्भर करते हैं । ऐसी स्थिति में उन ग्रहों को सन्तुलित करने का उपाय स्वास्थ्य के लिए कारगर साबित हो सकता है ।इसमें कहीं कोई दो राय नहीं कि मनुष्य का भाग्य और पुरूषार्थ दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। परन्तु यह भी सच है कि भाग्य से मनुष्य जो पाता है उसे कायम रखने के लिए उसे प्रयास करने होते हैं लेकिन जो भाग्य में नहीं है उसे कर्मयोगी व्यक्ति पुरूषार्थ से हासिल कर लेते हैं। जीवन के अनेक पहलुओं को प्रभावित करने वाला ज्योतिष शास्त्र हमारी समस्याओं के हल तो अवश्य देता है परन्तु ज्योतिष विद्या भी कर्म पर बल देती है । इसलिए यदि हम स्वयं पर भरोसा रखेंगे तो भ्रम और भ्रान्तियों के मकड़जाल में भी कम फसेंगे ।किसी भी व्यक्ति की कुण्डली का अध्ययन भी ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर ही किया जाता है । आज बदलते दौर के साथ हम जितना आधुनिक होते जा रहे हैं उतना ही ज़्यादा हम भविष्य को जानने के लिऐ भी आतुर रहने लगे हैं । शायद यही वजह है कि आज ज्योतिष विद्या को अनेक भ्रान्तियों ने आ घेरा है जिस कारण समाज में अन्धविश्वास भी बढ़ने लग है अब सवाल यह है कि सही ज्योतिषी और गलत ज्योतिषी मैं फर्क कैसे जाने क्या जो ज्योतिषी अपनी फीस लेकर आपको कुंडली देखकर पसंद करते हैं वह गलत है या फ्री अभी देखकर बताते हैं पूजा पाठ के नाम से आपक डरा् कर आपसे पैसे लेते्हैं। मुफ्त में कोई कुछ नहीं देता मित्रों अतः ऐसे लोगो से दूर रहे उसके बाद दूसरे ज्योतिषियों में से आप चुनाव करें,आचार्य राजेश
मां काली ज्योतिष की आज की पोस्ट ज्योतिष तो अपने आप में पूर्णतः सही गणना है, परन्तु भविष्य वक्ता की गणना सही है या गलत यह इस बात पर निर्भर करता है कि जो व्यक्ति गणना कर रहा है, उसके पास ज्योतिष का कितना ज्ञान है, जिस प्रकार एक प्रशिक्षित डॉक्टर या वैद्य किसी बीमारी को डाइग्नोस करने में पहले उसके लक्षण व स्वभाव को समझता है फिर उसका इलाज करता है । हालांकि यह और बात है कि आज के मशीनी युग में हम मशीनी परीक्षण पर निर्भर हैं, लेकिन दोनों ही स्थितियों में डॉक्टर व वैद्य का ज्ञान और परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही मरीज़ को सही इलाज मिलना सम्भव है । थोड़ी सी लापरवाही या अल्पज्ञान मरीज़ के लिये घातक सिद्ध हो सकता है ठीक उसी प्रकार ज्योतिष में ग्रहों के स्वभाव, भाव और राशि तथा आपसी ग्रहों के संबंधों के आधार पर भविष्य कथन होता है जो पूर्णतः सही होता है । परन्तु यदि ज्योतिष शास्त्री अगर ग्रहों की स्थिति व भावगत स्वभाव को समझने में थोड़ी सी भी भूल कर देते हैं तो उनका कथन गलत हो जाता है । ज्योतिष शास्त्र जीवन का आईना दिखाने के साथ - साथ जीवन का मार्गदर्शन भी करता है । व्यक्ति का जीवन किस दिशा में निर्धारित है और उसे को किस दिशा में प्रयास करना चाहिए । जैसे कि ज्योतिष में पहले से निर्धारित है कि अमुक समस्या का समय अमुक तारीख से अमुक तारीख तक रहेगा, उसके लिए व्यक्ति मानसिक तौर पर तैयार हो जाता है और उस समय धैर्य नहीं खोता है । अगर समस्या का समय पता न हो तो व्यक्ति धैर्य खो देता है । अतः समस्या का कारण पता होने से सकारात्मक दिशा में सुधार हेतु प्रयास भी काफी हद तक व्यक्ति को समस्याओं से निजात दिलाने में सार्थक होते हैं । जहाँ तक नौकरी की बात है तो बच्चे के जन्म के समय से ही पता लग जाता है कि वह नौकरी करेगा या व्यवसाय तो उस दिशा में उसके स्वभाव के अनुरूप दिशा देना उसके कैरियर में काफी महत्वपूर्ण साबित होता है । ठीक उसी प्रकार से बीमारी की जहां तक बात है तो ज्योतिष द्वारा यह आंकलन होता है कि कौन सी बीमारी कब और शरीर के किस हिस्से में होगी उसके अनुरूप ज्योतिष द्वारा कौन से उपाय करने चाहिए यह तय करना आसान हो जाता है । जैसे की अगर किसी को पाचन की समस्या हो रही है तो कुण्डली में यह पता चल जाता है कि उसे यह समस्या मंदाग्नि या जठराग्नि के कारण है । मंदाग्नि, जठराग्नि पित्तज प्रवृति के ग्रहों की प्रबलता या निर्बलता पर निर्भर करते हैं । ऐसी स्थिति में उन ग्रहों को सन्तुलित करने का उपाय स्वास्थ्य के लिए कारगर साबित हो सकता है ।इसमें कहीं कोई दो राय नहीं कि मनुष्य का भाग्य और पुरूषार्थ दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। परन्तु यह भी सच है कि भाग्य से मनुष्य जो पाता है उसे कायम रखने के लिए उसे प्रयास करने होते हैं लेकिन जो भाग्य में नहीं है उसे कर्मयोगी व्यक्ति पुरूषार्थ से हासिल कर लेते हैं। जीवन के अनेक पहलुओं को प्रभावित करने वाला ज्योतिष शास्त्र हमारी समस्याओं के हल तो अवश्य देता है परन्तु ज्योतिष विद्या भी कर्म पर बल देती है । इसलिए यदि हम स्वयं पर भरोसा रखेंगे तो भ्रम और भ्रान्तियों के मकड़जाल में भी कम फसेंगे ।किसी भी व्यक्ति की कुण्डली का अध्ययन भी ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर ही किया जाता है । आज बदलते दौर के साथ हम जितना आधुनिक होते जा रहे हैं उतना ही ज़्यादा हम भविष्य को जानने के लिऐ भी आतुर रहने लगे हैं । शायद यही वजह है कि आज ज्योतिष विद्या को अनेक भ्रान्तियों ने आ घेरा है जिस कारण समाज में अन्धविश्वास भी बढ़ने लग है अब सवाल यह है कि सही ज्योतिषी और गलत ज्योतिषी मैं फर्क कैसे जाने क्या जो ज्योतिषी अपनी फीस लेकर आपको कुंडली देखकर पसंद करते हैं वह गलत है या फ्री अभी देखकर बताते हैं पूजा पाठ के नाम से आपको ब्रोकर आपसे पैसे लेते्हैं। मुफ्त में कोई कुछ नहीं देता मित्रों अतः ऐसे लोगो से दूर रहे उसके बाद दूसरे ज्योतिषियों में से आप चुनाव करें,आचार्य राजेश
गुरुवार, 4 मई 2017
बुधवार, 3 मई 2017
रिश्ते और ग्रह नक्षत्तर मित्तरो ग्रह नक्षत्रों व रिश्तों का एक अनोखा व अटूट सम्बन्ध होता है. आपके पारिवारिक रिश्ते ग्रह व नक्षत्रों से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं. नक्षत्र यानि आकाश के तारों का समूह व ग्रह यानि आकाश में स्थापित अन्य पिंड. ग्रह व नक्षत्र हमारे आपसी रिश्ते / नातों पर प्रभाव डालते हैं. ये बिल्कुल सत्य है. लाल किताब के अनुसार हमारी जिंदगी से जुड़ने वाला हर रिश्ता किसी ना किसी ग्रह का सूचक है. हमारी कुंडली में जो ग्रह जहाँ स्थित है, वो रिश्ता वहीँ से हमारी ज़िन्दगी में भी आता हैयदि किसी ग्रह की दशा खराब चल रही है तो उस से जुड़े रिश्ते पर ध्यान देने से लाभ प्राप्त होगा. कुंडली का प्रत्येक भाव किसी ना किसी रिश्ते अथवा रिश्तेदार से प्रभावित होता है और इसीलिए कुंडली में यदि कोई ग्रह कमजोर है तो उस से जुड़े रिश्ते को मजबूत बनाने की कोशिश करें व अपने आपसी संबंधों में सुधार व बदलाव लायें.. जिंदगी की आपाधापी में रिश्ते कहीं खो गए हैं शायद इसीलिए अब लोग दुखी है सो तरा के उपाय हम कर रहे हैं लेकिन अपने रिश्तो को नहीं सुधारतेमाता-पिता, भाई-बहिन,पति पत्नी, मित्र पड़ोसी सगे-सम्बन्धी इत्यादि संसार के अजितने भी रिश्ते नाते है। सब मिलते है। क्योंकि इन सबको हमें या तो कुछ देना होता है या इनसे कुछ लेना होता है।जन्म पत्रिका के बाहर भावों में ग्रह और सामाजिक रिश्ते अलग-अलग भाव से होते है।व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों ग्रह स्वामी ,ग्रहों के आपसी संबंध, ग्रहों की दृष्टि, आदि का प्रभाव व्यक्ति के संबंधों पर पड़ता है। जो की परिवारजनों के संबंधों को अनुकूल बनाता है। रिश्ते की बुनियाद प्यार और विश्वास हर टिकी होती है। इसलिए अाजकल के समय में जितना रिश्तों को बनाना अासान है उतना ही बनाएं रखना मुश्किल हो गया है। इसके लिए आपको हर रिश्ते की अच्छे से देखभाल करने के लिए अपने रिश्ते को ज्यादा समय देकर और समझदारी से बना कर रखना चाहिए ताकि अापका रिश्ता कमजोर न हों। ऐसे में अगर आपके रिश्ते में कोई गलतफहमी हो या फिर दूरिया हो तो अापके अापकी प्यार से इन्हें दूर करेबदलते जमाने के साथ हर किसी की सोच बदल गई है, तो एेसे ही हर परिवार में बदलती सोच के साथ परिवार भी बिखर गए हैं। पुराने समय में सभी एक साथ एक परिवार बन कर रहते थें पर अब अलग-अलग रहने लगे हैं। एेसे में हर किसी के लिए उन रिश्तों की अहमियत बढ़ जाती है जो खून के न हों, जैसे दोस्ती, व्यापारिक या आसपड़ोस के रिश्ते। एेसे रिश्ते हमारी जरूरतों की वजह से बनते हैं। एेसे में हमें खून के रिश्तों को भी समय देकर और समझदारी से निभाना चाहिएइसलिए दोस्तों अगर आपके ग्रह छप्पर ठीक नहीं चलोगे तो सबसे पहले आपसे बंधुओं को सुधारें उसके बाद ही ज्योतिष उपाय काम करेंगे जब तक आपके अपने आप से दूर है यानी माता-पिता भाई-बहन पड़ोसीं।इनसे आप अपने रिश्ते की करें और इन से मधुर संबंध बनाएंग्रह और संबंध :ग्रह अनुकूल होने पर ग्रहों के अनुसार संबंध ठीक रहते हैं। अपने रिस्तो पर नजर डाले । देखें आपका कौन सा सम्बन्धी आपसे संतुस्ट नही है ,उससे सम्बंधित ग्रह आपका ख़राब होगा। जैसे आपकी माँ आपसे रूठी है तो चन्द्रमाँ आपका अच्छा फल नही कर रहा है। इसी प्रकार पिता से आपके सम्बन्धं अगर ठीक नही है तो सूर्य अच्छा फल नही दे रहा है । पत्नी से अनबन चल रही होतो समझले आप का शुक्र ग्रह ख़राब फल कर रहा है । बहने अगर आपसे खफा हैं तो बुध आप से खफा है। भाई आपके साथ नहीं है तो मंगल आपके साथ नही है । आपके गुरुजन आपसे रुष्ट है तो गुरु ग्रह आपसे रुष्ट है । और जब शनि की टेड़ी नजर आप पर है तो आपके नौकर चाकर आप का नुकसान करते रहेंगे । रहू अपनी सैतानी आपके दुष्ट मित्रो के रूप में दिखा सकता है । केतु आपके पालतू जानवर पर प्रभाव दिखता है । इसके आलावा भी आलग आलग रिस्तो के लिए आलग आलग ग्रह प्रभाव रख ते है । इस तथ्य को जानकर आप आसानी से जान सकते है की ,कौन सा ग्रह आप का ख़राब है और कौन सा अच्छा है आज इतना ही आचार्य राजेश
सोमवार, 1 मई 2017
ज्योतिष क्या है आज के दौर में ज्योतिष एक फैशन बन गया है. ज्योतिष व्यवसायीकरण के युग में एक प्रोडक्ट बन गया है जिसका उपाय किसी इंस्टंट नूडल की तरह बताया जा रहा है .मन की मनुष्य के जीवन में लाभ-हानि, अनुकूलता-प्रतिकूलता, शुभता-अशुभता या अच्छा-बुरा कब-कब होगा इसको ज्योतिष के माध्यम से ही जाना जा सकता है. लेकिन वास्तव में ज्योतिष का अर्थ होता है व्यक्ति को जागरुक/ सचेत करना, परन्तु समाज में इसके गलत प्रयोग करने ,लोगो को सही जानकारी देने की बजाए उनको भयभीत कर धन कमाने के कारण कई बार इस बिद्या की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है. ज्योतिष समय का विज्ञानं है . तिथि , वार, नक्षत्र , योग और कर्म इन पांच चीजों का अध्ययन कर भविष्य में होने वाली घटनायों का आकलन किया जाता है . संभावनायों और भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिष शास्त्र का सही उपयोग परामर्श , मानव जीवन को अनुशासित और जिंदगी के हर पल का एक समुचित मार्गदर्शन के साधन के तौर पर समाज में प्रस्तुत करने की अंत्यत आवश्यकता है . केवल भविष्यवाणियों में सिमित न रह कर , ज्योतिष का आधार लेकर मनुष्य की जीवन की कई समस्यायों का हल निकाला जा सकता है. ज्योतिष भविष्य को बदलता नहीं बल्कि मनुष्य को सही और उचित सलाह देता है . प्रथम तो हमें यह समझ लेना चाहिए की ज्योतिष है क्या ? ज्योतिष प्रकाश का नाम है | प्रकाश अँधेरे को दूर करता है अँधेरा लाता नहीं | ज्योतिष कर्म को निश्चित करता है कर्म से भटकाता नहीं | ज्योतिष व्यर्थ के प्रयासों से बचते हुए सफलता के लिए मदद करता है व्यर्थ के कार्य नहीं करवाता है | वस्तुतः ज्योतिष हमें हमारे अन्तर्निहित शक्ति का ज्ञान करवाते हुए सही दिशा प्रदान करता है | 12 राशि, 9 ग्रह और 27 नक्षत्रों को लेकर कुंडली बनाई जाती है। सही गणना के लिए तारीख, वक्त, स्थान तीनों सही होने चाहिए। ग्रहों के अलावा पिछले पूर्वजन्म भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जन्मकुंडली के अलावा हस्तरेखा, प्रश्नकुंडली आदि तरीकों से भी भाग्य बांचा जाता है। बाहरी दुनिया के साथ हमारे संपर्कों को जानने-समझने का तरीका है ज्योतिष। यह ऐसा विज्ञान है, जो वातावरण द्वारा मनुष्य पर पड़नेवाले प्रभावों की स्टडी करता है। इसमें समुद्र तल से ऊंचाई, देशांतर-अक्षांश, पर्यावरण, स्तंभन, चुंबकत्व, गुरुत्वाकर्षण, रेडिएशन ईश्वर, पुनर्जन्म, पूर्वजन्म और मनुष्य का विवेक मायने रखता है।ज्योतिष महज संकेत करता है, उससे जानना और समझना हमारे ऊपर है। इसके लिए देश-पात्र-काल जरूरी है लेकिन कर्म और संगत का भी असर होता है। प्रश्नकर्ता को घरवालों के ग्रह भी प्रभावित करते हैं। साथ ही, आप कैसा सोचते हैं, क्या करते हैं, ये सब बातें भी प्रभावित करती हैं। हर दो घंटे में लग्न बदलता है। कई बार एक मिनट के अंतर से भी लग्न बदल जाता है, मसलन अगर 2 बजे लग्न बदल रहा है और जन्म 1:59 मिनट पर हुआ तो दूसरा लग्न होगा। तब जन्म समय में 1 मिनट के फर्क से ही गणना में बहुत ज्यादा अंतर आ जाएगा। अगर लग्न नहीं बदला है तो थोड़ा अंतर हो सकता है।दो तरह से असर होता है। एक राशि या लग्न बदल जाना और दूसरे ग्रह की ताकत बदल जाना। लेकिन वक्त काफी मायने रखता है। 3.40 सेकंड में नवांश (नवां हिस्सा) बदल जाता है और एक मिनट के फर्क से गणना में 20-25 फीसदी बदलाव आ जाता है। मिनटों का अंतर भी गणना में फर्क ला देता है। सही गणना के लिए सही वक्त और जगह का होना जरूरी है। लेकिन यह भी सच है कि एक ही वक्त पर एक ही जगह जन्मे सभी बच्चों का भविष्य एक नहीं होगा। कर्मयोग और वातावरण से बदलाव आ सकता है। ज्योतिष में ECMCDIP का फॉर्म्युला चलता है, यानी एजुकेशन, करियर, मैरिज, चिल्ड्रन, डेथ, इलनेस और प्रॉपर्टी के बारे में जानने में लोगों की सबसे ज्यादातर दिलचस्पी होती है। लेकिन ज्योतिष महासागर है। बीते या आनेवाले वक्त की सभी बातें सटीक बताना नामुमकिन नहीं हैं।करियर, रिश्ते, कामयाबी, एजुकेशन, बच्चों आदि के बारे में बता सकते हैं लेकिन अगर कोई यह पूछे कि आज मैंने क्या खाया था तो यह नहीं बताया जा सकता।प्रफेशन, बीमारी, देश-विदेश का योग, विवाह, बच्चे, रिश्ते सभी के बारे में बता सकते हैं लेकिन ये सिर्फ संभावनाएं झहोंगी। कर्म तो करना ही पड़ेगा। अगर कोई ये कहे कि इस बंजर जमीन पर फसल कब उगेगी तो बताना मुश्किल है।बस मार्गदर्शक या संकेतक का काम कर सकता है ज्योतिष। अगर ईश्वर न चाहे या किसी ने अपना आत्मबल काफी मजबूत किया हुआ है तो ग्रह चाल का असर काफी कम होगा। : हठयोग के आगे ज्योतिष हार जाता है। अगर किसी को बताया जाए कि बुरा वक्त है और वह सावधान हो जाता है तो वक्त टल सकता है लेकिन तब वही व्यक्ति कहेगा कि ज्योतिषी का बताया गलत साबित हुआ। लोग अक्सर इंटरप्रेट भी गलत कर लते हैं।ज्योतिष बस दिशा दिखाता है। कर्म किए बिना फल की उम्मीद बेकार है।सब कुछ लिखा है। हर बारीक से बारीक बात लिखी है। उपायों से थोड़ा-बहुत बदल सकते हैं। अगर हल्का मारक है यानी ग्रह की पावर कम है तो टाला जा सकता है, प्रबल मारक को रोका नहीं जा सकता। रेखाएं बनती-बिगड़ती हैं। भाग्य भी बदलता है। कर्म और दूसरे उपायों से 50 फीसदी तक बदलाव मुमकिन है। काफी बदलाव किया जा सकता है। हालांकि भाग्य का लिखा मिटता नहीं है सिर्फ कुछ हद तक फेरबदल किया जा सकता है। मसलन, एक बच्चे के ग्रह अच्छे हैं लेकिन बुरी संगति में पड़कर बिगड़ सकता है।बाजारू ज्योतिषी उपाय बताएगा और उपाय खुद करने के नाम पर पैसे एंठेगा। आपकी कुंडली देखकर जो आपके बारे में मोटी-मोटी बातें सही बता दे, उसे विषय का जानकार मान सकते हैं। अच्छे ज्योतिषी के पास तकनीकी, बौद्धिक और नैतिक उत्कृष्टता होती है।जो अपने विषय का जानकार हो, पढ़ा-लिखा हो और तार्किक तरीके से सोचे। तामझाम और आडंबर के चक्कर में नहीं आना चाहिए। उपाय भी ऐसे होने चाहिए, जो आप खुद कर सकें। अच्छा ज्योतिषी सामने बिठाकर या चित्र देखकर फैमिली बैकग्राउंड जानकर बताएगा। किसी की गणनाएं कितनी सही निकलती हैं, इस आधार पर भी पता लगाया जा सकता है। वैसे, दूसरे क्षेत्रों की तरह ज्योतिषियों के लिए डिग्री जरूरी होनी चाहिए। 12 राशियां हैं और 600 करोड़ लोग हैं। ऐसे में एक राशि में आए 50 करोड़ लोग। तो भला इतने लोगों का भविष्य एक जैसा कैसे हो सकता है। दैनिक राशिफल बेकार होते हैं। राशिफल करने वाले लोग को मैं ज्योतिष नहीं मानता ज्योतिष से उन लोगों का नाता हो ही नहीं सकता आचार्य राजेश
मारक बुद्ध बुध का रूप बहुत ही कोमल नाजुक माना जाता है फ़ूल में पंखुडियां बुध की होती है पंखुडियों की सजावट शुक्र करता है और राहु खुशबू देता है,फ़ूल को साधने का काम भी बुध करता है वह हरे पत्तों के रूप में भी और हरे रंग के रूप में भी,केतु उसकी टहनी होती है,जड शनि और गुरु खुशबू को फ़ैलाने वाली वायु.फ़ूल के रंग अलग अलग ग्रहों के आधार पर देखे जाते है चन्द्रमा सफ़ेद सूर्य गुलाबी मंगल लाल गुरु से पीला शनि से काला राहु से धूमिल और केतु से चितकबरा.कई रंगो का मिलावटी रूप भी देखा जाता है जैसे गुलाब में गुलाबी भी होता है तो सफ़ेद भी होता है काला भी होता है लाल गुलाब भी होता है। समय कुंडली के नवांस से मन का कारक चन्द्रमा जिस भाव में होता है उस भाव और उस राशि का रंग ही दिमाग मे रहता है अक्सर चालाक ज्योतिषी पहले से ही फ़ूल का नाम लिख लेते है और जातक से जब फ़ूल का नाम पूंछा जाता है तो जातक उसी फ़ूल का नाम बताता है जो ज्योतिषी ने लिख लिया होता है,यह आश्चर्य की सीमा मे आजाता है और जातक का विश्वास ज्योतिषी पर पूरी तरह से हो जाता है। बुध जब मारक ग्रह का काम करता है तो मेष राषि वाले के लिये छठे भाव की बीमारियां देता है वृष राशि वाले को पेट की बीमारी देता है मिथुन राशि वाले को सांस की बीमारी देता है,कर्क राशि वाले को लकवा की बीमारी देता है सिंह राशि वाले को जुबान के रोग देता है कन्या राशि वाले को सिर के रोग देता है तुला राशि वाले को यात्राओं से इन्फ़ेक्सन देता है वृश्चिक राशि वालो को दाहिने हिस्से में सुन्नता देता है धनु राशि वाले को रीढ की हड्डी की बीमारी देता है मकर राशि वालो को पुट्ठों और नितम्बो की बीमारी देता है कुम्भ राशि वालो को जननांग सम्बन्धी बीमारी देता है,मीन राशि वालो को शरीर के नीचे के हिस्से यानी नाभि के नीचे की बीमारी देता है। आक्स्मिक हादसे में बुध जब राहु का साथ लेता है तो मेष राशि का जातक या तो बहुत सा धन इकट्ठा कर लेता है और डकैती आदि के कारण मारा जाता है अथवा बहुत बडी दुश्मनी अलावा जातियों से कर लेता है और सामाजिक दुश्मनी के कारण मारा जाता है अथवा वह अपने प्रयासो से इतना कर्जा कर लेता है कि कर्जा वसूलने वाले उसे मार डालते है,अथवा वह नौकरी आदि में अपनी बहादुरी दिखाने के चक्कर में मारा जाता है।कन्या लगन मे मीन राशि का बुध चन्द्र शुक्र एक छलावा की तरह से काम करते है,यहाँ बुध एक ऐसी लडकी के रूप मे काम करता है कि वह कहलाने को तो बहिन कहलाये और समय आने पर पत्नी का हक भी पूरा कर दे,इसके साथ ही चन्द्रमा भी यहा बुध के साथ मिलकर जीवन साथी के रूप मे छलावा करता है,शादी के बाद मतलब परस्ती और रिस्ता एक व्यापारी की भांति निभाना भी माना जा सकता है,शुक्र उच्च राशि का होकर केवल जीवन साथी की आराम परस्ती के लिये अपना हक अदा करता है,जातक के लिये यात्राओ वाले काम देता है माता बहिन और पत्नी के बीच मे सामजस्य बैठाने मे दिक्कत आती है,रोजाना के कामो मे कभी कभी एन वक्त पर खोपडी घूमने पर काम का खराब कर दिया भी माना जा सकता है.इस दोष को दूर करने के लिये केवल पहाडी क्षेत्रो की देवी यात्रायें ही लाभदायक होती है ज्योतिष आदि के काम भी फ़लीभूत होते है. अगर आप में से कोई भी मुझसे अपनी कुंडली बनवाना दिखाना या कोई समस्या का हल चाहता है तो आप मुझसे निबंध नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं 07597718725 094144813240 paid service
रविवार, 30 अप्रैल 2017
: वक्री बुघ आमतौर पर ग्रहों के संबोधन को ही उनका असर मान लिया जाता है। जैसे नीच के ग्रह को नीच यानि घटिया और उच्च के ग्रह को उच्च यानि श्रेष्ठ मान लिया जाता है। यही स्थिति कमोबेश वक्री ग्रह के साथ भी होती है। उसे उल्टी चाल वाला मान लिया जाता है। यानि वक्री ग्रह की दशा में जो भी परिणाम आएंगे वे उल्टे ही आएंगे। ऐसा नहीं है कि केवल नौसिखिए या शौकिया ज्योतिषी ही यह गलती करते हैं बल्कि मैंने कई स्थापित ज्योतिषियों को भी यही गलती करते हुए देखा है।बुध का। बुध कभी भी सूर्य से तीसरे घर से दूर नहीं जा पाता है। यानि 28 डिग्री को पार नहीं कर पाता है। इसी के साथ दूसरा तथ्य यह है कि सूर्य के दस डिग्री से अधिक नजदीक आने वाला ग्रह अस्त हो जाता है। अब बुध नजदीक होगा तो अस्त हो जाएगा और दूर जाएगा तो वक्री हो जाएगा। ऐसे में बुध का रिजल्ट तो हमेशा ही नेगेटिव ही आना चाहिए। शब्दों के आधार पर देखें तो ग्रह के अस्त होने का मतलब हुआ कि ग्रह की बत्ती बुझ गई, और अब वह कोई प्रभाव नहीं देगा और वक्री होने का अर्थ हुआ कि वह नेगेटिव प्रभाव देगा। वास्तव में दोनों ही स्थितियां नहीं होती। टर्मिनोलॉजी से दूर आकर वास्तविक स्थिति में देखें तो सूर्य के बिल्कुल पास आया बुध अस्त तो हो जाता है लेकिन अपने प्रभाव सूर्य में मिला देता है। यही तो होता है बुधादित्य योग। ऐसे जातक सामान्य से अधिक बुद्धिमान होते हैं। यानि सूर्य के साथ बुध का प्रभाव मिलने पर बुद्धि अधिक पैनी हो जाती है। दूसरी ओर वक्री ग्रह का प्रभाव। सूर्य से दूर जाने पर बुध अपने मूल स्वरूप में लौट आता है। जब वह वक्री होता है तो पृथ्वी पर खड़े अन्वेषक को अधिक देर तक अपनी रश्मियां देता है। यहां अपनी रश्मियों से अर्थ यह नहीं है कि बुध से कोई रश्मियां निकलती हैं, वरन् बुध के प्रभाव वाली तारों की रश्मियां अधिक देर तक अन्वेषक को मिलती है। ऐसे में कह सकते हैं बुध उच्च के परिणाम देगा। अब यहां उच्च का अर्थ अच्छे से नहीं बल्कि अधिक प्रभाव देने से है। सुबह यह है कि बुद्ध कब अच्छे या खराब प्रभाव देगा इसका जवाब बहुत आसान है। जिस कुण्डली में बुध कारक हो और अच्छी पोजिशन पर बैठा हो वहां अच्छे परिणाम देगा और जिस कुण्डली में खराब पोजिशन पर बैठा हो वहां खराब परिणाम देगा। इसके अलावा जिन कुण्डलियों में बुध अकारक है उनमें बुध कैसी भी स्थिति में हो, उसके अधिक प्रभाव देखने को नहीं मिलेंगे। [सारावली के अनुसार वक्री ग्रह सुख प्रदान करने वाले होते हैं लेकिन यदि जन्म कुंडली में वक्री ग्रह शत्रु राशि में है या बलहीन अवस्था में हैं तब वह व्यक्ति को बिना कारण भ्रमण देने वाले होते हैं. यह व्यक्ति के लिए अरिष्टकारी भी सिद्ध होते हैं.फल दीपिका में मंत्रेश्वर जी का कथन है कि ग्रह की वक्र गति उस ग्रह विशेष के चेष्टाबल को बढ़ाने का काम करती है. कृष्णमूर्ति पद्धति के अनुसार प्रश्न के समय संबंधित ग्रह का वक्री होना अथवा वक्री ग्रह के नक्षत्र में होना नकारात्मक माना जाता है. काम के ना होने की संभावनाएँ अधिक बनती हैं. यदि संबंधित ग्रह वक्री नहीं है लेकिन प्रश्न के समय वक्री ग्रह के नक्षत्र में स्थित है तब कार्य पूर्ण नहीं होगा जब तक कि ग्रह वक्री अवस्था में स्थित रहेगा. सर्वार्थ चिन्तामणि में आचार्य वेंकटेश ने वक्री ग्रहों की दशा व अन्तर्दशा का बढ़िया विवरण किया है. सर्वार्थ चिन्तामणि के अनुसार ही वक्री बुध अपनी दशा/अन्तर्दशा में शुभ फल प्रदान करता है. व्यक्ति अपने साथी व परिवार का सुख भोगता है. व्यक्ति की रुचि धार्मिक कार्यों की ओर भी बनी रहतीहै बुद्ध बक्री वर्ष में तीन बार होता है,और यह ग्रह केवल चौबीस दिन के लिये बक्री होता है,इस ग्रह के द्वारा अपने फ़लों में बाहरी प्राप्तियों के लिये लाभकारी माना जाता है,अन्दरूनी चाहतों के लिये यह समय नही होता है,यह दिमाग में झल्लाहट पैदा करता है,इन झल्लाहटों का मुख्य कारण कार्यों और कही बातों में देरी होना,पिछली बातों का अक्समात सामने आ जाना वे बाते कही गयीं हो या लिखी गयीं हो,इसके साथ ही इस बक्री बुध का प्रभाव आखिरी मिनट में अपना फ़ैसला बदल सकता है। यह समय किसी भी कारण को क्रियान्वित करने के लिये सही नही माना जाता है,जैसे किसी एग्रीमेंट पर साइन करना,और अधिकतर उन मामलों में जहां पर लम्बी अवधि के लिये चलने वाले कार्यों के लिये एग्रीमेंट तो कतई सफ़ल नही हो सकते हैं। इस समय में साधारण मामले जो लगातार दिमाग में टेंसन दे रहे होते है,उनको निपटाने के लिये अच्छे माने जाते है,उन कारकों के लिये अधिक सफ़ल माने जाते हैं जिनके अन्दर संचार वाले साधन और कारण ट्रांसपोर्ट और आने जाने के प्लान,जो साधारण टेंसन वाले कारण माने जाते है वे किसी प्रकार के कमन्यूकेशन को बनाने और संधारण करने वाले काम,किसी से बातचीत करने वाले काम,आने जाने के साधन को रिपेयर करने वाले काम टेलीफ़ोन के अन्दर बेकार की खराबियां उन समाचारों को जो काफ़ी समय से डिले चल रहे हों,जिन सामानों और पत्रावलियों को वितरित नही किया गया हो उन्हे वितरित करने वाले काम,मशीने जो जानबूझ कर बन्द की गयी हो उन्हे चलाने वाले काम,और जो किसी के साथ अक्समात अपोइटमेंट के कारण बनाये गये हों,और अधिकतर उन मामलों जो आखिरी समय में बनाये गये हों या बनाकर कैंसिल किये गये हों। यह समय उन बातों के लिये भी मुख्य माना जाता है,जो पिछले समय में प्लान बनाये गये हों,और उन प्लानों पर काम किया जाना हो,और प्लानों के अन्दर की बातों को सही किया जाना हो,यह समय उन कारकों को के लिये भी प्रभावी माना जा सकता है जिनके लिये दिमागी रूप से कार्य किया जाना हो,जैसे किसी बात की खोजबीन करना,रीसर्च करना, जो कोई बात लिखी गयी हो या लिखकर उसे सुधारने का काम हो,लिखावट के अन्दर की जाने वाली गल्तियों को सुधारने का काम,यह समय ध्यान लगाने समाधि में जाने और ध्यान लगाकर सोचने वाले कामों के लिये भी उत्तम माना जाता है,अपने अन्दर की बुराइयों को पढने का यह सही समय माना जाता है,मनोवैज्ञानिक तरीके से किसी बात को मनवाने के लिये यह समय उत्तम माना जाता है। नये तरीके के विचार बनाये जा सकते है लेकिन उनको क्रियान्वित नही किया जा सकता है,और उन कामों को करने का उत्तम समय है जो पिछले समय में नही किये जा सके है। इस प्रकार से बक्री बुध शेयर बाजार की गतिविधियों के मामले में भी खोजबीन करने के लिये काफ़ी है,किसी भी प्रकार के तामसी कारकों को प्रयोग करने के बाद की जाने वाली क्रियान्वनयन की बातों के ऊपर भी यह बक्री बुध जिम्मेदार माना जाता है। इस बुध के कारणों में उन बातों को भी शामिल किया जाता है जो पहले कही गयी हों या संचार द्वारा सूचित की गयीं हो,उनके लिये फ़ैसला देने के लिये यह बुध उत्तरदायी माना जा सकता है।
शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
यही जीवन है :- मैं दीपक निरंतर जल रहा हूं, दूर करता हूँ अँधेरा , सुबह होगी मैं मिटूंगा , ख़ाक में मिल जाऊंगा । सूर्य के उजाले के आगे, मैं कहां टिक पाऊंगा। यही मेरा जीवन है। दूसरों की खातिर,खुद मिट जाना, कुछ भी पाने की चाह किए बगैर, हर पल जलना, अंधेरा दूर करने को। मानव जीवन का चरम और सार्थक रूप मोक्ष है। उसे पाने के लिए व्यक्ति तप या पुरुषार्थ करता है। इसलिए मृत्यु के भय से मुक्त होकर व्यक्ति को अपने जीवन का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए। जहां पर मै अटकता हूँ तो जिंदगी गम़गीन हो जाती है। हर ओर सन्नाटा सा होता है न कोई आता है न कोई जाता है बस मैं ही ‘अकेला’ चलता चला जा रहा हूं। मंजिलों की दूरी का एहसास है मुझे फिर भी सपनों की दुनिया में खोया सा अपनी धुन में मश़गूल मैं चल रहा हूं। कुछ तो ख़ास है, इस सफ़र में, जिसके पूरे होने का भरोसा, न जाने कहां गुम सा हो गया है, फिर भी एक रा़ग सुन रहा हूं। इस जिंदगी की कठिन डगर पे, मैं ‘अकेला’ चल रहा हूं। कभी यादों की छाँव से खेले कभी पेड़ों से शीतलता का मज़ा लो,तो कभी सूरज में आंखे डालो कभी अपनों को गले लगा लो, कभी संभालो अपने पागल दिल को तो कभी गगन मैं दूर उड़ा दो, प्यार हमेशा दिल मैं पालो कभी रास्ते में यूँ ही मुस्करा भी दो | कभी आँखों से बात भी कर लो , कभी सांसों की ताल सुनो तो कभी प्यार भी आभार जाता दो | कभी सपनों मैं उन्हें निहारो कोई खिलौना हाथ मैं लेकर कभी उन्ही की नींद चुरा लो, उसे ही दिल की बात बता दो| कभी तो अपने दिल को खोलो किसी को अपने राज बता दो, दर्द छिपा है दिल मैं जो भी आँखों के रस्ते उसे बहा दो| जिंदगी भर जाएगी खुशियों से यूँ ही कभी दुश्मन को भी गले लगा लो, प्यार रखो इन आँखों मैं अब तुम दिल मैं भी भगवान् बसा लो| वो तो दर्पण है अतीत का ,जब बचपन की यादें आती,तो मैं बच्चा बन जाता हूँ,माँ के आंचल में खेल रहा, मैं मृग शावक बन जाता हूँ, जब बहुत याद आता बचपन, पुलकित होता मेरा तनमन, मैं फिर से बच्चा बन जाऊं,ऐसा कहता है मेरा मन ना भोजन को समय है, ना सोने को समय है, ना कोई सोच ना कोई उद्देश्य , बस भागते रहना , क्या यही जिन्दगी है , कल ये करना है , कल वो करना है , कल क्या क्या करना है बस सोचते रहना कल – कल के चक्कर में , आज का रोना , क्या यही जिंदगी है , कभी सब भूलकर पैसा कमाने की ललक में , बस सोचते रहना , क्या यही जिन्दगी है ? जीवन भगवान के द्वारा हमें दिया गया सबसे बेहतरीन तोहफा है, लेकिन जब कभी जीवन की सुंदरता के पीछे छुपे बदसूरत चेहरे मन को भटकने पर मजबूर कर देता है I मेरा मानना है कि हर आदमी के अंदर एक और आदमी रहता है जो वाह्य दुनिया से सीधे वार्तालाप नही करता किंतु वाह्य दुनिया के कुछ घटनाओ को बहुत बारीकी से महसूस करता है । हमें बाहर का आदमी तो दिखाई देता है किंतु अन्दर का आदमी दिखाई नहीं देता । बाहर का आदमी भौतिक रूप से विद्यमान रहता है किन्तु अन्दर का आदमी का भौतिक अस्तित्व नहीं होता । उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है । कुछ संवेदनशील व्यक्तियों का इसका एहसास जरुर हो जाता है कि उसके अन्दर कोई और है जो उसे समय समय पर सचेत करता रहता है । जिन्दगी में बहुत से कार्य ऐसे होते है जिसे हम करना नहीं चाहते किन्तु करना पड़ता है । वह कोई और नहीं अन्दर का आदमी ही होता है जो ऐसा करने से रोकता है । निश्चित रूप से अन्दर का आदमी, बाहर के आदमी से ज्यादा न्यायायिक होता है । कुछ करने से पहले उस आदमी का सहमति ज्यादा जरुरी है जो हमारे अन्दर है । इस उम्मीद में कि, आने वाला कल, आज से बेहतर होगा ,जिए जाता हूँ |मुसीबतों का जंगल कभी तो कटेगा, यह सोच कर हर गम को पिए जाता हूँ |इस उम्मीद में कि आने वाला कल आज से बेहतर होगा,जिए जाता हू |दो पहर का उज्जाला हो या रातों का अंधेरा, बर्फों की गलन हो या गर्मी का थपेड़ा प्यासी धरती हो या सावन का बसेरा, हर वक्त दिल के अरमानों को सिये जाता हू इस उम्मीद में कि.... आने वाला कल आज से बेहतर होगा जिए जाता हू | न जाने कब, वो घड़ी आयेगी इंतज़ार की सारी जख्मों को मिटा जायेगी, एक सुकून मिलेगा, जिंदगी भी खूबसूरत होती है वो सब कुछ मिलेगा जिसकी जरुरत होती है, इन्ही तमन्नाओं के डोर से खुद को बांधे जाता हू, इस उम्मीद में कि..... आने वाला कल आज से बेहतर होगा जिए जाता हू |आखिर कब तक झूलता इन ख़्वाबों के हवा महल पर, यह सोचकर उतर आया एक दिन, हकीक़त की धरातल पर, दिल में आया, जिंदगी का हिसाब कर लू अब तक क्या किया, आगे क्या करना है इसे एक बार याद कर लू यह सोच कर पहुँच गया अतीत के झरोखों में गुजरा हुआ वक्त दिखता है कोरे कागज़ में फिसली हुई उम्र डूब चुकी है सागर में जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा इंतज़ार खा गया, पूरब का सूरज भी अब पश्चिम में आ गया, अब तक तो कुछ कर न पाया आगे क्या कुछ कर पायेंगे ? ज़मीन तो खिसक चुकी है क्या शिखर को छू पायेंगे ? नीव तो टूट चुकी है क्या महल खड़ा कर पायेंगे ? इन्ही प्रश्नों में उलझ कर रह जाता हू आने वाला कल आज से बेहतर होगा यह सोच कर जिए जाता हू | खामोश तन्हा चल रहा है जिन्दगी का सफर । तय हो रही हैं बहुत-सी दूरियां हासिल किए जा रहे हैं नए-नए मुकाम स्थापित हो रही हैं नई-नई मान्यताएं हर दिन , हर पल । यही जिन्दगी है यही जिन्दगी का सफर है जो चल रहा है चुपके - चुपके - आहिस्ता - आहिस्ता । जब जिन्दगी, किसी सीधी सड़क से उतर कर पकदंडी की ओर मुड़ जाती है | लक्ष्य पाने की तमन्ना जब टुकड़ों में बट जाती है, हर सोच व ख्यालात का मतलब, जब विपरीत हो जाता है, वजह इन बदलाओं का जब कलम के रास्ते से कागज़ पर उतर आता है, कविता शायद इसी का नाम होता है |एक व्यक्ति, वातानुकूलित महल में, एक दौलत की ढेर पर बैठ कर, असंतुष्ट नजर आता है |दूसरा इससे से दूर रहकर भी, संतुष्ट नजर आता है | दृष्टिकोण के इन बिंदुओं के बीच, सच्चाई को दर्शाना, कविता कुछ और नहीं शायद इसी का नाम होता है | जिन्दगी छोटी है इसके बीच में छुपी जवानी, और भी छोटी है | यह कब शुरू होकर कब ख़त्म हो जाती है एक अतृप्त प्रश्न है यह कभी बदसूरत है तो कभी सुहानी है, समय को मापता उम्र जिन्दगी की कहानी है | बचपन, खेल-खेल में निकल जाता है, जवानी, मदहोशी में फिसल जाता है बुढापा, बचपन और जवानी के पश्चाताप में जल जाता है, यह छोटी सी जिन्दगी तीन खण्डों में बट जाती है तमन्नाओं की तादाद बड़ी है पर जिन्दगी बहुत छोटी है | क्यों बहकते हो भ्रम की हवाओं में ? क्यों जाते हो अंधेरी गुफाओं में ? क्यों भटकते हो कोरी कल्पनाओं में जिन्दगी अनंत नहीं चाँद साँसों की एक लड़ी है यह कोई समंदर नहीं एक छोटी सी नदी है | रास्ते लम्बे किन्तु जिन्दगी छोटी है | जीवन स्वयं व्यापार बना हैं मोल - तोल का भाव बना हैं क्रय - विक्रय जो करना चाहो इसके वास्ते संसार बना हैं फिर भी कुछ अनमोल है इसमें जिसका कोई मोल नहीं भक्त की भक्ती हो हो साकी की हाला दाम से नही मिलती सम्मान से मिलती मधुशाला। यह एक बेहतरीन कविता किसी कवि ने आजकल के भागती-दौड़ती जिंदगी को लेकर लिखी है. ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो , ऑफिस में भी खुश रहो और घर में खुश भी रहो । आज नहीं है,पनीर दाल में ही खुश रहो। आज जिम जाने का समय नहीं तो पैदल चल के ही खुश रहो । आज दोस्तों का साथ नहीं, टीवी देख के ही खुश रहो । घर जा नहीं सकते, फोन कर के ही खुश रहो। आज कोई नाराज़ है, उसके इस अन्दाज़ में भी खुश रहो । जिसे देख नहीं सकते, उसकी आवाज़ में ही खुश रहो।जिसे पा नहीं सकते, उसकी याद में ही खुश रहो। लेपटोप न मिला तो क्या, डेस्कटोप में ही खुश रहो। बीता हुआ कल जा चुका है, उससे मीठी-मीठी यादें हैं, उनमें ही खुश रहो। आने वाले पल का पता नहीं … सपनों में ही खुश रहो। हँसते-हँसते ये पल बीतेंगे, आज में ही खुश रहो। ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो … यें ज़िन्दगी भी अजीब सी हैं , हर मोड़ पर अपना रंग बदल देती हैंकोई अपने बेगाने हो जाते हैं ,तो कोई पराया अपना हो जाता हैंयें ज़िन्दगी भी अजीब सी हैं , हर मोड़ पर कुछ नया सिखाती हैं कभी खुशिया भर -भर के आती है, तो कभी-कभी दुःख के बादल हर रोज बरसते हैं यें ज़िन्दगी भी अजीब सी हैं ,हरमोड़ पर एक नया मुकाम बनाती हैंइस ज़िन्दगी से हर रोज किसी न किसी को शिकायत होती है ,तो कोई इसकी प्रशंसा करता हैं यें ज़िन्दगी कभी खामोश रहती हैं ,तो कभी-कभी बिन कहे कुछ कह जाती हैं यें ज़िन्दगी दुश्मनों के साथ रहकर, अपनों को धोका दे जाती हैं यें ज़िन्दगी भी अजीब सी हैं , हर मोड़ पर एक नया रंग दे जाती हैं
अंक ज्योतिष और हम अब ज्योतिष का ब्लॉग है और मैं यह बात लिख रहा हूं तो आप सोचेंगे कि आखिर आ ही गया अपनी औकात पर। आप कुछ ऐसा समझ सकते हैं। क्योंकि मैंने सीखने में कभी कंजूसी नहीं बरती सो हर ऐसे इंसान से सीखने की कोशिश की जिसके बारे में कहा जाता था कि इसे कुछ आता है। सही कहूं तो आज भी यही स्थिति है। जिस तरह कला के जवान होने तक कलाकार बूढा हो जाता है वैसे ही ज्योतिष की समझ आने तक फलादेश करने का महत्व भी खो सा जाता है। खैर में आता हूं विषय पर आज मित्रों में बात करना चाहता हूं Ank ज्योतिष पर फलित ज्योतिष हमारे ऋषि-मुनियों की देन है तो इस पर उन्होंने बहुत खोज की और रिसर्च की है और भारत से यह विघा विदेशों में भी में फेली लेकिन हम भारतीय अपनी विद्या को संभाल नहीं सके और जब तक उसमें पश्चिम ठप्पा नहीं लगता तब तक उसको हम मानते नहीं और पश्चिम में विकसित आधा अधूरा ज्ञान को हम भारतीय अपना लेते हैं अपने अपने ज्ञान को भूलकर, हमारा भारतीय संवत बिक्रम संवत हिजरी संवत शाखा संवत आदि पहले तो यही तय कर लिया जाय कि परम्परावादी भारतीयों को अपना जन्मदिन कि पद्धति से मानना चाहिए, पारंपरिक हिन्दू कैलेण्डर को (जो भिन्न-भिन्न हैं) या आधुनिक कैलेण्डर को. मेरे जीवन को वर्त्तमान में जो तिथियाँ नियंत्रित करती हैं वे आधुनिक है परन्तु मेरे घर में ही बहुत सी बातों के लिए पारंपरिक कैलेण्डर को आगे कर देते हैं. फिर यह लोचा कि जन्मतिथि मात्र मानी जाय या जन्मतिथि, महीने, और वर्ष के अंकों का जोड़, इसमें भी कई विधियाँ हैं जिनसे योग पृथक आता है. फिर इसमें वर्णमाला के अक्षरों को भी शामिल कर लेना पचड़े को और ज्यादा बढ़ा देता है.वैदिक ज्योतिष, जो महर्षि पराशर, जैमनी, कृष्णमूर्ति आदि की उत्कृष्ट परम्परा पर आधारित है, उसमें जातक के जन्म की तिथि, समय और स्थान को लेकर, एक वैज्ञानिक तरीके से जन्म के समय, आकाश में ग्रहों व नक्षत्रों की स्थिति का निर्धारण कर समय का आकलन किया जाता है। तत्पश्चात ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रन्थों के आधार पर फलित कहा जाता है। ज्योतिषीय गणनाएँ पूर्णतः खगोलीय सिद्धांतों पर आधारित होती हैं, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने जिस तरह घर-घर अपनी पैठ बना ली है, उसका एक दुष्प्रभाव यह हुआ कि मदारी ज्योतिषियों की संख्या बढ़ी है। आप कोई भी चैनल देखें, इन मदारी ज्योतिषियों की एक पूरी जमात अपने लैपटॉप पर त्वरित समाधान बाँचती नज़र आयेगी।उपभोक्तावाद की इस रेलमपेल में कहीं तिलक चुटियाधारी खाँटी पंडित जी दिखते हैं, तो कहीं टाई-सूट में सजे फ़र्राटा अंग्रेज़ी बोलने वाले एस्ट्रोलोजर। इन सबके बीच एक प्रचलित विद्या है अंक ज्योतिष। इस प्रचलित अंक ज्योतिष में व्यक्ति की जन्मतिथि (ईसवी कलेंडर के अनुसार) के अंकों को जोड़कर एक मूलांक बना दिया जाता है और फिर उसे आधार बनाकर अधकचरा भविष्य बाँच दिया जाता है। इसी तरह अंग्रेजी के अक्ष्ररों (ए, बी, सी, डी आदि) को एक एक अंक दिया है. और लोगों के नाम के अंग्रेजी अक्षरों के अंकों के योग से उसका मूलांक निकाला जाता है. फिर उसी आधार पर उसका भी भविष्य बाँच दिया जाता है।अंक ज्योतिष ईसवी कलेंडर की तिथि के अनुसार चलता है जिसका एक सौर वर्ष मापने के अलावा कोई सार्वभौमिक आधार नहीं है। समय के अनंत प्रवाह में ईसवी कलेंडर मात्र 20 शताब्दी पुराना है। जिसमें अचानक एक दिन को 1 जनवरी लेकर वर्ष की शुरुआत कर दी गयी और शुरु हो गया 1 से 9 अंकों की श्रेणी में जातक को बाँटने का सिलसिला। यह सर्वविदित है कि इतिहास की धारा में अनेक सभ्यताओं तथा राजाओं ने अपने अपने कलेंडर विकसित किये जिन सबके वर्ष और तिथियों में कोई तालमेल नहीं है। तब सवाल यह उठता कि अंक ज्योतिष का आधार ईसवी कलेन्डर ही क्यों? अंग्रेज़ों ने चुँकि विश्व के एक बड़े हिस्से पर राज किया, इसलिये ईसवी कलेंडर का प्रचलन बढ़ गया। यहाँ तक कि विभिन्न गिरजाघरों ने इस कैलेंडर के दिनों की मान्यताओं पर प्रश्न चिह्न लगाए हैं. और तो और, जो सबसे अवैज्ञानिक बात इसकी सार्वभौमिकता को चुनौती देती है, वो यह है कि भिन्न भिन्न देशों ने इस कैलेंडर को भिन्न भिन समय पर अपनाया.ईसवी कलेंडर की शुरुआत 1 ए.डी. से होती है जो 1बी.सी. के समाप्त होने के तुरत बाद आ जाता है, यह तथ्य मज़ेदार है, क्योंकि इस बीच किसी ज़ीरो वर्ष का प्रावधान नहीं है। देखा जाये तो ईसवी कलेंडर की तिथियाँ, मूलत: सौर वर्ष को मापने का एक मोटा मोटा तरीका भर है। जब हम ईसवी कलेंडर के विकास पर दृष्टि डालतें हैं तो पाते हैं कि कलेंडर के बारह महीनों के दिन समान नहीं हैं और इनमें अंतर होने का कारण भी स्पष्ट नहीं है. यदि इस कलेंडर का इतिहास देखें तो इतनी उथल पुथल है कि इसकी सारी वैज्ञानिक मान्यताएँ समाप्त हो जाती हैं. इस कलेंडर पर कई राजघरानों का भी प्रभाव रहा, जैसे जुलियस और ऑगस्टस सीज़र. 13 वीं सदी के इतिहासकार जोहान्नेस द सैक्रोबॉस्को का कहना है कि कलेंडर के शुरुआती दिनों में अगस्त में 30 व जुलाई में 31 दिन हुआ करते थे। बाद में ऑगस्टस नाम के राजा ने (जिसके नाम पर अगस्त माह का नाम पड़ा) इस पर आपत्ति जतायी कि जुलाई (जो ज्यूलियस नाम के राजा के नाम पर था) में 31 दिन हैं, तो अगस्त में भी 31 दिन होने चाहिये. इस कारण फरवरी (जिसमें लीप वर्ष में 30 व अन्य वर्षॉं में 29 दिन होते थे) से एक दिन निकालकर अगस्त में डाल दिया गया। अब क्या वे अंक ज्योतिषी कृपा कर यह बताएँगे कि दिनों को आगे पीछे करने से कालांतर में तो सभी अंक बदल गये, तो इनका परिमार्जन क्या और कैसे किया गया?सारी सृष्टि एक चक्र में चलती है सारे अंक एक चक्र में चलते हैं जैसे 1 से 9 के बाद पुन: 1 (10=1+0=1) आता है. ईसवी कलेंडर के आधार पर अंक ज्योतिष में अजब तमाशा होता है जैसे 30 जून (मूलांक 3) के बाद 1 जुलाई (मूलांक 1) आता है। इसी तरह 28 फरवरी (2+8=10=1) के बाद 1 मार्च (1 अंक) आता है। नाम के अक्षरों के आधार पर की जाने वाली भविष्यवाणियाँ अंगरेज़ी (आजकल हिंदी वर्णमाला के अक्षरों को भी) के अक्षरों के अंकों को जोड़कर की जाती हैं. अब यह तो सर्वविदित है कि नाम के हिज्जे उस भाषा का अंग है जो जातक के देश या प्रदेश में बोली जाती है और जो साधारणतः निर्विवाद होता है. जैसे ही इसका अंगरेज़ी लिप्यांतरण किया जाता है, वैसे ही विरोध प्रारम्भ हो जाता है. ऐसे में सारे अंक बिगड़ सकते हैं और साथ ही जातक का भविष्य भी इसी अधूरे ज्ञान का सहारा लेकर आजकल लोग इन ज्योतोषियों की सलाह पर अपने नाम की हिज्जे बदलने लगे हैं.अंक ज्योतिष के यह अंतविरोध, इसके पूरे विज्ञान को तथाकथित की श्रेणी में ले आते हैं। एक सवाल यह भी रह जाता है कि क्या पूरी मानव सभ्यता को मात्र 9 प्रकार के व्यक्तियों में बांट कर इस प्रकार का सरलीकृत भविष्य बाँचा जा सकता है? ऐसे में इस नितांत अवैज्ञानिक सिद्धांत को, ज्योतिष के नाम पर चलाने के इस करतब को क्या कहेंगे आप? भारतीय अंक ज्योतिष अपने आप में एक विज्ञान है और हमारी वर्णमाला मैं बहुत से रहस्य छुपे है हमारी तिथियां अपने आप में संपूर्ण है उपरोक्त विचार मात्र अंक-ज्योतिष के विषय में हैं। ज्योतिष शास्त्र के विषय में नहीं क्योंकि उसके सिद्धांत और पद्धतियाँ, खगोल शास्त्र पर आधारित हैं और कई अर्थो में वैज्ञानिकता लिये हैं। ज्योतिष शास्त्र में अभी और गहन शोध होने बाकी हैं भक्ति सिर को भी इस पर बात जारी रहेगी दोस्तों हो सकते मेरी बातों से तो ताकत के दोषियों को नाराजगी पैदा हो पर मुझे इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता सच तो सच्च ही होता है आचार्य राजेश
रविवार, 23 अप्रैल 2017
ज्योतिष और ज्योतिषी बचपन से ज्योतिष में रूचि होने के कारण साधु संतो में रूचि के कारण और कुछ पूर्व जन्मों के संस्कारों के कारण मुझे ऐसे विद्वद्जनों से संपर्क में सदा आनंद की अनुभूति होती थी. परन्तु सत्य ये भी है की इस खोज में मैंने ऐसे लोगों से भी मुलाकात की जो केवल ज्योतिष के किताबी ज्ञान में पारंगत थे. वास्तव में बहुत से ज्योतिषी मिथ्या ज्ञानी हैं (ध्यान रहे की मैं स्वयं एक ज्योतिषी हूँ). बहुत से ज्योतिषी केवल लोगों को डरा धमका कर पैसे उगाने का कार्य करते हैं. वास्तव में ज्योतिष ज्ञान बहुत दुरूह साधना की तरह है. केवल पुस्तक पाठ से ज्योतिष का ज्ञान नहीं होता और ज्योतिषी को केवल पढ़ने पर भी ये हांसिल नहीं होता है. ज्योतिष के लिए स्वयं का चरित्र व अंतर्मन पूर्ण शुद्ध होना आवश्यक है. दंभ, शिथिल चरित्र. लोभ, अशुद्ध मन, सदा माया में लीन व्यक्ति ज्योतिषी नहीं बन सकता. वो नाम कमा सकता है, आमजन को मूर्ख बनाकर पैसे ऐंठ सकता है पर जब उसका सामना असली विद्वद्जनों से होता है तो ऐसा व्यक्ति अक्सर खिस्यानी बिल्ली के तरह हो जाता है. ज्योतिष के मानद ग्रंथों में ज्योतिषी के लिए जो नियम बताये गए हैं उनके लिए तपश्चर्या की आवश्यकता है जो आजकल के शॉर्टकट वाले युग में ज्योतिषियों के गले नहीं उतरती.धन वैभव प्राप्ति के लिए मनुष्य अत्यंत प्रयत्नशील रहता है. आप पत्रिकायों और टीवी चैनलों को देख लें तो हजारों तरीकों से ज्योतिष और धर्म शास्त्र का सहारा लेकर कई तरह के विधि-विधान और अनुष्ठान बताएं जा रहे हैं . कई तरह के मंत्र - यन्त्र से वैभव और धन प्राप्ति के अचूक उपाय दिए जा रहे हैं. हर विधि विधान और मंत्र-यन्त्र की अपना महत्व और लाभ है . सही , उचित और शास्त्रोक्त रीतियों के अनुसार किये जाने वाले अनुष्ठानो का महत्व है और मनुष्य लाभान्वित भी होता है . हमारे प्राचीन शास्त्रों ने इसका विधिवत उल्लेख किया है. पर यह बात बहुत आवश्यक है की जिस तरह इसे आज समाज में प्रस्तुत किया जा रहा है क्या वह उचित और सही है और क्या हम सर्व प्रकार से प्राचीन ज्ञान को समाज में प्रस्तुत कर रहे हैं. हमारी संस्कृति , सभ्यता और सनातन धर्म कर्म प्रधान रहा है . ज्योतिष और वेदों में उल्लेखित उपाय या अनुष्ठान कोई इन्स्टंट नूडल बनाने के नुस्खे नहीं थे. ज्योतिष को बढ़ावा देने में मीडिया का भी बहुत अधिक हाथ है. हर कोई ज्योतिषी टी.वी चैनल पर आना चाहता है क्योंकि लोगों के मन में भी यह बात बैठ गई है कि टी.वी पर दिखने वाला व्यक्ति बहुत ज्ञानी है लेकिन वह यह नहीं जानते कि उनकी दुखती नस को दबाने का पूर इन्तजाम किया जा रहा है. टी.वी के पर्दे पर आने वाला एक ज्योतिषी दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगा हुआ है. जिस तरह से भू माफिया या कालाबाजारी ने अपना जाल बिछाया हुआ है ठीक उसी तरह से ज्योतिष माफिया भी तेजी से फैल रहा है. इन्टरनेट की दुनिया पर तो ज्योतिष ने अच्छा खासा कब्जा कर रखा है. किस समस्या का समाधान उनके पास नहीं है….बस प्रश्न करने की देर है. हर तरह के उपायों से व्यक्ति का दुख दूर करने की कोशिश आरंभ कर दी जाती है.आजकल एक अच्छे ज्योतिषी में अपने सभी प्रोडक्ट बेचने की खूबी होती है. किस तरह से सामने वाले को इमोशनली ब्लैकमेल करनाहै इसकी स्टडी अच्छी तरह से की जाती है. किस तरह से अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित किया जाए इसी चिन्ता में दिन रात एक किया जाता है. बस समस्या बताने की देरी है फिर तो रेस के सभी घोड़े दौडा दिए जाते हैं. प्रेम संबंधी मामलों में तो यह ज्योतिषी धृतराष्ट्र के संजय की भाँति काम करते हैं.ज्योतिष के इस व्यापार में सच्चे तथा ईमानदार व्यक्तियों का गुजारा नहीं हो सकता है. मैं इस विद्या के ऊपर किसी प्रकार की कोई अंगुली नहीं उठा रहा हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ कि यह अत्यधिक विश्वसनीय विद्या है. इस विद्या के सही उपयोग से परेशानी व्यक्ति को तिनके का सहारा मिल सकता है. हम ज्योतिष से अपना भाग्य नहीं बदल सकते लेकिन परेशानियों का सामना करने का बल अवश्य प्राप्त कर सकते हैं. जब आदमी चारों ओर से परेशानियों से घिर जाता है तब उसे ज्योतिषी की याद आती है. ऎसे व्यक्तियों को परामर्श की आवश्यकता होती है. ऎसे समय में ज्योतिषी का कर्तव्य है कि डराने की बजाय वह उचित मार्गदर्शन करें. ज्योतिष अपने आप में संपूर्ण था संपूर्ण है और संपूर्ण रहेग Acharya Rajesh 07597718725
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