जगत में शक्ति के बिना कोई काम सफल नहीं होता है। चाहे आपका सिद्धांत कितना भी अच्छा हो, आपके विचार कितने ही सुंदर हों लेकिन अगर आप शक्तिहीन हैं तो आपके विचारों का कोई मूल्य नहीं होगा। विचार अच्छा है, सिद्धांत अच्छा है, इसीलिए सर्वमान्य हो जाता है ऐसा नहीं है। शक्ति ही जीवन है और जीवन ही शक्ति है
आचार्य राजेश (ज्योतिष,वास्तु , रत्न , तंत्र, और यन्त्र विशेषज्ञ ) जन्म कुंडली के द्वारा , विद्या, कारोबार, विवाह, संतान सुख, विदेश-यात्रा, लाभ-हानि, गृह-क्लेश , गुप्त- शत्रु , कर्ज से मुक्ति, सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक ,पारिवारिक विषयों पर वैदिक व लाल किताबकिताब के उपाय ओर और महाकाली के आशीर्वाद से प्राप्त करें07597718725-०9414481324 नोट रत्नों का हमारा wholesale का कारोबार है असली और लैव टैस्ट रत्न भी मंगवा सकते है
मंगलवार, 24 मार्च 2020
शक्ति की उपासना
जगत में शक्ति के बिना कोई काम सफल नहीं होता है। चाहे आपका सिद्धांत कितना भी अच्छा हो, आपके विचार कितने ही सुंदर हों लेकिन अगर आप शक्तिहीन हैं तो आपके विचारों का कोई मूल्य नहीं होगा। विचार अच्छा है, सिद्धांत अच्छा है, इसीलिए सर्वमान्य हो जाता है ऐसा नहीं है। शक्ति ही जीवन है और जीवन ही शक्ति है
गुरुवार, 19 मार्च 2020
#(Coronavirus)#क्या कारण है ज्योतिष ग्रह योग क्यों फैला कोरोना और कब मिलेगी राहत?
कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया खौफजदा है। कोरोना चीन के वुहान शहर से सामने आया कोरोना वायरस आज पूरे विश्वभर में चर्चा के चरम पर है और एक महामारी का रूप ले चुका है। लाखों लोग इस वायरस से प्रभावित हो चुके हैं। कोरोना वायरस के रूप में शुरू हुई महामारी लगातार बढ़ती जा रही है। भारत में भी इसके बहुत से मामले सामने आने लगे हैं, लेकिन लोगों के मन में एक ही सवाल है कि इस वायरस से कब राहत मुक्ति मिलेगी।ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से देखें तो इस समय में कोरोना वायरस का सामने आना एवं महामारी का रूप लेना ये मात्र कोई संयोग नहीं है बल्कि इसके पीछे बहुत विशेष ज्योतिषीय कारण और वर्तमान ग्रह स्थितियां हैं। इसी वजह से कोरोना वायरस विश्वस्तर पर एक महामारी के रूप में फैलता जा रहा है।
गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020
#क्या राशिफल सही होता है ?क्या है सच#
मित्रोंआमतौर पर हम अपनी सुविधा के लिए रोज सुबह टीवी पर ही अपना राशिफल देखते हैं कई अखबार का भी इस्तेमाल करते हैं बहुत सारे लोग अपने मोबाइल मेंyoutube या किसी अन्य सोशल साइट्स पर भी राशिफल देखते हैं ।
रविवार, 23 फ़रवरी 2020
gemlogy# रत्न कैसे काम करते हैं?
रविवार, 16 फ़रवरी 2020
#महाशिवरात्रि#2020 पर विशेष
शनिवार, 8 फ़रवरी 2020
शनि देते हैं आपके किए गए कार्मो का फल?
शनिदेव को सूर्य पुत्र एवं कर्मफल दाता माना जाता है। लेकिन साथ ही पितृ शत्रु भी.शनि ग्रह के सम्बन्ध मे अनेक भ्रान्तियां और इस लिये उसे मारक, अशुभ और दुख कारक माना जाता है। पाश्चात्य ज्योतिषी भी उसे दुख देने वाला मानते हैं। लेकिन शनि उतना अशुभ और मारक नही है, जितना उसे माना जाता है।सत्य तो यह ही है कि शनि प्रकृति में संतुलन पैदा करता है, और हर प्राणी के साथ उचित न्याय करता है। जो लोग अनुचित विषमता और अस्वाभाविक समता को आश्रय देते हैं, शनि केवल उन्ही कोउनके कर्मो के अनुसार दण्डिंत (प्रताडित) करते हैं। अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनि हैं।नि के दो घर माने जाते है एक करने वाला और एक सोचने वाला। जो लोग काम को करने के बाद सोचते है वे मकर की श्रेणी मे आते है और जो सोच कर करते है वे कुम्भ की श्रेणी में आते है। कार्य को करने के बाद सोचने की क्रिया को करके सीखने का होता है और सीख कर करने की क्रिया को शिक्षा को पूर्ण करने के बाद कर्म की क्रिया को कहा जाता है। कार्य को करने के बाद जो सीखता है वह कार्य के बारे में गूढ रूप से जानता है कारण उसके द्वारा प्रेक्टिकल में कार्य किया जाता है। लेकिन सीख कर कार्य को जो करता है वह कार्य में अनुभव के बिना कहीं न कहीं अटक जाता है। , मित्रों शनि कर्म का कारक है,कर्म करने के लिये शनि अपनी पूरी ताकत देता है,कितना ही आलसी व्यक्ति हो शनि अपने अनुसार वक्त पर कर्म करने के लिये अपनी ताकत को दे ही देता है। व्यक्ति को शनि जमीनी ताकत का बोध करवाता है,कैसे जमीन से उगा जाता है और उगने के बाद समय के थपेडे किस प्रकार से खाये जाते है,तब जाकर किस प्रकार से कर्म की कसौटी पर उसे खरा उतरना पडता है। शनि के तीन रूप माने जाते है और तीनो रूपों को जन्म कुंडली के अनुसार परखा जाता है। शनि मार्गी होता है तो सम्बन्धित भाव के कार्य वह पूरे जीवन करवाता रहता है,चाहे वह अच्छा हो या बुरा कर्म तो मनुष्य को करने ही पडेंगे,वह गोचर से भी जिस भाव में प्रवेश करेगा,जन्म कुंडली के भाव के अनुसार ही अपनी शिफ़्त को प्रदान करेगा। मार्गी शनि शारीरिक मेहनत करवाता है और वक्री शनि दिमागी काम करवाता है,दिमागी कार्य करने के लिये वह अपने फ़ल भावानुसार ही देता है। व्यक्ति को अगर कहीं शारीरिक मेहनत करने के अवसर आते है और वह अपने द्वारा शारीरिक मेहनत करने के लिये उद्दत होता है तो वह शारीरिक मेहनत के अन्दर असफ़लता देता है,लेकिन दिमागी मेहनत के अन्दर अपने बल को प्रदान करता रहता है। उसी प्रकार से अगर शनि कुंडली में मार्गी है,और व्यक्ति अगर दिमागी मेहनत करने के कारण कही भी प्रस्तुत करता है तो उसे सफ़लता नही मिलती है। लेकिन वह अपने अनुसार शारीरिक मेहनत को करने के बाद सफ़ल होता जाता है। शनि अस्त का प्रभाव अपने में बहुत महत्व रखता है,जन्म स्थान का शनि अगर अस्त है तो वह गोचर से जिस भी भाव में प्रवेश करेगा,उस भाव के जन्म के भाव से सम्बन्धित कार्यों को बन्द कर देगा,चलते हुये कार्य बन्द होने के कारण मनुष्य को बैचेनी हो जाती है,वह सोचने लगता है कि उसके द्वारा कोई भूल हुयी है और उसी भूल से उसका कार्य बन्द हुआ है,लेकिन जैसे ही शनि अपने समय के अनुसार आगे बढेगा वह बन्द किये गये कार्य को शुरु कर देगा और आगे के कार्य बन्द कर देगा,इस तरह से व्यक्ति के जीवन में शनि का जो योगदान मिलता है वह समझकर ही अगर किया जाता है तो व्यक्ति की सफ़लता मिलनी निश्चित होती है। उदाहरण के तौर पर अगर शनि बारहवे भाव में जाकर वक्री हो गया है,बारहवां भाव जेल जाने का कारण भी बनाता है,अगर शनि मार्गी होता है तो जेल में जाकर जेल के कार्य करना और जेल सम्बन्धी दुख भोगना जरूरी होता है,लेकिन शनि अगर बारहवें भाव में वक्री है तो वह दूसरों को जेल जाने के कारणॊं से बचाता है,उसके अन्दर दिमागी ताकत आजाती है और वह कानून या अन्य कारणों से दूसरों को अपने द्वारा जेल जाने की नौबत से दूर रखने में अपनी सहायता करता है। बारहवा भाव मोक्ष का भाव भी कहा जाता है,जातक की कुन्डली में वह जहां भी गोचर करेगा मोक्ष के भावों को प्रस्तुत करता चला जायेगा। शनि के साथ,शनि से पंचम नवम भाव में जो भी ग्रह होंगे वे शनि को सहायता देने वाले ग्रह होंगे,अगर वह अच्छे ग्रह है तो अच्छी सहायता करेंगे और खराब ग्रह है तो खराब सहायता करेंगे। जैसे शनि अगर बारहवां है और शनि से नवें भाव यानी अष्टम भाव में सूर्य है तो शनि को सरकारी और पिता सम्बन्धी सहायता मिलेगी,वह सरकारी कारणों में जो कि कानूनी भी हो सकते है,साथ ही शनि अगर बारहवें भाव में वृष राशि का है तो वह धन सम्बन्धी कारणों से लोगों को जेल जाने और पारिवारिक कारणॊं से जेल जाने और बडी मुशीबत से फ़ंसने में सहायता करेगा। इसी शनि के अगर नवें भाव में सूर्य है तो कार्यों के मामले में पिता और बडे सरकार से सम्बन्धित बडे अधिकारियों और राजनीतिक लोगों से लाभ देने के मामले में भी जाना जायेगा,पिता के द्वारा धन सम्बन्धी कारणों को सुलझाने के दिमागी कारणों को जातक ने अपने जन्म से ही सीखा होगा और वह पिता की छत्रछाया में ही बडे बडे अफ़सरों से मिलता रहा होगा तथा समय पर अपने लिये उन्ही लोगों और पिता से सम्बन्धित ज्ञान को समय समय पर प्रकट करने के बाद अपने कार्यों को करने में अपनी योग्यता को प्रकट करेगा। इसके साथ ही अगर इस शनि को अगर गुरु का प्रभाव भी शनि से नवें भाव से मिला होगा तो वह कानूनी रूप से अपने कार्यों को करने वाला होगा,वैसे साधारण ज्योतिष के अनुसार वृष राशि के नवें भाव में मकर राशि का स्थान है और यहां पर कई लोग गुरु को नीच का मान लेते है लेकिन गुरु अगर अष्टम में है तो वह नीचता को त्याग देगा,कारण बारहवें भाव में वृष राशि होने का मतलब होता है कि लगन मिथुन लगन की है और मिथुन लगन से अष्टम में गुरु का स्थान मकर राशि में होने से वह अपनी नीच प्रकृति को त्याग कर विपरीत राजयोग की श्रेणी को प्रस्तुत करेगा। इसके लिये कई विद्वानों ने अपने अपने भाव प्रदान किये है लेकिन नीच के गुरु की मान्यता तभी तक मान्य थी जब तक वर्ण व्यवस्था कायम थी और लोग अपने अपने वर्ण के अनुसार ही कार्य किया करते थे, आज किसी भी वर्ण का व्यक्ति कोई भी कार्य करने के लिये स्वतंत्र है,ब्राह्मण हरिजन के भी कार्य कर रहा है और हरिजन ब्राह्मण के भी कार्य कर रहा है,पानी भरने के लिये पहले भिस्ती का काम हुआ करता था आज कोई भी पानी भरने के लिये अपने कर्म को प्रदान कर सकता है,पहले राजपूतों का कार्य केवल रक्षा करना होता था तो आज राजपूत आराम से कृषि वाले कार्य भी कर रहे है और पूजा पाठ के कार्यों में भी लगे है। इस प्रकार से गुरु की नीचता का प्रभाव अब उस तरीके से नही माना जाता है। चूंकि मकर राशि का प्रभाव अष्टम में जाने से धन सम्बन्धी कार्यों की विवेचना करने से भी माना जाता है जो धन अनैतिक रूप से लोग अपने पास अण्डर ग्राउंड बेस में रखते है लेकिन किसी प्रकार के मंगल के दखल के कारण उस धन को सही रूप में साबित करने और धन के मामले में उचित सलाह देने तथा राजकीय अधिकारियों से जान पहिचान होने से और कानूनी बातों का पता होने से इस स्थान के गुरु और बारहवें भाव के बक्री शनि की ताकत से वह अपने दिमागी बल से अफ़सरों से जान पहिचान करने के बाद जो भी जेल जाने या बरबाद होने की स्थिति में आता है उसे जातक के द्वारा बचा लिया जाना माना जाता है। इसी प्रकार से अगर गुरु को बल देने के लिये अन्य ग्रह भी जैसे सूर्य भी है गुरु भी है और शुक्र भी है तो जातक की महिमा अपने समय के अनुसार आगे से आगे बढ जाती है। केवल सूर्य गुरु के कारण यह शनि कानूनी मान्यता को ही अपने जाल से निकालने में सहायता करता है लेकिन शुक्र के साथ हो जाने से सम्पत्ति से भी दूर करने में सहायता करता है जो भी सम्पत्ति है उसे जातक के प्रयास से दूसरी रास्ताओं के द्वारा सूचित किया जाता है और इस प्रयास से जातक खुद के अलावा राजकीय अधिकारियों और जिसकी गल्ती पकडी गयी उसे भी फ़ायदा देने के लिये उत्तम माना जाता है। वक्री शनि का दूसरा प्रयास होता है दिमागी रूप से लगातार आगे बढना,कारण लगन को बल देने के लिये यह शनि बहुत अच्छे प्रयास करता है,शनि बालों का और चमडी का कारक भी है,अगर बारहवां शनि मार्गी है तो जातक की खोपडी में घने बाल होंगे और शनि बारहवें भाव में वक्री है तो जातक की खोपडी गंजी होती है। इस शनि का प्रभाव जातक की कुंडली में दूसरे भाव में भी होता है,दूसरा भाव जातक के लिये धन और अपने ही परिवार के लिये माना जाता है,इसके अलावा भी यह देखा जाता है कि जब भी जातक को किसी प्रकार से धन की जरूरत महसूस होती है तो जातक को गुप्त रूप से सूर्य और गुरु के साथ शुक्र की सहायता मिल जाती है,कारण इस शनि से नवें भाव में विराजमान ग्रह उसे वक्त पर सहायता देने के लिये हमेशा आगे रहते है।
सोमवार, 3 फ़रवरी 2020
सप्ताह के साथ दिनों का क्या है रहस्य? (2)
मित्रों मैंने हाल ही में एक पोस्ट डाली थी 7 सप्ताह के साथ दिनों पर पर कुछ एक मित्रों ने उस पर कुछ टीका टिप्पणी की बेसिर पैर की बातें की बिना कोई तथ्य दिए-मित्र बहुत ही मेहनत करने के बाद पत्थर आदि को काट छांट कर बहुत ही सुन्दर तरीके से घर सप्ताह के साथ दिनों का क्या है रहस्य? (2)को बनाया जाता है,उसे सजा कर संवार कर रखा जाता है,लेकिन चीटी का स्वभाव सभी को पता है वह अपनी आदत के अनुसार उस घर के अन्दर हमेशा भाग भाग कर छेद को खोजा करती है। उसे लगने वाली मेहनत और भावना का पता नही होता है वह केवल छेद की भावना को लेकर ही अपने पूरे जीवन को व्यतीत कर देती है। यह भावना अक्सर उन्ही लोगों के अन्दर भी पायी जाती है खैर छोड़िए हम अपनी बात पर आते है जैसे मैंने पहले ही कहा हैआपको जानकर आश्चर्य होगा कि रविवार से सूर्य का कोई संबंध है ही नहीं । रविवार से सूर्य का संबंध दिखा पाना किसी भी ज्योतिषी के लिए न केवल कठिन वरन् असंभव कार्य है।विवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरुवार शुक्रवार शनिवार यह साथ दिन बनाये गये है,इन दिनों को बनाने का उद्देश्य केवल सप्ताह के समय को विभाजित करना ही था,साथ ही कल और आज तथा आज और कल के भेद को समझना भी था। इन दोनो के पीछे जो थ्योरी छिपी थी वह शायद हर किसी को पता नही है,बहुत बडा गूढ विषय है,इस विषय पर प्रकाश डालने की कोशिश तो की है,किसी प्रकार की त्रुटि अगर हो जाये तो क्षमा भी करना आपका ही काम है।
सूर्य को पिता के रूप में चन्द्र को माता के रूप में मंगल को पराक्रम के रूप में बुध को बुद्धि के रूप में गुरु को जीव के रूप में ज्ञान के रूप में सम्बन्ध के रूप में शुक्र को धन सम्पत्ति और पत्नी के रूप में शनि को कार्यों के रूप में अधिकतर माना जाता है। पिता ने माता की सहायता से जीव के पराक्रम को प्रकट किया,हिम्मत दी और संसार में बुद्धि प्राप्त करने के लिये उतार दिया,बुद्धि का कारक बुध है और बुध से इस जीव की उत्पत्ति को मानते है,बुध का रूप गोल है मतलब तीन सौ साठ डिग्री का है पूरा बुध,दुनिया भी गोल है,यानी पूरी तीन सौ साठ डिग्री की। इस संसार में तीन सौ साठ प्रकार की बुद्धि पायी जाती है,आगे कभी इन सभी बुद्धियों का विवेचन करूंगा। अक्सर इन्ही तीन सौ साठ प्रकार की बुद्धियों के मामले में कहावत कही जाती है कि- "तुम्हारे जैसे तीन सौ साठ लोग बेवकूफ़ बनाने वाले मिलते हैं",अक्सर यह बात लोगों के मुँह से कहावत के रूप में सुनी जाती है। बुध को मुख्य माना जाता है इसी के आसपास सभी ग्रह घूमते है। अगर पराक्रम और हिम्मत माता पिता ने सही दी है तो बुद्धि सही काम करेगी,और माता पिता के द्वारा ही पराक्रम और हिम्मत को गलत दिया गया है तो बुद्धि अपने आप कुत्सित होकर गलत काम करेगी। बुध से आगे गुरु आता है और बुध के पीछे मंगल,मंगल पराक्रम और हिम्मत का मालिक है बुध बुद्धि का और गुरु सम्बन्ध का,अगर हिम्मत और पराक्रम सही है तो बुद्धि अच्छी तरह से काम करेगी और सम्बन्ध भी अच्छे बनेंगे,इसके विपरीत सम्बन्ध खराब हो जायेंगे। सूर्य अनाज का कारक है चन्द्र पानी का,अगर अनाज और पानी सही लिया है तो शरीर में खून अच्छा बनेगा और वह बुद्धि को भी सही पैदा करेगा,साथ ही बुद्धि के सही होने पर ज्ञान की मात्रा भी अधिक से अधिक प्राप्त की जायेगी। लेकिन सूर्य के पीछे भी शनि लगा है,अगर सही कर्म करने के बाद अनाज को पैदा किया गया है तो अनाज भी आगे सही परिणाम देगा,शनि के पीछे भी शुक्र विराजमान है,अगर शुक्र से अपनी सही रीति नीति शनि को दी है तो शनि भी सही कार्य करेगा,और पीछे से शुक्र भी खराब है तो शनि अपने आप खराब हो जायेगा। शुक्र के पीछे भी गुरु लगा है,अगर ज्ञान की मात्रा समुचित है और वह शुक्र के लिये प्रयोग किये जाने योग्य है तो शुक्र सही काम करेगा,अगर गुरु ही खराब है तो शुक्र अपने आप खराब हो जायेगा। गुरु के पीछे बुध लगा हुआ है यानी बुद्धि को सही प्रयोग में लाया गया है तो गुरु अपना सही काम करेगा,यह थी साधारण रूप में दिनो की समीक्षा। इस समीक्षा को अगर उदाहरणों के रूप में प्रकट करें तो इस प्रकार से प्रकट होगा:-बुद्धि को सही रूप से प्रकट करने के बाद गुरु यानी समबन्ध को सही बनाया गया है तो शुक्र यानी पत्नी उस सम्बन्ध को निभाकर शनि यानी अच्छे कर्म करेगी,और जब अच्छे कर्म होंगे तो सूर्य यानी पैदा होने वाली संतान भी सूर्य यानी पुत्र और चन्द्र यानी पुत्री अपने अपने अनुसार सही होंगे,और वे अच्छे अच्छे पराक्रम पैदा करने वाले होंगे उनकी बुद्धि भी सही होगी,और वे भी गुरु की सम्बन्ध वाली नीति को सही लेकर चलेंगे।
बुध को सही रूप से प्रकट नही किया गया है तो सम्बन्ध भी सही नही बनेगा,सम्बन्ध सही नही बनेगा तो वह वापस जहां से शुरु हुये थे वहीं जाकर पटक देगा,बुध से पीछे का दिन मंगल है,मंगल की सिफ़्त तीन जगह पर पायी जाती है,पहली तो धर्म स्थान में है जहां पर अपने किये गये माइनर पापों के लिये प्रायश्चित किया जा सकता है,दूसरी जगह पुलिस है जहां पापों का प्रायश्चित नही करने पर भी करवा लिया जाता है और सीधा जेल का रास्ता दिखा दिया जाता है वहां बैठ कर अपने पापों का प्रायश्चित आराम से करते रहो,तीसरा स्थान अस्पताल का होता है,डाक्टर पेट भी फ़ाडेगा और पेट फ़ाडने का धन भी लेगा,अथवा अपने ही घर पर उसका प्रायश्चित मिलेगा,डकैत आयेगा वह पेट भी फ़ाडेगा और धन भी ले जायेगा,अथवा रास्ते में प्रायश्चित करना पडेगा,एक्सीडेन्ट होगा अस्पताल जाना पडेगा,धन भी जायेगा और प्रायश्चित भी करना होगा,अगर किसी प्रकार से बुद्धि ने अपनी जगह सही नही प्राप्त की तो डाक्टर बजाय दाहिने हाथ के बायें हाथ का आपरेशन कर देगा,और भी बुद्धि ने काम नही किया तो वह सही किडनी को खराब और खराब को सही बताकर ऊपर का रास्ता दिखा देगा,इसलिये सबसे पहले अपनी बुद्धि को सुधारना जरूरी है तब दिनों के नाम लेने और दिनो को गिनने का फ़ल सही मिलेगा। मित्रों आगे हम बात करेंगे कि सृष्टि कैसे बनीं हमारे वेद क्या कहते हैं। आगे हमारे ऋषि मुनि की बानी क्या कहती है हमारे पुराणों में क्या लिखा है उन सब पर मैं आपको बताने की कोशिश करूंगा ताकि जो हमारा सनातन धर्म है हिंदू धर्म है। उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को ज्ञान प्राप्त हो क्योंकि ज्ञान बांटने से ही वड़ता है, इसलिए अगर आपके पास भी कोई ऐसी जानकारी है तो आप जरूर शेयर करें, धन्यवाद मित्रों
शुक्रवार, 31 जनवरी 2020
कालसर्प योग है या दोष है क्या है सच क्या है झूठ? (4) कालसर्प के उपाय
कौटिल्य, आचार्य चाणक्य, जो स्वयं काल सर्प योगी थे, ने ईसा पूर्व तीसरी सदी में अपनी कूटनीति से विश्व विजय का सपना लेकर आए सिकन्दर को व्यास नदी की तट सीमा पर ही रोक कर यूनानी सेना को (स्वदेश) वापस जाने को बाध्य किया तथा चन्द्रगुप्त मौर्य को विशाल आर्यावर्त का सम्राट बनवाया।
इतिहास साक्षी है दसवीं शताब्दी में केरल में नम्बूदिरिपाद ब्राह्मण आचार्य विद्याधर के धर्मात्मा पुत्र शिवगुरु के यहां शंकर ने जन्म लिया। उनकी कुंडली में भी कालसर्प योग था, जो आगे चलकर आदिगुरु शंकराचार्य के नाम से विख्यात हुए। उन्होंने वैदिक धर्म की धर्मध्वजा फहरायी और हिन्दू धर्म को पुनर्जाग्रत कर चार धामों (केदारनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम्) की स्थापना कर भारतीय जनजीवन में धार्मिक आस्थाओं को जीवन्त किया।
चंगेज खां, एडोल्फ हिटलर और मुसोलिनी सरीखे जातकों की कुंडली में भी कालसर्प योग था। मुगल बादशाह अकबर, राष्ट्रपति अय्यूब खां, सद्दाम हुसैन, श्रीमती भंडार नायके, सर हेरोल्ड विल्सन, श्रीमती मारग्रेट थैचर तथा स्वतंत्र भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, भारत के प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू, पी.वी.नरसिंहराव, अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहीम लिंकन, बिल क्लिंटन, स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल, फिल्मी दुनिया से अशोक कुमार, दिलीप कुमार, संगीत की देवी लता मंगेशकर खेल जगत से मेजर ध्यानचंद (हाकी), सचिन तेंदुलकर आदि सभी व्यक्तियों की जन्म कुंडलियां कालसर्प योग से प्रभावित रही हैं।
मेरी दृष्टि में जो जानकारी आई- कालसर्प योग से प्रभावित व्यक्तियों की वह तो सूक्ष्मतम् है। मेरा मकसद मात्र इतना है कि जिन व्यक्तियों की कुंडली कालसर्प योग से प्रभावित हो, वे संघर्ष करें, विचलित न हों, अपने-अपने इष्ट की मनसा, वाचा-कर्मणा से साधना करें। विद्यार्थीगण 12 से 16 घंटे प्रतिदिन अपने अध्ययन, मनन में अध्ययनरत रहें, मेरा विश्वास है कि सफलताएं उनके कदम चूमेंगी।
भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वाहन के साथ ही पूरी करें। राष्ट्र सेवा सदैव ईमानदारी से करें। यथा संभव गरीबों की मदद करें। मानवीय संवेदनाएं आपके व्यक्तित्व को सजीवता प्रदान करेगी। पद का अंहकार कभी न करें अन्यथा पद से च्युत होते ही मानव समाज हिकारत की नजर से देखती है। वे कुर्सियां, वे लाल-पीली बत्तियां, वे मनुहार करते लोगों की भीड़ न जाने कहां गुम हो जाती हैं। यकीन न हो तो देखिये- वे राजनैतिक, प्रशासनिक चेहरे जो पदों से जैसे ही मुक्त हुए, समाज में रहते हुए भी वानप्रस्थ की मानसिकता में जी रहे हैं।
[30/01, 21:29] Acharya Rajesh: इस योग की खासियत है कि काल सर्प योगियों का जन्म निश्चित रूप से कर्म-भोग के लिए है। किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए अवतरित आत्मा की सन्तान भी कालसर्प योगी ही होगी। सूक्ष्म दिव्य संचालन राहु केतु करते हैं।
'काल सर्पयोग व्यक्ति, सामान्य व्यक्ति से कुछ अलग होते हैं। इसके अलावा इस योग के सकारात्मक फल भी होते हैं। साथ ही नकारात्मक फल भी इस योग में अन्य ग्रहों के कारण बनते हैं। मित्रों कल बहुत करते हैं उनकी मित्रों वैसे तो उपाय आपकी कुंडली के अनुसार ही बताए जाते हैं पर यहां कुछ आसान से उपाय जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं वो यह बताने की कोशिश कर रहा हूं जिसको करके आप लाभ उठा सकते हो
कालसर्प योग अत्यन्त ही चर्चित विषय है। इस विषय में सही जानकारी एवं ज्ञान रखने वाले ज्योतिषी अत्यन्त ही सीमित संख्या में हैं। कालसर्प योग इतना प्राचीन है कि 'लाल किताब में भी इसके निवारण के उपाय मिलते हैं। कालसर्प योग मूलत: सर्पयोग का ही परिष्कृत स्वरूप है। किसी भी जातक के भाग्य का निर्णय करने में राहु-केतु का बहुत योगदान रहता है। इसी कारण विंशोतरी महादशा में अठारह वर्ष और अष्टोत्तरी महादशा में बारह वर्ष राहु दशा मानी गई है।लाल किताब के अनुसार उपाय
राहु की स्थिति केतु की स्थिति लाल किताब के अनुसार उपाय
1/ 7 ठोस चांदी से बनी गेंद अपने पास सदैव रखें
2 /8 दो रंग का कम्बल दान करें
3 /9 चना दाल को पानी में प्रवाहित करें
4 /10 एक चांदी के डिब्बे में शहद घर के सामने गाड़ दें
5 /11 ठोस चांदी से बना हाथी घर पर रखें
6/ 12 जातक पालतू जानवर रखें
7/ 1 चांदी के बर्तन में जल रखें व घर में चांदी से बनी कोई चीज़ गाड़ दें |
8 /2 नारियल जल में प्रवाहित करें
9/ 3 चना दाल को नदी में प्रवाहित करें
10 /4 पीतल के बर्तन में पानी भरकर घर में रखें
11/ 5 किसी धार्मिक स्थल पर मूली दान करें
12 /6 सोने को धारण करें
लाल किताब में कई ऐसे अन्य उपायों का विवरण भी है | जैसा की हमने पहले भी आपको अवगत करवाया कि जातक को किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी कुंडली में स्थित दोष के बारे में विस्तार से जान लेना चाहिए और उसी के अनुसार उपाय भी करवाना चाहिए | आप अपनी कुंडली लाल किताब के अनुभवी जानकार के साथ साझा कर सकते है |
कालसर्प योग का निवारणके अन्य उपाय
शक्कर के बने पताशे जन्मकुंडली में बारहवें मंगल का रूप माने जाते हैं। जब भी किसी की कुंडली में राहु बहुत ज्यादा बुरा असर दिखाने लगे तो बतासे के प्रयोग से उसके सभी बुरे प्रभाव दूर हो जाते हैं।
(2) जिनकी कुंडली में कालसर्पयोग हो उन्हें अपने घर के नैऋत्य कोण (दिशा) में बम्बू (बांस) का पेड़ लगाना चाहिए। साथ ही रोजाना उसका पानी बदलते रहना चाहिए। इससे कालसर्पयोग से होने वाले सभी बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।
कालसर्प दोष वालों को मोर पंख को अपने दाहिने हाथ में सफेद कपड़े में बांधना चाहिए। इससे जीवन भर के लिए कालसर्प दोष का असर खत्म हो जाता है।
(4)कोयला पानी में वहां
(5) अक्सर रहने के घरों में कई बार कीमती चीजें, जेवर, रूपया आदि छिपाने के लिए सीक्रेट जगह बना दी जाती है। यदि ऎसी जगह खाली रहे तो उस घर में कभी भी पैसा नहीं आ पाता वरन उस घर में हमेशा कर्जा ही चलता रहेगा। ऎसी सीक्रेट जगहों के बुरे असर से बचने के लिए वहां पर बादम, छुआरे या कोई दूसरी मीठी चीज रख देनी चाहिए जिससे घर में पैसा आना शुरू हो जाए।
आजकल मकान बनाते समय घर में कहीं भी खाली जगह (मिट्टी वाली जगह) नहीं छोड़ी जाती वरन पूरे फर्श को ही पक्का करवा लिया जाता है। ऎसे में उस घर में शुक्र का खात्मा हो जाता है जिसके कारण वहां सुख, सौन्दर्य, शांति और भोग-विलास के साधन खत्म हो जाते हैं। इससे बचने के लिए या तो घर में कुछ जगह खाली छोड़ देनी चाहिए। अथवा घर में मनीप्लांट तथा अन्य पौधे मिट्टी के गमलों में स्थापित कर लेने चाहिए।
(7) यदि किसी की लाल किताब के अनुसार बनाई कुंडली में शुक्र दसवें घर में बैठा हो तथा वह अत्यंत बीमार चल रहा हो तो परिजनों को उसके निमित्त कपिला गाय दान देनी चाहिए। गाय के दान करने से से लाभ हैगा जातक को चाहिए वो खाना रसोईघर में ही खाये व खाना बैठकर खाये
घर में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
जातक काले व नीले कपड़े न धारण करें
जातक अपने ससुराल पक्ष से मधुर सम्बन्ध बना कर रखे
जातक अपने निवास स्थल में ठोस चांदी से बना हाथी रखें
जातक को किसी लाल किताब के महाज्ञाता से मिलकर उनके राय के अनुसार मंगल या गुरु कर उपाय करें
राहु की पूजा करें
गंगा जल भरकर घर में रखे |
गले में चांदी का चौकोर ठोस टुकड़ा धारण करें
- केसर का तिलक प्रतिदिन मस्तक पर लगाएं।
- रात को सोते समय गीले कपड़े में वाघ कर 'जौ सिरहाने रखें और सुबह होते ही पक्षियों को खाने के लिए डाल दें।
- 108 दिनों तक नित्य पांच पाठ के हिसाब से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- चांदी की डिब्बी में शहद भरकर घर में रखें।
- शिवलिंग पर तांबे का सर्प प्राण-प्रतिष्ठा करके, विधि-विधान पूर्वक चढ़ाएं।
- 'ऊँ नम: शिवायÓ का मानसिक जाप हर समय करते रहें।
- घर तथा कार्यलय में मोर पंख स्थापित करे
- चंदन की लकड़ी के छोटे चौकोर टुकड़े पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा बनवाकर जड़वा लें और वह ताबीज गले में धारण करें मित्रों के कुछ उपाय मैंने आपको बताए हैं फिर भी आप किसी अच्छे जानकार को अपनी कुंडली दिखाकर उपाय करें या आप हम से भी संपर्क कर सकते हैं या अपने बच्चों की जन्मकुण्डली बनवाने या जन्मकुण्डली विश्लेषण करवाने लिए कॉल करें 9414481324/
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गुरुवार, 30 जनवरी 2020
,, कालसर्प योग है या दोष है क्या है सच क्या है झूठ ( 3)
मित्रों यह यह पोस्ट कालसर्प पर ही है इससे पहले मैं दो पोस्ट कालसर्प पर लिख चुका हूं आप पढ़ सकते हो उसको पढ़ने से ही आपको आगे की पोस्ट समझ में आएगी मित्रों जैसा कि मैंने अपनी पहली पोस्ट में आपको बताया था कि राहुल जिस ग्रह के साथ बैठता है उसको खराब कर देता है आज हम उसी पर चर्चा करेंगे सबसे पहले हम बात करेंगे कालसर्प की पहचान कैसे करेंकालसर्प दोष की पहिचान
कालसर्प योग है या दोष है क्या है सच क्या है झूठ? (२)
मित्रों मेरी पिछली पोस्ट भी इस विषय पर हैं यानि काल सर्प पर यह जरूर पढ़ें कालसर्प दोष को लेकर लोगों में काफी भय और आशंका-कुशंकाएं रहती हैं, लेकिन कुछ आसान और अचूक उपायों से इसके असर को कम किया जा सकता है। कोई इसे कालसर्प दोष कहता है तो कोई योग। कोई इसे मानता है और कोई नहीं, मित्रों अगर आपको किसी एस्ट्रोलॉजर में कालसर्प बताया है कि आपकी कुंडली में कालसर्प योग है तो पहले आप उसकी अच्छी तरह जांच कर ले क्या कालसर्प योग बनता है कि नहीं बनता और वह जो आपको अशुभ फल दे रहा है या अशुभ फल दे रहा है समय आपको कोई परेशानी आ रही है तो किसी वजह से आ रही है किसी अन्य ग्रह की वजह से यह सब देखना जरूरी होता है मित्रो
कालसर्प योग हैं या दोष है क्या है सच क्या है झूठ?
कालसर्प दोष एक ऐसा योग है या दुर्योग है जिसका नाम सुनते ही जनमानस में भय व चिंता व्याप्त हो जाती है। साढ़े साती और काल सर्प योग का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं. इनके प्रति लोगों के मन में जोड भय बना हुआ है इसका फायदा उठाकर बहुत से ज्योतिषी लोगों को लूट रहे हैं. बात करें काल सर्प योग की तो इसको भी ्कुछ विद्वान इसे सिरे से नकारते हैं, तो कुछ इसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं। मेरे देखे दोनों गलत हैं।कालसर्प दोष' को न तो महिमामंडित कर प्रस्तुत करना सही है और न ही इसके अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित है। शास्त्रों में सर्पयोग के नाम से स्वीकार किया गया है। उसी को ही आजकल काल सर्प का नाम दिया गया है चूंकि राहु को शास्त्रों में 'काल' कहा गया है और केतु को 'सर्प' की संज्ञा दी गई है इसलिए इसका नाम 'कालसर्प' कहा गया है वराहमिहिर ने अपनी संहिता 'जानक नभ संयोग' में इसका सर्पयोग के नाम से उल्लेख किया है, वहीं 'सारावली' में भी 'सर्पयोग' का वर्णन मिलता है।अधिकांश ग्रन्थों में सर्पयोग की व्याख्या तो मिलती है किन्तु कालसर्प योग की व्याख्या किसी भी मानक ग्रन्थ में नहीं मिलती है।सी पिछली शताब्दी के सातवें या आठवें दशक तक के अधिकांश ज्योतिषी भी इस योग के बारे में नहीं जानते थे, लेकिन इस योग के हर इंसान पर लागू किए जा सकने वाले फलादेशों ने कुछ ऐसा चमत्कार पैदा किया कि बड़ी संख्या में लोगों ने इसे मानना शुरू कर दिया।
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