रविवार, 26 जनवरी 2020

#शनि मकर में #24/1/2020

आचार्य राजेश कुमार
#शनि मकर में #24/1/2020
मित्रों आप जानते हो 24 जनवरी को शनि ने अपनी राशि बदली है और सभी एस्ट्रोलोजर में होड़ सी मची हुई है, फेसबुक यूट्यूब पर जितनी भी एस्ट्रोलॉजर हैं, यह जितनी भी ज्योतिषी हैं सभी शनिदेव मकर राशि में आने पर धड़ाधड़ प्रोडक्शन ऐसा होगा वैसा होगा चारों तरफ खुशियों का लहर दौड़ेगा उस लग्न वालों को या फायदा होगा उस लग्न वालों को भी फायदा होगा उस राशि वालों को वह फायदा होगा उस राशि वाला को वह फायदा होगा सभी राशि वालों को फायदा दिखा दिया सभी लग्न वाले को फायदा देखा दीया.. कोई लाइव प्रिडिक्शन दे रहे हैं- कोई टेलिफोनिक प्रोडक्शन दे रहे हैं कोई पोस्ट के माध्यम से लेख लिख रहे है कीजिए मित्रों इससे पहले भी शनिदेव मकर राशि में आए थे आज से 30 साल पहले लगभग 1990 में क्या हुआ था अगर जानकारी है तो ठीक है नहीं तो गूगल में सर्च कीजिए तू मेरे कहने का मतलब है क्या वह छोटी मोटी घटना थी क्या उसमें विभिन्न राशियों वाले लोग नहीं होंगे विभिन्न लगने वाले लोग नहीं होंगे जरूर होंगे इसलिए कहते हैं एस्ट्रोलॉजी का सिद्धांत को पहले समझिए एस्ट्रोलॉजी का सिद्धांत क्या कहता है- कोई भी ग्रह जब अपने स्वराशि में आते हैं तो वह किस प्रकार से फल देते हैं इसका क्या मतलब होता है शायद ही किन्ही को पता हो मित्रों कोई भी ग्रह गोचर में आप पर क्या प्रभाव डालेगा वह आपकी जन्मकुंडली से मुताबिक फल देता है जन्म कुंडली में उस ग्रह की क्या पोजीशन है वर्तमान में किस ग्रह की दशा या अंतर्दशा चल रही है यह सब देखकर की ग्रह गोचर का फल कथन किया जा सकता है ऐसा नहीं है कि तुला राशि वालों को यह पल होगा फला लग्न वालों को यह फल होगा
इसलिए एस्ट्रोलॉजी को पहले सीखिए सिद्धांत को सीखिए सिस्टम को समझिए खैर छोड़िए हम भी थोड़ी शनि पर चर्चा करते हैं जैसे कि आप जानते हैं 24 जनवरी को क्षण मकर राशि में यानी अपनी खुद की राशि में प्रवेश कीया है जैसे कि हमें सबसे पहले काल पुरुष की कुंडली को ही देखना पड़ेगा काल पुरुष की कुंडली में शनि दशम भाव में आएगा यानी मकर राशि दसवें घर में पढ़ती हैदसवा भाव कालपुरुष की कुंडली अनुसार शनि की ही राशि मकर राशि होती है। और इसलिए सबसे पहले हमें मकर राशि के बारे में भी समझना होगा कर्म में आस्था रखने वाला शरीर है,सरकारी कार्य ठेकेदारी पिता से सम्बंधित काम तकनीकी काम आदि फ़ायदा देने वाले है आदत से काम करना और तकनीक के बारे में सोचना भी माना जा सकता है,वैसे कमन्यूकेशन के कामो से तुरत धन मिलने की बात मिलती है और धन के लिए मित्रो का सहयोग और पिता के धन का सहयोग भी माना जा सकता है,बड़े रूप में दिखावा करने और परिवार को संभालने की बात भी मिलती है,हनुमान जी जैसे देवता की भक्ति भी मिलती है रोजाना के कामो में जीव के प्रति दया की भावना भी मिलती है,जल्दी से धन कमाने के साधनों के प्रति सोच भी होती है और कैसे जल्दी से धन कमाया जाए उसके बारे में ही सोच भी रहती है,रोजाना के कार्यों में संचार की अधिक सुविधा होने से भी अक्सर कार्यों में बाधा का आना मकर राशि का स्वभाव होता है कि वह किसी भी किये गये काम को दुबारा से करवाती है। मकर राशि का सीधा सम्बन्ध वृष राशि से और कन्या राशि होता है,जो भी असर काम धन्धे के मामले में जातक के लिये मकर राशि के होते है वही असर वृष और कन्या राशि के लिये माने जाते है।मकर राशि का शनि अगर सही कार्य करवाता है तो वह सीधा वृष राशि से सम्बन्ध रखता है और अगर बुरा असर देना होता है तो वह सीधा कन्या राशि से अपना असर देना चालू कर देता है। वृष से अपना असर लेकर वह कन्या को देता है तो जातक को धन के द्वारा और परिवार के द्वारा भौतिक वस्तुओं के द्वारा जातक की सहायता रोजाना के कामो में कर्जा दुश्मनी बीमारी और सन्तान की बढोत्तरी के लिये फ़ायदा देना शुरु कर देता है और अगर वह जातक को दुख देना चाहता है तो वह अपना असर कन्या राशि से लेकर वृष राशि पर देना शुरु कर देता है,उन कारणों से जातक को अपने धन और कुटुम्ब तथा भौतिक साधनों की समाप्ति कर्जा दुश्मनी बीमारी या रोजाना के कामों के प्रति करने लगता है। मकर राशि में शनि के अलावा भी अगर कोई ग्रह होता है तो वह उसका भी असर दोहरा कर देती है,जैसे शुक्र के होने से जातक की दो पत्नी होती है,पहली या तो मर गयी होती है या काफ़ी समय तक रिस्ता चलने के बाद हमेशा के लिये खत्म हो गया होता है,उसी प्रकार से अगर मकर राशि में गुरु होता है तो जातक के दो भाई होते है लेकिन औकात यानी पुरुष संतति एक की ही चल पाती है,एक भाई समाप्त हो जाता है अथवा एक बिलकुल ही नेस्तनाबूद हो जाता है। इसी प्रकार से मकर राशि का बुध राजयोग कारक हो जाता है यानी जो केवल कमन्यूकेशन या बातों का व्यापार करना जानता है,अक्सर बातों के व्यापार करने वाले लोगों के अन्दर शनि की मकर राशि होने से शनि की चालाकी का असर जरूर मिल जाता है और वह झूठ बोलने या फ़रेब का सहारा लेकर अपने काम को चलाने लगता है,साधारण आदमी मेहनत करने के बाद अपने कार्य को बडी मुश्किल से कर पाता है जब कि मकर राशि के बुध वाला जातक अपने काम को बडी ही चतुराई से करता हुआ निकल जाता है। मकर राशि का शनि भी दोहरी नीति को चलने के लिये माना जाता है शनि अगर जन्म समय में मार्गी है तो जान लेना चाहिये कि जातक के लिये जीवन भर कठिन मेहनत का सामना करना पडेगा और अगर वह जन्म समय में बक्री है तो जातक को मेहनत के लिये शरीर की बजाय दिमाग की मेहनत करने का अवसर मिलने लगेगा,लेकिन बक्री और मार्गी शनि गोचर के समय जब जिस भाव में बक्री होता है तो परेशानी का कारण बनाने लगता है .शनि वाले कामों के अन्दर मकर राशि के द्वारा जो भी कार्य देखे जाते है उनके अन्दर सबसे पहले राज्य वाले कामों को देखा जाता है मार्गी शनि लेबर वाले कामों की तरफ़ ले जाता है और मार्गी शनि ठेकेदारी या दिमाग से कमाने वाले कामों मे ले जाता है,उसके बाद शनि का असर मीन राशि में होने के कारण जातक को कार्यों के प्रति किसी बडे संस्थान जैसे जेल आदि के लिये कार्य करना पडता है अथवा वह विदेश की नीतियों वाले कार्य या विदेश वाले कामों के लिये अपना कार्य करता है,शनि तिरछी नजर लगन पर होने के कारण शनि अक्सर शरीर को कष्ट पहुंचाने का कार्य करता है,जो भी नाम या कुल के अनुसार कार्य होते है तो वह उन कार्यों के अनुसार कार्य नही करने देता है। लेकिन बक्री शनि समाज के कार्यों के प्रति अपने अपने भावों के अनुसार जल्दी से निपटाने का कार्य करने लगता है।र्गी शनि शरीर को कष्ट देता है और बक्री शनि दिमागी रूप से परेशान करने के लिये माना जाता है,इस शनि का मुख्य कारण धन के प्रति होता है,इसके बाद शनि की सप्तम नजर कर्क राशि पर होने के कारण जातक के लिये घर के काम और जन्म स्थान के कामों के लिये अपनी चाहत भी देता है,बक्री शनि अपनी दिमागी ताकत से घर बनाने के लिये आगे आता है तो मार्गी शनि शरीर के द्वारा पसीना बहाने के द्वारा मकान और रहने के स्थान को बनाने के लिये अपना कार्य करता है। मकर राशि के शनि का सबसे बुरा असर जीवन साथी के भाव में होता है अगर शनि मार्गी है तो गृहस्थी चलाने के लिये लोहे के चने चबाने पडते है,और अगर बक्री हो तो जीवन साथी अपने फ़रेबी कारणों से जातक का अपमान करने से नही चूकता है। अक्सर मार्गी शनि के होने से जातक के अन्दर बल और वीर्य की अधिकता होने से जातक का जीवन साथी उससे दूर भागने लगता है जबकि बक्री शनि के होने के समय जातक के बल और वीर्य में कमी होने से जातक का जीवन साथी उसे अपने इशारे पर नचाना चालू कर देता है। जातक के जीवन में दसवा शनि अगर मार्गी होता है तो देर से उन्नति को दे पाता है और बक्री होता है तो जल्दी से उन्नति भी देता है और गोचर से बक्री होने के समय अवनति भी देता है। दसवा शनि मार्गी होने पर न्याय को मानने वाला होता है और बक्री शनि न्याय को नही मान कर उसके ऊपर अपने दिमाग से विजय पाने वाला होता है. आगे हम अगली पोस्ट में शनि के वारे थोड़ी चर्चा ओर करेंगे आचार्य राजेश मित्रों आप भी अगर अपनी कुंडली दिखाकर शनि गोचर का कल पता करना चाहते हो कि आपकी कुंडली में शनि जो मकर राशि में कैसा फल देगा शुभ देगा या अशुभ देगा तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं 

शनिवार, 25 जनवरी 2020

आठवां शनि शनिदेव का अष्टम भाव में फल | Saturn Effects 8th House.

https://youtu.be/2GqMEVBeo_Y
शनि का अष्टम भाव में फल | Saturn Effects 8th House. जन्मकुंडली में अष्टम भाव को शुभ नहीं माना गया है। यह त्रिक भाव भी है। इस भाव से व्यक्ति की आयु व मृत्यु के स्वरुप का विचार किया जाता है। शनि इस भाव का तथा मृत्यु का कारक ग्रह भी है।कुंडली का आठवा भाव और शनि दोनों ही बड़े महत्वपूर्ण और चर्चित विषय हैं। आठवां स्थान मृत्यु का भाव कहलाता है। इसलिए अष्टम स्थान को लेकर अक्सर लोग भयभीत रहते हैं। और यदि इस घर में शनि आ जाए यानी आठवें स्थान में शनि आ जाए तो डरना स्वाभाविक ही है।एक कहानी पढी थी कि जब शनि देव ने जन्म लिया और उन्होने अपनी आंखे खोली तो सूर्य देव जो उनके पिता थे उनको कोढ की बीमारी हो गयी,उनका सारथी जो रथ को चलाता था लंगडा हो गया,और रथ में चलने वाले घोडें अन्धे हो गये,मतलब शनि के अष्टम में आने से एक दम सूर्य अस्त हो गया,यही स्थान शनि के जन्म का कहा जाता है। किसी भी जातक की कुंडली में शनि अगर वृश्चिक राशि का है या फ़िर शनि उच्च की राशि में होकर अष्टम स्थान में है तो जातक को मौत के बाद की सम्पत्ति तो मिलेगी,जब मौत के बाद की सम्पत्ति मिलेगी तो सीधी बात है कि किसी भी रिस्तेदार की जो अष्टम भाव से सम्बन्ध रखता हो उसकी सम्पत्ति जातक को मिलेगी। अब अष्टम के रिस्तेदारों को गौर से देखने पर पता चलता है कि पिता का ग्यारहवा भाव और माता मा पंचम भाव यानी जातक के जन्म के बाद माता के परिवार का सूर्य जरूर डूबेगा। दूसरे यह स्थान माता के परिवार के अलावा भी कई स्थानों से सम्बन्ध रखता है,जैसे छठे स्थान से यह तीसरा स्थान है और मामा या छोटी मौसी के लिये भी माना जा सकता है जातक को नाना की भाभी की सम्पत्ति भी मिलेगी। यह स्थान पत्नी के मामा के भाग्य का स्थान भी माना जाता है यानी पत्नी का मामा कभी कभी न कभी भाग्य से जातक को अपनी सम्पत्ति का कुछ हिस्सा दे ही देगा। यह स्थान बडे भाई की पत्नी का मकान भी कहा जाता है यानी बडे भाई की ससुराल में भी सूर्य का डूबना माना जायेगा और सारथी के रूप में रहने वाली बडे भाई की सास भी लंगडी होकर मरेगी और उसकी भी मकान जैसी सम्पत्ति भी जातक के बडे भाई को मिलेगी। इस स्थान को छोटे भाई के रोजाना के कार्य और कार्य के बाद मिलने वाली बीमारियों और कर्जा दुश्मनी बीमारी के लिये भी माना जाता है जातक को छोटे भाई के कर्जा दुशमनी बीमारी को निपटाने के लिये अपने द्वारा खर्चा करने वाली बात इसलिये मानी जा सकती है कि तीसरा भाव पत्नी का भाग्य का भाव कहा जाता है,अगर जातक अपने छोटे भाई के लिये इन बातों में खर्चा करता है तो जातक का भाग्य का घर और अपमान मृत्यु जान जोखिम आदि के लिये सहारा भी मिलने में कोई सन्देह नही किया जा सकता है।

इस भाव के शनि की सवारी के लिये मैने कही सुना था कि इसके रथ को आठ सांप खींच रहे है उन आठ सांपों का शरीर एक है और फ़न आठ है,यानी शेषनाग का रूप माना जा सकता है,अक्सर जब हम इस शनि के लिये अपनी आराधना में भगवान श्रीकृष्ण के रूप को यमुना में गिरी गेंद को निकालने के लिये कालियादाह में जाकर और शेषनाग को नाथ कर उसके फ़नों पर ता ता थैया करते हुये देखते है तो आठवें शनि की बुरी बातों में कुछ कमी मिलती है,कुछ स्थानों पर इस शनि की सवारी को भैंसे के रूप में माना जाता है और जब व्यक्ति की मौत होती है तो वह भैंसे पर सवार यमराज को देखकर या लोक मान्यता को समझ कर मान ही सकता है कि शनि का रूप मृत्यु के देवता के रूप में भी है और तभी यूनान के लोग शनि की पूजा करते थे,शनि को इन्साफ़ का देवता भी मानते थे,एक बुजुर्ग ऋषि के रूप में मान्यता भी रखते थे। अन्ग्रेजी में शनि का नाम Saturan रखा गया है।
हर आदमी को तांत्रिक लोगों से डर लगता है,कारण आठवें भाव का शनि तांत्रिक बनने की योग्यता देता है,जातक के अन्दर इतने दुख भेजता है कि वह अपने को दुनियादारी से दूर लेजाकर शमशान को ही अपनी कार्यस्थली बनाता है और तांत्रिक शक्तियों के लिये अपने प्रयास करता है। वह शीत वायु नमी गरमी बरसात आदि को सहन करने की क्षमता रखता है भार को खींचने की योग्यता रखता है,कैसा भी भोजन खाने की हिम्मत रखता है और पचाता भी है शराब और तामसी वस्तुओं का सेवन करता है,उसके पास उन रूहानी ताकतों का आवागमन हो जाता है जो पहले से ही दुखी होती है या तांत्रिक कारणों से परेशान रही होती है। अक्सर देखा जाता है कि इस प्रकार के व्यक्ति लम्बी उम्र तक जिन्दा रहते है,कहावत भी है कि जो समय से भोजन को प्राप्त कर लेता है वह जल्दी मर जाता है और जो भूखा रहता है और भोजन के प्रयास को करता रहता है उसके अन्दर उन ताकतों का विकास हो जाता है जो किसी भी बीमारी को दूर रखने के लिये काफ़ी होती है।

अष्टम स्थान के शनि को शनि की उतरती और नीची साढेशाती के रूप में जाना जाता है। जातक के अन्दर मान अपमान का भेद और अपने मन के अन्दर ही कितने ही विचारों की लडाई अपने आप चलने लगती है और उन लडाइयों के कारण वह कुछ करने जाता है और कुछ करने लगता है। उसे जितनी लोग सहायता के लिये सामने आते है उन्हे वह दूर करता है और जो लोग गालियां देते है उनके ऊपर वह रहम करता है और गाली सुनने की आदत पड जाती है। अक्सर इस शनि के द्वारा जातक को अपने जीवन साथी से हमेशा मतभेद के साथ रहना पडता है कारण जीवन साथी का विचार जातक के परिवार के प्रति बिलकुल बेकार का ही माना जाता है वह पिता के परिवार से दूरिया रखने या किसी भी प्रकार की चालाकीकरने के लिये भी माना जाता है,जातक के जीवन साथी का व्यवहार इतना रूखा और बेकार सा हो जाता है कि वह कभी भी जातक के परिवार को परिवार नही समझ कर अपने मान अपमान को हमेशा सामने रखता है यही कारण होता है कि जातक जब अपनी शनि की उम्र में आता है तो अपने जीवन साथी से अपने आप दूरिया बना लेता है और जीवन साथी को जवानी के दिनों में किये गये व्यवहार के लिये पश्चाताप करना पडता है। अगर जातक का सूर्य कुछ मजबूत है तो जातक के पुत्र जातक के जीवन साथी के लिये अपनी स्वार्थी मर्यादा को कायम रखते है और जैसे ही उनका स्वार्थ पूरा होता है वे अपने स्वभाव से जातक के जीवन साथी के साथ दुर्व्यवहार करने लगते है,जातक के लिये जातक का जीवन साथी कई प्रकार के आक्षेप और विक्षेप भी देता है।

शनि के इस भाव के प्रभाव को दूर करने के लिये एक अच्छा उपाय यह भी कहा गया है कि जातक अगर खुद ही दुखों को अपने सीने से लगाकर चले और सुखों से दूरिया बना ले तो जातक को दुख परेशान ही नही कर सकते है,वह अगर अपने को अपमान में भी सुखी माने,सर्दी गर्मी और बरसात के असर को सहन करने की क्षमता को रखे तथा हितू नातेदार रिस्तेदार से भली बुरी सुनने का आदी बना रहे उसे यह चिन्ता नही हो कि कल क्या मिलेगा तो शनि दुख दे ही नही सकता है और एक दिन ऐसा आता है सभी सुख उस जातक के आगे पीछे घूमने लगते है और वह उन दुखों को देखने के बाद सुखों से नफ़रत पैदा कर लेता है।

इस भाव के शनि के कारण जातक की बहिन बुआ बेटी को या तो हमेशा दुखी ही देखा गया है या वे शनि जैसी सिफ़्त वाले लोगों से अपने सम्बन्ध बनाकर जातक को अपमानित करने के लिये पूरे प्रयास करने में कसर नही रखती है। जातक को जब कोई साधन नही मिलता है तो जातक अपने को उन्ही की शरण में लेजाकर पटक देता है और अपने को अपमानित होने में उसे कोई दुख नही होता है,अक्सर इस भाव के शनि वाले जातक के रिस्तेदारों से कभी नही बनती है वे अपनी चालाकी और अपने द्वारा जातक से मुफ़्त में प्राप्त करने के कारण बिगाडखाता कर लेते है और जब भी जातक के लिये कोई बात होती है तो केवल बुराई को ही सामने करने से बाज नही आते है।

इस भाव के शनि वाले जातक अक्सर ध्यान समाधि की तरफ़ चले जाते है और जब वे ध्यान समाधि के बाद अपने अन्तर्मन के अन्दर सूर्य की उस किरण को प्राप्त करते है जिसे अन्तर्ग्यान के रूप में जाना जाता है तो जातक को सभी प्रकार की शान्ति मिलती है,जातक उस ज्योति की किरण को दुबारा से प्राप्त करने के लिये कई प्रयास रोजाना करने लगता है और उसी प्रकाश के सहारे चलते चलते वह एक दिन सिद्ध पुरुष या स्त्री की श्रेणी में आजाता है लोग उसके पीछे घूमते है और वह किसी प्रकार के सुख को अपने पास नही आने के लिये कृतसंकल्प रहता है।यदि शनि कुंडली के अष्टम भाव में हो तो ऐसे में शनि दशा स्वास्थ कष्ट और संघर्ष उत्पन्न करने वाली होती है। अष्टम में शनि होना किसी भी स्थिति में शुभ तो नहीं है पर यदि यहाँ स्व उच्च राशि में हो या बृहस्पति से दृष्ट हो तो समस्याएं बड़ा रूप नहीं लेती और उनका समाधान होता रहता है।

यदि शनि कुंडली के अष्टम भाव में होने से ये समस्याएं उत्पन्न हो रही हों तो निम्नलिखित उपाय करना लाभदायक होगा।

1. ॐ शम शनैश्चराय नमः का जप करें।
2. साबुत उड़द का दान करें।
3. शनिवार को पीपल पर सरसों के तेल का दिया जलायें।--
4-नित्य अपने माता पिता से आशीर्वाद लें।
5-मजदूर वर्ग से प्रेम से पेश आयें और उनकी परेशानी में उनका साथ निभाएं।
---किसी जरूरतमंद की सहायता करें। इस शनि के प्रभाव को दूर करने के लिये और अपने अपमान आदि को दूर करने के लिये एक उपाय लालकिताब में बताया गया है कि जातक अगर चांदी का चौकोर टुकडा अपने गले में डाले रहता है तो चन्द्र मंगल की युति बनाकर वह दुखों से कुछ सीमा तक दूर रह सकता है।
आप अपने विचार www.acharyarajesh.inपर लिख सकते है.

गुरुवार, 23 जनवरी 2020

वैदिक ज्योतिष मे गुरु राहु और केतु की दृष्टि ऐक समान

https://www.youtube.com/watch?v=crxhPe2C5ic 
वैदिक ज्योतिष मे गुरु राहु और केतु की दृष्टि ऐक समान जन्मकुंडली में कोई भी ग्रह कहीं भी बैठा हो वह दूसरे ग्रह आदि पर दृष्टि डालता है तो उस दृष्टि का प्रभाव शुभ या अशुभ होता है। आप अपनी कुंडली के ग्रहों की स्थिति जानकर उनकी दृष्टि किस भाव या ग्रह पर कैसी पड़ी रही है यह जानकार आप भी उनके अशुभ प्रभाव को जान सकते हैं।
 दृष्टि क्या होती है?
दृष्टि का अर्थ यहां प्रभाव से लें तो ज्यादा उचित होगा। जैसे सूर्य की किरणें एकदम धरती पर सीधी आती है तो कभी तिरछी। ऐसा तब होता है जब सूर्य भूमध्य रेखा या कर्क, मकर आदि रेखा पर होता है। इसी तरह प्रत्येक ग्रह का अलग-अलग प्रभाव या दृष्टि होती हैं। मित्रों आप तो जानते ही हो कि राहु केतु छाया ग्रह है। पर इनकी भी दृष्टि  निर्धारित की गई है। गुरु राहु केतु अपने स्थान अपने स्थान से तीसरे भाव पंचम भाव सप्तम भाव और नवें भाव को पूरी द्रिष्टि से देखते है,गुरु का अर्थ वैदिक ज्योतिष में ज्ञान सम्बन्ध क्षमता आदि से लिया जाता है तो नाडी ज्योतिष में जीव से लिया जाता है लाल किताब में गुरु को पिता के रूप में देखा जाता है.इसी प्रकार से राहु का अर्थ वैदिक ज्योतिष में पूर्वजों की आत्माओं से लिया जाता है,जो अपने अन्दर जिन्दा शक्ति को सोखने की शक्ति को रखता है उसे भी राहु कहते है जो अपने रहते हुये अन्य की प्रतिक्रिया को नेस्तनाबूद रखे उसे भी राहु कहते है,नाडी ज्योतिष में जीवन पदार्थ स्थान आदि की अन्दरूनी शक्ति को कहा गया है और लालकिताब में राहु को ससुराल आसमानी शक्ति और रूह के रूप में बताया गया है,उसी प्रकार से केतु को भी नकारात्मक शक्ति के रूप में वैदिक ज्योतिष में जिस के अन्दर जीव नही हो और जिसे प्रयोग में लाया जा सकता है,जैसे जानवर के मरने के बाद उसके सींगों में कोई शक्ति नही है लेकिन उसके सींग के अन्दर छेद आदि करने के बाद बजाने के काम में भी लाया जाता है तो महीन हड्डी आदि को हथियार और कांटे के रूप में भी प्रयोग किया जाता है,जो सहारा देने के लिये प्रयोग में लिया जाये चाहे वह पहिचान बताने के लिये झंडा का रूप हो या कुत्ते को भगाने के लिये डंडा के रूप में हो आजकल जनता के हित के लिये नेता के रूप में भी केतु की उपाधि बताई जाती है,नाडी ज्योतिष में केतु को उन रिस्तों के लिये माना जाता है जो वास्तव में कुछ नही होते है लेकिन सम्बन्धों के व्यवहार के कारण वे आजीवन ही नही कई पीढियों तक चलते रहते है जैसे ननिहाल का रिस्ता साथ ही लालकिताब में भी केतु को मामा के घर में भान्जे के रूप में ससुराल में जंवाई के रूप में और बहिन के घर भाई के रूप में केतु की मान्यता है। लेकिन इन सभी में गुरु को जीव के रूप में मानना और हवा का कारक जो जीव को सांस के रूप में जिन्दा रखती है के लिये माना जाना ठीक है,जिन्दा है तो रिस्ता है,जिन्दा है तो किसी न किसी प्रकार का ज्ञान रखता है मुद्रा चलन में है तो वह जिन्दा है किताब  में जो लिखा है और वह अच्छा या बुरा प्रभाव प्रकट करने में सक्षम है तो उसे जिन्दा माना जाता है,इसी प्रकार से राहु को भी पूर्वजों के रूप में मानना चाहे वह राख के रूप में हो कैमिकल पदार्थ के रूप में हो वह पानी मिलने पर कैमिस्ट्री की उपाधि देता हो,पदार्थ में मिलाने पर फ़िजिक्स की बात बताता हो हवा में मिलने पर गैस की उत्पत्ति करता हो तार के अन्दर जाने पर बिजली की प्रधानता को बताता हो या मोबाइल के अन्दर बैटरी के रूप में चलाने की क्षमता बेलेन्स के रूप में बात करने की क्षमता और सेमीकन्ड्क्टर के अन्दर सोफ़्टवेयर के रूप में कार्य करने की क्षमता के रूप में अपना आस्तित्व रखता हो,इसके विपरीत में केतु को माना जा सकता है।
तीनो ग्रहों की समान द्रिष्टि को समझने के लिये गुरु जहां है वहां से स्थान की पहिचान औकात की पहिचान बताता है,तीसरे स्थान से अपने द्वारा लोगों के अन्दर पहिचानने की शक्ति नाम की शक्ति और प्रदर्शन की शक्ति को बताता है,पंचम स्थान से कितनी शक्ति चाहे वह ज्ञान के रूप में हो या रक्षक और मारक के रूप में हो सम्मोहन के रूप में हो बखान करता है सप्तम से किन किन कारकों से वह मुकाबला कर सकता है और नवें भाव से वह किस प्रकार के समाज समुदाय या रा मेटेरियल से निर्मित है. गुरु के समान ही यह अपनी नजर रखते हैं।

शनिवार, 18 जनवरी 2020

Ketu(Importance of Ketu planet in Horoscope केतु का ज्योतिष महत्व

www.acharyarajesh.in Ketu(Importance of Ketu planet in Horoscope केतु का ज्योतिष महत्व

मित्रों आज बात करते हैं केतु ग्रह 

लाल किताब में केतु को कुत्ता माना गया है। कुत्ता खूँखार भी हो सकता है और गीदड़ भी। यदि समझदार है तो रक्षक का कार्य करेगा। केतु को दरवेश माना गया है। इसका सम्बन्ध इस लोक से कम परलोक से अधिक है। केतु इस भवसागर से मुक्ति का प्रतीक है,केतु दया का सन्देश वाहक है,मंगल बुध और गुरु तीनो ही केतु में सम्मिहित है। केतु यात्राओं का कारक है और जीवन यात्रा के गन्तव्य तक जातक का सहायक है। केतु को तीन कुत्तों के रूप में भी पहिचाना जाता है,बहन के घर भाई ससुराल में जंवाई और मामा के घर भान्जा भी केतु की श्रेणी में आते है। केतु के लिये कुत्ते को पाला जाता है दिन के लिये सफ़ेद कुत्ते को और रात क लिये काले रंग के कुत्ते को पाला जाता है,केतु दिवा बली भी होता है और रात्रि बली भी होता है जबकि अन्य ग्रह या तो दिवा बली होते है या रात्रि बली माने जाते है। यदि कुत्ते का लाल रंग है तो वह बुध के लिये माना जाता है और बुध वाले ही फ़ल देने के लिये अपना असर देता है लेकिन बुध का असर केवल केतु के समय तक ही निश्चित माना जाता है। जब केतु बुरा फ़ल देना शुरु करे तो जातक को किसी प्रकार का अपनी मुशीबतों का शोर नही मचाना चाहिये,कारण जितना अधिक शोर मचाया जायेगा केतु उतना ही अधिक परेशान करने के लिये अपना असर देगा। दसवे भाव के ग्रहों को देखकर केतु की प्रताणन की सूचना निश्चित  रूप से पहले ही मिल जाती है।केतु की पीडा से जातक का स्वास्थ खराब होता है,तो चन्द्रमा सहायक माना जाता है,कभी कभी केतु पुरुष सन्तान यानी पुत्रो को कष्ट देता है,ऐसा होने पर मन्दिर में कम्बल का दान करना चाहिये,केतु के बुरे प्रभाव से पांव के पंजो एं या पेशाब की नली में रोग पीडा आदि होने के कारण मिलने वाले कष्टो से बचने के लिये पावों के अंगूठो पर रेशमी धागा बांध लेना चाहिये।

केतु का कारक सोने वाला पंलग भी माना जाता है,विवाह के समय जो पलंग मिलता है या बिस्तर मिलता है उस पर केतु का स्वामित्व माना जाता है,प्रसूति के समय स्त्री को इसी पलंग का इस्तेमाल करना चाहिये। ऐसा करने से केतु बच्चे को दुख नही देता है।केतु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए व्यक्ति को चाहिए कि, कभी भी खुद के पैसे से खरीदे पलंग पर नहीं सोएं। केतु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ससुराल से प्राप्त पलंग का प्रयोग करना चाहिए। अगर खुद के पैसे से पलंग खरीदना चाहते हैं तो थोड़े से पैसे ससुराल से भी आशीर्वाद स्वरुप प्राप्त कर लें।

जब केतु परेशान करता है तो दूसरे ग्रहों पर भी बुरा प्रभाव डालता है,केतु का राहु या शनि से सम्बन्ध होने पर वह पापी हो जाता है,राहु केतु युति निश्चय ही असम्भव है,किन्तु नकली राहु जो अन्य ग्रहों के मेल से बनता है और वह अगर केतु के साथ युति करते है तो बहुत ही खतरनाक स्थिति बन जाती है। केतु पीडित होने पर भी मारक नही होता है। वह किसी सम्बन्धी की मृत्यु का कारण भी नही बनता है। वह अन्य प्रकार के कष्ट देता है। पापी होने पर केतु प्राय: घर को घर की स्त्रियों को और बच्चों को प्रताणित करता है। जब रवि या गुरु अपने शत्रु ग्रहों द्वेआरा पीडित होते है तो वे केतु क अशुभ फ़ल उत्पन्न करते है,जब केतु अशुभ होता है त वह प्राय: बच्चों को कष्ट देता है। फ़लत: बच्चों को यदि सूखा रोग हो जाता है तो नदी आदि की मिट्टी से नहलाने से केतु का असर ठीक होने लगता है यह प्रयोग तेतालीस दिन तक करना चाहिये।सामान्य रूप से केतु के उपचार) सवा किलो आटे को हल्का सा सेंककर उसमें गुड़ का चूरा मिला दें तो 43 दिन तक लगातार चींटियो को डालें।
(2) बुधवार के दिन
गणेश चतुर्थी और गणेश पूजा के दिन उपवास रखना चाहिये.
3तिल नीबू और केले का दान करना चाहिये.
4-घर मे काला धोला कुत्ता पालें या ऐसे कुत्ते की सेवा करें,लेकिन शुक्र केतु की युति होने पर हरगिज भी कुत्ता नही पाले और न ही कुत्तों की सेवा करें.
आसपास के लोगों से अच्छा व्यवहार और अच्छा चालचलन बना कर रखें,अन्यथा पेशाब वाली बीमारी होने की बात मिलती है.
नौ साल से कम उम्र की बालिकाओं को खट्टी मीठी टाफ़ियां देने से भी केतु खुश रहता है.
काले धोले तिल बहते पानी में बहाने से भी केतु की पीडा कम होती है.मन्दे केतु की पहचान: पेशाब की बीमारी, जोड़ों का दर्द, सन्तान उत्पति में रुकावट और गृहकलह।
तेज: मकान, दुकान या वाहन पर ध्वज के समान है। केतु का शुभ होना अर्थात पद, प्रतिष्ठा और संतानों का सुख।
मंदा: मंगल के साथ केतु का होना बहुत ही खराब माना गया है। इसे शेर और कुत्ते की लड़ाई समझें। चंद्र के साथ होने से चंद्र ग्रहणमाना जाता हैकेतु के बारे में एक कहावत प्रसिद्ध है की केट छुडावे खेत यानी की केतु जिस भाव में हो उस भाव से सम्बन्धित जातक में अलगाव पैदा कर देता है। अन्य ग्रहों की तरह केतु की ज्योतिष में अहम भूमिका होती है। ज्योतिष में केतु को मोक्ष का कारक ग्रह माना गया है। केतु को कुल को तारने वाला भी माना गया है। पुत्र को भी केतु ही माना गया है।
 
सावधानी: कुंडली के खानों अनुसार ही उपायों को लाल किताब के जानकार से पूछकर करना चाहिए।
नाना की सेवा करे और उनकी आज्ञा का पालन करें.अब यहाँ केतु के बल को समझना है, केतु जिसके साथ बैठता है उसके बल को बढ़ाता है जिसके कारण शुभ ग्रह होने पर शुभ फल को बढ़ाएगा और पाप ग्रह होने पर पाप फल को बढ़ाएगा और राहु में यह अंतर है की राहु जिसके साथ बैठेगा उस के बल को लेकर अपने बल को बढ़ाएगा और पाप प्रभाव दिखाएगा  सभी ज्योतिष शास्त् केतु का फल करते समय इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए उस पर
किस ग्रह का प्रभाव है
वह किस भाव में बैठा है
वह किस राशि में है वह उसके अनुसार फल देने में समर्थ रखता है                       
 वैसे वेदों में सूर्य की राशिमो को  केतु कहा गया है  यदि वेद के इन शब्दों को सही माने तो केतु सूर्य की  राशिमो होने की वजह से वह जीवनदाता माना जायेगा क्योकि की सूर्य की किरणों से ही पूरा व्रह्माण्ड प्रकाशित होता है उसी राशिमो से जीव का जीवन है|

मंगलवार, 14 जनवरी 2020

जीवन यात्रा: Life Through the Lens of Jyotish

http://acharyarajesh.in/%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97/www.acharyarajesh.inजीवन यात्रा: Life Through the Lens of Jyotish
 
मित्रों हर चीज हमारे नियंत्रण में नही है। हम मेहनत तो बहुत करते है परन्तु सबको एक जैसा फल नहीं मिलता, कोई बीमार है, कोई आर्थिक तंगी का शिकार है, किसी की शादी नही हो रही और किसी को नौकरी नही मिल रही तो कोई व्यापार में घाटा उठा रहा है, कोई पाप करता है और फिर भी मजे से जिन्दगी काटता है और कोई बहुत शुभ कर्म करता है तब भी कष्ट उठा रहा है,  वैसे तो आजकल भाग्य और ज्योतिष को निरर्थक और अनपढ़ लोगो की विद्या समझ कर नकार दिया जाता है लेकिन जब हम अभी कही गयी बातों का लगातार शिकार होते है, तब हमे लगता है कि इस संसार में भाग्य नाम की एक चीज भी है। जन्म कुंडली में बारह खाने बने होते हैं जिन्हें भाव कहा जाता है। शास्त्रों में 12 भावों के स्वरूप हैं और भावों के नाम के अनुसार ही इनका काम होता है। पहला भाव तन, दूसरा धन, तीसरा सहोदर, चतुर्थ मातृ, पंचम पुत्र, छठा अरि, सप्तम जाया, आठवाँ आयु, नवम धर्म, दशम कर्म, एकादश आय और द्वादश व्यय भाव कहलाता है़।कुंडली मे जीवन की यात्रा पहले भाव से शुरु होती है,चौथे भाव तक शरीर का पालन पोषण किया जाता है और पहली यात्रा शुरु हो जाती है सप्तम भाव तक पहली यात्रा चलती है,सप्तम के बाद जीवन की दूसरी यात्रा शुरु होती है जो दसवे भाव तक चलती है,दसवे से तीसरी और अन्तिम यात्रा शुरु हो जाती है जो दुबारा से जीवन को देने के लिये पहले तक अपनी यात्रा को जारी रखने के लिये माना जाता है.इस प्रकार से जीवन की यात्रायें क्रम से चलती रहती है,शरीर बदल जाते है योनि बदल जाती है कर्मो के अनुसार जीवन का क्षेत्र बदल जाता है। अच्छे काम जीवन की यात्रा मे किये जाते है तो अच्छी योनि की प्राप्ति हो जाती है बुरे काम किये जाते है तो बुरी योनि की प्राप्ति हो जाती है। अच्छे और बुरे दोनो प्रकार के कार्य किये जाते है तो अच्छे और बुरे दोनो प्रकार के सम्मिलित परिणाम मिलते रहते है। शरीर परिवार जीवन साथी और दुनियादारी यह चार रास्ते हर जीव के प्रति अपने विचार चार रास्तों की तरह से होते है और इन चारो के मिलने के स्थान को चौराहे से जोड कर देखा जा सकता है। जो व्यक्ति जिस रास्ते पर जा रहा होता है वह अपने रास्ते को अगर लगातार दाहिनी तरफ़ लेकर चला जाता है तो वह पहले परिवार मे चलेगा फ़िर जीवन साथी के साथ चलेगा और बाद मे जगत व्यवहार को लेकर चलने के बाद वापस फ़िर से जीवन के प्रति आकर नया जीवन शुरु कर देगा,यह मान्यता जगत मे मान्य है और वैदिक तथा शास्त्रीय रीति से इसे उत्तम रास्ता कहा जाता है। इसके विपरीत दूसरा व्यक्ति अपने लगातार बायीं तरफ़ लेकर चलेगा तो वह पहले जगत व्यवहार को देखना शुरु कर देगा और फ़िर जीवन साथी और बाद मे परिवार की तरफ़ देखकर दुबारा से शरीर के प्रति आकर नया जन्म लेगा और दुबारा से अपनी सृष्टि क्रम का साझेदार बन जायेगा। इस प्रकार से दो प्रकार के भाव जीवन मे माने जाते है।सुबह जागने के बाद व्यक्ति के अन्दर कई प्रकार के भाव पैदा होते है जो उसे पूरे दिन के लिये अपनी चेतन और अचेतन मन के द्वारा प्रकट किये जाते है। वह किस क्षेत्र मे अपने को ले जायेगा वह विचार उसे या तो अपने दिमाग से लेकर चलना पडता है अथवा दूसरे लोग उसके मन को अधिग्रहण करने के बाद चलाने के लिये माने जाते है। जो लोग अपने मन से चलते है वे अक्सर बायीं ओर चलने वाले माने जाते है और जो दूसरों के प्रति दूसरों की धारणा से चलते है वे दाहिनी तरफ़ चलने वाले लोगों के जैसे माने जाते है। जब उन्नति और अवनति क कारण देखा जाता है तो दाहिनी तरफ़ वाले व्यक्ति तो जगत के व्यवहार को पहले नही देखते है वे परिवार की सहायता से फ़िर जीवन साथी की सहायता से जगत व्यवहार को समझने की चेष्टा करते है और उन्हे भावी कष्ट ही मिलते है लेकिन जो दाहिनी तरफ़ चलने वाले लोग होते है वे सीधे से जगत व्यवहार से जुडते है और उन्हे स्वार्थी जगत की श्रेणी मे पहले से ही निपटना होता तो वे अपने जगत व्यवहार से अपने जीवन साथी को भी केवल आदेश से ही लेकर चलते है और अपने परिवार को भी आदेश से लेकर चलने के लिये माने जाते है इस प्रकार से वे जगत व्यवहार के आगे अपने वास्तविक मूल्य को भूल कर केवल जगत व्यवहार के लिये ही होकर रह जाते है,उन्हे अपने जीवन का वास्तविक रास्ता नही मिलता है जो मिलता है वह स्वार्थ की रीति से ही मिलता है। जैसे जगत व्यवहार का रास्ता खत्म हो जाता है तो जीवन साथी भी अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिये साथ चलता है और जैसे ही जीवन साथी का स्वार्थ पूरा हो जाता है व्यक्ति अपने परिवार के ऊपर निर्भर होकर रह जाता है एक समय ऐसा भी आता है जब व्यक्ति निराट अकेला रहकर अपने द्वारा लोगों की छल वाली नीतियों के प्रति सोचता हुआ अन्तगति को प्राप्त करता है और दूसरे जीवन मे अपनी उसी नीति को धारणा मे लेकर चलता है,उस धारणा के अन्दर जो पहले जीवन की अनुभूति होती है वह दूसरे जीवन मे बदली हुयी होती है पहले जैसे उसे ठगा गया था वह दूसरों को ठगना शुरु कर देता है और जब जीवन साथी का क्षेत्र आता है तो वह जीवन साथी के स्वार्थ को भी अपनी चाहत से ठगने की बात सोचता है और स्वार्थी भावना के रहते उसे केवल अपनी स्वार्थो की पूर्ति के लिये ही प्रयोग मे लाता है अन्त मे अपने परिवार को भी ठग कर दूसरी दुनिया मे अपने को लेजकर किसी ऐसे क्षेत्र को पकडता है जहां उसके जान पहिचान या कोई सगा सम्बन्धी नही होता है वह अपने को अकेला रखकर अन्तगति को प्राप्त करता है।इस यात्रा क्रम को कई लोग बीच मे बदल लेते है और वे जो दाहिने चलने वाले होते है वे अपने को बायें चलाने लगते है और बायें चलने वाले दाहिने चलने के लिये भी माने जाते है कई लोग ऐसे भी होते है जो अपने को बीच मे ही रोकर एक जगह पर स्थापित कर लेते है फ़िर उनका जीवन के रहते हुये कोई मकसद नही होता है। या तो वे नितान्त अकेले रहकर जीवन को निकालते है या अपने को दूसरो के भरोसे छोड कर पडे रहते है। जो लोग अकेले पडे रहते है उनके अन्दर या तो खुद का अहम भरा हुआ होता है या वे किसी के अहम के शिकार हो गये होते है। जो अहम के शिकार हुये होते है वे हर बात से अपने अन्दर शक्तिहीन मानने लगते है और जो अपने अहम से अकेले पडे रहते है वे दूसरो को शक्तिहीन समझने लगते है। लेकिन दोनो ही बातो में दम नही होता है कारण जीव अपनी शक्ति को लेकर पैदा होता है और अपनी शक्ति का प्रयोग करने के बाद ही अपनी गति को समेट लेता है। अगर उसके अन्दर अहम की भावना आजाती है तो वह अपने चलते हुये जीवन क्रम को बिगाडने का क्रम ही पैदा करता है उसे अपनी शक्ति के आगे दूसरे की शक्ति की आभास नही हो पाता है। यही बात उन लोगो के लिये भी पैदा होती है जो अपने को दूसरो का अहम का शिकार बनाकर पडे रहते है उन्हे अपनी शक्ति का आभास नही हो पाता है। 

शक्ति का आभास प्राप्त करने के लिये जो चल रहा है उसे तो समझना होता ही है लेकिन जो आगे चलना है उसके प्रति अनुमान लगाना भी जरूरी होता है जो लोग अपने अनुसार चलते है और आगे की बातो को अनुमान लगाकर जानने की क्षमता को रखते है वे तो आगे सफ़ल हो जाते है और जो लोग जो हो रहा है उसी को मानकर चलते रहते है वे कभी कभी बडे रास्ते पर जाकर भटक जाते है और अपने को जबरदस्ती ही शक्तिहीन मानने लगते है। एक समस्या हमेशा के लिये टिक कर नही बैठती है वह समस्या पहले चिडिया की पूंछ की तरह से प्रकट होती है और बाद मे उसके पंखों की तरह से फ़ैल कर बडी हो जाती है लेकिन जब समाप्त होती है तो चिडिया की चोंच की तरह से समाप्त हो जाती है। कई बार यह भी देखा जाता है कि लोग अपने अपने अनुसार समस्या का निस्तारण करने की कोशिश करते है और वे असफ़ल हो जाते है अगर उनके अन्दर अहम की मात्रा है तो वे समस्या को और अधिक बढाने लगते है लेकिन जो लोग समझदार होते है वे उस समस्या के निराकरण के लिये एक से अधिक लोगो से पूंछ कर चलते है तथा जिन लोगो ने अधिक बताया होता है और एक प्रकार का उत्तर दिया होता है उन्ही का कहा मानकर चलने से अधिकतर बडी से बडी समस्या समाप्त हो जाती है। मित्रो
ज्योतिष विद्या के माध्यम से आप अपने जीवन की कठियानियों को दूर या सरल कर सकते हैं। लोग अक्सर इसे अंधविश्वास के रूप में लेते हैं जो की गलत है। अच्छे ज्योतिषाचार्यों की बेहद कमी है हमारे देश में जिसकी वजह से ज्योतिष विद्या से धन उगाई करने वाले झूठे ज्योतिष्कारों ने समाज में अपनी जगह बना ली। यह सदैव ध्यान रहे की हमारा संसार विज्ञान के प्रभाव में बहुत बाद में आया है पर ज्योतिष की मौजूदगी बहुत पहले से है अतः इसे अन्धविश्वास मानना गलत है। अच्छे ज्ञानी की खोज करना ईश्वर की खोज करने जैसा है; ज्योतिष की उत्तम सलाह उत्तम ज्योतिष ज्ञानी ही दे सकता है।

हर समस्या का वैज्ञानकि समाधान मुमकिन नहीं है और हर मर्ज की दवा भी मुमकिन नहीं है। ऐसे स्थान में ज्योतिष का महत्त्व सामने आता है, जिसके माध्यम से आपके जीवन पर पड़ने वाले दोष, कुप्रभाव, कठिनाईयों इत्यादि का हल निकाला जा सकता है।

मित्रों ज्योतिष स्वयं एक ज्ञान है , वेद है , विद्या है और अतीत का विज्ञान है आचार्य राजेश

शनिवार, 11 जनवरी 2020

#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 2


मित्रों अपनी पिछली पोस्ट में मैंने जनवरी से लेकर अगस्त तक के मंदा तेजी बाजार के बारे में ग्रह गोचर  को देखकर लिखा है उसको भी आप पढ़ सकते हैं इस पोस्ट में सितंबर से लेकर दिसंबर 2020 तक की मंदा -तेजी की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं September 2020#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 2
 सितंबर के महीने में मंदड़िये बाज़ार पर हावी रहेंगे, जिसकी वजह से इस महीने में मंदी रह सकती है। हालांकि, निरंतर उतार-चढ़ाव तेजड़ियों को एक संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। सितंबर 2020 में, यूरेनस और मंगल ग्रह मेष राशि में, बृहस्पति, केतु और प्लूटो ग्रह धनु राशि में, शुक्र ग्रह कर्क राशि में, शनि ग्रह मकर राशि में, राहु ग्रह मिथुन राशि में और नेप्च्यून ग्रह कुंभ राशि में स्थित रहेंगे। इस महीने की 2 तारीख को भाद्रपद पूर्णिमांत, आश्विन अमात और कन्या संक्रांति है- ये तीनों ज्योतिषीय घटनाएँ एक शुभ योग बना रही हैं। इसलिए, पब्लिक सेक्टर, फार्मा सेक्टर, सरकारी बांड, इलेक्ट्रिकल समूह, चाय-कॉफी उद्योग, पेट्रोलियम खुदाई कंपनियां आदि के शेयर ग्राफ में उछाल आ सकता है।
हालाँकि इतने अनुकूल योग के बावजूद भी, शेयर बाज़ार के कई क्षेत्रों और उद्योगों के लिए यह समय अच्छा नहीं कहा जा सकता,10 तारीख तक बाजार में तेजी-मंदी का दौर चलता रहेगा। मंगल वक्री गति में 10 तारीख से आगे बढ़ना शुरू कर देगा। तेजड़िये बाजार में पैसा लगाना चाहेंगे लेकिन मंगल ग्रह पर बृहस्पति की दृष्टि उन्हें ऐसा करने का हौसला नहीं देगी। जल्द ही, तेजी की यह स्थिति फिजूल साबित होगी। बृहस्पति 13 तारीख से मार्गी गति शुरु करेगा, और सूर्य भी उसी दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इस ग्रह संयोजन से वस्तुओं में महंगाई बढ़ेगी। ऊनी कपड़ों (मोंटे कार्लो, लक्स इंड) के स्टॉक मांग में दिखाई देंगे। जैसे- कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से संबंधित क्षेत्र और उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी, ट्रेड मिल, समाचार पत्र, दूरसंचार, वनस्पति, कपास मिल, इत्र और सौंदर्य प्रसाधन क्षेत्रों के शेयर दरों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, 18 तारीख से, इन क्षेत्रों में कुछ उतार-चढ़ाव के बाद तेजी देखी जाएगी, जहां ख़रीदार, स्टॉकहोल्डर और निवेशक अपने नुकसान की वसूली कर सकते हैं।विवेकपूर्ण निवेशक ऑटोमोबाइल और ऑटो सहायक कंपनियों के शेयरों में दिलचस्पी लेना शुरू कर देंगे। 16 तारीख को कन्या राशि में सूर्य के प्रवेश से बुध-सूर्य की युति बनेगी। मंदी सूचकांक को निचले स्तर पर ले आएगी। 21 तारीख तक किसी भी तरह की उत्साही खरीदारी में कमी देखी जाएगी। स्मार्ट व्यापारी हर गिरावट पर फ्रंट-रनर स्टॉक को खरीदते रहेंगे।  विशेष रूप से स्टील, ऑटोमोबाइल, आवास, गैस और पेट्रोलियम के शेयरों में तेजी देखने को मिलेगी।

तेजी की अपेक्षित की तारीख: 6, 7, 8, 10, 13, 14, 18, 20, 21, 23 और 27 सितंबर 2020

मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 6, 7, 8, 12, 14. 16. 19 और 28 सित 
October 2020
अक्टूबर 2020 का महीना गुरुवार से शुरू हो रहा है, और महीने की शुरुआत में ग्रहों की स्थिति शेयर बाजार को प्रभावित करेगी। इस महीने  के गोचर विश्लेषण आधार पर देखें, तो कई राशियों में ग्रहों की मौजूदगी शेयर बाज़ार को प्रभावित करेगी। महीने की शुरुआत में सूर्य कन्या राशि में स्थित होगा, मंगल ग्रह मीन राशि में, बुध ग्रह तुला राशि में, बृहस्पति और प्लूटो ग्रह धनु राशि में, शुक्र ग्रह सिंह राशि में, शनि ग्रह मकर राशि में, राहु वृषभ राशि में, यूरेनस मेष राशि में और नेपच्यून कुंभ राशि में स्थित होगा। इस महीने की 18 तारीख को सूर्य तुला राशि में और मंगल मकर राशि में गोचर करेगा। ग्रहों के हलचल की बात करें तो, 20 तारीख को बुध ग्रह पश्चिम दिशा में अस्त होगा, और 31 तारीख को पूर्व दिशा में उदय होगा।वक्री मंगल 4 तारीख को मीन राशि में प्रवेश करेगा। यह मंगल अन्य प्रमुख ग्रहों के साथ कई महत्वपूर्ण दृष्टियों का निर्माण करेगा। मंगल की दृष्टि सूर्य पर होगी और शनि ग्रह मंगल पर दृष्टि डालेगा। इससे बाजार में अस्थिरता पैदा होगी। इस दौरान प्लाइवुड, सीमेंट, आवासीय, रियल एस्टेट और भारी उद्योग सेक्टर के स्टॉक्स मांग में रहेंगे। 14 तारीख को बुध तुला राशि में वक्री गति शुरु करेगा और इस पर मंगल और शनि की दृष्टि होगी।

बीमा, बैंकिंग, एएमसी (एचडीएफसी एएमसी) और पेंट सेक्टर कंपनियों के शेयरों को खरीदने में दिलचस्पी दिखाकर तेजड़िये बाजार में हावी हो जाएंगे। एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर (वोल्टास) के शेयरों की मांग में कमी देखी जाएगा 17 तारीख को सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेगा और बुध के साथ युति बनाएगा इस युति पर मंगल और शनि की दृष्टि भी होगी।18 तारीख से, शेयर बाजारों में मंदी देखी जा सकती है। इसके साथ, पूरा स्टॉक मार्केट एकतरफा गिरावट से गुजरेगा, जो वस्तुओं के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के शेयरों की कीमतों को प्रभावित करेगा। बैंकिंग, वित्त, भारी इंजीनियरिंग, तंबाकू, कॉस्मेटिक सामान, फार्मा सेक्टर, सार्वजनिक उद्यम, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी, शिपिंग कॉरपोरेशन, परिवहन आदि के ग्राफ में बड़ी गिरावट देखी जाएगी। इसलिए, तेजड़ियों और खरीदारों को सलाह दी जाती है, कि वे अपने निवेश के बारे में सतर्क रहें और पहले अच्छी तरह से सोच-विचार करने के बाद ही कोई निर्णय लें।

उछाल प्राप्त करने से पहले सूचकांक मंदी प्रदर्शित करेगा। शुक्र 23 तारीख को अपनी नीच राशि कन्या राशि में प्रवेश करेगा। मंगल कन्या राशि से सात राशि आगे मीन राशि में गोचर करेगा। राइस (केआरबीएल), एफएमसीजी (आईटीसी, हिंदयूएनआई), ऊनी कपड़े (मोंटे कार्लो, लक्स इंडस्ट्रीज़) और नाइटवेयर्स (लवटेबल, पेज) के स्टॉक्स की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। शुक्र 31 तारीख को हस्त नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इसलिए, पेय और बॉटलिंग स्टॉक (वरुण बेवरेजेज) में कमी आएगी।
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 3, 6, 11, 12, 13, 18, 20, 21, 25 और 31 अक्टूबर 2020

मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 5, 7, 8, 14, 15, 24, 26 और 28
: November 2020
 2020  नवंबर मे पूरे  में बाज़ार में तेजी और मंदी का मिश्रण रहेगा।तुला राशि में स्थित बुध 3 तारीख को मार्गी गति शुरु करेगा। सूर्य और बुध की युति पर शनि और मंगल की दृष्टि पड़ेगी। सूचकांक में तेजी आने की संभावना है। ऑटोमोबाइल्स (मारुति), बैंकिंग, पेपर, केबल (फिनोलेक्स, स्टरलाइट) और रसद (गति, ब्लू डार्ट) के स्टॉक मांग में होंगे। 6 तारीख को सूर्य विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। शेयर बाजार भविष्यवाणी 2020 के अनुसार इससे धातु, गैस, पेट्रोलियम और सीमेंट के शेयरों की मांग बढ़ेगी।

17 तारीख को शुक्र तुला राशि में प्रवेश करेगा और बुध के साथ युति बनाएगा। इस युति पर मंगल और शनि की दृष्टि होगी। तेजड़ियों के लिये  ग्रह मंगल आग में घी का काम करेगा। बृहस्पति 20 तारीख को मकर राशि में प्रवेश करेगा और यहां शनि के साथ उसकी युति होगी। बृहस्पति और शनि सूर्य द्वारा शासित उत्तरा आषाढ़ नक्षत्र के माध्यम से पारगमन करेंगे। इस दौरान तेजी जारी रहने की संभावना है।

21 तारीख को विशाखा नक्षत्र में बुध के आने से सराफा बाजार में मांग घट जाएगी। अप्रत्याशित राजनीतिक और प्राकृतिक घटनाओं के कारण बाजार में अशांति और अस्थिरता महसूस की जा सकती है। 23 से 27 तारीख के बीच तेजड़ियों की बाजार में दिलचस्पी कम होगी। हालांकि बाजार में सुधार आएगा और कुल मिलाकर बाजार की स्थिति ठीकठाक रहेगी।29 तारीख से, कूरियर कंपनी, शिपिंग कॉर्पोरेशन और फाइनेंस सेक्टर के स्टॉक की कीमतों में गिरावट आ सकती है।इन ग्रहों की गणना के परिणाम स्वरुप निवेशकों को मिश्रित परिणाम मिल सकते हैं, इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि इस दौरान आप सोच-समझ कर कहीं भी अपने पैसे लगाएं। चाय, कॉफी, कहवा, हैवी इंजीनियरिंग, स्टील, लोहा, आवास और कोयला से संबंधित उद्योगों में उछाल देखी जाएगी। साथ ही, 9 तारीख से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और प्रौद्योगिकी से जुड़े क्षेत्रों में भी तेजी दिखाई देगी। गिरावट की बात करें, तो फार्मा सेक्टर, पीएसयू या पब्लिक सेक्टर यूनिट, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी, शिपिंग, कॉर्पोरेशन आदि में मंदी देखी जा सकती है, हालांकि 19 तारीख से फार्मा सेक्टर, पीएसयू या पब्लिक सेक्टर यूनिट, मुद्रा बाजार और कोयला उद्योग में जबरदस्त वृद्धि देखी जाएगी।

तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 7, 9, 15, 21, 25, 29 और 30 नवंबर 2020

मंदी की अपेक्षित तिथि: 1, 4, 6, 8, 10, 11, 16, 18, 22, 25, 29 और 30 नवंबर 2020 में 
December 2020
दिसंबर का महीना मंगलवार से शुरू होने वाला है। सबसे पहले अगर बात की जाये ग्रहों की स्थिति और उनके प्रभावों के बारे में तो, सूर्य वृश्चिक राशि में, मंगल ग्रह मीन राशि में, मकर राशि में, शनि और बृहस्पति तुला राशि में, शुक्र तुला राशि में, राहु वृषभ में, यूरेनस मेष राशि में, नेपच्यून कुंभ राशि में और प्लूटो धनु राशि में रहेगा। ग्रहों के गोचर के बारे में बात करें तो, 16 तारीख को सूर्य धनु राशि में गोचर करेगा, जबकि 18 तारीख को बुध धनु राशि में गोचर करेगा। 8 तारीख को ज्येष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेगा और इसी नक्षत्र में सूर्य के साथ इसकी युति बनेगी। सूर्य और बुध का संयोग भावनाओं में अस्थिरता पैदा करता है। व्यापारियों को सावधानीपूर्वक व्यापार या सट्टा लगाने की सलाह दी जाती है।  बुध अस्त की स्थिति तेजड़ियों को दबाव में रखेगी।
शुक्र 11 तारीख को स्थिर और जल तत्व की राशि वृश्चिक में प्रवेश करेगा। वृश्चिक राशि में शुक्र, सूर्य, बुध और केतु के मिलन से आईटी, सॉफ्टवेयर, फार्मा(Sun, Divis, Pfizer) और कपड़ा क्षेत्र की कंपनियों की मांग बढ़ेगी। मंगल 24 तारीख को मेष राशि में प्रवेश करेगा और वृश्चिक राशि में शुक्र और केतु के मिलन पर दृष्टि डालेगा। कॉपर (हिंदुस्तान कॉपर), एमसीएक्स कॉपर, गोल्ड एंड सिल्वर, फुटवियर (रिलैक्सो) और सुगर (ई.आई.डी पैरी) के शेयरों की मांग में तेजी देखी जाएगी। गोचर अनुसार, सूचकांक में तेजी का रुख तेजड़ियों को खुशी देगा।शेयर बाजार में तेजी और मंदी दोनों समान रूप से प्रबल होंगे और मिलेजुले परिणाम देंगे। चाय-कॉफी, हैवी इंजीनियरिंग, स्टील उद्योग, खनन सहयोग, फार्मा सेक्टर, मुद्रा बाजार, इंजीनियरिंग स्टील इंडस्ट्री, कोयला उद्योग, पेट्रोल, पब्लिक सेक्टर, बैंकिंग, परिवहन, हिंदुस्तान वनपति आदि के शेयरों में गिरावट देखी जा सकती है। इन भविष्यवाणियों के अनुसार, हम ये कह सकते हैं, कि इन क्षेत्रों से संबंधित शेयरों में अपने पैसे निवेश करने से पहले दो बार सोचना चाहिए।

तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 5, 7, 8, 12, 14, 15, 19, 23 और 26 दिसंबर 2020

मंदी की अपेक्षित तिथि: 1, 2, 6, 9, 13, 16, 20, 22, 28 और 29 दिसंबर 2020
सूचना
शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट 2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण के बारे में निकाला गया निष्कर्ष विशुद्ध रूप से ग्रह स्थितियों पर आधारित है। न तो लेखक  किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदारनही है। यह ज्योतिषीय निष्कर्ष स्टॉक मार्केट में व्यापार करने के लिए न तो निमंत्रण है और न ही सुझाव/सिफारिश है। निवेश करने से पहले पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें। हो सकता है लेखक ने उल्लेखित शेयरों में निवेश किया हो।

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 1

http://acharyarajesh.in/2020/01/08/6797/www.acharyarajesh.inमित्रों अपनी पिछली पोस्ट पर मैंने जनवरी से लेकर अप्रैल तक आपको मंदा तेजी के बारे में बताया था अब हम मई से लेकर अगस्त तक इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे 

 मई
मई 2020 की शुरुआत में बाज़ार के खरीदारों, निवेशकों और शेयरधारकों के लिए लाभदायक परिणाम लेकर आने वाला है। महीने की शुरुआत में कई ग्रहों की बदलती स्थिति देखी जाएगी, मई के महीने में, ग्रह सूर्य, बुध और यूरेनस मेष राशि में पारगमन करेंगे। मंगल, बृहस्पति, शनि और प्लूटो एक साथ मकर राशि में भ्रमण करेंगे। चंद्रमा कर्क राशि से, शुक्र वृषभ से और राहु मिथुन राशि से होकर गुजरेगा। उग्र ग्रह मंगल, कुंभ राशि में प्रवेश करेगा और वृष राशि में मौजूद शुक्र पर दृष्टि डालेगा। इससे कपास, फैशन, आभूषण, घड़ियां (टाइटन), चांदी, पेंट (एशियन पेंट्स) और आतिथ्य (भारतीय होटल) क्षेत्र की कंपनियों की मांग को बढ़ावा मिलेगा।
, शनि 11 तारीख से वक्री गति में चलेगा। इसी दिन कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करेगा। यह इस्पात (जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील), ऑटोमोबाइल्स (टीवीएस मोटर्स, मारुति), ऑटो सहायक (मदरसन), तेल, गैस और पेट्रोलिय (एचपीसीएल, बीपीसीएल, एमजीएल, आईजीएल) सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में मांग पैदा करेगा।13 तारीख को बुध रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र की कंपनियों को 13 तारीख को शुक्र के वृष राशि में वक्री गति करने के चलते मांग में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। फैशन, प्रसाधन सामग्री (कॉस्मेटिक्स) और तेजी से बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) के शेयरों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। 16 तारीख को पश्चिम में बुध का उदय होगा। इससे बाजार में तेजी आएगी। राहु और बुध 20 तारीख को मृगशिरा नक्षत्र में शुक्र ग्रह के साथ युति बनाएंगे। शेयर बाजार में 28 तारीख तक अस्थिरता की स्थित होने की संभावना है। मुनाफे की चाह में लंबे समय तक बाजार में पैसा लगाने वाले व्यापारियों (Long side traders) को हर बढ़त पर मुनाफा कमाने की कोशिश करनी चाहिये। 29 तारीख को, शुक्र के वक्री होने और सूर्य और शुक्र पर उग्र ग्रह मंगल की दृष्टि होने के कारण स्पॉट एंड इक्विटी मार्केट का ग्राफ ऊपर की ओर जाएगा।शेयर बाज़ार में तेजी आने की संभावना है। स्टील, तेल, फार्मा, उर्वरक, चाय, कॉफी, भारी इंजीनियरिंग, सार्वजनिक क्षेत्र, पेट्रोलियम, रसायन, विद्युत समूह, तंबाकू, वाहन उद्योग, रिलायंस आदि से जुड़े क्षेत्र में उछाल आएगा। स्टॉक मार्केट इंडेक्स सभी रिकॉर्डों को पार करेगा और सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। मंदड़ियों को किसी भी प्रकार के निवेश या खरीदारी से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 3, 4, 5, 6, 8, 12, 17, 18, 19, 20, 23, 24, 25, 26 और 31 मई 2020
[््््््््््््््््््््््््््््््््
june2020/,में अगर जून महीने की बातe की जाये तो, गोचर-कुंडली का विश्लेषण करते हुए यह पता चलता है कि कई ग्रह किसी न किसी राशि में स्थित होंगे, और उनकी वह स्थिति शेयर बाज़ार और उसके विभिन्न तत्वों को प्रभावित कर सकती है। शुक्र के साथ सूर्य, वृषभ राशि में भ्रमण करेगा, वहीं बुध और राहु ग्रह मिथुन राशि में स्थित रहेंगे। चंद्रमा मिथुन राशि से अन्य राशियों में गोचर करेगा और मंगल ग्रह कुंभ राशि में गोचर करेगा जबकि शनि और बृहस्पति ग्रह दोनों वक्री अवस्था में मकर से गोचर करेंगे। उग्र ग्रह मंगल 3 तारीख को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा। खाद्य तेलों, बुलियन (स्वर्ण और रजत), कपास, कपड़ा स्टॉक, एफएमसीजी स्टॉक और कच्चे तेल के शेयरों की मांग में तेजी देखी जाएगी।सूर्य ग्रह 7 तारीख को मृगशिरा नक्षत्र में राहु के साथ युति करेगा। इससे पेट्रोलियम, पेय पदार्थ, चावल, मोती, पानी और चांदी की मात्रा में कमी देखी जा सकती है। एक्वा कल्चर (अवंती फीड्स), चावल (केआरबीएल) और पेय पदार्थ स्टॉक (वरुण बेवरेज) की दरों में वृद्धि होने की संभावना है। सूर्य ग्रह 14 तारीख को मिथुन राशि में प्रवेश करेगा जहां यह बुध और राहु ग्रह के साथ युति बनाएगा। ग्रहों की इस युति से बाजार के वातावरण में बेचैनी देखी जा सकती है।बारिश उम्मीद से कम होगी। कीमतों में वृद्धि के कारण अनाजों के स्टॉक में अच्छी कमाई होगी। चीनी, चावल, गेहूं, खाद्य, धातु और इस्पात के शेयरों में तेजी देखने को मिलेगी। 18 तारीख को मीन राशि में मंगल के प्रवेश के कारण बाजार में तेजी जारी रहने की संभावना है। मंगल, सूर्य, राहु और बुध की युति पर दृष्टि डालकर उसे प्रभावित करेगा और शनि की दृष्टि मंगल पर होगी। बुध वक्री गति में आगे बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप, सट्टेबाजों को बैंकों (एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एसबीआई) के शेयरों को अपूर्ण-बिक्री (Short-selling) से बचना चाहिए। इस महीने ग्रह नक्षत्रों की चाल के अनुसार, शेयर बाजार में लंबे समय तक निवेश करके मुनाफा कमाने वाले व्यापारियों को लाभ प्राप्त होगा।22 तारीख को बुध ग्रह पश्चिम दिशा में अस्त होता हुआ दिखाई देगा। इसलिए, यह महीना लगभग सभी क्षेत्रों में उछाल पैदा करेगा। 18 जून को स्टॉक मार्केट इंडेक्स सभी शेयरों की नई दरों के कारण नई ऊंचाइयों को छूएगा। हालांकि, 14 तारीख को मंदी की भावनाएं देखी जाएंगी, जो फार्मा सेक्टर, पब्लिक सेक्टर, सरकारी ब्रांडों, विदेशी मुद्राओं, गोल्ड ब्रांड, रिलायंस इंडस्ट्री, वाहन, कपड़ा आदि को प्रभावित करेंगी।तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 4, 7, 9, 10, 15, 18, 21, 22, 23, 27 और 28 जून 2020मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 1, 2, 8, 14, 17, 20, 24 और 29 जून
July
Julyजुलाई के महीने में शेयर, स्टॉक और वस्तुओं के संबंध में मिश्रित परिणाम मिलेंगे। विभिन्न ग्रहों के राशियों में होने वाले गोचर बहुत सारे तत्वों और परिणामों को प्रभावित करेंगे, जिनसे या तो निवेशकों को बहुत अधिक लाभ कमाने में मदद मिलेगी या फिर उनके लिए कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं। जुलाई 2020 की शुरुआत में, नेप्च्यून, राहु, सूर्य और बुध मिथुन राशि में स्थित दिखाई देंगे, जबकि प्लूटो धनु राशि में होगा। 9 जुलाई को, बुध पूर्व में उदय होगा, जिसकी वजह से मिश्रित परिणाम मिलने की संभावना है।त्पादों (मैरिको, डाबर) और चावल (केआरबीएल) के शेयरों की मांग में वृद्धि देखी जाएगी। 12 तारीख को बुध मार्गी गति शुरू करेगा। बैंकिंग, पेपर (जेके, वेस्ट कोस्ट), रसद (ब्लू डार्ट) और बीमा (एलआईसी, जीआईसी) कंपनियों के शेयरों में शुरुआती अड़चन के बाद तेजी देखने को मिलेगी। जैसे ही सूर्य 16 तारीख को कर्क राशि में प्रवेश करेगा, यह शनि के साथ 180 डिग्री का संयोग बनाएगा। मंदड़ियों की दखलअंदाजी के बावजूद बाजार में तेजड़ियों का बोलबाला रहेगा।19 तारीख को सूर्य शत्रु ग्रह द्वारा शासित पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेगा। धातु, इस्पात, पूंजीगत वस्तुओं (हैवेल्स) और उपभोक्ता वस्तुओं (गोदरेज कंज्यूमर, आईटीसी, डाबर) के स्टॉक्स मांग में बने रहेंगे।आईटी और सॉफ्टवेयर स्टॉक 23 तारीख को निवेशकों के प्रिय हो जाएंगे क्योंकि इस दिन शुक्र ग्रह मृगशिरा नक्षत्र में राहु के साथ युति करेगा। विवेकपूर्ण निवेशक हर गिरावट पर अच्छी गुणवत्ता वाले स्टॉक खरीदने के हर अवसर का उपयोग करेंगें। महीने के आखिरी सप्ताह में तेजी में कमी आएगी।उतार-चढ़ाव के साथ-साथ लौह और इस्पात उद्योग, वनपति उद्योग, तंबाकू उद्योग, सीमेंट उद्योग, कृषि, रबर उद्योग, खनन उद्योग, ट्रैक्टर ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में बढ़ोतरी देखी जाएगी। स्टॉक मार्केट इंडेक्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 1, 4, 7, 8, 12, 13, 15, 19, 21, 24, 25, 27 और 29 जुलाई 2020मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 5, 6, 11, 14, 18, 22 और 26 जुलाई 2020

August

August2020के अगस्त महीने की शुरुआत में ग्रहों की कई दिलचस्प घटनाएं होंगी।हालांकि, ग्रहों की स्थिति और चाल आपको मिलेजुले परिणाम दिलवा सकती है। ग्रहों की स्थिति के बारे में बात करें तो कुंडली का विश्लेषण करने के बाद देखा जा सकता है कि महीने की शुरुआत में सूर्य और बुध ग्रह कर्क राशि में रहेंगे, मंगल ग्रह मीन राशि में, बृहस्पति और प्लूटो ग्रह धनु राशि में, शुक्र और राहु ग्रह मिथुन राशि में, यूरेनस ग्रह मेष राशि में और नेपच्यून ग्रह कुंभ राशि में रहेगा । 17 तारीख को सूर्य और मंगल क्रमशः सिंह और मेष राशि में गोचर कर रहे हैं, जबकि 18 तारीख को बुध सिंह राशि में प्रवेश करेगा। शुक्र मिथुन राशि में राहु के साथ प्रवेश करेगा और केतु और बृहस्पति की युति पर इसकी विपरीत दृष्टि होगी। और ग्रह मंगल शुक्र और राहु की युति पर दृष्टि डालेगा। बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। समझदार व्यापारी हर बढ़त पर लाभ उठाएंगे। 4 तारीख को पुष्य नक्षत्र में बुध के आने से रजत-स्वर्ण में गिरावट देखने को मिलेगी। वाणिज्य और व्यापार का मुख्य ग्रह, बुध सूर्य के साथ अश्लेषा नक्षत्र में युति बनाएगा। गैस, खान (कोल इंडिया, वेदांता), किफायती आवास (आशियाना, एल्डेको) और सीमेंट (अल्ट्राटेक) सेक्टर के शेयरों में उछाल आएगा। हालांकि बाजार में तेजी की स्थिति की अचानक दिशा बदलने की संभावना है, क्योंकि मंगल मेष राशि में प्रवेश करके बुध पर दृष्टि डालकर बुध की स्थिति को कमजोर करेगा।14 तारीख से बैंकिंग और फाइनेंस, हिंदुस्तान लीवर, वनस्पती, और तंबाकू से संबंधित कंपनियों के स्टॉक की कीमतों में गिरावट आ सकती है, हालांकि जिन-जिन क्षेत्रों के शेयर मंगल, राहु और शनि द्वारा शासित होते है, उनके ग्राफ में निरंतर वृद्धि देखी जाएगी।कुल मिलाकर, 21 तारीख तक बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। 22 तारीख से, ग्रहों की स्थिति में परिवर्तन बाजार में मंदी की स्थिति को प्रभावित करेगा। खुदरा बाजार में 29 तारीख तक अपस्फीति का अनुभव होगा। महीने के अंतिम दिन शुक्र ग्रह का प्रवेश जल तत्व की राशि कर्क में होपर मंगल की दृष्टि होगी। यह संयोग तेजड़ियों के चहरों पर मुस्कानगा। यहां शुक्र लाएगा।
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 4, 6, 8, 12, 17, 19, 24 और 31 अगस्त 2020मंदी की अपेक्षित तिथि: 1, 2, 5, 10, 12, 15, 18, 22, 23, 27 और 29 अगस्त 2020

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शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट 2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण के बारे में निकाला गया निष्कर्ष विशुद्ध रूप से ग्रह स्थितियों पर आधारित है। न तो लेखक नाwebsite किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार है। यह ज्योतिषीय निष्कर्ष स्टॉक मार्केट में व्यापार करने के लिए न तो निमंत्रण है और न ही सुझाव/सिफारिश है। निवेश करने से पहले पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें। हो सकता है लेखक ने उल्लेखित शेयरों में निवेश किया हो।


बुधवार, 8 जनवरी 2020

शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट 2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण

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मित्रों मेरी पिछली पोस्ट ग्रह गोचर पर थी उसको पढ़कर कई मेरे मित्रों ने शेयर मार्केट और वस्तु जींस की मंदा तेजी के बारे ग्रहों के बारे में क्या संबंध बन रहा है। किस महीने क्या होगा यह सब इस पोस्ट में लिखने की कोशिश की है। उम्मीद है। आपको पसंद आएगी मित्रों इस पोस्ट को पढ़कर लाइक करें, और शेयर जरूर करें, मित्रों इस पोस्ट में हम जनवरी से लेकर अप्रैल तक बात करेंगे और अगली पोस्ट में फिर मई से लेकर बाकी महीनों की तो आओ जनवरी से शुरुआत करते हैं।

Acharya Rajesh: 7597718725/9414481324

जनवरी

ग्रह गोचर के अनुसारजनवरी महीने की शुरुआत में, सूर्य ग्रह, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु के साथ धनु राशि में स्थित रहेगा। वहीं मंगल ग्रह वृश्चिक राशि में रहेगा, राहु मिथुन राशि में रहेगा, शुक्र मकर राशि में रहेगा और चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और यूरेनस मेष राशि में रहेगा।
साल के पहले दिन धनु राशि में पांच ग्रहों (सूर्य, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु) का मिलन होगा। यह ग्रहों की यह युति तेजड़ियों के लिए अच्छी लग रही है। बुध साल 2020 के दूसरे दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा और सूर्य के साथ इसी नक्षत्र में बुध की युति होगी। शुरू में मामूली गिरावट के बाद कमोडिटीज और स्वर्ण-रजत मार्केट में तेजी देखने को मिलेगी। अष्टम घर में कुंभ राशि में शुक्र के आगमन के साथ, कपड़ा (रेमंड), एफएमसीजी (एचयूएल, आईटीसी) और चीनी (ईआईडी) के शेयरों में उछाल देखने को मिल सकता है, जबकि कपास, चीनी और घी से संबंधित स्टॉक में भी तेजी देखने को मिलेगी। 13 वें दिन बुध के मकर राशि में प्रवेश करते ही स्वर्ण और रजत सट्टेबाजों के प्रिय बन जाएंगे।पौष पूर्णिमा का महीना शुभ रह सकता है, जबकि माघ अमांत के दौरान मकर संक्रांति का समय अशुभ परिणाम दे सकता है। इसलिए, शेयर बाज़ार 2020 की भविष्यवाणियों के अनुसार इस महीने के अंत में बाज़ार में तेजी देखी जा सकती है। 18 जनवरी तक इस ग्राफ में उतार-चढ़ाव होगा, लेकिन बैंकिंग, वित्त, तंबाकू, चाय-कॉफी और औद्योगिक क्षेत्रों में शेयर बाज़ार में एकतरफा तेज़ी देखी जाएगी। साथ ही, 16 जनवरी से पब्लिक सेक्टर के शेयरों में वृद्धि होगी, और रबर उद्योग, कोयला, औद्योगिक, ऑटो, लोहा, तेल और मोबाइल कंपनियों के शेयर बाज़ार में वृद्धि होगी।

15 तारीख को मकर राशि में बुध के साथ सूर्य की युति बनेगी, यह स्थिति आग में घी डालने का काम करेगी। गेहूं, गुड़, चीनी, कपास, कपड़ा और स्वर्ण-रजत की मांग में और वृद्धि होगी। पूंजीगत माल (क्रॉम्पटन ग्रीव्स) के स्टॉक डिमांड में रहेंगे। शनि 24 तारीख को मकर राशि में प्रवेश करेगा और बुध और सूर्य के साथ युति बनाएगा। इससे बाजार के माहौल में अस्थिरता पैदा होगी। व्यापारियों और सट्टेबाजों को प्रत्येक वृद्धि पर मुनाफे की उम्मीद करनी चाहिये। 31 तारीख को कुंभ राशि में शुक्र के साथ बुध की युति बनेगी और इन दोनों ग्रहों पर मंगल की दृष्टि होगी। ग्रहों की इस स्थिति से तेजड़ियों की अस्थिरता में वृद्धि होगी।रिलायंस इंडस्ट्री, कैपिटल, सेल, टिस्को, एसटीआई आदि में निरंतर वृद्धि देखी जाएगी। हालांकि, इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री, एल्युमीनियम, टी, कॉफी, इंडस्ट्रियल, हैवी इंजीनियरिंग, केमिकल्स, खाद आदि में मंदी का रुख रहेगा।

तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 1, 4, 6, 7, 11, 13, 14, 18, 19, 21 और 26 जनवरी 2020

मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 5, 12, 20, 27 और 29 जनवरी 2020
[08/01, 19:13]

फरवरी

फरवरी महीने की शुरुआत में शनि ग्रह की सूर्य के साथ मकर राशि में युति बनेगी। बुध, शुक्र और नेपच्यून कुंभ राशि में रहेंगे। चंद्रमा मेष राशि में यूरेनस के साथ संयोग करेगा, जबकि बृहस्पति, केतु और प्लूटो धनु राशि में रहेंगे।मंगल वृश्चिक राशि में गोचर करेगा जबकि राहु मिथुन राशि में भ्रमण करता रहेगा।

शुक्र 2 तारीख को मीन राशि में प्रवेश करेगा और इस पर शनि की दृष्टि होगी, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में अस्थायी गिरावट आ सकती है। लेकिन धीरे-धीरे, घरेलू सामान (सिम्फनी, ब्लू स्टार) के शेयरों में एक मुद्रास्फीति देखी जाएगी और आईटी और सॉफ्टवेयर (टीसीएस, इन्फोसिस) कंपनियों पर गौर किया जाएगा। कच्चे तेल की कीमतों और दरों में वृद्धि देखी जाएगी। व्यापारियों को किसी भी तरह के झांसे में नहीं आना चाहिये, क्योंकि मांग बढ़ने की संभावना रहेगी। वैश्विक बाजार की स्थिति 12 फरवरी तक व्यापारियों और सटोरियों को बेचैन बनाए रखेगी।
17 तारीख को बुध ग्रह वक्री गति करेगा। मंदी का माहौल सूचकांक को गिरा देगा। हालांकि, 22 तारीख को बाजार और सूचकांक में तेजी देखी जाएगी। फार्मा (सन, फाइजर, डॉ. रेड्डीज), मीडिया और कैपिटल गुड्स (हैवेल्स) स्टॉक मार्केट 2020 गोचर के अनुसार मांग में रहेंगे। शुक्र मेष राशि में प्रवेश करेगा जहां बृहस्पति की दृष्टि भी उसपर होगी। एफएमसीजी, गेहूं, एडिबल्स, तेल, सरसोंं, ऊन और गुड़ के स्टॉक गिरने की संभावना है, जबकि सूचकांकों में तेजी का रुख रहेगा। क्यों किइस महीने में बृहस्पति, शनि और राहु की शुभ दृष्टि सिंह राशि पर पड़ेगी, जिस वजह से बाजार में तेजी का दौर आएगा। आयरन, स्टील, टी, कॉफी, बैंकिंग, हिंदुस्तान लीवर, ज्वैलरी, फर्टिलाइजर्स, हैवी इंजीनियरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, कॉस्मेटिक्स, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी आदि के शेयरों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 1, 3, 4, 8, 10, 11, 15, 17, 18, 22, 23, 24, 25, 27 और 28 फरवरी 2020

मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 5 और 6 फरवरी 2020

मार्च
ग्रहों की स्थिति के अनुसार मार्च में शेयर बाज़ार में मिले- जुले परिणाम मिलने के आसार हैं। मार्च 2020 की शुरुआत में, सूर्य और नेपच्यून ग्रह कुंभ राशि में, प्लूटो और शनि ग्रह मकर राशि में, धनु राशि में बृहस्पति और मंगल ग्रह, कुंभ राशि में बुध ग्रह, मिथुन राशि में राहु ग्रह, मकर राशि में केतु ग्रह और मेष राशि में शुक्र और हर्षल ग्रह को देखा जाएगा। हिंदू कैलेंडर या पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमांत शेयर बाज़ार के लिए अनुकूल लगता है, जबकि चैत्र अमांत और मीन संक्रांति (मीन राशि में सूर्य का गोचर) प्रतिकूल परिणाम दे सकते हैं।

पिछले महीने की तरह इस महीने की शुरुआत में भी बाज़ार में तेजी देखी जा सकती है। 6 तारीख तक सभी क्षेत्रों में एकतरफा बढ़ोतरी रहेगी।10 तारीख को कुंभ राशि में स्थित बुध मार्गी गति प्रारंभ करेगा। यह बैंकिंग (एचडीएफसी), बीमा, कागज (वेस्ट कोस्ट, तमिल न्यूजप्रिंट, ट्राइडेंट), लॉजिस्टिक्स (ब्लू डार्ट) और टायर सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में सकारात्मकता लाएगा।

निवेशक घरेलू सामान की कंपनियों (ब्लू स्टार, एम्बर, व्हर्लपूल) के शेयरों को प्राप्त करने में रुचि लेंगे। पावर, इलेक्ट्रिकल और गैस (IGL) क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में 13 तारीख से वृद्धि होगी। यह 12 मार्च के बाद, रिलायंस समूह, सौंदर्य प्रसाधन, वाहन, औद्योगिक, मनोरंजन, टीवी चैनल आदि में मिश्रित परिणाम देखने को मिलेंगे। रिलायंस, समाचार पत्र और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी के शेयरों में गिरावट आ सकती है। दूरसंचार और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भी मंदी का भाव देखा जा सकता है।18 से 20 के बीच फायदा होने की संभावना (प्रॉफिट बुकिंग) देखी जाएगी। मंगल 22 तारीख को अपनी उच्च राशि मकर में प्रवेश करेगा और यहां शनि से इसकी युति होगी। यह ग्रहीय संयोग वैश्विक स्तर पर एक असहज परिदृश्य पैदा करेगा। तेल, गेहूं, चावल और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थों की मांग में वृद्धि और आपूर्ति की कमी के कारण तेजी देखने को मिल सकती है। 25 से 27 के बीच इंडिसेस में गिरावट देखी जा सकती है। निवेशकों का सोना खरीदने की ओर झुकाव रहेगा। 27 तारीख के बाद शेयर बाजार में सुधार की संभावना है।

तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 3, 7, 8, 15, 16, 22, 24, 28, 29, और 30 मार्च 2020

मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 4, 5, 6, 11, 14, 18, 24 और 31 मार्च 2020

अप्रैल

अप्रैल 2020 का महीना निवेशकों के लिए आकर्षक रहेगा। महीने की शुरुआत में, विभिन्न ग्रहों की स्थिति शेयर बाज़ार को प्रभावित करती दिखेगी।अप्रैल के महीने में, ग्रहों की स्थिति इस तरह होगी - सूर्य मीन राशि में, मंगल, बृहस्पति, शनि और प्लूटो मकर राशि में। बुध और नेपच्यून कुंभ राशि में गोचर करेंगे। राहु और चंद्रमा संयुक्त रूप से मिथुन राशि में भ्रमण करेंगे जबकि शुक्र, वृषभ राशि में स्थित होगा।

महीने के मध्य में 13 तारीख को, सूर्य अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि में प्रवेश करेगा। मंगल की मेष राशि में सूर्य पर चतुर्थ दृष्टि होगी जोकि पहले से ही मकर राशि में बृहस्पति और शनि के साथ युतु बना रहा है। कपास, नारियल, सरसों और बुलियन सकारात्मक खरीद के रुझान से गुजरेंगे। आईटी (टीसीएस) और एफएमसीजी (एचयूएल, नेस्ले और ब्रिटानिया) के शेयर हरे रंग के रहेंगे। 17 तारीख को, बुध रेवती नक्षत्र में आगे बढ़ेगा और इसपर शनि की दृष्टि होगी। ब्लू चिप निवेशकों की मांग में बढ़ोतरी होगी। स्मार्ट और विवेकपूर्ण निवेशक आईटी, सॉफ्टवेयर (इन्फोसिस, विप्रो), भारी उद्योगों (रिलायंस), बैंकों (एचडीएफसी) और रासायनिक क्षेत्रों के शेयरों को कम दरों पर खरीदने के लिए प्रेरित रहेंगे।

बुध 24 तारीख को मेष राशि में सूर्य से युति करेगा। इस संयोग पर उग्र ग्रह मंगल की दृष्टि भी होगी, जिसकी वजह से मुद्रास्फीति बढ़ेगी। इस समय सूचकांकों के ग्राफ में तेजी देखने को मिलेगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस महीने बाजार में तेजी रहेगी।महीने के अन्त में बुध के उदय के कारण, तेल, पेट्रोलियम, चमड़ा, बड़े मशीनों, लोहा, इस्पात, सीमेंट, ऊनी कपड़े, कोयला, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, खनन, वनस्पती उद्योग, तंबाकू, परिवहन कंपनियां और इनसे संबंधित क्षेत्रों में तेजी देखी जाएंगी।

इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के भी शेयरों में गिरावट देखी जा सकती है। फार्मा सेक्टर में कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी और 23 अप्रैल से शेयर बाज़ार में भी एकतरफा बढ़त देखने को मिलेगी। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि निवेशकों और खरीदारों को शानदार परिणाम देगा, और इस तरह से कार्य करने पर उन्हें लंबे समय लिए लाभ कमाने में मदद मिल सकती है
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 8, 13, 14, 15, 20, 21, 22, 25, 26 और 28 अप्रैल 2020

मंदी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 6, 7, 11, 21 और 27 अप्रैल 2020

आगे अगली पोस्ट मै आचार्य राजेश

सूचना
शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट 2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण के बारे में निकाला गया निष्कर्ष विशुद्ध रूप से ग्रह स्थितियों पर आधारित है। न तो लेखक नाwebsite किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार है। यह ज्योतिषीय निष्कर्ष स्टॉक मार्केट में व्यापार करने के लिए न तो निमंत्रण है और न ही सुझाव/सिफारिश है। निवेश करने से पहले पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें। हो सकता है लेखक ने उल्लेखित शेयरों में निवेश किया हो।

रविवार, 5 जनवरी 2020

2020 ग्रह गोचर का प्रभाव ज्योतिषीय विश्लेषण

Q मित्रों आज वात करते हैं 2020 मैं ग्रहों के गोचर की

296 साल बाद 2020 में बनी है ग्रहों की ऐसी स्थिति,  साल के प्रारंभ में धनु राशि में सूर्य, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु भी हैं।  ग्रहों की ऐसी स्थिति 296 साल पहले 1 जनवरी 1723 को बनी थी।अब अगले 500 सालों तक ग्रहों की ऐसी स्थिति नहीं बनेगी। सितारों की ये स्थिति देश में बड़े बदलाव होने का संकेत दे रही है।

कई सालों में बनती है ग्रहों की ऐसी स्थिति
नए साल की शुरुआत में बुध, शनि और बृहस्पति धनु राशि में सूर्य के साथ होने से अस्त हैं, जिससे इन 3 ग्रहों का शुभ और अशुभ असर कम हो जाएगा। इनके साथ ही सूर्य और केतु पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में रहेंगे। वहीं बुध और गुरू मूल नक्षत्र में एक साथ हैं। इस तरह एक ही नक्षत्र में ग्रहों की युति बहुत ही कम बनती है। राहु को छोड़कर सभी ग्रह वृश्चिक से कुंभ राशि तक रहेंगे।9 जनवरी 2020 - शुक्र का कुंभ राशि में गोचर
13 जनवरी 2020 - बुध का मकर राशि में गोचर
15 जनवरी 2020 - सूर्य का मकर राशि में गोचर 
24 जनवरी 2020 - शनि का मकर राशि मं गोचर
31 जनवरी 2020 - बुध का कुंभ राशि में गोचरजनवरी 2020 में विभिन्न ग्रहों के पांच गोचर हैं और इनमें सबसे बड़ा गोचर 24 जनवरी 2020 को है। ये गोचर है शनि ग्रह का। इस दिन शनि तकरीबन ढाई साल बाद अपनी स्वराशि मकर में प्रवेश करेगा। वैसे तो सभी ग्रहों के गोचर का अक्सर पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतु प्राणी जलवायु वातावरण पर पड़ता है2020 में चल रही ठंड अभी तक के सारे रेकॉर्ड तोड़ सकती है। इन दिनों में चर्तुग्रही व पंचग्रही योग बन रहे हैं, जिसका असर जल्द ही कड़ाके की ठंड के रूप में नजर आएगा।शनि वर्ष गणना के अनुसार 30 साल बाद ग्रह-युति योग का भी संयोग बन रहा है। बृहस्पति वर्ष गणना से 12 साल बाद ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है, जिनसे चतुर्ग्रही व पंचग्रही योग बनेंगे। इन परिवर्तनों का असर मौसम और जलवायु के साथ सामान्य जनजीवन पर भी दिखाई देगा।24 जनवरी 2020 से सूर्य व शनि पिता-पुत्र एक ही राशि में स्थित होने एवम  24 जनवरी 2020 को ही शनि का मकर राशि में प्रवेश करते ही सूर्य व शनि की युति बनेगी। इस अवधि में पिता-पुत्र एक ही राशि में रहेंगे। इनका अच्छा असर न्याय, सामाजिक मूल्य का प्रभाव बढ़ेगा तथा प्राकृतिक विपदाओं में कमी आएगी।पंचागीय गणना के अनुसार इस वर्ष 2020 के जनवरी महीने में में ग्रहों का राशि व नक्षत्र परिवर्तन या प्रवेश की स्थिति बन रही है।

इस दौरान मौसम में परिवर्तन नजर आएगा। पूर्व-उत्तर में कहीं-कहीं बर्फ बारी तथा मावठे की बारिश होगी। इससे ठंड में तेजी आएगी।

24 दिसंबर से चंद्र योग में उक्त चार ग्रहों के साथ बुध की युति ।बुध को मौसम का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में पंचग्रही युति योग में भीषण सर्दी के रूप में इसके प्रभाव देखने को मिलेंगे। सूर्य 15 जनवरी तथा बुध 17 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। उसके सात दिन बाद 24 जनवरी को शनि भी मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में मकर राशि में सूर्य, बुध व शनि का त्रिग्रही युति योग बनेगा।

मौसम पर  कैसा होगा  प्रभाव 
  शीत ऋतु में चतुर्थ व पंचग्रही युति का प्रभाव मौसम में स्पष्टरूप से देखने को मिलेगा। जनवरी 2020 से मौसम में विचित्र परिवर्तन दिखाई देगा। पहाड़ों पर बर्फबारी के साथ मैदानी इलाकों में मघावट जैसी बारिश व ओला वृष्टि होगी।
पश्चिमोत्तर क्षेत्र में इसका सबसे अधिक प्रभाव नजर आएगा। पश्चिम उत्तर के क्षेत्र तथा राष्ट्रों में अत्यधिक ठंड पड़ेगी। इसका प्रभाव करीब 1 माह तक रहेगा। इस दौरान सर्दी पूर्व के कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ेगी। 17 मार्च 2020  के बाद ही स्थिति समान्य होगी।

यह स्थिति चतुर्ग्रही व पंचग्रही युति के रूप में दिखाई देगी। धनु राशि में पहले से गुरु, शनि व केतु मौजूद है। सूर्य के प्रवेश से चतुर्ग्रही युति योग बनेगा। धनु राशि में इन चार ग्रहों को मिथुन राशि स्थित राहु पर समसप्तक दृष्टि संबंध बनेगा।

इस दृष्टि से पूर्व तथा उत्तर दिशा के राज्यों में प्राकृतिक बदलाव होने की संभावनाएं हैं। बारीश, बर्फबारी और ओलावृष्टि के रूप में इसका असर भी दिखेगा। यह असर 30 जनवरी 2020 तक रहेगा। इसके बाद बदलाव होने लगेंगेचार ग्रहों का युति संबंध

ग्रह परिभ्रमणकाल में सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही वहां मौजूद गुरु, शनि, केतु से चर्तुग्रही युति संबंध बनेगा, जो राहू से सम-सप्तक दृष्टि संबंध बनाएगा। यह स्थिति भी मौसम के परिवर्तन का संकेत करती है। धनु राशि पूर्वोत्तर की कारक राशि मानी जाती है, किंतु ग्रहों की दिशा व राशि का देशिक संबंध मिलकर क्षेत्र विशेष को टारगेट करता है, जिससे ऋतुकालीन प्रभाव अपनी प्रकृति बदलता है।

बुध, शनि व गुरु के अस्त होने से भी बढ़ेगा प्रभाव

मैदिनी ज्योतिष शास्त्र में जलवायु, पर्यावरण व प्रकृति के परिवर्तन का कारक ग्रह बुध को माना जाता है। बुध उस समय ठंडी हवा को सहयोग करेगा, उत्तरी ध्रुव पर बर्फबारी के क्षेत्रीय प्रभाव भी दिखाई देंगे। अर्थात उत्तर दिशा से संबंधित राज्यों व राष्ट्रों में इसका प्रभाव नजर आएगा। गुरु के अस्त होने से भी पूर्वोत्तर क्षेत्र में बर्फबारी  के योग बनेंगे।

ग्रहों के स्वभाव से देश के कई भागों में तो अच्छी वर्षा रहेगी, कुछ क्षेत्र कम वर्षा से तो कुछ अधिक वर्षा से प्रभावित होंगे। इस वर्ष जनवरी 2020 से लेकर दिसंबर 2020 तक देश के इन क्षेत्र या शहरों में ग्रहों के अनुसार कितनी बारिश होगी इसका पूरा पूरा अनुमान लगाया जा रहा है।

जनवरी
धनु लग्न में आरंभ हुआ है नया साल
- धनु राशि में पांच ग्रहों के होने से शिक्षा के क्षेत्र में विकास होगा। दलहन और तिलहन के दाम कम हो सकते हैं।
- देश हित के लिए कड़े कानून और फैसले होंगे, जिससे जनता की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
- देश में उच्च पद पर स्थिति प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति असन्तोष एवं आक्रोश की स्थितियां भी बन सकती हैं, लेकिन विद्रोह नहीं होगा।
- राष्ट्रीय राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप बढ़ेगा। वहीं पश्चिमी प्रदेशों में उपद्रव की होने की संभावना बनेगी।
- पांच ग्रहों का योग पड़ोसी देशों में लगे सीमान्त राज्यों में उत्पात और उपद्रव बढ़ाने वाला रहेगा।
- नया साल षष्ठी तिथि को प्रारम्भ हो रहा है। षष्ठी तिथि की सामान्य संज्ञा नन्दा है, इसका विशेष नाम कीर्ति है।
- नए साल की शुरुआत बुधवार को होने से फसलों का उत्पादन अच्छा होगा। निर्यात में बढ़ोत्तरी होगी।
- फल एवं सब्जियों के दाम पूरे साल अनुकूल रहेंगे, क्योंकि  बुध वाणिज्य और व्यापार का कारक ग्रह है।
- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र होने से देश में जल, सिंचाई और नदियों से जुड़ी बड़ी योजनाओं पर फैसले हो सकते हैं। वहीं तैतिल करण होने से प्रशासन और सैनिकों के लिए पूरा साल श्रेष्ठ रहेगा।2 जनवरी 2020 को सूर्य, गुरु, शनि, केतु के साथ बुध का युति संबंध बनेगा। युति कृत बुध का प्रभाव इन बारह दिनों में विशेष तौर पर दिखाई देगा। यह समय पृथ्वी के ज्यादातर भागों पर अपना रौद्र प्रभाव छोड़ेगा।6 से 10 जनवरी, 20 से 24 जनवरी, 28 से 30 जनवरी तक देश के कई हिस्सों में शीतलहर, हिमपात, ओलावृष्टि हो सकती है।
15 जनवरी 2020 के बाद आंशिक राहत मिलेगी। सूर्य के उत्तरायण की अयन पद्धति में मकर राशि के प्रवेश काल से मौसम में ऊष्मा का प्रभाव बढ़ जाता है।
 29 मार्च 2020 से मंगल, शनि, गुरु की मकरराशि के उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में  तीन ग्रहों का  युक्ति  योग बन रहा है ।
  16 जून से 22 जून तक बुध, गुरु, शुक्र, शनि ,राहु तथा केतु वक्री रहेंगे इस प्रकार 37 दिनों तक 6 ग्रह वक्री रहेंगे । इन 37 दिनों में खाद्यान्नों में  तेजी एवं सत्ता में बिखराव के योग बन सकते हैं ।
24 सितम्बर 20 से राहु – मृगशिरा,  तथा केतु  -ज्येष्ठा  नक्षत्र में प्रवेश करेंगे जो गोचर भ्रमण के दौरान वृषभ एवं वृश्चिक राशि में रहेंगे।
19जून से 3 अगस्त 2020 तक बाढ़ से जनधन हानि, पशुहानि, पतन, संघर्ष, तनाव, तंगाई, वाहन दुर्घटनाएं आदि की योग बन सकते हैं ।
  29 मार्च 2020  से गुरु अतिचार गति से भ्रमण रत होकर  मकर राशि में प्रवेश करेंगे ।
  8 मई से 12 सितंबर 2020 तक शनि  वक्री गति से भ्रमण सील रहेंगे।
  11 मई से 22 जून सन 2020 तक शुक्र वक्री होकर भ्रमण करेंगे 
  16 मई से 15 सितंबर 2020 गुरु वक्री  रहेंगे। 
  15 जून से 8 सब 3 अगस्त  2020 तक मकर राशि में चतुष्य ग्रही चाल ।
दिनांक 28। ---_-----------_-------    -------_       अक्टूबर  2020  से 17  दिसंबर  2020 तक का समय संघर्ष, तनाव, दुर्घटना , आर्थिक मंदी आदि की ओर इंगित करता है  यह अवधि राजनैतिक क्षेत्र में संघर्ष एवं सत्ता संघर्ष की ओर इंगित करती है

गुरुवार, 2 जनवरी 2020

चंद्र ग्रहण 10/1/2020

https://youtu.be/bV7kSwr8i3w
https://youtu.be/bV7kSwr8i3wमित्रों दिसंबर में  सूर्य ग्रहण के बाद साल 2020 यानी नए साल का पहला ग्रहण 10 जनवरी को होगा। यह चंद्र ग्रहण होगा और यह 10 जनवरी की रात में 10 बजकर 37 मिनट से शुरू होगा और 11 जनवरी को 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 06 मिनट है। चंद्रग्रहण भारत, यूरोप, अफ्रीक, एशिया और आस्ट्रेलिया में देखा जाएगा।https://youtu.be/bV7kSwr8i3w
 ग्रहण शुरू होने का समय –  10 जनवरी 2020, 22:37 PM
ग्रहण समाप्त होने का समय – 11 जनवरी 2020, 02:42 AM
ग्रहणकी अवधि – 00:40
ग्रहण के दौरान चंद्रमा, मिथुन राशि में और पुनर्वसु नक्षत्र में होगा।इस चंद्र ग्रहण की अवधि कुल 4 घंटे से ज्यादा होगी। सबसे खास बात यह है कि यह भारत में भी दिखाई देगा।  सूतक भी ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले शुरू हो जाएगा। इसके मुताबिक भारतीय समय के अनुसार 10 जनवरी की सुबह 10 बजे से ग्रहण का सूतक आरंभ हो जाएगा। सूतक से पहले ही  पूर्णिमा की पूजा के बाद सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।।
मित्रों इस ग्रहण के दौरान कई दुष्प्रभाव सामने आएंगे पहले सूर्य ग्रहण और अब चंद्र ग्रहण इससे कहीं ना कहीं महावारी कर लेगी इसका इलाज पूरे विश्व को ढूंढने से नहीं मिलेगा पूरे विश्व इस से ग्रसित होगा कहीं ना कहीं जलजला भूचाल तूफान ओलावृष्टि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
मित्रों ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां ज्यादा हावी रहती हैं, मित्रों हमारी जन्म कुंडली के अंदर भी ग्रहण दोष पाया जाता है अतः इस चंद्रग्रहण पर हम उसके उपाय करके उस दोष को उसके द्वारा दी जाने वाली पीड़ा को कम कर सकते हैं मित्रों अगर कुंडली में चंद्र ग्रहण हो तो उसके कई दुष्परिणाम बुरे प्रभाव हमें देखने को मिलते यह दोष भाग्य कमजोर कर देते है ,बहुत ख़राब कर देते है लाइफ में हर चीज़ संघर्ष से बनती है या संघर्ष से मिलती है  हमारे चन्द्र ग्रह से वाहन का सुख सम्पति का सुख विशेष रूप से माता और दादी का सुख और घर का रूपया पैसा और मकान आदि सुख देखा जाता है.
  जन्म कुंडली में यदि चन्द्र राहू या केतु के साथ आ जाये तो वे शुभ फल नहीं देता है.ज्योतिष ने इसे चन्द्र ग्रहण माना है, यदि जन्म कुंडली में ऐसा योग हो तो चंद्रमा से सम्बंधित सभी फल नष्ट हो जाते है माता को कष्ट मिलता है घर में शांति का वातावरण नहीं रहता जमीन और मकान सम्बन्धी समस्या आती है.चन्द्र ग्रहण योग की अवस्था में जातक डर व घबराहट महसूस करता है,चिडचिडापन उसके स्वभाव का हिस्सा बन जाता है,माँ के सुख में कमी आती है, कार्य को शुरू करने के बाद उसे अधूरा छोड़ देना लक्षण हैं, फोबिया,मानसिक बीमारी, डिप्रेसन ,सिज्रेफेनिया,इसी योग के कारण माने गए हैं, मिर्गी ,चक्कर व मानसिक संतुलन खोने का डर भी होता है.
—-चन्द्र+केतु ,सूर्य+राहू ग्रहण योग बनाते है..इसी प्रकार जब चंद्रमा की युति राहु या केतु से हो जाती है तो जातक लोगों से छुपाकर अपनी दिनचर्या में काम करने लगता है . किसी पर भी विश्वास करना उसके लिए भारी हो जाता है .मन में सदा शंका लिए ऐसा जातक कभी डाक्टरों तो कभी पण्डे पुजारियों के चक्कर काटने लगता है .अपने पेट के अन्दर हर वक्त उसे जलन या वायु गोला फंसता हुआ लगता हैं .डर -घबराहट ,बेचैनी हर पल उसे घेरे रहती है .हर पल किसी अनिष्ट की आशंका से उसका ह्रदय कांपता रहता है .भावनाओं से सम्बंधित ,मनोविज्ञन से सम्बंधित ,चक्कर व अन्य किसी प्रकार के रोग इसी योग के कारण माने जाते हैं 
कुंडली चंद्रमा यदि अधिक दूषित हो जाता है तो मिर्गी ,पागलपन ,डिप्रेसन,आत्महत्या आदि के कारकों का जन्म होने लगता हैं । चूँकि चंद्रमा भावनाओं का प्रतिनिधि ग्रह होता है .इसकी राहु से युति जातक को अपराधिक प्रवृति देने में सक्षम होती है ,विशेष रूप से ऐसे अपराध जिसमें क्षणिक उग्र मानसिकता कारक बनती है . जैसे किसी को जान से मार देना , लूटपाट करना ,बलात्कार आदि .वहीँ केतु से युति डर के साथ किये अपराधों को जन्म देती है . जैसे छोटी मोटी चोरी .ये कार्य छुप कर होते है,किन्तु पहले वाले गुनाह बस भावेश में खुले आम हो जाते हैं ,उनके लिए किसी विशेष नियम की जरुरत नहीं होती .यही भावनाओं के ग्रह चन्द्र के साथ राहु -केतु की युति का फर्क होता है  मित्रों आप की कुंडली में भी चंद्र ग्रहण दोष है तो आप मुझसे या किसी अच्छै astrologer से मिलकर  उपाय करें यह आपके लिए इस बेस्ट रहेगा https://youtu.be/bV7kSwr8i3wकुछ उपाय मैंने अपने यूट्यूब वीडियो में बताएं जिसका लिंक में जहां दे रहा हूं उसको ओपन करके सूने  उसको करके आप लाभ उठा सकते हैं

शनिवार, 28 दिसंबर 2019

कुंडली मिलान कंप्यूटर बाबा से

 
जन्म, विवाह एवं मृ्त्यु ये तीनों ही जीवन के अति महत्वपूर्ण पडाव या कहें कि अंग माने गये हैं। बेशक जन्म और मृ्त्यु पर तो किसी का भी वश नहीं,किन्तु विवाह एक ऎसा माँगलिक कार्य है जिसके प्रति पुरातन एवं आधुनिक परिस्थितियों को ध्यान में रख कर यदि थोडी सी समझदारी दिखाई जाए तो जीवन को सुखपूर्वक व्यतीत किया जा सकता है। विवाह जिसका मर्म दो आत्माओं का स्वरैक्य है,जीवन में प्रेम, सहानुभूति,कोमलता,पवित्रता तथा भावनाओं का विकास है।आजकल समयाभाव के कारण विवाह की अत्यन्त जटिल विधि को भी बहुत थोडे समय में तुरत फुरत निपटाने की एक परम्परा ही चल पडी है। लेकिन इन सब में भी एक बात जो सबसे अधिक महत्व रखती है,वो है विवाह पूर्व लडका-लडकी की जन्म पत्रिका का मिलान किया जाना। इससे परिणय सूत्र में बँधने वाले वर-वधू के जन्मकालीन ग्रहों तथा नक्षत्रों में परस्पर साम्यता, मित्रता तथा संबंध पर विचार किया जाता है। शास्त्रों में मेलापक के दो भेद बताए गए हैं। एक ग्रह मेलापक तथा दूसरा नक्षत्र मेलापक। इन दोनों के आधार पर वर-वधू की शिक्षा, चरित्र,भाग्य,आयु तथा प्रजनन क्षमता का आकलन किया जाता है। नक्षत्रों के "अष्टकूट"(वर्ण,वश्य,तारा,योनि,ग्रह मैत्री,गण,भकुट,नाडी) तथा नौ ग्रह इत्यादि इस रहस्य को व्यक्त करते हैं।वैसे तो अक्सर ये भी देखने सुनने में आ जाता है कि कुण्डली मिलान के पश्चात भी पति-पत्नि में आपसी तनाव,गृ्हस्थ सुख में न्यूनता,सम्बन्ध विच्छेद रुपी दुष्परिणाम भोगने पड जाते हैं। आखिर ऎसा क्यूं होता है। इसका सबसे बडा कारण तो वो आधे अधूरे ज्योतिषी हैं, जो अपना अधकचरा ज्ञान लेकर सिर्फ गुण मिलान की संख्या को ही मेलापक की इतिश्री समझ लेते हैं। इन लोगों की नजर में यदि गुण संख्या 18 से कम हुई तो मिलान ठीक नहीं है ओर यदि संख्या 18 से अधिक हुई तो समझिये मिलान अच्छा है। गुण संख्या के अतिरिक्त मेलापक में ग्रह मिलान एवं अन्य बहुत सी बातें देखी जाती हैं,जिसका कि एक ज्योतिषी को पूर्णत: ज्ञान होना अति आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति सिर्फ गुणों के आधार पर मेलापक निष्कर्ष निकालता है तो समझिए वो ज्योतिषी नहीं बल्कि कोई घसियारा है,जिसने जीवन में ज्योतिष के नाम पर सिर्फ घास ही खोदी है एक ओर कारण जो कि इस विषय में उतरदायी है--वो है तकनीक पर अति निर्भरता।आजकल एक बात बहुत प्रचलन में आ गयी है कि शादी विवाह के मामले में कम्पयूटर से फ़टाफ़ट गुण मिलाकर शादी करने या नही कर देने के कारण कितने ही रिस्ते या तो शादी के बाद बिगड जाते है या जो रिस्ते कम्पयूटर से नही बनते है वे अपनी अपनी औकात को लेकर सभी प्रकार की शिक्षा को बेकार समझ कर एक तरफ़ कर दिये जाते है। हमेशा जरूरी नही है कि कम्पयूटर अपनी समझ को सही रूप में प्रकट करेगा।भई विज्ञान अभी इतना सूझवान नहीं हो पाया है कि कम्पयूटर जैसी मशीन के जरिये इन्सानी बुद्धि का काम ले सके। इसके जरिये सिर्फ कुंडली में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति व गुण दोष ही स्पष्ट हो पाते हैं। विवाह के लिये जरूरी जन्मपत्री का वास्तविक मिलान नहीं हो पाता। कम्पयूटर के जरिये आप सिर्फ गुण मिलान की संख्या के बारे में जान सकते हैं,जीवन पर कुंडली का क्या प्रभाव रहेगा, यह बताने में अभी कंप्यूटर बाबा जी समर्थ नहीं हो पाये हैं। दरअसल यह तो एक ज्योतिष विद्वान के अनुभव आधारित ज्ञान में ही छिपा रहता है,जिसका स्थान कम्पयूटर कदापि नहीं ले सकता।

सबसे बडी बात जब और समझ में आती है जब कम्पयूटर से अष्टकूट गुण मिलान कर दिया जाता है और किसी न किसी प्रकार का नाडी भकूट वश्य आदि दोष लगाकर पत्रिका मिलान को कर दिया जाता है,राशि के अनुसार ही पत्री को मिलाया जाता है और नाम को दरकिनार कर दिया जाता है।

पिछले कुछ साल से यह प्रचलन काफ़ी बढा है उसके पहले शादी को नाम से मिला दिया जाता था और जो शादिया नाम से मिलाकर की गयी वे आज तक सलामत है और पूरी की पूरी वैवाहिक जिन्दगी को पूरा किया है। इसके साथ ही चाहे गुण पूरे छत्तिस मिले लेकिन दो माह बाद तलाक का मामला या तो अदालत में चला गया या फ़िर पत्नी या पति ने अपने ध्यान को दुष्कर्म की तरफ़ बढा दिया।

चन्द्रमा की वैसे तो चौसठ कलायें है और हर कला को कम्पयूटर से नही निकाला जा सकता है। इसका भी कारण है कि नक्षत्र भेद को दूर किया जा सकता है भकूट दोष को भी दूर किया जा सकता है लेकिन राशि भेद को सामने रखकर भी लोग एक दूसरे पर आक्षेप देने के लिये जाने जाते है।

कम्पयूटर अस्त चन्द्रमा से दूर रहेगा,वह तो केवल चन्द्रमा की गति को ही अपने केलकुलेशन में लायेगा। कम्पयूटर से अक्सर वक्री ग्रह का भेद भी नही बखान किया जाता है सूर्य और चन्द्रमा की गति पर भी निर्भरता नही दी जाती है।

जातक के जो भी नाम शुरु से प्रसिद्धि में चले गये होते है उनके बारे में दक्षिण भारत की नाडी प्रथा के अनुसार गणना करने पर अक्सर सही नाडी में ही देखे गये है और जो भी नाम से शादी विवाह मिलाये जाते है वे अक्सर सही और आजीवन साथ निभाने के लिये चलते देखे गये है।विवाह पश्चात वर एवम कन्या की परस्पर अनुकूलता तथा परिवारिक सामंजस्य हो,दोनों ही दीर्घायु हो,धन-संपत्ति एवम संतान का उत्तम सुख प्राप्त हो, इसी उद्देश्य से हमारे ऋषि-मुनिओं ने अपने ज्ञान एवम अनुसन्धान के आधार पर जन्मकुण्डली मेलापन की इस श्रेष्ठ पद्दति का विकास किया था। लेकिन शायद इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जहाँ एक ओर आधे अधूरे ज्योतिषी,गलत मिलान के परिणामस्वरूप भावी दम्पति के वैवाहिक जीवन से खिलवाड कर रहे हैं। वहीं कुछ विद्वान अपने अल्पज्ञान का परिचय देते हुए विवाह पूर्व कुण्डली मिलान के औचित्य को ही नकार रहे हैं। मैं इन लोगों से सिर्फ इतना कहना चाहूँगा कि मुहूर्त तथा विवाह इत्यादि जो कि वैदिक ज्योतिष के मुख्य अंग है---इनमें से यदि किसी एक भी अंग को अलग किया गया तो ये विधा ही पंगु हो जाएगी। अंगहीन तो मनुष्य भी किसी काम का नहीं रहता,फिर ये तो विधा है। जरूरत है तो सिर्फ उसे समझने की ओर ज्ञान को उसकी पूर्णता के साथ स्वीकार करने की।

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