1🔬 भाग-4: किस्मत बदलने का विज्ञान (आपके जीवन की Re-Programming)
आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
सोमवार, 15 दिसंबर 2025
भाग-3: नक्षत्र विज्ञान: ब्रह्मांड का 'जीपीएस' और हमारे डीएनए का रहस्य
भाग-3: नक्षत्र विज्ञान: ब्रह्मांड का 'जीपीएस' और हमारे डीएनए का रहस्य
ब्रह्मांडीय रश्मियों का रहस्य: ज्योतिष, भौतिकी और डीएनए का अद्भुत संगम
ब्रह्मांडीय रश्मियों का रहस्य: ज्योतिष, भौतिकी और डीएनए का अद्भुत संगम
(एक शोधपरक वैज्ञानिक विश्लेषण)
— आचार्य राजेश कुमार —
जब मैंने ज्योतिष पर अपना शोध शुरू किया, तो मेरे सामने सवाल यह नहीं था कि "ग्रह क्या फल देंगे?" बल्कि सवाल यह था कि "ग्रह फल कैसे देते हैं?"
क्या यह कोई जादू है? नहीं। मेरा शोध कहता है कि यह 'ध्वनि, प्रकाश और चेतना' का विशुद्ध विज्ञान है।
1. आरंभ: प्रकाश से पहले 'शब्द' (Sound precedes Light)
सृष्टि के निर्माण को समझने के लिए हमें थोड़ा और पीछे जाना होगा।
हमारे वेदों में लिखा है— "नाद ब्रह्म" (ध्वनि ही ईश्वर है)। बाइबल में भी लिखा है— "In the beginning was the Word" (आरंभ में शब्द था)।
विज्ञान भी मानता है कि 'बिग बैंग' (महाविस्फोट) से पहले एक महा-शून्य था। सबसे पहले एक 'कंपन' (Vibration/Sound) हुआ।
जब ध्वनि की तरंगें आपस में टकराईं, तो उस घर्षण (Friction) से 'ऊष्मा' पैदा हुई और उसी ऊष्मा से 'प्रकाश' (Light) का जन्म हुआ।
- ज्योतिषीय अर्थ: इसीलिए 'मंत्र' (Sound) ग्रहों के 'रत्नों' (Light) से भी ज्यादा शक्तिशाली माने जाते हैं। रत्न केवल प्रकाश (Light) को ठीक करते हैं, लेकिन मंत्र उस स्रोत (Sound) को ठीक करते हैं जहाँ से प्रकाश पैदा हुआ है।
2. भचक्र का विज्ञान: 360 डिग्री का 'कॉस्मिक योनि' (The Cosmic Womb)
जब ध्वनि से 'प्रकाश' उत्पन्न हुआ, तो उसे एक दिशा चाहिए थी।
हमारा ब्रह्मांड (भचक्र) 360 डिग्री का एक गोला है। ऋषियों ने इसे 12 भागों में बांटा। यह विभाजन काल्पनिक नहीं, बल्कि एक 'फिल्टर' है।
यहाँ एक गहरा रहस्य है। विज्ञान में प्रिज्म का आकार 'त्रिकोण' होता है और तंत्र शास्त्र में त्रिकोण को 'योनि' (शक्ति) माना गया है।
यह भचक्र 'प्रकृति का गर्भगृह' है। जब मुख्य 'श्वेत ऊर्जा' इस 'योनि रूपी प्रिज्म' से गुजरती है, तो वह 7 रंगों में बंटकर सृष्टि बनाती है।
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3. 1 से 6 तक का सफर: रंग और किरणों का विज्ञान (The Color Evolution)
जैसे ही प्रकाश प्रिज्म (राशियों) से गुजरा, उसने अलग-अलग रंग लिए और हमारा शरीर बना:
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1. मेष (The Spark - गहरा लाल रंग):
- मूल: ध्वनि से जन्मी पहली अग्नि।
- रंग: गहरा लाल (Deep Red).
- विज्ञान: स्पेक्ट्रम में लाल रंग की तरंग सबसे लंबी होती है। सृष्टि की शुरुआत के लिए 'धमाके' और 'गर्मी' चाहिए थी। यह मंगल की ऊर्जा है।
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2. वृषभ (Solidification - चमकीला श्वेत रंग):
- रंग: चमकीला श्वेत/प्रिज्म रंग.
- विज्ञान: धमाके के बाद ऊर्जा ठंडी होकर 'पदार्थ' (Matter) बनती है। शुक्र का यह रंग सौंदर्य और आकार का प्रतीक है।
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3. मिथुन (Vibration - हरा रंग):
- रंग: तोतिया हरा (Green).
- विज्ञान: हरा रंग संतुलन (Balance) का है। यहाँ 'वायु तत्व' यानी जुड़ाव (Communication) शुरू हुआ।
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4. कर्क (Liquification - दूधिया/पर्ल रंग):
- रंग: दूधिया सफेद (Milky White).
- विज्ञान: जीवन को 'जल' चाहिए। यहाँ ऊर्जा पिघलकर 'भावना' (मन) बन गई।
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5. सिंह (Centralization - सुनहरा/नारंगी रंग):
- रंग: सुनहरा नारंगी (Golden Orange).
- विज्ञान: शरीर को चलाने के लिए 'नाभिक' (आत्मा) बना। यह सूर्य का तेज है।
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6. कन्या (Analysis - चितकबरा रंग):
- रंग: मिश्रित हरा/भूरा.
- विज्ञान: पृथ्वी तत्व का वह रूप जो व्यवस्था (Management) संभालता है।
4. मंगल का गहरा विज्ञान: मेष से वृश्चिक तक (खून और गर्मी)
अक्सर लोग पूछते हैं कि मंगल को दो राशियां क्यों मिलीं? इसे रक्त (Blood) से समझिए:
- मेष (जीवित रक्त): मंगल का रंग लाल है और खून भी लाल है। जब तक खून में 'गर्मी' (Heat) है, तब तक वह 'मेष' है (जीवन)।
- वृश्चिक (ठंडा रक्त): जब खून से गर्मी निकल जाती है और वह 'पानी' बन जाता है, तो वह 'वृश्चिक' (Watery Mars) में बदल जाता है। इसीलिए मेष 'जीवन' है और वृश्चिक 'मृत्यु या बदलाव' है।
5. मीन राशि (बैंगनी किरण) और 'उल्टे प्रिज्म' का चमत्कार
यह यात्रा मीन पर खत्म क्यों हुई?
- रंग: बैंगनी (Violet).
- विज्ञान: मीन राशि 'उल्टा प्रिज्म' (Inverted Prism) है। न्यूटन ने सिद्ध किया था कि उल्टा प्रिज्म रंगों को वापस 'सफेद रोशनी' में बदल देता है।
- मीन राशि में हमारे सारे रंग (कर्म) वापस मिलकर 'मोक्ष' (White Light) बन जाते हैं।
6. सबसे सूक्ष्म रहस्य: क्वांटम दृष्टि और श्वास
- क्वांटम दृष्टि: देखने वाले के नजरिए से दृश्य बदल जाता है। शनि को 'डर' से देखोगे तो जहर, 'न्याय' से देखोगे तो दवा।
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श्वास ही एंटेना है:
- दाहिना स्वर: सूर्य/मंगल की किरणें खींचता है।
- बायां स्वर: चंद्र/बुध की किरणें खींचता है।
निष्कर्ष
ज्योतिष अंधविश्वास नहीं है। यह ध्वनि (Sound), प्रकाश (Light) और चेतना (Consciousness) का अद्भुत संगम है। पहले 'शब्द' था, फिर 'प्रकाश' आया और अंत में हम बने।
इस विषय पर मेरा शोध अनंत है। शेष अद्भुत रहस्य अगले लेखों में।
सत्यमेव जयते।
आचार्य राजेश कुमार
(हनुमानगढ़, राजस्थान)
पाठकों से प्रश्न:
क्या आपने कभी महसूस किया है कि किसी मंत्र के जाप (ध्वनि) से आपके शरीर की ऊर्जा (प्रकाश) बदल गई हो? अपने अनुभव कमेंट में जरूर साझा करें।
रविवार, 14 दिसंबर 2025
ग्रह युति और रंग विज्ञान: एक क्रांतिकारी शोध(Planetary Conjunctions & Color Theory: A Scientific Analysis)
ग्रह युति और रंग विज्ञान: एक क्रांतिकारी शोध
(Planetary Conjunctions & Color Theory: A Scientific Analysis)
— शोध एवं आलेख: आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़)।। जय महाकाली ।।
ज्योतिष शास्त्र में हम अक्सर पढ़ते हैं कि अमुक दो ग्रह मित्र हैं या शत्रु हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? हनुमानगढ़ स्थित अपने कार्यालय में वर्षों के अनुभव और गहन चिंतन के बाद, मैंने ज्योतिषीय युतियों को समझने के लिए 'रंग विज्ञान' (Color Physics) का एक विशेष सूत्र विकसित किया है।
ब्रह्मांड में हर ग्रह एक विशेष ऊर्जा और रंग का प्रतिनिधित्व करता है। मेरा (आचार्य राजेश का) यह मानना है कि जब कुंडली के किसी भाव में दो ग्रह एक साथ बैठते हैं, तो वे केवल राशियाँ नहीं मिला रहे होते, बल्कि दो अलग-अलग रंगों का मिश्रण (Mixing) कर रहे होते हैं। अगर बनने वाला नया रंग सुंदर और जीवनदायी है, तो वह 'राजयोग' है, अन्यथा वह 'दोष' है।
आइए, मेरी इस मौलिक रिसर्च के कुछ प्रमुख अंशों को उदाहरणों से समझते हैं:
1. शुक्र और मंगल: महालक्ष्मी योग (गुलाबी रंग)
- शुक्र: चमकीला सफेद/क्रीम (लग्जरी का रंग)।
- मंगल: गहरा लाल (ऊर्जा का रंग)।
- वैज्ञानिक परिणाम: जब आप सफेद और लाल रंग को मिलाते हैं, तो एक अत्यंत सुंदर 'गुलाबी' (Pink) रंग बनता है।
- निष्कर्ष: यह गुलाबी रंग उसी कमल के फूल का रंग है जिस पर माँ लक्ष्मी विराजमान होती हैं। इसीलिए मैं अपने यजमानों को बताता हूँ कि यदि कुंडली में यह युति शुद्ध भावों में है, तो जातक के जीवन में धन और विलासिता (Luxury) चुंबक की तरह खिंची चली आती है।
2. गुरु और मंगल: मंगल दोष का वैज्ञानिक अंत (केसरिया रंग)
यह बिंदु उन लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है जो मंगल दोष से डरते हैं।
- समस्या (मंगल दोष): मंगल का रंग 'गहरा लाल' है। जब यह अकेले किसी खराब स्थान पर होता है, तो यह 'अनियंत्रित आग' या गुस्से (Danger Red) जैसा होता है जो रिश्तों को जला सकता है।
- समाधान (गुरु का साथ): गुरु का रंग 'शुद्ध पीला' (Wisdom) है।
- कलर केमिस्ट्री: आचार्य राजेश का सूत्र कहता है कि जैसे ही मंगल के लाल रंग में गुरु अपना पीला रंग मिलाते हैं (चाहे युति से या दृष्टि से), तो वह लाल रंग बदलकर 'केसरिया' (Saffron) हो जाता है।
- निष्कर्ष: केसरिया रंग 'खतरे' का नहीं, बल्कि 'त्याग और शौर्य' का रंग है। गुरु ने मंगल की आग को बुझाया नहीं, बल्कि उसे 'हवन की पवित्र अग्नि' में बदल दिया। इसीलिए गुरु के प्रभाव में मांगलिक व्यक्ति अपनी ऊर्जा का उपयोग लड़ाई-झगड़े में नहीं, बल्कि समाज कल्याण और उच्च पदों (Administration) को पाने में करता है।
3. गुरु और चंद्रमा: गजकेसरी योग (दूधिया स्वर्ण/Creamy Gold)
यह ज्योतिष का सबसे शुभ योग माना जाता है।
- गुरु: गहरा पीला (सोना)।
- चंद्रमा: धवल सफेद (दूध/चांदी)।
- वैज्ञानिक परिणाम: जब सोने और दूधिया सफेद रंग का मिलन होता है, तो एक बहुत ही सौम्य 'क्रीम' या 'हल्का सुनहरा' रंग बनता है। यह ठीक वैसा ही रंग है जैसे दूध में केसर मिलाने पर बनता है (खीर का रंग)।
- निष्कर्ष: यह रंग पूर्णता, शांति और समृद्धि का प्रतीक है। इसीलिए गजकेसरी योग वाला व्यक्ति ज्ञान (गुरु) को शांत मन (चंद्रमा) से उपयोग करता है, जिससे उसे स्थायी कीर्ति और धन प्राप्त होता है।
4. सूर्य और बुध: बुधादित्य योग (सुनहरा हरा/Golden Green)
- सूर्य: तेजस्वी नारंगी/सुनहरा (प्रकाश का स्रोत)।
- बुध: हरा (बुद्धि/हरियाली)।
- वैज्ञानिक परिणाम: यहाँ रंग मिक्स नहीं होते, बल्कि 'प्रकाशित' होते हैं। जब सूर्य की सुनहरी रोशनी हरे रंग (बुध) पर पड़ती है, तो वह हरा रंग काला नहीं पड़ता, बल्कि और अधिक चमकने लगता है (जैसे धूप में पेड़ के पत्ते चमकते हैं)।
- निष्कर्ष: इसे 'प्रबुद्ध बुद्धि' (Illuminated Intellect) कहते हैं। सूर्य की शक्ति बुध की वाणी और बुद्धि को चमका देती है, जिससे व्यक्ति समाज में अपनी बातों और फैसलों के लिए प्रसिद्ध होता है।
5. बुध और मंगल: बुद्धि का संघर्ष (मटमैला रंग)
यहाँ स्थिति बदल जाती है।
- बुध: हरा (बुद्धि का रंग)।
- मंगल: लाल (आक्रामकता का रंग)।
- वैज्ञानिक परिणाम: कलर व्हील (रंग चक्र) में लाल और हरे रंग एक-दूसरे के विरोधी (Opposite) होते हैं। जब इन्हें मिलाया जाता है, तो यह न लाल रहते हैं न हरे, बल्कि एक गंदा भूरा (Muddy) रंग बनाते हैं।
- निष्कर्ष: इसीलिए मैं मानता हूँ कि बुध-मंगल की युति बुद्धि में 'कीचड़' या कन्फ्यूजन पैदा करती है। व्यक्ति निर्णय लेने में जल्दबाजी करता है और अपनी ही बुद्धि से अपना नुकसान कर बैठता है।
6. शनि और चंद्रमा: विष योग (स्लेटी/धुंधला रंग)
यह एक अत्यंत सूक्ष्म और महत्वपूर्ण बिंदु है।
- शनि: काला या गहरा नीला (अंधकार/गहराई)।
- चंद्रमा: सफेद (मन/प्रकाश)।
- वैज्ञानिक परिणाम: जब काले और सफेद को मिलाया जाता है, तो 'ग्रे' (स्लेटी) रंग बनता है। यह धुंध, कोहरे और उदासी का रंग है।
- निष्कर्ष: यही कारण है कि इसे 'विष योग' कहा जाता है। यह जातक के मन (चंद्रमा) पर निराशा की धुंध (शनि) चढ़ा देता है, जिससे व्यक्ति अकारण अवसाद या चिंता में रहता है।
शोध का सार
ज्योतिषीय उपाय और कुछ नहीं, बल्कि जीवन का 'कलर करेक्शन' है। अगर आपकी कुंडली की पेंटिंग में ग्रहों के गलत मिश्रण से रंग बिगड़ गए हैं, तो हम रत्न, दान या मंत्र के माध्यम से एक 'तीसरा रंग' जोड़कर उस बिगड़े हुए रंग को सुधारने का प्रयास करते हैं।
(आग्रह: यह शोध आचार्य राजेश कुमार की बौद्धिक संपदा है। इसे बिना अनुमति या नाम हटाकर प्रयोग करना कॉपीराइट अधिनियम के तहत अपराध है।)
आचार्य राजेश कुमार
(विशेषज्ञ: वैदिक ज्योतिष, नाड़ी ज्योतिष एवं वास्तु)
📍 हनुमानगढ़, राजस्थान
शनिवार, 13 दिसंबर 2025
चंद्र और राहु (ग्रहण योग): एक 'शाप' नहीं, 'शून्यता' से 'पूर्णता' की ओर
अक्सर जब आसमान में चाँद बादलों के पीछे छिपता है, तो दुनिया कहती है— "देखो, अंधेरा हो गया।" लेकिन एक कवि, एक प्रेमी और एक साधक जानता है कि बादलों के पीछे से छनकर आती हुई वह मद्धम चांदनी, खुले आसमान के चाँद से कहीं ज्यादा रहस्यमयी और खूबसूरत होती है।
शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025
सूर्य-राहु: फकीरों की नज़र, सितारों की खबर
सूर्य-राहु: फकीरों की नज़र, सितारों की खबर
गुरुवार, 11 दिसंबर 2025
गुरु-चांडाल योग: श्राप नहीं, एक 'विद्रोही संत' का जन्म! 🚩
गुरु-चांडाल योग: श्राप नहीं, एक 'विद्रोही संत' का जन्म! 🚩
(खुली आँखों का भ्रम और बंद आँखों का सत्य)
मित्रों,
ज्योतिष की दुनिया बड़ी विचित्र है। यहाँ शब्दों के जाल में फँसाकर किसी को भी रातों-रात 'महापापी' घोषित कर दिया जाता है और किसी को 'महात्मा'। ऐसा ही एक बदनाम शब्द है— 'गुरु-चांडाल योग' (बृहस्पति + राहु)।
लेकिन सत्य कुछ और है। आचार्य राजेश के अनुभव और तर्क की कसौटी पर कसकर देखें, तो यह योग डरने का नहीं, बल्कि 'समझने' और 'साधने' का विषय है। यह किसी अपराधी का योग नहीं, बल्कि एक 'विद्रोही संत' के जन्म लेने का संकेत है।
आइए, भ्रम के बादलों को हटाकर तर्क का सूर्य देखते हैं:
1. गंगा में नाला मिलता है, गंगा नाला नहीं बनती
सबसे पहले इस बुनियादी तर्क को समझें— गुरु 'ज्ञान का सागर' (सात्विकता) है और राहु 'अंधकार' (तामस)। क्या कभी अंधेरा रोशनी को मैला कर सकता है? नहीं। जैसे ही रोशनी (गुरु) आती है, अंधेरा (राहु) अपने आप मिट जाता है।
“चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।”
अर्थात्, चंदन के पेड़ पर हजारों विषैले सांप (राहु) लिपटे रहते हैं, लेकिन चंदन (गुरु) अपनी शीतलता और सुगंध नहीं छोड़ता। गुरु के सानिध्य में आकर राहु का विष भी 'औषधि' बन जाता है।
2. नाड़ी ज्योतिष का सत्य: यह 'लाउडस्पीकर' योग है
नाड़ी ज्योतिष (Nadi Astrology) में राहु को 'बड़ा मुख' और 'विस्तार' कहा गया है।
जरा सोचिये, ज्ञान (गुरु) अगर चुपचाप एक गुफा में बैठा रहे, तो दुनिया को कैसे पता चलेगा? ज्ञान को फैलाने के लिए राहु रूपी 'लाउडस्पीकर' की जरूरत होती है।
“जंगल में मोर नाचा, किसने देखा?”
यह योग जातक को जंगल का मोर नहीं, बल्कि दुनिया के मंच का सितारा बनाता है। ऐसा व्यक्ति अपने ज्ञान को पुरानी रूढ़ियों से निकालकर (Out of the box thinking) देश-विदेश तक फैलाता है। वह 'लकीर का फकीर' नहीं बनता, बल्कि नया रास्ता बनाता है।
3. आध्यात्मिक रहस्य: "राहु यानी कुंडली का सर्प"
इस योग का सबसे गहरा अर्थ 'कुंडलिनी विज्ञान' में छिपा है।
गुरु वह 'सपेरा' या 'योगी' है जिसके पास इस सर्प को वश में करने की विद्या है।
तर्क: गुरु के बिना राहु "बिना नकेल का सांप" है जो डस सकता है। लेकिन गुरु के साथ, यह ऊर्जा ऊपर उठती है (उर्ध्वगामी) और व्यक्ति को 'महायोगी' बना देती है। शिव के गले में पड़ा सर्प विष नहीं, आभूषण है। यह योग आपको वही 'शिव-तुल्य' क्षमता देता है।
4. सावधान: ज्योतिष में 'डर का व्यापार' (डिग्री और दूरी का सच)
आजकल कई लोग बिना तकनीकी विश्लेषण किए केवल 'युति' देखकर डरा देते हैं। यह सरासर बेईमानी है। "आधा हकीम खतरे जान" वाली स्थिति से बचें। सच्चाई जानने के लिए इन तकनीकी पहलुओं को देखना अनिवार्य है:
अंशों का खेल (Degrees): यदि गुरु 5 डिग्री पर है और राहु 25 डिग्री पर, तो दोनों में 20 डिग्री का अंतर है। इतनी दूरी पर राहु, गुरु का बाल भी बांका नहीं कर सकता। वे एक घर में होकर भी अजनबी हैं।- नक्षत्र भेद: क्या दोनों अलग-अलग नक्षत्रों में हैं? यदि हाँ, तो उनका प्रभाव भी अलग होगा।
- भाव और लग्न: मेष लग्न में गुरु भाग्येश होकर अगर राहु के साथ है, तो वह भाग्य को 'भ्रष्ट' नहीं करेगा, बल्कि राहु की कूटनीति से भाग्य को 'चमका' देगा।
निष्कर्ष
अतः, 'गुरु-चांडाल' नाम से घबराएं नहीं। यह योग बताता है कि ईश्वर ने आपको कीचड़ में कमल की तरह खिलने के लिए भेजा है। आपके पास वह क्षमता है कि आप 'माया' (राहु) के बीच रहते हुए भी 'ब्रह्म' (गुरु) को पा सकें।
आप चांडाल नहीं, सोए हुए 'युग-प्रवर्तक' हैं। बस जरूरत है अपने भीतर के गुरु को जगाने की।
।। जय महाकाली ।।
क्या आपकी कुंडली में भी यह योग है?
डरें नहीं, सही विश्लेषण कराएं। हम आपको डराते नहीं, तर्क और विज्ञान के आधार पर राह दिखाते हैं।
✍️ आचार्य राजेश
(हनुमानगढ़, राजस्थान)
(ज्योतिष, वास्तु और रत्न विशेषज्ञ)
बुधवार, 10 दिसंबर 2025
कुंडली में 'नीच' ग्रह देख कर डरें नहीं! जानिए ग्रहों की असली ताकत का राज 'षड्बल' ✨
अष्टम भाव का शनि-चंद्र: 'विष योग' नहीं, यह 'नीलकंठ योग' है-
मित्रों मेरी कोशिश रहती है कि मैं सही जानकारी आपको दे सकूं ताकि ज्योतिष के अंदर जो भी बुराइयां चल रही है उसको दूर किया जा सके और आपको समझ में आ जाए इसलिए इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर किया करें ताकि दूसरे लोगों को भी लाभ मिल सके
सोमवार, 8 दिसंबर 2025
न्म कुंडली का सबसे बड़ा रहस्य
महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां
‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...
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लक्ष्मी योग शुभ ग्रह बुध और शुक्र की युति से बनने वाला योग है।बुध बुद्धि-विवेक, हास्य का कारक है तो शुक्र सौंदर्य, भोग विलास कारक है।अब ये द...
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जब किसी के जीवन में अचानक परेशानियां आने लगे, कोई काम होते-होते रूक जाए। लगातार कोई न कोई संकट, बीमारी बनी रहे तो समझना चाहिए कि उसकी कुंडली...
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दशम भाव ज्योतिष भाव कुडंली का सबसे सक्रिय भाव है| इसे कर्म भाव से जाना जाता है क्यूंकि ये भाव हमारे समस्त कर्मों का भाव है| जीवन में हम सब क...
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मालव्य योग को यदि लक्ष्मी योगों का शिरोमणी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं। मालव्य योग की प्रशंसा सभी ज्योतिष ग्रन्थों में की गई है। यह योग शुक्...
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आचार्य राजेश ईस बार मलमास 15 दिसंबर से आरंभ हो रहा है जो 14 जनवरी 2018तक रहेगा। मलमास के चलते दिसंबर के महीने में अब केवल 5 दिन और विवाह मुह...
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