सोमवार, 1 जनवरी 2018

नमस्कार करना हमारी संस्कृति का प्रतीक है, हिंदुस्तानियों की पहचान बना 'नमस्कार' केवल एक परंपरा ही नहीं बल्कि इसके कई भौतिक और वैज्ञानिक फायदे हैं।जिनके बारे में आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे।हमारे देश ने नमस्कार का अद्भुत ढंग निकाला।‍ दुनिया मैं वैसा कहीं भी नहीं है। भारत देश ने कुछ दान दिया है मनुष्‍य की चेतना को, अपूर्व। यह देश अकेला है जब दो व्‍यक्ति नमस्‍कार करते है, तो दो काम करते है। एक तो दोनों हाथ जोड़ते है। दो हाथ जोड़ने का मतलब होता है: दो नहीं एक। दो हाथ दुई के प्रतीक है, द्वैत के प्रतीक है। उन दोनों को हाथ जोड़ने का मतलब होता है, दो नहीं एक है। उस एक का ही स्‍मरण दिलाने के लिए।हाथों को अनाहत चक पर रखा जाता है, आँखें बंद की जाती हैं और सिर को झुकाया जाता दोनों हाथों को जोड़ कर नमस्‍कार करते है। और, दोनों को जोड़ कर जो शब्‍द उपयोग करते है। वह परमात्‍मा का स्‍मरण होता है। कहते है: राम-राम, जयराम, या कुछ भी, लेकिन वह परमात्‍मा का नाम होता है। दो को जोड़ा कि परमात्‍मा का नाम उठा। दुई गई कि परमात्‍मा आया। दो हाथ जुड़े और एक हुए कि फिर बचा क्‍या: हे राम।

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