आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
मंगलवार, 21 जुलाई 2020
मंत्र की शक्ति
रविवार, 21 जून 2020
क्या तीसरा विश्व युद्धहोगा। क्या भारत ओर चीन के मघ्य युद्ध होगा?(2)
मित्रों प्राचीन भारतीय ज्योतिषियों जैसे वाराह मिहिर तथा अंय संहिता ज्योतिषियों ने भारत की प्राचीन राशि मकर बताई थी 20 वीं सदी के महान ब्रिटिश पाॅमिस्ट काउंट लुई हेमन कीरो में भी 1925 मे प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘वल्र्ड प्रैडिक्शन’ मे भारत की राशि मकर बताई है लगभग हजार वर्ष पहले भारत विदेशी
मुस्लिम आक्रांताओं का गुलाम हो गया और 15 अगस्त 1947 को वृष लग्न मे भारत विदेशी गुलामी से मुक्त हुआ। भारतीय ज्योतिष मे किसी भी देश या व्यक्ति के पूर्वजंम का ज्ञान नवम भाव से और अगले जंन्म का ज्ञान पंचम भाव से होता है। वृष राशि मकर राशि से पंचम राशि है। भारतीय ज्योतिष मे बृहस्पति को धर्म और अध्यात्म का कारक ग्र्रह माना गया है तथा राहू को दैत्यों, राक्षसों, मुस्लिमों, मलेच्छों नास्तििििक धर्म विरोधी तथा दुर्भाग्य, नर संहार का कारक ग्रह माना गया है। भारत के इतिहास मे वृष मिथुन और धनु राशियो ंकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दुर्भाग्यवश भारत के जमांक मे धर्म गुरू की राशि धनु भारत की प्राचीन राशि मकर से धनु 12 भाव की राशि है। जो विनाश का भाव है मिथुन राशि भारत की राशि मकर से छठे भाव की राशि है। जो रोग व शत्रु का भाव है। भारत के इतिहास मे वृष मिथुन वृश्चिक और धनु राशियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राहू विनाश का कारक ग्रह है। केतु मोक्ष अलौकिकता तथा नई उत्पति का कारक ग्रह है। साथ ही केतु मे कई विनाशकारी शक्तियां भी है। भारत के लंबे इतिहास का ज्योतिषीय अध्ययन करने पर यह तथ्य प्रकृट हुआ है। जब-जब वृष वृश्चिक या मिथुन व धनु राशि मे राहू या केतु का गोचर हेाता है। तब तब भारत मे विनाशकारी घटनायें घटित होती है। राहू-केतु के विनाशकारी प्रभाव का भारत के इतिहास मे आश्चर्यजनक विनाशकारी घटनायें:-
क्या तीसरा विश्व युद्धहोगा। क्या भारत ओर चीन के मघ्य युद्ध होगा ?
मित्रों आपको पता ही है कि भारत और चीन में सीमा पर तनाव चल रहा है।इस वक्त देश और दुनिया में कई लोग भारत और चीन के बीच युद्ध की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। इसी आशंका के चलते कई ज्योतिष और भविष्यवक्ता अपने अपने यूट्यूब चैनल या सोशल मीडिया को चमकाने के लिए युद्ध की तरीख तक करने में लगे हैं। पिछले कुछ सालों से भारत और पाकिस्तान को लेकर हर साल युद्ध होने की भविष्यवाणी की जाती है लेकिन युद्ध तो होता हुआ नहीं दिखाई देता। हां, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे जरूर कुछ होता रहा है। आखिर इन भविष्यवाणियों का सच क्या है। भविष्य के गर्त में क्या छुपा है। आओ आज हम भी थोड़ा कुछ जान लेते हैं। भविष्यवाणियों के बारे में।
मंगलवार, 2 जून 2020
ग्रहण को लेकर मन में हैं शंकाएं, पढ़ें वैज्ञानिक एवं ज्योतिषीय विश्लेषण Surya Grahan 2020
मित्रों ग्रहण पर मैं पहले भी पोस्ट कर चुका हूं लेकिन एक astrologer होने के नाते मित्र दोस्त आस पड़ोस के लोग और रिश्तेदार यह सभी बार-बार सूर्यग्रहण को लेकर पूछ रहे हैं तो आज फिर से एक पोस्ट कर रहा हूं जिसमें सब कुछ बहुत ही डिटेल में बताया जाएगा। मित्रों इस साल का पहला सूर्यग्रहण 21 जून रविवार काे हाेगा।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 21 जून को सदी का सबसे बड़ा कंकणाकृति सूर्य ग्रहणओर सदी का सबसे बड़ा ग्रहण होने के कारण इस पर शोध भी होगा। जबकि इसके प्रभाव के चलते दिन में अंधेरा छा जाएगा। साथ ही दिन में तारे भी दिखाई देंगे।इसका असर बहुत अच्छा नहीं मिलने जा रहा है। पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था में और गिरावट आने के संकेत हैं। मृत्युदर और बढ़ोतरी हो सकती है। तूफान और भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं।
सोमवार, 1 जून 2020
Lunar And Solar Grahan/eclipse 2020: ग्रहण, जनिए सूतक काल का समय
Lunar And Solar Grahan/eclipse 2020: ग्रहण,
मित्रों 6 जून से 5 जुलाई के बीच दो चंद्र ग्रहणओर एक सुर्य ग्रहण लगेगा। 5 व 6 जून मांद्य चंद्र ग्रहण और 5 जुलाई को उप छाया ग्रहण लगेंगे। जो भारत ने दृश्यhttps://youtu.be/2A7UF80uvVs मान नहीं होने के कारण कम प्रभावशाली होगा। 21 जून को लग रहे सूर्य ग्रहण भारत में 99.4 % दृश्यमान परम ग्रास रहेगा। जिसमें चूड़ामणि सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा होगा।
पंचांगीय दशा से यह सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील और अशुभ स्थिति का निर्माण करने वाला होगा। जिसमें छह ग्रह एक साथ वक्री होकर संपूर्ण विश्व में बड़ी उथल-पुथल की स्थिति बनाएंगे। अभी एक पोस्ट लिख चुका हूं आप मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं महासागर में चीन की गतिविधियों से स्थिति तनावपूर्ण बनेगी। लगभग 5 घंटे 48 मिनट और 3 सेकंड के उक्त सूर्य ग्रहण के होने की बात बताई जा रही है।
जिसमें एक पॉजिटिव बात भी सामने आ रही है कि वर्तमान में कोरोनावायरस के संक्रमण व्याधि सूर्य ग्रहण से शुरू होकर इस सूर्य ग्रहण के गुजर जाने के बाद धीरे-धीरे कम होती जाएगी।58 वर्ष पूर्व वर्ष 1962 में ऐसी ही एक माह में तीन ग्रहणों की स्थिति बनी थी। जिसमें 17 जुलाई 1962 को मांद्य चंद्र ग्रहण, 31 जुलाई 1962 को सूर्य ग्रहण और 15 अगस्त 1962 को मांद्य चंद्रग्रहण हुआ था। मित्रोंपहला ग्रहण 5 जून को होगा। यह चंद्र ग्रहण रहेगा। इस वर्ष का यह दूसरा चंद्र ग्रहण है। इसके पहले 10 जनवरी को चंद्र ग्रहण लग चुका है। इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा जो कि कंकणाकृति का होगा। यह भारत में नजऱ नहीं आएगा। तीसरा ग्रहण भी चंद्र ग्रहण है जो 5 जुलाई को लगेगा। एक माह में तीन ग्रहण केवल एक ग्रहण भारत में दिखाई देगा। एक माह में तीन ग्रहण का होना देश के लिए हितकारी नहीं है। 5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच मे तीन ग्रहण हैं। चंद्रग्रहण - 5 जून , 2020
आरम्भ - रात्रि 11:15
अंत - रात्रि 2:34 ( 6 जून )
कुल अवधि - 3 घण्टे 19 मिनट
2. सूर्यग्रहण - 21 जून 2020
आरम्भ - सुबह 9:15
अंत - शाम 15:03
कुल अवधि - 5 घण्टा 48 मिनट
3. चंद्रग्रहण - 5 जुलाई 2020
आरम्भ - सुबह 8:37 मिनट
अंत - दिन 11:22 मिनट
कुल अवधि - 2 घण्टे 45 मिनट
( भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा, लेकिन साधना के लिए मान्य होगा )
तीन से ज्यादा ग्रहण आ जाएं तो एक चिंता का विषय बनता है
5 जून 2020 चंद्रग्रहण
प्रारंभ रात 11:15 मिनिट समाप्ति 6 जून सुबह 2:34 चंद्र ग्रहण जिसमे शुक्र वक्री और अस्त रहेगा गुरु शनि वक्री रहेंगे तो तीन ग्रह वक्री रहेंगे, जिसके कारण जिसके प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। शेयर बाजार से जुड़े हुए लोग सावधान रहें। यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर बुरा प्रभाव डालेगा। अगर कुंडली में भी अशुभ प्रभाव हो किसी भी तरह से
21 जून 2020 सूर्य ग्रहण
एक साथ 6 वक्री रहेंगे बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु यह छह ग्रह 21 जून 2020 को वक्री रहेंगे। इन छह ग्रह का वक्री होना यानी एक बहोत बड़ा तहलका मचाने वाला है।
5 जुलाई 2020 चंद्रग्रहण एक बहुत बड़ा परिवर्तन
मंगल का राशि परिवर्तन
सूर्य का राशि परिवर्तन
गुरु धन राशि मे वापस, लेकिन वक्री रहेंगे।
शुक्र मार्गी होगा24 जनवरी से शनि मकर राशि में गोचर है और मई से शनि की उल्टी चाल भी शुरू हो चुकी है. हालांकि सितंबर माह में केतु के राशि परिवर्तन और गुरु के साथ शनि के मार्गी हो जाने से इन हालातों में सुधार आने की भी संभावना है. सितंबर के आखिरी सप्ताह में देश में हालात पूरी तरह से अनुकूल हो सकते हैं और इस संक्रमण से मुक्ति मिलने के आसार हैं.
Lunar And Solar Grahan/eclipse 2020: ग्रहण, जनिए सूतक काल का समय
Lunar And Solar Grahan/eclipse 2020: ग्रहण,
मित्रों 6 जून से 5 जुलाई के बीच दो चंद्र ग्रहणओर एक सुर्य ग्रहण लगेगा। 5 व 6 जून मांद्य चंद्र ग्रहण और 5 जुलाई को उप छाया ग्रहण लगेंगे। जो भारत ने दृश्यhttps://youtu.be/2A7UF80uvVs मान नहीं होने के कारण कम प्रभावशाली होगा। 21 जून को लग रहे सूर्य ग्रहण भारत में 99.4 % दृश्यमान परम ग्रास रहेगा। जिसमें चूड़ामणि सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा होगा।
पंचांगीय दशा से यह सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील और अशुभ स्थिति का निर्माण करने वाला होगा। जिसमें छह ग्रह एक साथ वक्री होकर संपूर्ण विश्व में बड़ी उथल-पुथल की स्थिति बनाएंगे। अभी एक पोस्ट लिख चुका हूं आप मेरे ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं महासागर में चीन की गतिविधियों से स्थिति तनावपूर्ण बनेगी। लगभग 5 घंटे 48 मिनट और 3 सेकंड के उक्त सूर्य ग्रहण के होने की बात बताई जा रही है।
जिसमें एक पॉजिटिव बात भी सामने आ रही है कि वर्तमान में कोरोनावायरस के संक्रमण व्याधि सूर्य ग्रहण से शुरू होकर इस सूर्य ग्रहण के गुजर जाने के बाद धीरे-धीरे कम होती जाएगी।58 वर्ष पूर्व वर्ष 1962 में ऐसी ही एक माह में तीन ग्रहणों की स्थिति बनी थी। जिसमें 17 जुलाई 1962 को मांद्य चंद्र ग्रहण, 31 जुलाई 1962 को सूर्य ग्रहण और 15 अगस्त 1962 को मांद्य चंद्रग्रहण हुआ था। मित्रोंपहला ग्रहण 5 जून को होगा। यह चंद्र ग्रहण रहेगा। इस वर्ष का यह दूसरा चंद्र ग्रहण है। इसके पहले 10 जनवरी को चंद्र ग्रहण लग चुका है। इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा जो कि कंकणाकृति का होगा। यह भारत में नजऱ नहीं आएगा। तीसरा ग्रहण भी चंद्र ग्रहण है जो 5 जुलाई को लगेगा। एक माह में तीन ग्रहण केवल एक ग्रहण भारत में दिखाई देगा। एक माह में तीन ग्रहण का होना देश के लिए हितकारी नहीं है। 5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच मे तीन ग्रहण हैं। चंद्रग्रहण - 5 जून , 2020
आरम्भ - रात्रि 11:15
अंत - रात्रि 2:34 ( 6 जून )
कुल अवधि - 3 घण्टे 19 मिनट
2. सूर्यग्रहण - 21 जून 2020
आरम्भ - सुबह 9:15
अंत - शाम 15:03
कुल अवधि - 5 घण्टा 48 मिनट
3. चंद्रग्रहण - 5 जुलाई 2020
आरम्भ - सुबह 8:37 मिनट
अंत - दिन 11:22 मिनट
कुल अवधि - 2 घण्टे 45 मिनट
( भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा, लेकिन साधना के लिए मान्य होगा )
तीन से ज्यादा ग्रहण आ जाएं तो एक चिंता का विषय बनता है
5 जून 2020 चंद्रग्रहण
प्रारंभ रात 11:15 मिनिट समाप्ति 6 जून सुबह 2:34 चंद्र ग्रहण जिसमे शुक्र वक्री और अस्त रहेगा गुरु शनि वक्री रहेंगे तो तीन ग्रह वक्री रहेंगे, जिसके कारण जिसके प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। शेयर बाजार से जुड़े हुए लोग सावधान रहें। यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर बुरा प्रभाव डालेगा। अगर कुंडली में भी अशुभ प्रभाव हो किसी भी तरह से
21 जून 2020 सूर्य ग्रहण
एक साथ 6 वक्री रहेंगे बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु यह छह ग्रह 21 जून 2020 को वक्री रहेंगे। इन छह ग्रह का वक्री होना यानी एक बहोत बड़ा तहलका मचाने वाला है।
5 जुलाई 2020 चंद्रग्रहण एक बहुत बड़ा परिवर्तन
मंगल का राशि परिवर्तन
सूर्य का राशि परिवर्तन
गुरु धन राशि मे वापस, लेकिन वक्री रहेंगे।
शुक्र मार्गी होगा24 जनवरी से शनि मकर राशि में गोचर है और मई से शनि की उल्टी चाल भी शुरू हो चुकी है. हालांकि सितंबर माह में केतु के राशि परिवर्तन और गुरु के साथ शनि के मार्गी हो जाने से इन हालातों में सुधार आने की भी संभावना है. सितंबर के आखिरी सप्ताह में देश में हालात पूरी तरह से अनुकूल हो सकते हैं और इस संक्रमण से मुक्ति मिलने के आसार हैं.
रविवार, 10 मई 2020
समुंदर मंथन में छिपा गहरा राज रहस्य-2
मित्रों पहली पोस्ट में हमने कथा पर चर्चा की लेकिनइस पौराणिक कथा का आध्यात्मिक संबध भी है| यह कथा सभी के लिए मार्गदर्शक है| आध्यात्मिक रूप से देखा जाए तो समुद्र का अर्थ है शरीर और मंथन से अमृत और विष दोनों निकलते हैं|मित्रों
समुद्र कथा में छुपे गहरे रहस्य-1
समुद्र मंथन – हमारे धर्म की पौराणिक कथाओं में वैसे तो कई कथाएँ प्रचलित हैं…
शुक्रवार, 1 मई 2020
शनि केतु की युति
मित्रों आज हम चर्चा करेंगे शनि और केतु ग्रह की युति पर शनि ग्रह और केतु ग्रह की युति को समझने के लिए सर्वप्रथम हमें दोनों ग्रहों को समझना होगा। शनि ग्रह आयु, न्याय, नौकरी, सेवा, अपमान, और निष्ठा के कारक ग्रह है। ये कारावास के भी कारक ग्रह है। एवं केतु को रहस्यमयी विषयों का कारक ग्रह माना गया है। यह मोक्ष कारक ग्रह भी है्।
बुधवार, 29 अप्रैल 2020
#Planet#TransitIn #May&June2020
मित्रों मई माह में कई ग्रह अपनी चाल बदलेंगे। इन ग्रहों में सूर्य, मंगल, बुध शामिल हैं। इस महीने बुध दो बार अपनी राशि बदलेगा। इसके साथ ही गुरु, शुक्र और शनि ग्रह वक्री होंगे। इन सभी ग्रहों की चाल का प्रभाव आप सभी के ऊपर शुभाशुभ रूप में पड़ेगा।4 मईको मंगल ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि में यह 18 जून 2020 तक रहेगा। बुध ग्रह 9 मई को वृषभ राशि में प्रवेश करेगा।14 मई को सूर्य का मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश होगा। सूर्य इस राशि में 15 जून 2020 तक रहेगा।25 मई को बुध अपनी स्वराशि में प्रवेश करेगा।11 मई को शनि वक्री होंगे। उनकी यह वक्री चाल 142 दिन तक रहेगी। इसके बाद 29 सितंबर को फिर से मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिष में शनि का गोचर, वक्री और मार्गी होना बहुत ही महत्व होता है। इसका प्रभाव सभी पर पड़ता है 13 मई को शुक्र ग्रह वक्री होंगे। इसके बाद 25 जून 2020 को शुक्र मार्गी होगा। 14 तारीख को गुरु वक्री चाल चलेंगे और फिर 13 सितंबर 2020 को वह मार्गी होंगे। राहु केतु सदा ही बक्री चाल चलते हैंकुल 6ग्रह बक्री गति से होंगे प्लुटो सहित 7ग्रह होगेबक्री ग्रह अक्सर अप्रत्याशित रूप से अच्छे और बुरे दोनों परिणाम देते हैं। प्रतिगामी गति में ग्रह पृथ्वी के अधिक निकट होते हैं। इसलिए उनका प्रभाव अधिक महसूस होता है। प्रतिगामी गति में ग्रहों के कारक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में कुंडली के जिस घर में वक्री ग्रह होते हैं उनके परिणाम समुचित नहीं दे पाते हैं। इसलिए जब ग्रह वक्र हो तब किसी नई नीति या परियोजना को शुरू नहीं करना चाहिएसौर मंडल के सभी ग्रह पृथ्वी के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। लेकिन सांसारिक दृष्टिकोण से ऐसा लगता है जैसे पृथ्वी नहीं चल रही है, और सभी ग्रह केंद्र के रूप में पृथ्वी के साथ घूम रहे हैं। यह सिर्फ एक ऑप्टिकल भ्रम है। इसलिए ग्रह रुकते हुए प्रतीत होते हैं, पीछे की ओर जाते हैं, फिर से रुकते हैं और आगे जाते हैं जिसे डायरेक्ट मोशन कहते हैं। सूर्य और चंद्रमा हमेशा प्रत्यक्ष गति में होते हैं (अर्थात, वे कभी पीछे नहीं चलते हैं) जबकि राहु और केतु हमेशा प्रतिगामी यानी वक्री होते हैं (अर्थात, वे हमेशा पीछे की ओर बढ़ते हैं)। पांच ग्रह, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि दोनों प्रत्यक्ष और प्रतिगामी गति में चलते हैं। कुल 9 ग्रह हैं जिनका प्रभाव हमारे जीवन और समाज पर होता है। इस बीच काल सर्प योग भी प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की ऐसी स्थिति शुभ नहीं होती है। पूरी दुनिया इन दिनों एक गंभीर संकट का सामना कर रही है ऐसे में 6 ग्रहों का एक साथ उलटी चाल में चलना क्या गुल खिलाएंगा 18 जून को बुध उलटी चाल से चलने लगेंगे। गौरतलब है कि 18 जून से 25 जून के बीच ये चारों ग्रह एक ही समय पर प्रतिगामी यानी वक्र रहेंगे। ग्रहों की यह स्थिति 15 जुलाई तक कालपुरुष कुंडली में बने काल सर्प दोष के साथ परस्पर व्याप्त होती है जिसका परिणाम चिंताजनक हो सकता है।प्रतिगामी शनि उन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए शक्ति प्रदान करते है जिन्हें अतीत में अधूरा छोड़ दिया गया था। शनि 11 मई से 29 सितंबर तक मकर राशि में वक्री रहेंशनि का प्रतिगमन जिम्मेदारियों और काम के बोझ के साथ एक कठिन अवधि को दर्शाता है। लेकिन यह लोगों को अपने कौशल को अधिक निखारने और यथार्थवादी एवं व्यवहारिक बनने में भी मदद करेगा। कोरोनावायरस के कारण आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए नए कानून और नीतियां बनाई जा सकती हैं। न्यायिक सुधार और न्यायिक ढांचे का पुनर्गठन भी हो सकता है।शुक्र विलासिता, आराम, सौंदर्य और खुशी की भावना का ग्रह है। कालपुरुष की कुंडली में वह 2 और 7 भाव के स्वामी हैं। शुक्र 13 मई से 25 जून तक वृष राशि में वक्री रहेंगे जो इस अवधि के दौरान लोगों के सामान्य दृष्टिकोण में सुधार होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी। यात्रा और आतिथ्य उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए समर्थन और प्रोत्साहन मिल सकता है। साथ ही भारत के प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।बृहस्पति ज्ञान और बुद्धिमत्ता के ग्रह हैं। प्रतिगामी गति में उनके शुभ परिणाम देने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। बृहस्पति नवे और ग्यारहवें भाव के स्वामी है और 14 मई से 13 सितंबर तक मकर राशि में वक्री रहेंगे इस समय के दौरान देश में उन कार्यों और परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की क्षमता बढ़ेगी जिन्हें पहले अधूरा छोड़ दिया गया था। यह वह समय है जब बीमार कंपनियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है और सरकार द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज भी प्रदान किया जा सकता है। भारत के अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों को मजबूती मिल सकती है। इस समय जन आक्रोश और अशांति की आशंका रहेगी। मौजूदा कानूनों और नीतियों के खिलाफ धार्मिक समुदायों में भी असंतोष पैदा हो सकती है।बुध व्यापार, संचार व्यवस्था एवं नयी सोच का प्रतीक है। कालपुरुष कुंडली में, बुधक्षतीसरे ,छठे भाव के मालिक हैं। यह 18 जून से 12 जुलाई के बीच वृषभ राशि में वक्री रहेंगे, जो इस समय के दौरान कोरोनो वायरस के प्रभावों से निपटने के लिए नए विचार और समाधान सामने आ सकते हैं। पड़ोसियों देशों के साथ संवाद में व्यवधान आ सकता है। यह भी गौरतलब है कि 18 जून से 25 जून के बीच चार ग्रह – शनि, बृहस्पति, शुक्र और बुध – एक ही समय में प्रतिगामी गति में होंगे जो भ्रम और अराजकता पैदा कर सकते हैं।जून और जुलाई के महीने में करीब 30 दिन के अंदर तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं ऐसे में इसका क्या असर होगा जानिए
शनिवार, 18 अप्रैल 2020
#लॉकडाउन3मई। 3 मई के बाद जब lockdown खुलेगा क्या कहती है ग्रहों के गोचर की स्थिति?
मित्रों मैंने पहले भी एक पोस्ट डाली थी उसमें मैंने कहां धा कि 14तारीक को सुर्य उच्च के होंगेपर सुर्य10अश पर उच्च के होते हैं जो 24/42020को होोंगेउस के बाद सुघार आना शुरू हो जाएगा लेकिन देश के कुछ ही हिस्सोमे मेरी गणना के अनुसार मंगल, वह 22 मार्च को शनि की राशि मकर में आए। यहां आकर मंगल उच्च के हो गए। इससे मंगल का प्रभाव बढ़ गया। कमाल की बात देखिए इसी दिन जनता कर्फ्यू लगाया गया। इसके बाद 24 मार्च से पूरे देश में लॉक डाउन घोषित कर दिया गया और अब 4 मई से जब लॉक डाउन समाप्त होगा तो मंगल भी मकर से निकलेंगे। यानी इन दिनों जो पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है उसमें मंगल और शनि का बड़ा युघ है। शनि मंगल के योग के समाप्त होते ही दुनिया भर में फैले कोरोना के कहर में कमी आने लगेगी भारत में कोरोना पीडि़तों की संख्या 30 मार्च को अचानक से बढ गयी जब तबलिगी जमात के कारण यहां भी कमाल की बात यह रही कि इसी दिन गुरु मकर राशि में पहुंचे और शनि मंगल के बीच में फंसकर पीड़ित हो गए। गुरु के पीड़ित होने से धर्म-कर्म के कार्यों में बाधा आ रही है। मंदिर, गुरुद्वारे, मस्जिद, चर्च सभी सीमित तरीके से अपने दैनिक कार्यों को पूरा कर पा रहे हैं। लेकिन 4 मई को मंगल मकर राशि से निकल कर कुंभ राशि में आ जाएंगे। इससे बृहस्पति को बल मिलेगा। जनता के बीच डर ओर खोफ कम होने लगेगा।सूर्य देव13 अप्रैल से उच्च राशि राशि मेष में विराजमान हैं। 4 मई से मंगल के मकर से कुंभ में जाने के बाद बृहस्पति अपनी पूर्ण शक्ति से फल देने में सक्षम हो जाएंगे और धीरे-धीरे अपने सुधारात्मक प्रभाव से लोगों के जीवन में उन्नति को सुनिश्चित करेंगे। किन्त बृहस्पति, जो स्थिरता एवं विकास के प्रतीक हैं, इस समय तेज गति में चल रहे हैं जिसे ज्योतिषीय भाषा में बक्री गति से उल्टी चाल से कहा गया है। इस स्थिति में विकास दिखेगा लेकिन यह सच से दूर हो सकता है।11 मई को शनि और 14 मई को बृहस्पति (वक्री) हो जाएंगे। जब भी कोई ग्रह अपनी नीच राशि में होकर बक्री हो जाता है तो वह उच्चतम फल देता है। बृहस्पति का निश्चित रूप से मौजूदा स्थिति में तनाव काम करेगा। जहां तक निर्णय लेने का सवाल है, यह सबसे महत्वपूर्ण अवधियों में से एक होगा। विश्व के नेताओं को अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और व्यवसायों को बचाने के लिए कुछ सख्त निर्णय लेने की आवश्यकता होगी। यह मौजूदा नीतियों के आत्मनिरीक्षण और समीक्षा का समय होगा। 30 जून को, प्रतिगामी बृहस्पति अपनी राशि धनु में आ जाएंगे जिससे उन्हें और अधिक बल मिलेगा। इस स्थिति में वह राहु और केतु की नकारात्मक ऊर्जा को कम करेंगे। इस स्थिति के कारण, विश्व अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एक सामान्य रोडमैप पर वैश्विक नेताओं के बीच आम सहमति होने की संभावना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भूमिका जांच के दायरे में आएगी और एक नई विश्व स्वास्थ्य एजेंसी के गठन का विचार होगा। 21june को सुर्य ग्रहण होगाभारत और विश्व के लिए 21 जून का सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील है। मिथुन राशि में होने जा रहे इस ग्रहण के समय मंगल जलीय राशि मीन में स्थित होकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु को देखेंगे जिससे अशुभ स्थिति का निर्माण होगा। इसके अलावा ग्रहण के समय 6 ग्रह शनि, गुरु, शुक्र और बुध वक्र होंगे। राहु केतु हमेश वक्र चलते हैं इसलिए इनको मिलकर कुब 6 ग्रह वक्री रहेंगे, जो शुभ फलदायी नहीं है। इस स्थिति में संपूर्ण विश्व में बड़ी उथल-पुथल मचेगी।ग्रहण के समय इन बड़े ग्रहों का वक्री होना प्राकृतिक आपदाओं जैसे अत्यधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, महामारी आदि से जन-धन की हानि कर सकता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में भयंकर वर्षा एवं बाढ़ से जूझना पड़ सकता है। विस्फोटक स्थिति बनेगी ऐसे में कुछ देशों में तनातनी तनाव का माहोल वन सकता है आग से संबंधित घटनाएं घटित हो थी नजर आ रही है महामारी और भोजन का संकट विश्व के कुछ देशों में कई स्थानों पर हो सकता है।इस वर्ष मंगल जल तत्व की राशि मीन में पांच माह तक रहेंगे ऐसे में वर्षा काल में आसामान्य रूप से अत्यधिक वर्षा और महामारी का भय रहेगा। ग्रहण के समय शनि और गुरु का मकर राशि में वक्री होना इस बात की आशंका को जन्म दे रहा है कि चीन के साथ पश्चिमी देशों के संबंध बेहद खराब हो सकते हैं।भारत के पश्चिमी हिस्सों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान में राजनीतिक उठा-पटक चिंता का कारण बनेगी तथा हिंद महासागर में चीन की गतिविधयों से तनाव बढ़ेगा। शनि, मंगल और गुरु इन तीनों ग्रहों के प्रभाव से विश्व में आर्थिक मंदी का असर अगस्त 2021 तक बना रहेगा।इस वर्ष आषाढ़ के महीने में 6 जून से 5 जुलाई के बीच तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं। इनमें से दो ग्रहण भारत में दृश्य होंगे।सके बाद 4/5 जुलाई को लगने जा रहा चंद्र ग्रहण अफ्रीका और अमेरिका में नजर आएगा। इन तीनों ग्रहणों में से पहले दो ग्रहण, जो कि आषाढ़ कृष्ण पक्ष में पड़ेंगे, वह भारत में दृश्य होंगे। अंतिम ग्रहण जो कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष में है वह भारत में दिखाई नहीं देगा। इन ग्रहणों का मिथुन और धनु राशि के अक्ष को पीड़ित करना अमेरिका और पश्चिम के देशों के लिए विशेष रूप से अशुभ होगा। मित्रों जिनकी भी कुंडली में सूर्य के साथ राहु या केतु चंद्र के साथ राहु केतु की युति हो वो लोग अपनी-अपनी कुंडली अभी से दिखा कर उपाय करें कुछ उपाय ग्रहण के समय ओर कुछ पहले ही शुरू करने चाहिए आज इतना ही मित्रों आगे फिर से आपको जानकारी देंगे आचार्य राजेश
महाभारत कालीन 'अग्नि पंचक' 2026: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की बड़ी भविष्यवाणियां
‼️ महाभारत कालीन गोचर और आगामी विक्रमी संवत: 15 दिन में दो उग्र ग्रहण और 2028 तक की महा-भविष्यवाणियां ‼️ ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल और ग्रह...
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https://youtu.be/hb9Ouf_rST4 मित्रों आज बात करेंगे बुध और शनि की युति जब एक ही भाव में एक साथ हो या किसी भी तरह की युति बन रही है, तो कल क्य...
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लक्ष्मी योग शुभ ग्रह बुध और शुक्र की युति से बनने वाला योग है।बुध बुद्धि-विवेक, हास्य का कारक है तो शुक्र सौंदर्य, भोग विलास कारक है।अब ये द...
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जब किसी के जीवन में अचानक परेशानियां आने लगे, कोई काम होते-होते रूक जाए। लगातार कोई न कोई संकट, बीमारी बनी रहे तो समझना चाहिए कि उसकी कुंडली...
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दशम भाव ज्योतिष भाव कुडंली का सबसे सक्रिय भाव है| इसे कर्म भाव से जाना जाता है क्यूंकि ये भाव हमारे समस्त कर्मों का भाव है| जीवन में हम सब क...
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https://youtu.be/I6Yabw27fJ0 मंगल और राहूजब राहु और मंगल एक ही भाव में युति बनाते हैं, तो वह मंगल राहु अंगारक योग कहलाता है। मंगल ऊर्जा का स...
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मालव्य योग को यदि लक्ष्मी योगों का शिरोमणी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं। मालव्य योग की प्रशंसा सभी ज्योतिष ग्रन्थों में की गई है। यह योग शुक्...
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https://youtu.be/9VwaX00qRcw ये सच है कि हर रत्न इस धरती पर मौजूद हर व्यक्ति को शोभा नहीं देता है. इसे पहनने के लिए ज्योतिष की सलाह आवश्यक ह...
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आचार्य राजेश ईस बार मलमास 15 दिसंबर से आरंभ हो रहा है जो 14 जनवरी 2018तक रहेगा। मलमास के चलते दिसंबर के महीने में अब केवल 5 दिन और विवाह मुह...
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मित्रों आज वात करते हैं फिरोजा रतन की ग्रहों के प्रभाव को वल देने के लिए या फिर उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए ज्योतिष विज्ञान द्वारा विभि...











