मित्रों यह यह पोस्ट कालसर्प पर ही है इससे पहले मैं दो पोस्ट कालसर्प पर लिख चुका हूं आप पढ़ सकते हो उसको पढ़ने से ही आपको आगे की पोस्ट समझ में आएगी मित्रों जैसा कि मैंने अपनी पहली पोस्ट में आपको बताया था कि राहुल जिस ग्रह के साथ बैठता है उसको खराब कर देता है आज हम उसी पर चर्चा करेंगे सबसे पहले हम बात करेंगे कालसर्प की पहचान कैसे करेंकालसर्प दोष की पहिचान
आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
गुरुवार, 30 जनवरी 2020
,, कालसर्प योग है या दोष है क्या है सच क्या है झूठ ( 3)
मित्रों यह यह पोस्ट कालसर्प पर ही है इससे पहले मैं दो पोस्ट कालसर्प पर लिख चुका हूं आप पढ़ सकते हो उसको पढ़ने से ही आपको आगे की पोस्ट समझ में आएगी मित्रों जैसा कि मैंने अपनी पहली पोस्ट में आपको बताया था कि राहुल जिस ग्रह के साथ बैठता है उसको खराब कर देता है आज हम उसी पर चर्चा करेंगे सबसे पहले हम बात करेंगे कालसर्प की पहचान कैसे करेंकालसर्प दोष की पहिचान
कालसर्प योग है या दोष है क्या है सच क्या है झूठ? (२)
मित्रों मेरी पिछली पोस्ट भी इस विषय पर हैं यानि काल सर्प पर यह जरूर पढ़ें कालसर्प दोष को लेकर लोगों में काफी भय और आशंका-कुशंकाएं रहती हैं, लेकिन कुछ आसान और अचूक उपायों से इसके असर को कम किया जा सकता है। कोई इसे कालसर्प दोष कहता है तो कोई योग। कोई इसे मानता है और कोई नहीं, मित्रों अगर आपको किसी एस्ट्रोलॉजर में कालसर्प बताया है कि आपकी कुंडली में कालसर्प योग है तो पहले आप उसकी अच्छी तरह जांच कर ले क्या कालसर्प योग बनता है कि नहीं बनता और वह जो आपको अशुभ फल दे रहा है या अशुभ फल दे रहा है समय आपको कोई परेशानी आ रही है तो किसी वजह से आ रही है किसी अन्य ग्रह की वजह से यह सब देखना जरूरी होता है मित्रो
कालसर्प योग हैं या दोष है क्या है सच क्या है झूठ?
कालसर्प दोष एक ऐसा योग है या दुर्योग है जिसका नाम सुनते ही जनमानस में भय व चिंता व्याप्त हो जाती है। साढ़े साती और काल सर्प योग का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं. इनके प्रति लोगों के मन में जोड भय बना हुआ है इसका फायदा उठाकर बहुत से ज्योतिषी लोगों को लूट रहे हैं. बात करें काल सर्प योग की तो इसको भी ्कुछ विद्वान इसे सिरे से नकारते हैं, तो कुछ इसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं। मेरे देखे दोनों गलत हैं।कालसर्प दोष' को न तो महिमामंडित कर प्रस्तुत करना सही है और न ही इसके अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित है। शास्त्रों में सर्पयोग के नाम से स्वीकार किया गया है। उसी को ही आजकल काल सर्प का नाम दिया गया है चूंकि राहु को शास्त्रों में 'काल' कहा गया है और केतु को 'सर्प' की संज्ञा दी गई है इसलिए इसका नाम 'कालसर्प' कहा गया है वराहमिहिर ने अपनी संहिता 'जानक नभ संयोग' में इसका सर्पयोग के नाम से उल्लेख किया है, वहीं 'सारावली' में भी 'सर्पयोग' का वर्णन मिलता है।अधिकांश ग्रन्थों में सर्पयोग की व्याख्या तो मिलती है किन्तु कालसर्प योग की व्याख्या किसी भी मानक ग्रन्थ में नहीं मिलती है।सी पिछली शताब्दी के सातवें या आठवें दशक तक के अधिकांश ज्योतिषी भी इस योग के बारे में नहीं जानते थे, लेकिन इस योग के हर इंसान पर लागू किए जा सकने वाले फलादेशों ने कुछ ऐसा चमत्कार पैदा किया कि बड़ी संख्या में लोगों ने इसे मानना शुरू कर दिया।
मंगलवार, 28 जनवरी 2020
राहु केतु का रत्न धारण करना चाहिए या नहीं?Should you wear the gem of Rahu Ketu or not?
राहू केतु का रत्न क्य धारण करना चाहिएया नहीं ? मित्रों सबसे पहले तो एक बात ख्याल में ले कि कोई भी जेमस्टोन जा रत्न ग्रहों को बल देने के लिए होता है ना कि उनकी शांति के लिए कुछ astrologer राहु केतु की शांति के लिए रतन पहना देते हैं हर एस्ट्रोलॉजर रत्न एक्सपर्ट नहीं होता मित्रों यह भी बात आप ध्यान में ले जो एस्ट्रोलॉजर ग्रहों की शांति के लिए रत्न पहना देते हैं उनको रत्नों के बारे में पूरी जानकारी नहीं हैंराहु , केतु दो ऐसे ग्रह है ये जिस भी राशि में यह विराजमान रहते हैं वहां से पांचवें , सातवें और नौवें स्थान पर अपनी दृष्टि डालते हैं । इस प्रकार से देखा जाए तो कुंडली के बारह भाव में से 8 भावों पर इनका प्रभाव रहता है । केतु को ज्यादा क्रूर ग्रह ना माना जाए परंतु फिर भी राहु केतु के सामने रहता है और उस पर हमेशा उसकी दृष्टि रहती है अतः केतु के अंदर भी राहु के गुण तो समाहित हो ही जाते हैं । अब यदि 8 भावों में कहीं भी सूर्य , चंद्रमा , मंगल या गुरु पर इनकी दृष्टि पड़ जाए या इनसे युति बन जाए तो यह ग्रह जिस भाव के स्वामी होते हैं उस भाव से सुख से संबंधित परेशानी देते हैं एवं जिस भाव में युति बनती है उस भाव में भी परेशानी पैदा कर देते हैं । यदि राहु केतु मेष राशि ,कर्क राशि , सिंह राशि , वृश्चिक राशि , धनु राशि या मीन राशि पर विराजमान हो जाए या इन राशियों पर दृष्टि डालें तो ये राशि जिस भाव में रहते है उन भावों के सुख में भी परेशानी हो जाती है । इसलिए मेरा मानना है कि बिना कुंडली का विश्लेषण कराए राहु , केतु का रत्न कभी भी धारण नहीं करना चाहिए । राहु , केतु यदि आप को 20% लाभ देते हैं तो किसी न किसी प्रकार से 80 % नुकसान भी करते हैं । जन्म कुंडली में 12 भाव होते हैं ।इनके स्वामी सूर्य , चंद्रमा , मंगल , बुध , गुरु , शुक्र एवं शनि के होते हैं । जीवन की समस्या को ठीक करने के लिए इन 7 ग्रहों मे से कारक ग्रहों को रत्न द्वारा प्रबल करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है तब राहु केतु का रत्न क्यों धरण करें , जिस ग्रह के साथ यजह कनेक्ट होते हैं उनको खराब करते हैं । सूर्य और चंद्र के साथ ग्रहण दोष गुरु के साथ गुरु चांडाल योग मंगल के साथ अंगारक योग शनि के साथ प्रेतश्राप इसी तरह दूसरे ग्रहों के साथ हुई यह खराबी भी देता है 90 परसेंट लोगों की कुंडली में राहु केतु के कारण परेशानी आती है कुछ 10 परसेंट ऐसी कुंडल में होती है जिनको हम राहु केतु के रत्न धारण करने की सलाह देते है ।् मित्रों राहु केतु दोनों पापी ग्रह हैं। राहु खुफिया पाप तो केतु ज़ाहिरा पाप है तो इनके रत्न सोच समझकर ही पहनने चाहिए कई व्यक्तियों को रत्न धारण करने का शौक होता है। कुछ तथाकथित ज्योतिषी भी उनके इस शौक के लिए उत्तरदायी होते हैं जिनका रत्न विक्रेताओं के साथ बड़ा घनिष्ठ संबंध होता है। मैंने देखा है जब मैं किसी को राहु केतु के रतन रत्न ना धारण करने का परामर्श देता हूं तो उनमें से कुछ आश्चर्यचकित हो जाते हैं वहीं कुछ मायूस हो जाते हैं। सामान्यतः ज्योतिषीगण राशि रत्न, लग्नेश का रत्न, विवाह हेतु गुरू-शुक्र के रत्न धारण करने की सलाह देते हैं। रत्नों के धारण करने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। किसी रत्न को धारण करने से पूर्व उसके अधिपति ग्रह की जन्मपत्रिका में स्थिति एवं अन्य ग्रहों के साथ उसके संबंध का गहनता से परीक्षण करना चाहिए भले ही वे रत्न लग्नेश या राशिपति के ही क्यों ना हों। यह भी देखना आवश्यक है कि जिस ग्रह का रत्न आप धारण कर रहे हैं वह जन्मपत्रिका में किस प्रकार के योग का सृजन कर रहा है या किस ग्रह की अधिष्ठित राशि का स्वामी है। यदि जन्मपत्रिका में एकाधिक रत्नों के धारण की स्थिति बन रही हो तो वर्जित रत्नों का भी पूर्ण ध्यान रखना अति-आवश्यक है। पंचधा मैत्री चक्र के अनुसार ग्रहमैत्री की रत्न धारण में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। यह सर्वथा गलत धारणा है कि रत्न सदैव ग्रह की शांति के लिए धारण किया जाता है। वास्तविकता इससे ठीक विपरीत है रत्न हमेशा शुभ ग्रह के बल में वृद्धि करने के लिए धारण किया जाता है। अनिष्ट ग्रह की शांति के लिए उस ग्रह के रत्न का दान किया जाता है। कुछ रत्न आवश्यकतानुसार ग्रह शांति के उपरांत अल्प समयावधि के लिए धारण किए जाते हैं जिनका निर्णय जन्मपत्रिका के गहन परीक्षण के पश्चात किया जाता है। अतः रत्न धारण करने से पूर्व अत्यंत सावधानी रखें। किसी विद्वान ज्योतिषी से जन्मपत्रिका के गहन परीक्षण के उपरान्त ही रत्न धारण करना चाहिए अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है।समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है । इस विषय से संबंधित लेख लिखने लगे तो बहुत लंबा लेख हो जाएगा इसलिए मैं यहां समाप्त करता हूँ । मेरे पहले भी रत्नों पर काफी आर्टिकल इस ब्लॉग में आपको पढ़ने को मिल जाएंगे आप उसको जरूर पढ़ें उस से आपको रत्नों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त होगी ।आचार्य राजेश
रविवार, 26 जनवरी 2020
#शनि मकर में #24/1/2020
शनिवार, 25 जनवरी 2020
आठवां शनि शनिदेव का अष्टम भाव में फल | Saturn Effects 8th House.
शनि का अष्टम भाव में फल | Saturn Effects 8th House. जन्मकुंडली में अष्टम भाव को शुभ नहीं माना गया है। यह त्रिक भाव भी है। इस भाव से व्यक्ति की आयु व मृत्यु के स्वरुप का विचार किया जाता है। शनि इस भाव का तथा मृत्यु का कारक ग्रह भी है।कुंडली का आठवा भाव और शनि दोनों ही बड़े महत्वपूर्ण और चर्चित विषय हैं। आठवां स्थान मृत्यु का भाव कहलाता है। इसलिए अष्टम स्थान को लेकर अक्सर लोग भयभीत रहते हैं। और यदि इस घर में शनि आ जाए यानी आठवें स्थान में शनि आ जाए तो डरना स्वाभाविक ही है।एक कहानी पढी थी कि जब शनि देव ने जन्म लिया और उन्होने अपनी आंखे खोली तो सूर्य देव जो उनके पिता थे उनको कोढ की बीमारी हो गयी,उनका सारथी जो रथ को चलाता था लंगडा हो गया,और रथ में चलने वाले घोडें अन्धे हो गये,मतलब शनि के अष्टम में आने से एक दम सूर्य अस्त हो गया,यही स्थान शनि के जन्म का कहा जाता है। किसी भी जातक की कुंडली में शनि अगर वृश्चिक राशि का है या फ़िर शनि उच्च की राशि में होकर अष्टम स्थान में है तो जातक को मौत के बाद की सम्पत्ति तो मिलेगी,जब मौत के बाद की सम्पत्ति मिलेगी तो सीधी बात है कि किसी भी रिस्तेदार की जो अष्टम भाव से सम्बन्ध रखता हो उसकी सम्पत्ति जातक को मिलेगी। अब अष्टम के रिस्तेदारों को गौर से देखने पर पता चलता है कि पिता का ग्यारहवा भाव और माता मा पंचम भाव यानी जातक के जन्म के बाद माता के परिवार का सूर्य जरूर डूबेगा। दूसरे यह स्थान माता के परिवार के अलावा भी कई स्थानों से सम्बन्ध रखता है,जैसे छठे स्थान से यह तीसरा स्थान है और मामा या छोटी मौसी के लिये भी माना जा सकता है जातक को नाना की भाभी की सम्पत्ति भी मिलेगी। यह स्थान पत्नी के मामा के भाग्य का स्थान भी माना जाता है यानी पत्नी का मामा कभी कभी न कभी भाग्य से जातक को अपनी सम्पत्ति का कुछ हिस्सा दे ही देगा। यह स्थान बडे भाई की पत्नी का मकान भी कहा जाता है यानी बडे भाई की ससुराल में भी सूर्य का डूबना माना जायेगा और सारथी के रूप में रहने वाली बडे भाई की सास भी लंगडी होकर मरेगी और उसकी भी मकान जैसी सम्पत्ति भी जातक के बडे भाई को मिलेगी। इस स्थान को छोटे भाई के रोजाना के कार्य और कार्य के बाद मिलने वाली बीमारियों और कर्जा दुश्मनी बीमारी के लिये भी माना जाता है जातक को छोटे भाई के कर्जा दुशमनी बीमारी को निपटाने के लिये अपने द्वारा खर्चा करने वाली बात इसलिये मानी जा सकती है कि तीसरा भाव पत्नी का भाग्य का भाव कहा जाता है,अगर जातक अपने छोटे भाई के लिये इन बातों में खर्चा करता है तो जातक का भाग्य का घर और अपमान मृत्यु जान जोखिम आदि के लिये सहारा भी मिलने में कोई सन्देह नही किया जा सकता है।
गुरुवार, 23 जनवरी 2020
वैदिक ज्योतिष मे गुरु राहु और केतु की दृष्टि ऐक समान
वैदिक ज्योतिष मे गुरु राहु और केतु की दृष्टि ऐक समान जन्मकुंडली में कोई भी ग्रह कहीं भी बैठा हो वह दूसरे ग्रह आदि पर दृष्टि डालता है तो उस दृष्टि का प्रभाव शुभ या अशुभ होता है। आप अपनी कुंडली के ग्रहों की स्थिति जानकर उनकी दृष्टि किस भाव या ग्रह पर कैसी पड़ी रही है यह जानकार आप भी उनके अशुभ प्रभाव को जान सकते हैं।
रविवार, 19 जनवरी 2020
शनिवार, 18 जनवरी 2020
Ketu(Importance of Ketu planet in Horoscope केतु का ज्योतिष महत्व
www.acharyarajesh.in Ketu(Importance of Ketu planet in Horoscope केतु का ज्योतिष महत्व
मित्रों आज बात करते हैं केतु ग्रह
लाल किताब में केतु को कुत्ता माना गया है। कुत्ता खूँखार भी हो सकता है और गीदड़ भी। यदि समझदार है तो रक्षक का कार्य करेगा। केतु को दरवेश माना गया है। इसका सम्बन्ध इस लोक से कम परलोक से अधिक है। केतु इस भवसागर से मुक्ति का प्रतीक है,केतु दया का सन्देश वाहक है,मंगल बुध और गुरु तीनो ही केतु में सम्मिहित है। केतु यात्राओं का कारक है और जीवन यात्रा के गन्तव्य तक जातक का सहायक है। केतु को तीन कुत्तों के रूप में भी पहिचाना जाता है,बहन के घर भाई ससुराल में जंवाई और मामा के घर भान्जा भी केतु की श्रेणी में आते है। केतु के लिये कुत्ते को पाला जाता है दिन के लिये सफ़ेद कुत्ते को और रात क लिये काले रंग के कुत्ते को पाला जाता है,केतु दिवा बली भी होता है और रात्रि बली भी होता है जबकि अन्य ग्रह या तो दिवा बली होते है या रात्रि बली माने जाते है। यदि कुत्ते का लाल रंग है तो वह बुध के लिये माना जाता है और बुध वाले ही फ़ल देने के लिये अपना असर देता है लेकिन बुध का असर केवल केतु के समय तक ही निश्चित माना जाता है। जब केतु बुरा फ़ल देना शुरु करे तो जातक को किसी प्रकार का अपनी मुशीबतों का शोर नही मचाना चाहिये,कारण जितना अधिक शोर मचाया जायेगा केतु उतना ही अधिक परेशान करने के लिये अपना असर देगा। दसवे भाव के ग्रहों को देखकर केतु की प्रताणन की सूचना निश्चित रूप से पहले ही मिल जाती है।केतु की पीडा से जातक का स्वास्थ खराब होता है,तो चन्द्रमा सहायक माना जाता है,कभी कभी केतु पुरुष सन्तान यानी पुत्रो को कष्ट देता है,ऐसा होने पर मन्दिर में कम्बल का दान करना चाहिये,केतु के बुरे प्रभाव से पांव के पंजो एं या पेशाब की नली में रोग पीडा आदि होने के कारण मिलने वाले कष्टो से बचने के लिये पावों के अंगूठो पर रेशमी धागा बांध लेना चाहिये।
मंगलवार, 14 जनवरी 2020
जीवन यात्रा: Life Through the Lens of Jyotish
मित्रों हर चीज हमारे नियंत्रण में नही है। हम मेहनत तो बहुत करते है परन्तु सबको एक जैसा फल नहीं मिलता, कोई बीमार है, कोई आर्थिक तंगी का शिकार है, किसी की शादी नही हो रही और किसी को नौकरी नही मिल रही तो कोई व्यापार में घाटा उठा रहा है, कोई पाप करता है और फिर भी मजे से जिन्दगी काटता है और कोई बहुत शुभ कर्म करता है तब भी कष्ट उठा रहा है, वैसे तो आजकल भाग्य और ज्योतिष को निरर्थक और अनपढ़ लोगो की विद्या समझ कर नकार दिया जाता है लेकिन जब हम अभी कही गयी बातों का लगातार शिकार होते है, तब हमे लगता है कि इस संसार में भाग्य नाम की एक चीज भी है। जन्म कुंडली में बारह खाने बने होते हैं जिन्हें भाव कहा जाता है। शास्त्रों में 12 भावों के स्वरूप हैं और भावों के नाम के अनुसार ही इनका काम होता है। पहला भाव तन, दूसरा धन, तीसरा सहोदर, चतुर्थ मातृ, पंचम पुत्र, छठा अरि, सप्तम जाया, आठवाँ आयु, नवम धर्म, दशम कर्म, एकादश आय और द्वादश व्यय भाव कहलाता है़।कुंडली मे जीवन की यात्रा पहले भाव से शुरु होती है,चौथे भाव तक शरीर का पालन पोषण किया जाता है और पहली यात्रा शुरु हो जाती है सप्तम भाव तक पहली यात्रा चलती है,सप्तम के बाद जीवन की दूसरी यात्रा शुरु होती है जो दसवे भाव तक चलती है,दसवे से तीसरी और अन्तिम यात्रा शुरु हो जाती है जो दुबारा से जीवन को देने के लिये पहले तक अपनी यात्रा को जारी रखने के लिये माना जाता है.इस प्रकार से जीवन की यात्रायें क्रम से चलती रहती है,शरीर बदल जाते है योनि बदल जाती है कर्मो के अनुसार जीवन का क्षेत्र बदल जाता है। अच्छे काम जीवन की यात्रा मे किये जाते है तो अच्छी योनि की प्राप्ति हो जाती है बुरे काम किये जाते है तो बुरी योनि की प्राप्ति हो जाती है। अच्छे और बुरे दोनो प्रकार के कार्य किये जाते है तो अच्छे और बुरे दोनो प्रकार के सम्मिलित परिणाम मिलते रहते है। शरीर परिवार जीवन साथी और दुनियादारी यह चार रास्ते हर जीव के प्रति अपने विचार चार रास्तों की तरह से होते है और इन चारो के मिलने के स्थान को चौराहे से जोड कर देखा जा सकता है। जो व्यक्ति जिस रास्ते पर जा रहा होता है वह अपने रास्ते को अगर लगातार दाहिनी तरफ़ लेकर चला जाता है तो वह पहले परिवार मे चलेगा फ़िर जीवन साथी के साथ चलेगा और बाद मे जगत व्यवहार को लेकर चलने के बाद वापस फ़िर से जीवन के प्रति आकर नया जीवन शुरु कर देगा,यह मान्यता जगत मे मान्य है और वैदिक तथा शास्त्रीय रीति से इसे उत्तम रास्ता कहा जाता है। इसके विपरीत दूसरा व्यक्ति अपने लगातार बायीं तरफ़ लेकर चलेगा तो वह पहले जगत व्यवहार को देखना शुरु कर देगा और फ़िर जीवन साथी और बाद मे परिवार की तरफ़ देखकर दुबारा से शरीर के प्रति आकर नया जन्म लेगा और दुबारा से अपनी सृष्टि क्रम का साझेदार बन जायेगा। इस प्रकार से दो प्रकार के भाव जीवन मे माने जाते है।सुबह जागने के बाद व्यक्ति के अन्दर कई प्रकार के भाव पैदा होते है जो उसे पूरे दिन के लिये अपनी चेतन और अचेतन मन के द्वारा प्रकट किये जाते है। वह किस क्षेत्र मे अपने को ले जायेगा वह विचार उसे या तो अपने दिमाग से लेकर चलना पडता है अथवा दूसरे लोग उसके मन को अधिग्रहण करने के बाद चलाने के लिये माने जाते है। जो लोग अपने मन से चलते है वे अक्सर बायीं ओर चलने वाले माने जाते है और जो दूसरों के प्रति दूसरों की धारणा से चलते है वे दाहिनी तरफ़ चलने वाले लोगों के जैसे माने जाते है। जब उन्नति और अवनति क कारण देखा जाता है तो दाहिनी तरफ़ वाले व्यक्ति तो जगत के व्यवहार को पहले नही देखते है वे परिवार की सहायता से फ़िर जीवन साथी की सहायता से जगत व्यवहार को समझने की चेष्टा करते है और उन्हे भावी कष्ट ही मिलते है लेकिन जो दाहिनी तरफ़ चलने वाले लोग होते है वे सीधे से जगत व्यवहार से जुडते है और उन्हे स्वार्थी जगत की श्रेणी मे पहले से ही निपटना होता तो वे अपने जगत व्यवहार से अपने जीवन साथी को भी केवल आदेश से ही लेकर चलते है और अपने परिवार को भी आदेश से लेकर चलने के लिये माने जाते है इस प्रकार से वे जगत व्यवहार के आगे अपने वास्तविक मूल्य को भूल कर केवल जगत व्यवहार के लिये ही होकर रह जाते है,उन्हे अपने जीवन का वास्तविक रास्ता नही मिलता है जो मिलता है वह स्वार्थ की रीति से ही मिलता है। जैसे जगत व्यवहार का रास्ता खत्म हो जाता है तो जीवन साथी भी अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिये साथ चलता है और जैसे ही जीवन साथी का स्वार्थ पूरा हो जाता है व्यक्ति अपने परिवार के ऊपर निर्भर होकर रह जाता है एक समय ऐसा भी आता है जब व्यक्ति निराट अकेला रहकर अपने द्वारा लोगों की छल वाली नीतियों के प्रति सोचता हुआ अन्तगति को प्राप्त करता है और दूसरे जीवन मे अपनी उसी नीति को धारणा मे लेकर चलता है,उस धारणा के अन्दर जो पहले जीवन की अनुभूति होती है वह दूसरे जीवन मे बदली हुयी होती है पहले जैसे उसे ठगा गया था वह दूसरों को ठगना शुरु कर देता है और जब जीवन साथी का क्षेत्र आता है तो वह जीवन साथी के स्वार्थ को भी अपनी चाहत से ठगने की बात सोचता है और स्वार्थी भावना के रहते उसे केवल अपनी स्वार्थो की पूर्ति के लिये ही प्रयोग मे लाता है अन्त मे अपने परिवार को भी ठग कर दूसरी दुनिया मे अपने को लेजकर किसी ऐसे क्षेत्र को पकडता है जहां उसके जान पहिचान या कोई सगा सम्बन्धी नही होता है वह अपने को अकेला रखकर अन्तगति को प्राप्त करता है।इस यात्रा क्रम को कई लोग बीच मे बदल लेते है और वे जो दाहिने चलने वाले होते है वे अपने को बायें चलाने लगते है और बायें चलने वाले दाहिने चलने के लिये भी माने जाते है कई लोग ऐसे भी होते है जो अपने को बीच मे ही रोकर एक जगह पर स्थापित कर लेते है फ़िर उनका जीवन के रहते हुये कोई मकसद नही होता है। या तो वे नितान्त अकेले रहकर जीवन को निकालते है या अपने को दूसरो के भरोसे छोड कर पडे रहते है। जो लोग अकेले पडे रहते है उनके अन्दर या तो खुद का अहम भरा हुआ होता है या वे किसी के अहम के शिकार हो गये होते है। जो अहम के शिकार हुये होते है वे हर बात से अपने अन्दर शक्तिहीन मानने लगते है और जो अपने अहम से अकेले पडे रहते है वे दूसरो को शक्तिहीन समझने लगते है। लेकिन दोनो ही बातो में दम नही होता है कारण जीव अपनी शक्ति को लेकर पैदा होता है और अपनी शक्ति का प्रयोग करने के बाद ही अपनी गति को समेट लेता है। अगर उसके अन्दर अहम की भावना आजाती है तो वह अपने चलते हुये जीवन क्रम को बिगाडने का क्रम ही पैदा करता है उसे अपनी शक्ति के आगे दूसरे की शक्ति की आभास नही हो पाता है। यही बात उन लोगो के लिये भी पैदा होती है जो अपने को दूसरो का अहम का शिकार बनाकर पडे रहते है उन्हे अपनी शक्ति का आभास नही हो पाता है।
शनिवार, 11 जनवरी 2020
#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 2
मित्रों अपनी पिछली पोस्ट में मैंने जनवरी से लेकर अगस्त तक के मंदा तेजी बाजार के बारे में ग्रह गोचर को देखकर लिखा है उसको भी आप पढ़ सकते हैं इस पोस्ट में सितंबर से लेकर दिसंबर 2020 तक की मंदा -तेजी की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं September 2020#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 2
गुरुवार, 9 जनवरी 2020
#शेयर बाजार – स्टॉक मार्केट #2020 वस्तु बाजार का व्यापार-विमर्श एवं विश्लेषण 1
, शनि 11 तारीख से वक्री गति में चलेगा। इसी दिन कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करेगा। यह इस्पात (जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील), ऑटोमोबाइल्स (टीवीएस मोटर्स, मारुति), ऑटो सहायक (मदरसन), तेल, गैस और पेट्रोलिय (एचपीसीएल, बीपीसीएल, एमजीएल, आईजीएल) सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में मांग पैदा करेगा।13 तारीख को बुध रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र की कंपनियों को 13 तारीख को शुक्र के वृष राशि में वक्री गति करने के चलते मांग में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। फैशन, प्रसाधन सामग्री (कॉस्मेटिक्स) और तेजी से बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) के शेयरों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। 16 तारीख को पश्चिम में बुध का उदय होगा। इससे बाजार में तेजी आएगी। राहु और बुध 20 तारीख को मृगशिरा नक्षत्र में शुक्र ग्रह के साथ युति बनाएंगे। शेयर बाजार में 28 तारीख तक अस्थिरता की स्थित होने की संभावना है। मुनाफे की चाह में लंबे समय तक बाजार में पैसा लगाने वाले व्यापारियों (Long side traders) को हर बढ़त पर मुनाफा कमाने की कोशिश करनी चाहिये। 29 तारीख को, शुक्र के वक्री होने और सूर्य और शुक्र पर उग्र ग्रह मंगल की दृष्टि होने के कारण स्पॉट एंड इक्विटी मार्केट का ग्राफ ऊपर की ओर जाएगा।शेयर बाज़ार में तेजी आने की संभावना है। स्टील, तेल, फार्मा, उर्वरक, चाय, कॉफी, भारी इंजीनियरिंग, सार्वजनिक क्षेत्र, पेट्रोलियम, रसायन, विद्युत समूह, तंबाकू, वाहन उद्योग, रिलायंस आदि से जुड़े क्षेत्र में उछाल आएगा। स्टॉक मार्केट इंडेक्स सभी रिकॉर्डों को पार करेगा और सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। मंदड़ियों को किसी भी प्रकार के निवेश या खरीदारी से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 2, 3, 4, 5, 6, 8, 12, 17, 18, 19, 20, 23, 24, 25, 26 और 31 मई 2020
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August
August2020के अगस्त महीने की शुरुआत में ग्रहों की कई दिलचस्प घटनाएं होंगी।हालांकि, ग्रहों की स्थिति और चाल आपको मिलेजुले परिणाम दिलवा सकती है। ग्रहों की स्थिति के बारे में बात करें तो कुंडली का विश्लेषण करने के बाद देखा जा सकता है कि महीने की शुरुआत में सूर्य और बुध ग्रह कर्क राशि में रहेंगे, मंगल ग्रह मीन राशि में, बृहस्पति और प्लूटो ग्रह धनु राशि में, शुक्र और राहु ग्रह मिथुन राशि में, यूरेनस ग्रह मेष राशि में और नेपच्यून ग्रह कुंभ राशि में रहेगा । 17 तारीख को सूर्य और मंगल क्रमशः सिंह और मेष राशि में गोचर कर रहे हैं, जबकि 18 तारीख को बुध सिंह राशि में प्रवेश करेगा। शुक्र मिथुन राशि में राहु के साथ प्रवेश करेगा और केतु और बृहस्पति की युति पर इसकी विपरीत दृष्टि होगी। और ग्रह मंगल शुक्र और राहु की युति पर दृष्टि डालेगा। बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। समझदार व्यापारी हर बढ़त पर लाभ उठाएंगे। 4 तारीख को पुष्य नक्षत्र में बुध के आने से रजत-स्वर्ण में गिरावट देखने को मिलेगी। वाणिज्य और व्यापार का मुख्य ग्रह, बुध सूर्य के साथ अश्लेषा नक्षत्र में युति बनाएगा। गैस, खान (कोल इंडिया, वेदांता), किफायती आवास (आशियाना, एल्डेको) और सीमेंट (अल्ट्राटेक) सेक्टर के शेयरों में उछाल आएगा। हालांकि बाजार में तेजी की स्थिति की अचानक दिशा बदलने की संभावना है, क्योंकि मंगल मेष राशि में प्रवेश करके बुध पर दृष्टि डालकर बुध की स्थिति को कमजोर करेगा।14 तारीख से बैंकिंग और फाइनेंस, हिंदुस्तान लीवर, वनस्पती, और तंबाकू से संबंधित कंपनियों के स्टॉक की कीमतों में गिरावट आ सकती है, हालांकि जिन-जिन क्षेत्रों के शेयर मंगल, राहु और शनि द्वारा शासित होते है, उनके ग्राफ में निरंतर वृद्धि देखी जाएगी।कुल मिलाकर, 21 तारीख तक बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। 22 तारीख से, ग्रहों की स्थिति में परिवर्तन बाजार में मंदी की स्थिति को प्रभावित करेगा। खुदरा बाजार में 29 तारीख तक अपस्फीति का अनुभव होगा। महीने के अंतिम दिन शुक्र ग्रह का प्रवेश जल तत्व की राशि कर्क में होपर मंगल की दृष्टि होगी। यह संयोग तेजड़ियों के चहरों पर मुस्कानगा। यहां शुक्र लाएगा।
तेजी के लिए अपेक्षित तिथि: 4, 6, 8, 12, 17, 19, 24 और 31 अगस्त 2020मंदी की अपेक्षित तिथि: 1, 2, 5, 10, 12, 15, 18, 22, 23, 27 और 29 अगस्त 2020
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